Reading Comprehension-Poetry (CTET (Central Teacher Eligibility Test) Paper-I Hindi): Questions 85 - 89 of 89

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Passage

उपयुक्त उस खल को न यद्यपि मृत्यु का भी दण्ड है,

पर मृत्यु से बढ़कर न जग में दण्ड और प्रचण्ड है।

अतएव कल उस नीच को रण-मध्य जो मारूँ न मैं,

तो सत्य कहता हूँ कभी शस्त्रास्त्र फिर धारूँ न मैं।

अथवा अधिक कहना वृधा हैं, पार्थ का प्रण है यही,

साक्षी रहे सुन ये बचन रवि, शशि, अनल, अम्बर, मही।

सूर्यास्त से पहले न जो मैं कल जयद्रथ-वधकरूँ,

तो शपथ करता हूँ स्वयं मैं ही अनल में जल मरूँ।

Question number: 85 (5 of 6 Based on Passage) Show Passage

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Question

कवि के अनुसार नीच को युद्ध क्षेत्र के मध्य न मारने पर पार्थ क्या शपथ लेता है? v

Choices

Choice (4) Response

a.

जल में मरने की

b.

मृत्युदण्ड की

c.

अस्त्र-शस्त्र धारण न करने की

d.

None of the above

Passage

न जाने किस अदृश्य पड़ोस से

निकल कर आता था वह

खेलने हमारे साथ

रतन, जो बोल नहीं सकता था

खेलता था हमारे साथ

एक टूटे खिलौने की तरह

देखने में हम बच्चों की ही तरह

था वह भी एक बच्चा।

लेकिन हमन बच्चों के लिए अजूबा था

क्योंकि हमने भिन्न था।

Question number: 86 (6 of 6 Based on Passage) Show Passage

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Question

कवि ने बच्चे के घर को अदृश्य पड़ोस से क्यों सम्बोधित किया?

Choices

Choice (4) Response

a.

कवि बच्चे को नहीं जानता था

b.

कवि को बच्चे का घर नहीं पता था

c.

बच्चा असाधारण प्रकृति का था

d.

बच्चा सभी बच्चों से दूर-दूर रहता था

Passage

वह आता

दो टूक कलेजे के करता पछताता

पथ पर आता।

पेट पीट दोनों मिलकर हैं एक

चल रहा लकुटिया टेक

मुट्ठी भर दाने को भूख मिटाने को

मुँह फटी पुरानी झोली का फैलाता

दो टूक कलेजे के करता पछताता पथ पर आता।

साथ दो बच्चे भी हैं सदा हाथ फैलाए

बाएँ से वे मलते हुए पेट को चलते

और दाहिना दया-दृष्टि पाने की ओर बढ़ाए।

भूख से सूख ओंठ जब जाते

दाता-भाग्य विधाता से क्या पाते?

घूँट आँसुओं के पीकर रह जाते?

चाट रहे जूठी पत्तल वे सभी सड़क पर खड़े हुए

और झपट लेने को उनके कुत्ते भी अड़े हुए

Question number: 87 (6 of 6 Based on Passage) Show Passage

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Question

‘झपट’ का समानार्थी है

Choices

Choice (4) Response

a.

झाड़ना

b.

छीनना

c.

फेंकना

d.

All of the above

Passage

नन्हीं-सी नदी हमारी टेढ़ी-मेढ़ी धार,

गर्मियों में घुटने भर भिगो कर जाते पार।

पार जाते ढोर-डँगर बैलगाड़ी चालू,

ऊँचे है किनारे इसके, पाट इसका ढालू।

पेटे में झकाझक बालू कीचड़ का न नाम,

काँस फूले एक पार उजले जैसे घाम।

दिन भर किचपिच-किचपिच करती मैना डार-डार,

रातों को हुआँ-हुआँ कर उठते सियार।

रविन्द्रनाथ ठाकुर

Question number: 88 (6 of 6 Based on Passage) Show Passage

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Question

नन्हीं-सी नदी के किनारे कैसे हैं?

Choices

Choice (4) Response

a.

चिकने

b.

उजले

c.

ऊँचे

d.

कीचड़ से भरे हुए

Passage

उपयुक्त उस खल को न यद्यपि मृत्यु का भी दण्ड है,

पर मृत्यु से बढ़कर न जग में दण्ड और प्रचण्ड है।

अतएव कल उस नीच को रण-मध्य जो मारूँ न मैं,

तो सत्य कहता हूँ कभी शस्त्रास्त्र फिर धारूँ न मैं।

अथवा अधिक कहना वृधा हैं, पार्थ का प्रण है यही,

साक्षी रहे सुन ये बचन रवि, शशि, अनल, अम्बर, मही।

सूर्यास्त से पहले न जो मैं कल जयद्रथ-वधकरूँ,

तो शपथ करता हूँ स्वयं मैं ही अनल में जल मरूँ।

Question number: 89 (6 of 6 Based on Passage) Show Passage

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Question

रवि, शशि, अनल, अम्बर एवं मही के पर्यायवाची क्रमश: हैं

Choices

Choice (4) Response

a.

सूर्य, अग्नि, रात्रि, आकाश, पाताल

b.

सूर्य, चन्द्रमा, वायु, आकाश, पाताल

c.

सूर्य, रात्रि, अग्नि, आकाश, पाताल

d.

सूर्य, चन्द्रमा, अग्नि, आकाश, पृथ्वी

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