Reading Comprehension-Prose or Drama (CTET (Central Teacher Eligibility Test) Paper-I Hindi): Questions 127 - 134 of 161

Get 1 year subscription: Access detailed explanations (illustrated with images and videos) to 497 questions. Access all new questions we will add tracking exam-pattern and syllabus changes. View Sample Explanation or View Features.

Rs. 300.00 or

Passage

प्रगतिवाद का संबंध जीवन और जगत के प्रति नये दृष्टिकोण से है। इस भौतिक जगत को सम्पूर्ण सत्य मानकर, उसमें रहने वाले मानव समुदाय के मंगल की कामना से प्रेरित होकर प्रगतिवादी साहित्य की रचना की गई है। जीवन के प्रति लौकिक दृष्टि इस साहित्य का आधार है और सामाजिक यथार्थ से उत्पन्न होता है, लेकिन उसे बदलने और बेहतर बनाने की कामना के साथ प्रगतिवादी कवि न तो इतिहास की उपेक्षा करता है, न वर्तमान का अनादर, न ही वह भविष्य के रंगीन सपने बुनता है। इतिहास को वैज्ञानिक दृष्टि से जाँचते-परखते हुए, वह वर्तमान मो समझने की कोशिश करताहै और उसी के आधार पर भविष्य के लिए अपना मार्ग चुनता है। यही कारण है कि प्रगतिवादी काव्य में ऐतिहासिक चेतना अनिवार्यत: विद्यमान रहती है। प्रगतिवादी कवि की दृर्ष्टि सामाजिक यथार्थ पर केन्द्रित रहती है, वह अपने परिवेश और प्रकृति के प्रति गहरे लगाव से प्रेरित होता है तथा जीवन के प्रति उसका दृष्टिकोण सकारात्मक होता है। मानव को वह सर्वोपरि मानता है।

प्रगतिवादी कवि के पास सामाजिक यथार्थ को देखने की दृष्टि होती है। एक वर्ग चेतना प्रधान दृष्टि। नागार्जुन यदि दुखरन झा जैसे प्राइमरी स्कूल के अल्पवेतन भोगी मास्टर का यथार्थ चित्रण करते हैं, जो सामाजिक विषमता के यथार्थ को ध्यान में रखते हुए इस सरल यथार्थ को कविता में व्यक्त करने के लिये यथार्थ रूपों की समझ जरूरी है। कवि का वास्तव बोध और वस्तुपरक निरीक्षण दोनों पर ध्यान जाना चाहिए।

प्रगतिशील चेतना के कवि की दृष्टि सामाजिक यथार्थ के अनेक रूपों की ओर जाती है। कवि सामाजिक विषमता को उजागर करता हुआ कभी अपना विक्षोभ व्यक्त करता है, तो कभी अपना सात्विक क्रोध। कभी वह अन्याय और अत्याचार के विरूद्ध सिंह गर्जना करता है, तो कभी शोषण और दमन के दृश्य देखकर अपना दु: ख व्यक्त करता है।

प्रगतिवादी चेतना के कवि को प्रकृति और परिवेश के प्रति कवि का लगाव भी ध्यान आकृष्ट करता है। प्रगतिवादी कवि प्रकृति में जिस जीवन सक्रियता का आभास पाता है, उसके लिए एक प्रकार का स्थानिक लगाव जरूरी है।

Question number: 127 (8 of 8 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Prose or Drama

MCQ▾

Question

‘स्थानिक’ की तरह कौनसा विशेषण शब्द प्रस्तुत गद्यांश में प्रयुक्त नहीं हुआ है?

Choices

Choice (4) Response

a.

भौतिक

b.

लौकिक

c.

आर्थिक

d.

सामाजिक

Passage

बौद्ध शिक्षण पद्धति का आरम्भ स्वयं बुद्ध ने सरल तथा जनमानस की भाषा में तीवन के तत्वों के उपदेश तथा जगह-जगह चर्चा करके की। लोगों को शिक्षित करने के लिए महात्मा बुद्ध ने व्याख्यान, प्रश्नोत्तर प्रासंगिक उपमा, दृष्टान्त एवं कथा को माध्यम बनाया। बुद्ध के बाद से बौद्ध शिक्षा पद्धति भी एक निश्चित स्वरूप, संगठन के साथ हिन्दू शिक्षा पद्धति से अलग स्वतंत्र शिक्षा प; ति के रूप में विकसित हुई। प्रारम्भ में हिन्दू तथा बौद्ध शिक्षा पद्धति के मूल में कोई विशेष अन्तर नहीं था किन्तु बाद में आकर दोनों शिक्षा प्रणालियों के आदर्श एवं पद्धति में विशेष रूप से उस पाठ्यक्रम में जो विशेष रूप से आम उपासक की बजाय बौद्ध भिक्षु-भिक्षुणियों के लिए था, बहुत कम समानता रह गई थी।

बौद्ध धर्म में शिक्षा प्रारम्भ संस्कार ब्राह्मणों के उपनयन संस्कार की भाँति होता था। बौद्ध संघ में सम्मिलित होने के लिए दो संस्कार आवश्यक थे प्रथम था ‘पब्बज्जा’ तथा दूसरा ‘उपसम्पदा’। पब्बज्जा से उपासकत्व का प्रारम्भ होता था। उपनयन की भाँति इसे भी आध्यात्मिक जन्म कहा गया है। यह 8 वर्ष से अधिक आयु के किसी भी व्यक्ति को दी जा सकती थी। संरक्षक की अनुज्ञा इसके लिए आवश्यक थी। व्यक्ति को तीन प्रकार की शरण की शपथ एवं दस धर्मादेश दिए जाते थे। ये शरण बुद्ध धर्म एवं संघ की होती थी।

दस धर्मादेशों में निम्न की मनाही थी

1. पारिवारिक जीवन

2. ऐसी वस्तु ग्रहण करना जो दी ना हो

3. अशुद्ध आचरण

4. झूठ बोलना

5. मादक द्रव्यों का सेवन

6. असमय भोजन

7. नृत्य गायन

8. पुष्प माला, ईत्र गहने आदि का प्रयोग

9. उच्च आसन का प्रयोग

10. सोना एवं चांदी की प्राप्ति।

Question number: 128 (8 of 8 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Prose or Drama

MCQ▾

Question

ब्राह्मणों में शिक्षा का प्रारम्भ किस संस्कार से होता था?

Choices

Choice (4) Response

a.

पब्बज्जा

b.

उपनयन

c.

उपसम्पदा

d.

उपासकत्व

Passage

विद्यालय समाज की एक ऐसी संस्था है, जिसके कुछ सुनिश्चित एवं सुनिर्धारित लक्ष्य होते हैं जबकि समुदाय का तात्पर्य ऐसे समूह से है जिसमें एक प्रकार के लोग होते हैं। एह एकत्व आर्थिक, राजनीतिक, धार्मिक या नागरिक गुणों में हो सकता है। कई समुदाय अपने लिए अलग विद्यालय की स्थापना भी कर लेते है। अपनी औपचारिक भूमिकाओं के अलावा अन्य भूमिकाओं के निर्वहन में भी विद्यालय समुदाय की सहायता करता है। इसके लिए आवश्यकता पड़ने पर समुदाय के क्रिया-कलापों वह हस्तक्षेप भी करता है। उदाहरण स्वरूप प्रौढ़ शिक्षा, स्त्री शिक्षा, स्वास्थ्य संबंधी जानकारियों को अभिभावकों तक पहुंचाने में भी विद्यालय यथासम्भव समुदाय की सहायता करता है एवं आवश्यकता पड़ने पर हस्तक्षेप भी करता है।

अभिभावक एवं विद्यालय एक-दूसरे के सम्पर्क में रहते हैं। अभिभावक समुदाय की आवश्यकताओं से परिचित होते हैं तथा विद्यालय को भ्ज्ञी इनसे अवगत कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाकर बीच की व्यवहार्य कड़ी का काम करते हैं। उदाहरण स्वरूप समुदाय की आवश्यकताओं के अनुरूप अभिभावकगण प्रौढ़ शिक्षा, स्त्री शिक्षा इत्यादि में सहायता के लिए विद्यालय से अनुरोध करते है। इस तरह वे विद्यालय एवं समुदाय के बीच ही व्यवहार्य कड़ी हैं। समुदाय के साथ निकट से जुड़कर कार्य करने की स्थिति में विद्यालय अधिक प्रभावशाली हो जाता है।

समुदाय और विद्यालय को जोड़ने में समाज के लोगों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। समुदाय के क्रिया-कलापों में विद्यालय की भागीदारी होती है। यही कारण है कि विद्यालय के लिए पाठ्यवस्तु इतना लचीला बनाया जाता है कि उसमें समाज के विभिन्न समुदायों की विशेषताएँ स्पष्ट रूप से दिखाई पड़ती है। पर्यावरण को स्वच्छ रखने की शिक्षा देने के लिए आवश्यक है कि विद्यालय परिसर को स्वच्छ रखा जाए। जल संरक्षण की शिक्षा देने के लिए आवश्यक है कि विद्यालय परिसर में भी इनके संरक्षण के नियमों का पालन होता हो। इस तरह समुदाय की वास्तविकताओं को प्रायोगिक रूप से विद्यालय परिसर में प्रयोग कर उसे अधिगम अनुभवों में रूपान्तरित किया जा सकता है।

Question number: 129 (9 of 9 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Prose or Drama

MCQ▾

Question

‘यथासम्भव’ में कौनसा समास है?

Choices

Choice (4) Response

a.

कर्मधारय

b.

बहुब्रीहि

c.

अव्ययीभाव

d.

दव्न्दव्

Passage

‘गोदान’ प्रेमचन्द जी की उन अमर कृतियों में से एक है, जिसमें ग्रामीण भारत की आत्मा का करूण चित्र साकार हो उठा है। इसी कारण कई मनीषी आलोचक इसे ग्रामीण भारतीय परिवेशगत समस्याओं का महाकाव्य मानते हैं तो कई विद्वान इसे ग्रामीण जीवन और कृषि संस्कृति का शोक गीत स्वीकारते हैं। कुछ विद्वान तो ऐसे भी है कि जो इन उपन्यास को ग्रामीण भारण की आधुनिक ‘गीता’ तक स्वीकार करते हैं जो कुछ भी हो, ‘गोदान’ वास्तव में मुंशी प्रेमचन्द का एक ऐसा उपन्यास है, जिसमें आचार-विचार, संस्कार और प्राकृतिक परिवेश, जो गहन करूणा से युक्त है, प्रतिबिम्बित हो उठाा है। डॉ. गोपाल राय का कहना है कि गोदान ग्राम जीवन और ग्राम संस्कृति को उसकी सम्पूर्णता में प्रस्तुत करने वाला अदव्तीय उपन्यास है, न केवल हिन्दी के वरन किसी भी भारतीय भाषा के किसी भी उपन्यास में ग्रामीण समाज का ऐसा व्यापक यथार्थ और सहानुभूतिपूर्ण चित्रण नहीं हुआ है। ग्रामीण जीवन और संस्कृति के अंकन की दृष्टि से इस उपन्यास का वही महत्व है जो आधुनिक युग में युग जीवन की अभिव्यक्ति की दृष्टि से महाकाव्यों का हुआ करता था। इस प्रकार डॉ. राय गोदान को आधुनिक युग का महाकाव्य ही नहीं स्वीकारते वरन् सर्वश्रेष्ठ महाकाव्य भी स्वीकारते है। उनके इस कथन का यही आशय है कि प्रेमचन्द जी ने ग्राम जीवन से संबंध सभी पक्षों का न केवल अत्यन्त विशदता से चित्रण किया है, वरन् उनकी गहराइयों में जाकर उनके सच्चे चित्र प्रस्तुत कर दिए हैं। प्रेमचन्द जी ने जिस ग्राम जीवन का चित्र गोदान में प्रस्तुत किया है, उसका संबंध आज ग्राम परिवेश से न होकर तत्कालीन ग्राम जीवन से है। ग्रामीण जीवन को वास्तविक आधार प्रदान करने के लिए प्रेमचन्द जी ने चित्र के अनुरूप ही कुछ ऐसे खांचे अथवा चित्रफलक निर्मित किए हैं जो चित्र को यथार्थ बनाने में सहयोगी सिद्ध हुए हैं। ग्रामीण किसानों के घर द्वार, खेत-खलिहान और प्राकृतिक दृश्यों का ऐसा वास्तविक चित्रण अत्यन्त दुर्लभ है।

Question number: 130 (8 of 8 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Prose or Drama

MCQ▾

Question

‘सहानुभूति’ का सन्धि विच्छेद है

Choices

Choice (4) Response

a.

सह + अनुभूति

b.

सहान + भूति

c.

सहा + अनुभूति

d.

सहा: नुभूति

Passage

पत्र-पत्रिकाएँ मानव समाज की दिशा-निर्देशिका मानी जाती हैं। समाज के भीतर घटती घटनाओं से लेकर परिवेश की समझ उत्पन्न करने का कार्य पत्रकारिता का प्रथम व महत्वपूर्ण कर्तव्य है। राजनीतिक-सामाजिक चिन्तन की समझ पैदा करने के साथ विचार की सामर्थ्य पत्रकारिता के माध्यम से ही उत्पन्न होती है। पत्रकारिता ने युगों से अपने इस दायित्व का निर्वाह किया तथा दायित्व निर्वहन की समस्त कसौटियों को पूर्ण करते हुए समय-समय पर अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज की। यह अध्ययन करना अपने-आपमें अत्यन्त रोचक है कि पत्रकारिता की यह यात्रा कब और कैसे आरम्भ हुई और किन पड़ावों से गुजरकर राष्ट्रीयता के मिशन से व्यावसायिकता तक की यात्रा को उसने सम्पन्न किया। आजादी से पूर्व का युग राष्ट्रीयता और राष्ट्रीय चेतना की अनुभूति के विकास का युग था। इस युग का मिशन और जीवन का उद्देश्य एक ही था - स्वाधीनता की चाह और प्राप्ति का प्रयास। इस प्रयास के तहत ही हिन्दी पत्र-पत्रिकाओं का आरम्भ हुआ। इस संदर्भ में इस तथ्य को भी ध्यान में रखना होगा कि हिन्दी क्षेत्रों के बाहर भी विशेषकर हिन्दीतर भाषी क्षेत्रों को राष्ट्रीय अस्मिता का वाहक मानकर सभी पत्रकारों ने हिन्दी को ही अपनी ‘भाषा’ के रूप में चुना और हिन्दी भाषा के पत्र-पत्रिकाओं के संवर्द्धन में अपना योगदान दिया।

Question number: 131 (9 of 9 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Prose or Drama

MCQ▾

Question

निम्नलिखित में से किसे मानव समाज के दिशा-निर्देशक के अन्तर्गत नहीं रखा गया है?

Choices

Choice (4) Response

a.

छोटी पत्रिकाएँ

b.

सांध्य समाचार पत्र

c.

दैनिक समाचार पत्र

d.

टीवी

Question number: 132

» Reading Comprehension » Prose or Drama

Appeared in Year: 2013

MCQ▾

Question

भाषा की पाठ्य-पुस्तक में सबसे महत्वपूर्ण पक्ष है

Choices

Choice (4) Response

a.

कागज की गुणवत्ता और छपाई

b.

वस्तुनिष्ठ अभ्यास

c.

व्याकरणिक नियमों की सैद्धान्तिक व्याख्या

d.

पाठों का उद्देश्यपूर्ण चयन

Question number: 133

» Reading Comprehension » Prose or Drama

Appeared in Year: 2013

MCQ▾

Question

बच्चे विद्यालय आने से पहले

Choices

Choice (4) Response

a.

अपनी बोलचाल की भाषा के अनुभवों से लैस होते है

b.

कोई भी भाषा बोल नहीं सकते है

c.

सभी भाषाएँ पढ़ सकते है

d.

सब कुछ लिख सकते है

Question number: 134

» Reading Comprehension » Prose or Drama

Appeared in Year: 2013

MCQ▾

Question

प्राथमिक स्तर पर भाषिक रेखांकन और चित्रांकन

Choices

Choice (4) Response

a.

लेखन अभ्यास एक महत्वपूर्ण चरण है

b.

एक सह-शैक्षणिक गतिविधि मात्र है

c.

बच्चों की अनुकरण प्रवृत्ति को पोषित करता है

d.

काव्य व्याख्या का एकमात्र मार्ग है

f Page
Sign In