Reading Comprehension (CTET (Central Teacher Eligibility Test) Paper-I Hindi): Questions 48 - 55 of 255

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Passage

प्राचीन भारत में शिक्षा ज्ञान प्राप्ति का सबसे बड़ा स्रोत माना जाता था। व्यक्ति के जीवन को संतुलित और श्रेष्ठ बनाने तथा एक नई दिशा प्रदान करने में शिक्षा का महत्वपूर्ण योगदान था। सामाजिक बुराइयों को उसकी जड़ों से निर्मूल करने और त्रुटिपूर्ण जीवन में सुधार करने के लिए शिक्षा की नितान्त आवश्यकता थी। यह एक ऐसी व्यवस्था थी, जिसके द्वारा सम्पूर्ण जीवन ही परिवर्तित किया जा सकता था। व्यक्ति को अपने व्यक्तित्व का विकास करने, वास्तविक ज्ञान को प्राप्त करने और समस्याओं को दूर करने के लिए शिक्षा पर निर्भर होना पड़ता था। आधुनिक युग की भाँति प्राचीन भारत में भी मनुष्य के चरित्र का उत्थान शिक्षा से ही सम्भव था। सामाजिक उत्तरदायित्वों को निष्ठापूर्वक वहन करना प्रत्येक मानव का उल्लेखनीय योगदान रहता है। भारतीय मनीषियों ने इस ओर अपना ध्यान केन्द्रित करके शिक्षा को समाज की आधारशिला के रूप में स्वीकार किया। विद्या का स्थान किसी भी वस्तु से बहुत ऊँचा बताया गया। प्रखर बुद्धि एवं सही विवेक के लिए शिक्षा की उपयोगिता को स्वीकार किया गया। यह माना गया कि शिक्षा ही मनुष्य को व्यावहारिक कर्तव्यों का पाठ पढ़ाने और सफल नागरिक बनाने में सक्षम है। इसके माध्यम से व्यक्ति का शारीरिक, मानसिक और आत्मिक अर्थात् सर्वांगीण विकास सम्भव है। शिक्षा ने ही प्राचीन संस्कृति को संरक्षण दिया और इसके प्रसार में मदद की।

विद्याल का आरम्भ उपनयन संस्कार द्वारा होता था। उपनयन संस्कार के महत्व पर प्रकाश डालते हुए मनुस्मृति में उल्लेख मिलता है कि गर्भाधान संस्कार द्वारा तो व्यक्ति का शरीर उत्पन्न होता है पर उपनयन संस्कार द्वारा उसका आध्यात्मिक जन्म होता है। प्राचीन काल में बच्चों को शिक्षा प्राप्त करने के लिए आचार्य के पास भेजा जाताथा। शतपथ ब्राह्मण के अनुसार, जो ब्रह्मचर्य ग्रहण करता है। वह लम्बी अवधि की यज्ञावधि ग्रहण करता है। छान्दोग्योपनिषद् में उल्लेख मिलता है कि आरूणि ने अपने पुत्र श्वेतकेतु को ब्रह्मचारी रूप में वेदाध्ययन के लिए गुरू के पास जाने को प्रेरित किया था। आचार्य के पास रहते हुए ब्रह्मचारी को तप और साधना का जीवन बिताते हुए विद्याध्ययन में तल्लीन रहना पड़ता था। इस अवस्था में बालक जो ज्ञानार्जन करता था उसका लाभ उसको जीवन भर मिलता था। गुरू गृह में निवास करते हुए विद्यार्थी समाज के निकट सम्पर्क में आता था। गुरू के लिए समिधा, जल का ालना तथा गृह कार्य करना उसका कर्तव्य माना जाता था। गृहस्थ धर्म की शिक्षा केसाथ-साथ वह श्रम और सेवा का पाठ पढ़ता था। शिक्षा केवल सैद्धान्तिक और पुस्तकीय न होकर जीवन की वास्तविकताओं के निकट होती थी।

Question number: 48 (6 of 9 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Prose or Drama

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Question

‘उपनयन’ शब्द में कौनसा समास है?

Choices

Choice (4) Response

a.

दव्न्दव्

b.

कर्मधारय

c.

अव्ययीभाव

d.

बहुब्रीहि

Question number: 49 (7 of 9 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Prose or Drama

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Question

प्राचीन भारत में शिक्षा होती थी

Choices

Choice (4) Response

a.

उपरोक्त में से कोई नहीं

b.

सैद्धान्तिक

c.

केवल पुस्तकीय

d.

जीवन की वास्तविकताओं से परिपूर्ण

Question number: 50 (8 of 9 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Prose or Drama

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Question

प्रस्तुत गद्यांश का सर्वाधिक उपयुक्त शीर्षक निम्नलिखित में से कौनसा हो सकता है?

Choices

Choice (4) Response

a.

भारतीय शिक्षा प्रणाली

b.

प्राचीन भारत में शिक्षा

c.

शिक्षा के लाभ

d.

प्राचीन भारत में शिक्षा का विकास

Question number: 51 (9 of 9 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Prose or Drama

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Question

प्रस्तुत गद्यांश में निम्नलिखित में से किस ग्रन्थ का उल्लेख नहीं है?

Choices

Choice (4) Response

a.

शतपथ ब्राह्मण

b.

कठोपनिषद्

c.

छान्दोग्योपनिषद्

d.

मनुस्मृति

Passage

अन्धकार की गुहा सरीखी उन आँखों से डरता है मन

भरा दूर तक उनमें दारूण दैन्य दु: ख का नीरव रोदन।

वह स्वाधीन किसान रहा, अभिमान भरा आँखों में इसका

छोड़ उसे मँझधार आज संसार कगार सदृश वह खिसका।

लहराते वे खेत दृगों में हुआ बेदखल वह अब जिन से

हँसती भी उसके जीवन की हरियाली जिनके तृन-तृन से।

आँखों ही में घूमा करता वह उसकी आँखों का तारा

कारकुनों की लाठी से जो गया जवानी ही में मारा।

बिना दावादर्पन के घरनी स्वरग चली - आँखे आती भर

देख-रेख के बिना दुधमुँही बिटिया दो दिन बाद गई मर।

Question number: 52 (1 of 6 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Poetry

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Question

इस पद्यांश के लिए उपयुक्त शीर्षक लिखिए

Choices

Choice (4) Response

a.

किसान की पीड़ा

b.

दारूण दु: ख

c.

जीवन का अन्धकार

d.

वे आँखें

Question number: 53 (2 of 6 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Poetry

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Question

जिन आँखों का वर्णन कवि ने किया है वे किसकी आँखे हैं?

Choices

Choice (4) Response

a.

नीरव रोदन की

b.

स्वाधीन भारत की

c.

अन्धकार की

d.

किसान की

Question number: 54 (3 of 6 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Poetry

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Question

कवि का मन जिन आँखों से डरता है वै कैसे हैं?

Choices

Choice (4) Response

a.

अन्धकारी सी दारूण

b.

अन्धकार सी काली

c.

डरावने आँखें

d.

अन्धकार की गुफा सी

Question number: 55 (4 of 6 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Poetry

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Question

किसान की आँखों में अब भी क्या लहराता है?

Choices

Choice (4) Response

a.

दैन्य-दु: ख का दारूण रोदन

b.

वह संसार जो कगार सदृश खिसक गया

c.

स्वाधीनता का अभिमान

d.

अपने खेत जितने वो बेदखल किया गया

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