Reading Comprehension-Prose or Drama (CTET Paper-I Hindi): Questions 35 - 42 of 161

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Passage

साहित्य को समाज का प्रतिबिम्ब माना गया है अर्थात् समाज का पूर्ण रूप साहित्य में प्रतिबिम्बित होता रहता है। अनादि काल से साहित्य अपने इसी धर्म का पूर्ण निर्वाह करता चला आ रहा है। वह समाज के विभिन्न रूपों का चित्रण कर एक तरफ तो हमारे सामने समाज का यथार्थ चित्र प्रस्तुत करता है और दूसरी ओर अपनी प्रखर मेधा और स्वस्थ कल्पना द्वारा समाज के विभिन्न पहलुओं का विवेचन करता हुआ यह भी बताता है कि मानव समाज की सुख समृद्धि, सुरक्षा और विकास के लिए कौनसा मार्ग उपादेय है। एक आलोचक के शब्दों में - ”कवि वास्तव में समाज की व्यवस्था, वातावरण, धर्म-कर्म, रीति-नीति तथा सामाजिक शिष्टाचार या लोक व्यवहार से ही अपने काव्य के उपकरण चुनता है और उनका प्रतिपादन अपने आदर्शों के अनुरूप करता है। साहित्यकार उसी समाज का प्रतिनिधित्व करता है, जिसमें वह जन्म लेता है। वह अपनी समस्याओं का सुलझाव, अपने आदर्श की स्थापना अपने समाज के आदर्शों के अनुरूप ही करता है। अत: यह कहना सर्वथा असम्भव और अविवेकपूर्ण है कि साहित्यकार समाज से पूर्णत: निरपेक्ष या तटस्थ रहकर साहित्य सृजन करता है। वाल्मीकि, तुलसी, सूर, भारतेन्दु, प्रेमचन्द आदि का साहित्य इस बात का सर्वाधिक सशक्त प्रमाण है कि साहित्यकार समाज से घनिष्ट रूप से सम्बद्ध रखता हुआ ही साहित्य सृजन करता है। समाज की अवहेलना करने वाला साहित्य क्षणजीवी होता है।“

मानव का कला या साहित्य सृजन के प्रति उन्मुख होना उसके इन्द्रिय बोध का परिणाम रहा है। रूप, रस, ग्रन्थ, स्पर्श आदि के इन्द्रियबोध मानव और पशु दोनों में ही विद्यमान हैं, परन्तु मानव में पशु की अपेक्षा अधिक मात्रा में। मानव में एक विशिष्ट गुण और विवेक है। विवेक द्वारा उसने सामाजिक जीवन का विकास और अपने इन्द्रियबोध का परिष्कार किया है। समाज व्यवस्था बदलने के साथ मनुष्य का इन्द्रियबोध विचार और भावों की अपेक्षा स्थायी रहता है। भाव और विचार दोनों ही साहित्य के मूलाधार है और इनका उद्गम और परिष्कार सामाजिक परिवेश में ही सम्भव होता है, समाज से कटकर निरपेक्ष रहने पर नहीं।

Question number: 35 (2 of 8 Based on Passage) Show Passage

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Question

अनादिकाल से साहित्य अपने किस धर्म का निर्वहन करता आ रहा है?

Choices

Choice (4) Response

a.

अपने प्रभुत्व बनाए रखने का

b.

समाज के पूर्ण रूप को प्रतिबिम्बित करने का

c.

यूएनडीपी से सहयोग लेना

d.

निर्धन लोगों की सहायता करना

Question number: 36 (3 of 8 Based on Passage) Show Passage

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Question

निम्नलिखित में से कौनसा अव्यय है

Choices

Choice (4) Response

a.

प्रति

b.

रूप

c.

समाज

d.

मानव

Question number: 37 (4 of 8 Based on Passage) Show Passage

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Question

साहित्य हमें क्या बताता है?

Choices

Choice (4) Response

a.

सामाजिक वर्चस्व करने के लिए क्या करना चाहिए

b.

समाज व्यवस्था को बदलते रहना चाहिए

c.

मानव समाज की सुख समृद्धि, सुरक्षा और विकास के लिए कौनसा मार्ग उपादेय है

d.

All of the above

Passage

‘बिस्मिल्ला खॉ हिन्दू और मुसलमानों की मिली-जुली संस्कृति के प्रतिक थे। एक ओर जहाँ वे सच्चे मुसलमान थे। पाँचों समय की नमाज श्रद्धा के साथ अदा करते थे। दूसरी ओर वे काशी, विश्वनाथ और बाजाली के मंदिर में शहनाई बजाते थे। गंगा के प्रति सच्ची श्रद्धा रखते थे। काशी से बाहर रहते हुए भी बालाजी के मंदिर की ओर मुँह करके प्रणाम किया करते थे। इसलिए वे मिली-जुली संस्कृति के प्रतिक थे।

उन्होंने खुदा से हमेशा ही सुर मांगा। यद्यपि वे जीवन में फटेहाल रहे, लेकिन उन्होंने खुदा से अपने लिए धन नहीं मांगा। ऊँचे-ऊँचे पुरस्कार पाकर भी वे अपने जीवन में सरल ही बने रहे।

Question number: 38 (1 of 3 Based on Passage) Show Passage

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Question

बिस्मिल्ला खॉ नमाज के उपरान्त (बाद) सजदे (प्रार्थना) में खुदा से क्या मांगते थे?

Choices

Choice (4) Response

a.

स्वर, सुर

b.

धन

c.

मोती

d.

कपड़े

Question number: 39 (2 of 3 Based on Passage) Show Passage

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Question

बिस्मिल्ला खॉ कौनसे मंदिर में शहनाई बजाते थे?

Choices

Choice (4) Response

a.

शिव मंदिर

b.

जैन मंदिर

c.

काशी, विश्वनाथ और बालाजी मंदिर

d.

गुरूद्वार में

Question number: 40 (3 of 3 Based on Passage) Show Passage

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Question

बिस्मिल्ला खॉ कौनसी मिली-जुली संस्कृति के प्रतीक थे?

Choices

Choice (4) Response

a.

हिन्दू-मुसलमान

b.

सिख-ईसाई

c.

मुसलमान-सिख

d.

ईसाई-हिन्दू

Passage

लेखक की अन्तिम दो पंक्तियाँ वर्षा एवं संगीत के बीच समानता का संकेत देती हैं। जिस प्रकार एक गीत का संगीत कवि के हृदय से उठता है, उसी प्रकार वर्षा जमीन एवं समुद्र से जन्म लेती है। पुन: जब कवि अपना गीत गा चुकता है तो यह गीत उसके हृदय में वापस बस जाता है। इसी प्रकार वर्षा जब आकाश से जमीन पर गिरती है तो इसी में समाज जाती है, जो इसकी जन्म भूमि है। गीत कवि के हृदय को शुद्ध एवं प्रसन्न बनाये रखता है, उसी प्रकार वर्षा प्रत्येक वस्तु को स्वच्छ एवं जीवित रखती है व सुन्दर बनाती है।

Question number: 41 (1 of 2 Based on Passage) Show Passage

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Question

वर्षा किस प्रकार पृथ्वी को शुद्ध एवं सुन्दर बनाती है?

Choices

Choice (4) Response

a.

बरसकर

b.

जमकर

c.

गिरकर

d.

रूककर

Question number: 42 (2 of 2 Based on Passage) Show Passage

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Question

एक गीत वर्षा से किस प्रकार समान होता है?

Choices

Choice (4) Response

a.

जमीन से

b.

समुद्र से

c.

हृदय से / जन्म भूमि से

d.

कवि से

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