Reading Comprehension-Poetry (CTET (Central Teacher Eligibility Test) Paper-I Hindi): Questions 83 - 89 of 89

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Passage

रवि जग में शोभा सरसाता, सोम सुधा बरसाता।

सब हैं लगे कर्म में, कोई निष्क्रिय दृष्टि न आता।

है उद्देश्य नितान्त तुच्छ तृण के भी लघु जीवन का।

उसी पूर्ति में वह करता है अन्त कर्ममय तन का।

तुम मनुष्य हो, अमित बुद्धि-बल विलसित जन्म तुम्हारा।

क्या उद्देश्य रहित हो जग में, तुमने कभी विचारा?

बुरा न मानों एक बार सोचो तुम अपने मन में

क्या कर्तव्य समाप्त कर लिया तुमने निज जीवन में?

जिस पर गिरकर उदर-दरी से तुमने जन्म लिया है

जिसका खाकर अन्न सुधासम नीर, समीर पिया है

वही स्नेह की मूर्ति दयामयि माता तुल्य मही है

उसके प्रति कर्तव्य तुम्हारा क्या कुछ शेष नहीं है?

Question number: 83 (6 of 6 Based on Passage) Show Passage

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Question

‘निष्क्रिय’ का विपरीतार्थक लिखिए

Choices

Choice (4) Response

a.

अक्रिय

b.

सक्रिय

c.

क्रियान्वयन

d.

क्रियान्वित

Passage

अन्धकार की गुहा सरीखी उन आँखों से डरता है मन

भरा दूर तक उनमें दारूण दैन्य दु: ख का नीरव रोदन।

वह स्वाधीन किसान रहा, अभिमान भरा आँखों में इसका

छोड़ उसे मँझधार आज संसार कगार सदृश वह खिसका।

लहराते वे खेत दृगों में हुआ बेदखल वह अब जिन से

हँसती भी उसके जीवन की हरियाली जिनके तृन-तृन से।

आँखों ही में घूमा करता वह उसकी आँखों का तारा

कारकुनों की लाठी से जो गया जवानी ही में मारा।

बिना दावादर्पन के घरनी स्वरग चली - आँखे आती भर

देख-रेख के बिना दुधमुँही बिटिया दो दिन बाद गई मर।

Question number: 84 (6 of 6 Based on Passage) Show Passage

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Question

इस पद्यांश के लिए उपयुक्त शीर्षक लिखिए

Choices

Choice (4) Response

a.

किसान की पीड़ा

b.

दारूण दु: ख

c.

वे आँखें

d.

जीवन का अन्धकार

Passage

उपयुक्त उस खल को न यद्यपि मृत्यु का भी दण्ड है,

पर मृत्यु से बढ़कर न जग में दण्ड और प्रचण्ड है।

अतएव कल उस नीच को रण-मध्य जो मारूँ न मैं,

तो सत्य कहता हूँ कभी शस्त्रास्त्र फिर धारूँ न मैं।

अथवा अधिक कहना वृधा हैं, पार्थ का प्रण है यही,

साक्षी रहे सुन ये बचन रवि, शशि, अनल, अम्बर, मही।

सूर्यास्त से पहले न जो मैं कल जयद्रथ-वधकरूँ,

तो शपथ करता हूँ स्वयं मैं ही अनल में जल मरूँ।

Question number: 85 (5 of 6 Based on Passage) Show Passage

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Question

पार्थ की क्या प्रतिज्ञा है?

Choices

Choice (4) Response

a.

दुष्ट को मारने की

b.

जयद्रथ वध करने की

c.

अस्त्र-शस्त्र धारण न करने की

d.

आग में जलकर मरने की

Passage

न जाने किस अदृश्य पड़ोस से

निकल कर आता था वह

खेलने हमारे साथ

रतन, जो बोल नहीं सकता था

खेलता था हमारे साथ

एक टूटे खिलौने की तरह

देखने में हम बच्चों की ही तरह

था वह भी एक बच्चा।

लेकिन हमन बच्चों के लिए अजूबा था

क्योंकि हमने भिन्न था।

Question number: 86 (6 of 6 Based on Passage) Show Passage

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Question

शब्द ‘अदृश्य’ का पर्याय है

Choices

Choice (4) Response

a.

जो दिखाई न दे

b.

पारदर्शी

c.

जो सुनाई न दे

d.

जिसका कोई नाम न हो

Passage

वह आता

दो टूक कलेजे के करता पछताता

पथ पर आता।

पेट पीट दोनों मिलकर हैं एक

चल रहा लकुटिया टेक

मुट्ठी भर दाने को भूख मिटाने को

मुँह फटी पुरानी झोली का फैलाता

दो टूक कलेजे के करता पछताता पथ पर आता।

साथ दो बच्चे भी हैं सदा हाथ फैलाए

बाएँ से वे मलते हुए पेट को चलते

और दाहिना दया-दृष्टि पाने की ओर बढ़ाए।

भूख से सूख ओंठ जब जाते

दाता-भाग्य विधाता से क्या पाते?

घूँट आँसुओं के पीकर रह जाते?

चाट रहे जूठी पत्तल वे सभी सड़क पर खड़े हुए

और झपट लेने को उनके कुत्ते भी अड़े हुए

Question number: 87 (6 of 6 Based on Passage) Show Passage

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Question

किस पर व्यंग्य किया गया है

Choices

Choice (4) Response

a.

सामाजिक विषमता पर

b.

आर्थिक न्याय पर

c.

राजनीतिक सत्य पर

d.

मध्यवर्गीय जीवन पर

Passage

नन्हीं-सी नदी हमारी टेढ़ी-मेढ़ी धार,

गर्मियों में घुटने भर भिगो कर जाते पार।

पार जाते ढोर-डँगर बैलगाड़ी चालू,

ऊँचे है किनारे इसके, पाट इसका ढालू।

पेटे में झकाझक बालू कीचड़ का न नाम,

काँस फूले एक पार उजले जैसे घाम।

दिन भर किचपिच-किचपिच करती मैना डार-डार,

रातों को हुआँ-हुआँ कर उठते सियार।

रविन्द्रनाथ ठाकुर

Question number: 88 (6 of 6 Based on Passage) Show Passage

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Question

शब्द ‘घाम’ का अर्थ क्या होगा?

Choices

Choice (4) Response

a.

निवास

b.

धूप

c.

दिन

d.

आश्रम

Passage

उपयुक्त उस खल को न यद्यपि मृत्यु का भी दण्ड है,

पर मृत्यु से बढ़कर न जग में दण्ड और प्रचण्ड है।

अतएव कल उस नीच को रण-मध्य जो मारूँ न मैं,

तो सत्य कहता हूँ कभी शस्त्रास्त्र फिर धारूँ न मैं।

अथवा अधिक कहना वृधा हैं, पार्थ का प्रण है यही,

साक्षी रहे सुन ये बचन रवि, शशि, अनल, अम्बर, मही।

सूर्यास्त से पहले न जो मैं कल जयद्रथ-वधकरूँ,

तो शपथ करता हूँ स्वयं मैं ही अनल में जल मरूँ।

Question number: 89 (6 of 6 Based on Passage) Show Passage

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Question

‘वृथा’ का समानार्थक है

Choices

Choice (4) Response

a.

उचित

b.

व्यर्थ

c.

पाप

d.

प्रण

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