Reading Comprehension-Prose or Drama (CTET (Central Teacher Eligibility Test) Paper-I Hindi): Questions 41 - 49 of 161

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Passage

लेखक की अन्तिम दो पंक्तियाँ वर्षा एवं संगीत के बीच समानता का संकेत देती हैं। जिस प्रकार एक गीत का संगीत कवि के हृदय से उठता है, उसी प्रकार वर्षा जमीन एवं समुद्र से जन्म लेती है। पुन: जब कवि अपना गीत गा चुकता है तो यह गीत उसके हृदय में वापस बस जाता है। इसी प्रकार वर्षा जब आकाश से जमीन पर गिरती है तो इसी में समाज जाती है, जो इसकी जन्म भूमि है। गीत कवि के हृदय को शुद्ध एवं प्रसन्न बनाये रखता है, उसी प्रकार वर्षा प्रत्येक वस्तु को स्वच्छ एवं जीवित रखती है व सुन्दर बनाती है।

Question number: 41 (1 of 2 Based on Passage) Show Passage

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Question

वर्षा किस प्रकार पृथ्वी को शुद्ध एवं सुन्दर बनाती है?

Choices

Choice (4) Response

a.

बरसकर

b.

जमकर

c.

गिरकर

d.

रूककर

Question number: 42 (2 of 2 Based on Passage) Show Passage

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Question

एक गीत वर्षा से किस प्रकार समान होता है?

Choices

Choice (4) Response

a.

जमीन से

b.

समुद्र से

c.

हृदय से / जन्म भूमि से

d.

कवि से

Passage

सभ्यता के पुराने दस्तावेज के रूप में खण्डहरों व भूमिगम सामग्रियों को देखा जाता है। जब व्यक्ति अपने आपको सामाजिक जीवन में ढालने लगा, तब से वह समग्र एकता में प्रदर्शित होता है। इस प्रदर्शन की सीमा को हड़प्पा व मोहनजोदड़ों से प्राप्त वस्तुओं से कर सकते हैं उनकी अभिव्यक्ति रहन-सहन, मोहरों, सिक्कों एवं बने बनाए पक्के व अधपक्के खिलौनों से जान सकते हैं। उनकी धार्मिक भावना के रूप में कुण्ड की प्राप्ति हुई है, जिससे उनके धार्मिक संवेदनाओं को जाने सकते हैं। लेकिन प्राकृतिक आपदाओं में ढहती सभ्यताओं की कहानी, जमीन में धंसे समय के काल को खोद कर देख सकते हैं। इससे इतिहास की टूटी कड़ियों का पता चलता है। इससे यह भी पता चलता है कि कैसे नगरीय सभ्यता के स्थान पर ग्रामीण सभ्यता का विकास होता है। यह वैदिक युग में हुआ और इसी सभ्यता में भाषा की उपलब्धि हासिल हुई जिसको संस्कृत के रूप में जाना जाताहै।

वैदिक युग में मानव ने जंगल से निकल ग्रामीण संस्कृति का निर्माण किया तथा समाज ने प्राकृतिक रूपों को ही अपने ईष्ट के रूप में स्वीकारा, जिसकी अभिव्यक्ति ऋग्वेद के रूप में मिलती है। भाषा की यह वृत्ति केवल भारतभूमि पर ही सम्भव नहीं हुई बल्कि विश्व के अन्य हिस्सों में भी देखने को मिलती है। संस्कृत भाषा के प्राथमिक जीवित रचना के रूप में ऋग्वेद का शास्त्रीय संस्कृत भाषा का संबंध है। संस्कृत भाषा अपनी समस्त स्थितियों में प्रयुक्त बहुल भाषा है परन्तु वेदों में जो रूप प्रयुक्त हुए हैं, उनमें बाद के दिनों से अन्तर है। यही कारण है कि वैदिक भाषा का प्रभाव बाद के दिनों में अन्य भाषाओं में देखने को मिलता है क्योंकि संस्कृत ही इन भाषाओं की जननी है। वर्तमान में भारतीय संविधान में संग्रहीत सभी भाषाओं का प्रभाव देखा जाता है।

Question number: 43 (1 of 9 Based on Passage) Show Passage

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Question

किसी सभ्यता के सामाजिक जीवन के बारे में किससे पता चलता है?

Choices

Choice (4) Response

a.

अधपके खिलौनों से

b.

सिक्कों से

c.

मोहरों से

d.

Question does not provide sufficient data or is vague

Question number: 44 (2 of 9 Based on Passage) Show Passage

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Question

‘प्राथमिक’ शब्द है

Choices

Choice (4) Response

a.

विशेषण

b.

क्रिया

c.

क्रिया विशेषण

d.

संज्ञा

Question number: 45 (3 of 9 Based on Passage) Show Passage

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Question

संस्कृत को किन भाषाओं की जननी बताया गया है?

Choices

Choice (4) Response

a.

हड़प्पाकालीन भाषाओं की

b.

सभी भाषाओं की

c.

वैदिक भाषाओं की

d.

Question does not provide sufficient data or is vague

Question number: 46 (4 of 9 Based on Passage) Show Passage

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Question

‘अधपका’ में कौनसा समास है?

Choices

Choice (4) Response

a.

अव्ययीभाव

b.

तत्पुरूष

c.

दव्न्दव्

d.

कर्मधारय

Question number: 47 (5 of 9 Based on Passage) Show Passage

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Question

प्रस्तुत गद्यांश में ‘ईष्ट’ का तात्पर्य है

Choices

Choice (4) Response

a.

इच्छित

b.

ईर्ष्या

c.

ईश्वर

d.

असुर

Passage

पत्र-पत्रिकाएँ मानव समाज की दिशा-निर्देशिका मानी जाती हैं। समाज के भीतर घटती घटनाओं से लेकर परिवेश की समझ उत्पन्न करने का कार्य पत्रकारिता का प्रथम व महत्वपूर्ण कर्तव्य है। राजनीतिक-सामाजिक चिन्तन की समझ पैदा करने के साथ विचार की सामर्थ्य पत्रकारिता के माध्यम से ही उत्पन्न होती है। पत्रकारिता ने युगों से अपने इस दायित्व का निर्वाह किया तथा दायित्व निर्वहन की समस्त कसौटियों को पूर्ण करते हुए समय-समय पर अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज की। यह अध्ययन करना अपने-आपमें अत्यन्त रोचक है कि पत्रकारिता की यह यात्रा कब और कैसे आरम्भ हुई और किन पड़ावों से गुजरकर राष्ट्रीयता के मिशन से व्यावसायिकता तक की यात्रा को उसने सम्पन्न किया। आजादी से पूर्व का युग राष्ट्रीयता और राष्ट्रीय चेतना की अनुभूति के विकास का युग था। इस युग का मिशन और जीवन का उद्देश्य एक ही था - स्वाधीनता की चाह और प्राप्ति का प्रयास। इस प्रयास के तहत ही हिन्दी पत्र-पत्रिकाओं का आरम्भ हुआ। इस संदर्भ में इस तथ्य को भी ध्यान में रखना होगा कि हिन्दी क्षेत्रों के बाहर भी विशेषकर हिन्दीतर भाषी क्षेत्रों को राष्ट्रीय अस्मिता का वाहक मानकर सभी पत्रकारों ने हिन्दी को ही अपनी ‘भाषा’ के रूप में चुना और हिन्दी भाषा के पत्र-पत्रिकाओं के संवर्द्धन में अपना योगदान दिया।

Question number: 48 (1 of 9 Based on Passage) Show Passage

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Question

निम्नलिखित में से किस शब्द के समानार्थी शब्द का प्रयोग प्रस्तुत गद्यांश में हुआ है?

Choices

Choice (4) Response

a.

स्वाधीनता

b.

भाषा

c.

क्षेत्र

d.

All of the above

Question number: 49 (2 of 9 Based on Passage) Show Passage

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Question

आजादी से पूर्व पत्रकारों का मुख्य उद्देश्य क्या था?

Choices

Choice (4) Response

a.

अपनी पहचान स्थापित करना

b.

भारतीय महत्व को स्थापित करना

c.

स्वाधीनता की प्राप्ति के लिए प्रयास करना

d.

Question does not provide sufficient data or is vague

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