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भाषा विकास की प्रारम्भिक अवस्था (Initial State of Language Development)

इस अवस्था में एक तरह से बालक ध्वन्यात्मक संकेतों से युक्त भाषा को समझने और प्रयोग करने के लिए स्वयं को तैयार करता हुआ प्रतीत होता है।

जिसकी अभिव्यक्ति उसकी निम्न प्रकार की चेष्टाओं तथा क्रियाओं के रूप में होती है

  • सबसे पहले चरण के रूप में बालक जन्म लेते ही रोने, चिल्लाने की चेष्टाएँ करता है। रोने-चिल्लाने की चेष्टाओं के साथ ही वह अन्य ध्वनि या आवाजें भी निकालने लगता है। ये ध्वनियाँ पूर्णत: स्वाभाविक, स्वचालिक एवं नैसर्गिक होती हैं, इन्हें सीखा नहीं जाता।
  • उपरोक्त क्रियाओं के बाद बालकों में बड़बड़ाने की क्रियाएँ तथा चेष्टाएँ शुरू हो जाती हैं।… (100 more words) …

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भाषा विकास की वास्तविक अवस्था (Actual State of Language Development)

  • प्रारम्भिक अवस्था को भाषा सीखने के लिए तैयारी की अवस्था कहा जा सकता है। इस अवस्था से गुजरने के बाद बालकों में वास्तविक भाषा विकास का कार्य प्रारम्भ होता है, जिसे भाषा विकास की वास्तविक अवस्था कहा जा सकता है। यह अवस्था बालक के एक वर्ष का हो जाने अथवा उससे एक-दो माह पहले ही शुरू हो जाती है। पहले बालक में मौखिक अभिव्यक्ति के रूप में भाषा का विकास होता है। वह शब्दों, वाक्यों तथा इनसे बनी भाषा को बोलना तथा समझना सीखता है, उसके मौखिक शब्द भण्डार में वृद्धि होती है तथा उसमें मौखिक अभिव्यक्ति के विभिन्न साधनों… (131 more words) …

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