Reading Comprehension (CTET Paper-I Hindi): Questions 57 - 64 of 250

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Passage

साहित्य को समाज का प्रतिबिम्ब माना गया है अर्थात् समाज का पूर्ण रूप साहित्य में प्रतिबिम्बित होता रहता है। अनादि काल से साहित्य अपने इसी धर्म का पूर्ण निर्वाह करता चला आ रहा है। वह समाज के विभिन्न रूपों का चित्रण कर एक तरफ तो हमारे सामने समाज का यथार्थ चित्र प्रस्तुत करता है और दूसरी ओर अपनी प्रखर मेधा और स्वस्थ कल्पना द्वारा समाज के विभिन्न पहलुओं का विवेचन करता हुआ यह भी बताता है कि मानव समाज की सुख समृद्धि, सुरक्षा और विकास के लिए कौनसा मार्ग उपादेय है। एक आलोचक के शब्दों में - ”कवि वास्तव में समाज की व्यवस्था, वातावरण, धर्म-कर्म, रीति-नीति तथा सामाजिक शिष्टाचार या लोक व्यवहार से ही अपने काव्य के उपकरण चुनता है और उनका प्रतिपादन अपने आदर्शों के अनुरूप करता है। साहित्यकार उसी समाज का प्रतिनिधित्व करता है, जिसमें वह जन्म लेता है। वह अपनी समस्याओं का सुलझाव, अपने आदर्श की स्थापना अपने समाज के आदर्शों के अनुरूप ही करता है। अत: यह कहना सर्वथा असम्भव और अविवेकपूर्ण है कि साहित्यकार समाज से पूर्णत: निरपेक्ष या तटस्थ रहकर साहित्य सृजन करता है। वाल्मीकि, तुलसी, सूर, भारतेन्दु, प्रेमचन्द आदि का साहित्य इस बात का सर्वाधिक सशक्त प्रमाण है कि साहित्यकार समाज से घनिष्ट रूप से सम्बद्ध रखता हुआ ही साहित्य सृजन करता है। समाज की अवहेलना करने वाला साहित्य क्षणजीवी होता है।“

मानव का कला या साहित्य सृजन के प्रति उन्मुख होना उसके इन्द्रिय बोध का परिणाम रहा है। रूप, रस, ग्रन्थ, स्पर्श आदि के इन्द्रियबोध मानव और पशु दोनों में ही विद्यमान हैं, परन्तु मानव में पशु की अपेक्षा अधिक मात्रा में। मानव में एक विशिष्ट गुण और विवेक है। विवेक द्वारा उसने सामाजिक जीवन का विकास और अपने इन्द्रियबोध का परिष्कार किया है। समाज व्यवस्था बदलने के साथ मनुष्य का इन्द्रियबोध विचार और भावों की अपेक्षा स्थायी रहता है। भाव और विचार दोनों ही साहित्य के मूलाधार है और इनका उद्गम और परिष्कार सामाजिक परिवेश में ही सम्भव होता है, समाज से कटकर निरपेक्ष रहने पर नहीं।

Question number: 57 (3 of 8 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Prose or Drama

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Question

कवि अपने काव्य के उपकरण कहाँ से चुनता है?

Choices

Choice (4) Response

a.

धर्म-कर्म

b.

रीति-नीति

c.

लोक व्यवहार

d.

All a. , b. and c. are correct

Question number: 58 (4 of 8 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Prose or Drama

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Question

साहित्यकार किस समाज का प्रतिनिधित्व करता है?

Choices

Choice (4) Response

a.

जिस समाज में वह जन्म लेता है

b.

जिस समाज के बारे में वह लिखना चाहता है

c.

जिस समाज की वह अवहेलना करता है

d.

All of the above

Passage

उपयुक्त उस खल को न यद्यपि मृत्यु का भी दण्ड है,

पर मृत्यु से बढ़कर न जग में दण्ड और प्रचण्ड है।

अतएव कल उस नीच को रण-मध्य जो मारूँ न मैं,

तो सत्य कहता हूँ कभी शस्त्रास्त्र फिर धारूँ न मैं।

अथवा अधिक कहना वृधा हैं, पार्थ का प्रण है यही,

साक्षी रहे सुन ये बचन रवि, शशि, अनल, अम्बर, मही।

सूर्यास्त से पहले न जो मैं कल जयद्रथ-वधकरूँ,

तो शपथ करता हूँ स्वयं मैं ही अनल में जल मरूँ।

Question number: 59 (1 of 6 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Poetry

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Question

कवि के अनुसार नीच को युद्ध क्षेत्र के मध्य न मारने पर पार्थ क्या शपथ लेता है? v

Choices

Choice (4) Response

a.

जल में मरने की

b.

मृत्युदण्ड की

c.

अस्त्र-शस्त्र धारण न करने की

d.

None of the above

Question number: 60 (2 of 6 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Poetry

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Question

‘वृथा’ का समानार्थक है

Choices

Choice (4) Response

a.

उचित

b.

व्यर्थ

c.

पाप

d.

प्रण

Question number: 61 (3 of 6 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Poetry

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Question

खल’ का समानार्थी है

Choices

Choice (4) Response

a.

नायक

b.

दुष्ट प्रवृत्ति का

c.

योद्धा

d.

दण्ड

Question number: 62 (4 of 6 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Poetry

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Question

रवि, शशि, अनल, अम्बर एवं मही के पर्यायवाची क्रमश: हैं

Choices

Choice (4) Response

a.

सूर्य, अग्नि, रात्रि, आकाश, पाताल

b.

सूर्य, चन्द्रमा, वायु, आकाश, पाताल

c.

सूर्य, रात्रि, अग्नि, आकाश, पाताल

d.

सूर्य, चन्द्रमा, अग्नि, आकाश, पृथ्वी

Passage

‘बिस्मिल्ला खॉ हिन्दू और मुसलमानों की मिली-जुली संस्कृति के प्रतिक थे। एक ओर जहाँ वे सच्चे मुसलमान थे। पाँचों समय की नमाज श्रद्धा के साथ अदा करते थे। दूसरी ओर वे काशी, विश्वनाथ और बाजाली के मंदिर में शहनाई बजाते थे। गंगा के प्रति सच्ची श्रद्धा रखते थे। काशी से बाहर रहते हुए भी बालाजी के मंदिर की ओर मुँह करके प्रणाम किया करते थे। इसलिए वे मिली-जुली संस्कृति के प्रतिक थे।

उन्होंने खुदा से हमेशा ही सुर मांगा। यद्यपि वे जीवन में फटेहाल रहे, लेकिन उन्होंने खुदा से अपने लिए धन नहीं मांगा। ऊँचे-ऊँचे पुरस्कार पाकर भी वे अपने जीवन में सरल ही बने रहे।

Question number: 63 (1 of 3 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Prose or Drama

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Question

बिस्मिल्ला खॉ नमाज के उपरान्त (बाद) सजदे (प्रार्थना) में खुदा से क्या मांगते थे?

Choices

Choice (4) Response

a.

स्वर, सुर

b.

धन

c.

मोती

d.

कपड़े

Question number: 64 (2 of 3 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Prose or Drama

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Question

बिस्मिल्ला खॉ कौनसी मिली-जुली संस्कृति के प्रतीक थे?

Choices

Choice (4) Response

a.

हिन्दू-मुसलमान

b.

सिख-ईसाई

c.

मुसलमान-सिख

d.

ईसाई-हिन्दू

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