Reading Comprehension-Prose or Drama (CTET (Central Teacher Eligibility Test) Paper-I Hindi): Questions 76 - 83 of 166

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Passage

भारत प्राचीन काल से ही विविध धर्मों का प्रांगण रहा है। प्राचीन भारत में हिन्दू, जैन, बौद्ध, धर्मों का उदय हुआ है परन्तु इन सभी धर्मों में सांस्कृतिक पारस्परिक समिश्र इस प्रकार हुआ कि लोग भले ही विभिन्न भाषाएँ बोलते हैं, विभिन्न धर्मों को मानते हैं फिर भी भिन्न सामाजिक रीतियों पर समूचे देश में सभी की एक समान जीवन पद्धति है। हमारे देश में विविधताओं के बावजूद भीतर से गहरी एकता, हिमालय से कन्याकुमारी पूर्व में ब्रह्मपुत्र की घाटी से पश्चिम में सिन्धु पार तक झलकती है। देश में भाषात्मक एवं सांस्कृतिक एकता स्थापित करने के लिए निरन्तर प्रयास होते हैं। ईसा पूर्व तीसरी सदी में प्राकृत देश भर की सम्पर्क भाषा (लिंगवाँ का) का काम करती थी। सारे देश के प्रमुख कार्यों में अशोक के शिलालेख प्राकृत व ब्रह्मी लिपि में लिखे गये थे। बाद में वह स्थान संस्कृत ने ले लिया और देश के कोने-कोने में राजभाषा के रूप में प्रचलित रही। यह सिलसिला ईसा की चौथी शताब्दी में आकर मजबूत हुआ। यद्यपि इसके बाद देश छोटे-छोटे राज्यों में बंट गया। फिर भी राजकीय दस्तावेज की भाषा संस्कृत ही रहीं। प्राचीन भारत के लोगों की लिपि का ज्ञान 2500 ई. पूर्व तक ही था जिसको हड़प्पा व मोहनजोदड़ों के सभ्यता में सिक्कों पर अंकित पाते हैं। यद्यपि अभी तक इस लिपि को पढ़ना सम्भव नहीं हो पाया है। हस्तलिपियों के मामले में उपलब्ध हस्तलिपियाँ ईसा की चौथी सदी से पहले की नहीं है। भारत में हस्तलिपियाँ भोज पत्र एवं ताम्र पत्रों पर लिखी मिलती है। परन्तु मध्य एशिया में जहाँ भारत से प्राकृत भाषा फैल गई थी। ये हस्तलिपियाँ मेष चर्म, कष्ठि पत्रों में लिखी गई हैं, संस्कृत में पुराणों, हस्तलिपियाँ लिखित दक्षिण-भारत तथा नेपाल से प्राप्त हुई हैं।

Question number: 76 (8 of 9 Based on Passage) Show Passage

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MCQ▾

Question

ईसा पूर्व तीसरी शताब्दी में भारत की सम्पूर्क भाषा निम्नलिखित में से कौनसी थी?

Choices

Choice (4) Response

a.

प्राकृत

b.

अवधी

c.

ब्रज

d.

हिन्दी

Passage

बौद्ध शिक्षण पद्धति का आरम्भ स्वयं बुद्ध ने सरल तथा जनमानस की भाषा में तीवन के तत्वों के उपदेश तथा जगह-जगह चर्चा करके की। लोगों को शिक्षित करने के लिए महात्मा बुद्ध ने व्याख्यान, प्रश्नोत्तर प्रासंगिक उपमा, दृष्टान्त एवं कथा को माध्यम बनाया। बुद्ध के बाद से बौद्ध शिक्षा पद्धति भी एक निश्चित स्वरूप, संगठन के साथ हिन्दू शिक्षा पद्धति से अलग स्वतंत्र शिक्षा प; ति के रूप में विकसित हुई। प्रारम्भ में हिन्दू तथा बौद्ध शिक्षा पद्धति के मूल में कोई विशेष अन्तर नहीं था किन्तु बाद में आकर दोनों शिक्षा प्रणालियों के आदर्श एवं पद्धति में विशेष रूप से उस पाठ्यक्रम में जो विशेष रूप से आम उपासक की बजाय बौद्ध भिक्षु-भिक्षुणियों के लिए था, बहुत कम समानता रह गई थी।

बौद्ध धर्म में शिक्षा प्रारम्भ संस्कार ब्राह्मणों के उपनयन संस्कार की भाँति होता था। बौद्ध संघ में सम्मिलित होने के लिए दो संस्कार आवश्यक थे प्रथम था ‘पब्बज्जा’ तथा दूसरा ‘उपसम्पदा’। पब्बज्जा से उपासकत्व का प्रारम्भ होता था। उपनयन की भाँति इसे भी आध्यात्मिक जन्म कहा गया है। यह 8 वर्ष से अधिक आयु के किसी भी व्यक्ति को दी जा सकती थी। संरक्षक की अनुज्ञा इसके लिए आवश्यक थी। व्यक्ति को तीन प्रकार की शरण की शपथ एवं दस धर्मादेश दिए जाते थे। ये शरण बुद्ध धर्म एवं संघ की होती थी।

दस धर्मादेशों में निम्न की मनाही थी

1. पारिवारिक जीवन

2. ऐसी वस्तु ग्रहण करना जो दी ना हो

3. अशुद्ध आचरण

4. झूठ बोलना

5. मादक द्रव्यों का सेवन

6. असमय भोजन

7. नृत्य गायन

8. पुष्प माला, ईत्र गहने आदि का प्रयोग

9. उच्च आसन का प्रयोग

10. सोना एवं चांदी की प्राप्ति।

Question number: 77 (1 of 9 Based on Passage) Show Passage

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Question

‘प्रासंगिक’ शब्द में कौनसा प्रत्यय है?

Choices

Choice (4) Response

a.

प्र

b.

इक

c.

गिक

d.

प्रा

Question number: 78 (2 of 9 Based on Passage) Show Passage

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Question

ब्राह्मणों में शिक्षा का प्रारम्भ किस संस्कार से होता था?

Choices

Choice (4) Response

a.

उपसम्पदा

b.

उपासकत्व

c.

उपनयन

d.

पब्बज्जा

Question number: 79 (3 of 9 Based on Passage) Show Passage

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Question

‘धर्मादेश’ शब्द है?

Choices

Choice (4) Response

a.

क्रिया

b.

विशेषण

c.

सर्वनाम

d.

संज्ञा

Question number: 80 (4 of 9 Based on Passage) Show Passage

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Question

‘बौद्ध धर्म में शिक्षा प्रारम्भ संस्कार ब्राह्मणों के उपनयन संस्कार की भाँति होता था।’ - इस वाक्य में रेखांकित पद में कौनसा कारक है?

Choices

Choice (4) Response

a.

अपादान कारक

b.

अधिकरण कारक

c.

सम्प्रदान कारक

d.

करण कारक

Question number: 81 (5 of 9 Based on Passage) Show Passage

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Question

बौद्ध शिक्षा पद्धति में शिक्षा देने हेतु निम्नलिखित में से किसे माध्यम बनाया जाता था?

Choices

Choice (4) Response

a.

व्याख्यान

b.

कथा

c.

प्रश्नोत्तर

d.

All a. , b. and c. are correct

Question number: 82 (6 of 9 Based on Passage) Show Passage

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Question

संरक्षक की अनुमति किसके लिए आवश्यक थी?

Choices

Choice (4) Response

a.

व्यक्ति को वेद की शिक्षा देने के लिए

b.

शिक्षा के आरम्भिक संस्कार हेतु

c.

उपरोक्त दोनों

d.

Question does not provide sufficient data or is vague

Passage

पृथ्वी के चार मुख्य जैविक तत्व है - मछली - क्षेत्र, वन, चारागाह एवं कृषि क्षेत्र। ये विश्व अर्थव्यवस्था की नींव है। वे हमें भोजन देते हैं। वे हमारे उद्योगों के लिए सभी कच्चा सामान भी प्रदान करते हैं। इन तत्वों की मांग उस सीमा तक बढ़ रही है कि उसे पूरा नहीं किया जा सकता। यह उस बिन्दु तक पहुँच रही है, जहाँ उनकी उत्पादकता ही घटती जा रही हैं। मछली - क्षेत्र नष्ट हो रहे हैं, अधिक दोहन के कारण। जंगल गायब हो रहे हैं। चारागाह बंजर - भूमि में बदल रहे है तथा उपजाऊ भूमि खराब हो रही है। यह सब इन तत्वों के अतिदोहर के कारण हो रहा है। इसलिए यह पृथ्वी बीमार ग्रह बन गई है।

Question number: 83 (1 of 2 Based on Passage) Show Passage

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Question

पृथ्वी के चार मुख्य जैविक तत्व कौन-कौन से है?

Choices

Choice (4) Response

a.

वन, चारागाह, मछली, सामान

b.

कृषि, वन, मछली, आग

c.

मछली, वन, चारागाह, उद्योग

d.

मछली, वन, चारागाह, कृषि

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