CTET (Central Teacher Eligibility Test) Paper-I Hindi Pedagogy of Language Development-Learning and Acquisition Revision (Page 2 of 3)

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भाषा के अधिगम एवं अर्जन के संदर्भ में जीन पियाजे का परिप्रेक्ष्य (Concept of Jean Piaget in Relation of Learning and Acquisition of Language)

  • जब भी भाषा सीखने की प्रवृत्ति पर बात हो तो वहाँ चॉम्स्की की मानसिक धारणा का बहुत प्रभाव दिखलाई पड़ता है, लेकिन शिक्षा के क्षेत्र में पियाजे सर्वाधिक प्रभावकारी साबित हुए। सभी बच्चे संज्ञानात्मक विकास के पूर्व-ऑपरेशनल, कन्वर्ट ऑपरेशनल और फॉर्मल ऑपरेशनल चरणों से गुजरते हैं। इस धारणा ने सम्पूर्ण शिक्षाशास्त्रीय विमर्श पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाला।
  • चॉम्स्की के अनुसार, भाषा सीखे जाने के क्रम में, वैज्ञानिक पड़ताल भी साथ-साथ चलती रहती है। इस अवधारणा से आँकड़ों का अवलोकन, वर्गीकरण, संकल्पना निर्

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बालकों में भाषा विकास (Language Development in Children)

बालक के विकास के विभिन्न आयाम होते हैं। भाषा का विकास भी उन्हीं आयामों में से एक है। भाषा को अन्य कौशलों की तरह अर्जित किया जाता है। यह अर्जन बालक के जन्म के बाद ही प्रारम्भ हो जाता है। अनुकरण, वातावरण के साथ अनुक्रिया तथा शारीरिक, सामाजिक एवं मनौवैज्ञानिक आवश्यकताओं की पूर्ति की मांग इसमें विशेष भूमिका निभाती है।

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भाषा विकास की प्रारम्भिक अवस्था (Initial State of Language Development)

इस अवस्था में एक तरह से बालक ध्वन्यात्मक संकेतों से युक्त भाषा को समझने और प्रयोग करने के लिए स्वयं को तैयार करता हुआ प्रतीत होता है।

जिसकी अभिव्यक्ति उसकी निम्न प्रकार की चेष्टाओं तथा क्रियाओं के रूप में होती है

  • सबसे पहले चरण के रूप में बालक जन्म लेते ही रोने, चिल्लाने की चेष्टाएँ करता है। रोने-चिल्लाने की चेष्टाओं के साथ ही वह अन्य ध्वनि या आवाजें भी निकालने लगता है। ये ध्वनियाँ पूर्णत: स्वाभाविक, स्वचालिक एवं नैसर्गिक होती हैं, इन्हें सीखा नहीं जाता।
  • उपरोक्त क्रियाओं के बाद बालक

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