Reading Comprehension (CTET Paper-I Hindi): Questions 34 - 42 of 250

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Passage

एक दिन तने ने भी कहा था, जड़?

जड़ तो जड़ ही है; जीवन से सदा डरी रही है

और यही है उसका सारा इतिहास

कि जमीन में मुँह गड़ा पड़ी रही है

लेकिन मैं जमीन से ऊपर उठा

बाहर निकला, बढ़ा हूँ, मजबूत बना हूँ, इसी से तो तना हूँ

एक दिन डालों ने भी कहा था, तना?

किस बात पर है तनात्र

जहाँ बिठाल दिया था वहीं पर है बना

प्रगतिशील जगती में तिल भर नहीं डोला है

खाना है, मोटापा है, सहलाया चोला है

लेकिन हम तने से फूटीं, दिशा-दिशा में गई

ऊपर उठीं, नीचे आईं, हर हवा के लिए दोल बनी, लहराई

इसी से तो डाल कहलाई।

Question number: 34 (6 of 6 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Poetry

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Question

तने ने अपने बारे में क्या कहा?

Choices

Choice (4) Response
a.

मेरा सारा इतिहास है

b.

जमीन से ऊपर उठा बढ़ा है

c.

जमीन में मुँह गड़ाए पड़ा है

d.

जीवन से सदा डरा हूँ

Passage

पूछा किसी भाग्यवादी से,

यदि विधि अंक प्रबल है

पद पर क्यों देती न स्वयं

वसुधा निज रतन उगल है।

Question number: 35 (1 of 6 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Poetry

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Question

विधि अंक से तात्पर्य है

Choices

Choice (4) Response
a.

न्यायवादी

b.

न्याय अंक

c.

‘विधाता’ लिखा होना

d.

भाग्य का लिखा हुआ

Question number: 36 (2 of 6 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Poetry

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Question

‘प्र’ उपसर्ग से बनने वाले शब्द समूह है

Choices

Choice (4) Response
a.

प्रत्युत्तर, प्रदेश, प्रपत्र

b.

प्रत्येक, प्रभाव, प्रदेश

c.

प्रसाद, प्रत्येक, प्रपत्र

d.

प्रभाव, प्रदेश, प्रपत्र

Question number: 37 (3 of 6 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Poetry

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Question

कवि ने किसकी महिमा का खण्ड किया है?

Choices

Choice (4) Response
a.

रतनों का

b.

विधि के विधान का

c.

भाग्यवाद का

d.

वसुधा का

Question number: 38 (4 of 6 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Poetry

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Question

तुकबन्दी के कारण कौनसा शब्द बदले हुए रूप में प्रयुक्त हुआ है?

Choices

Choice (4) Response
a.

उगल

b.

रतन

c.

प्रबल

d.

स्वयं

Question number: 39 (5 of 6 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Poetry

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Question

इनमें से कौनसा ‘वसुधा’ का समानार्थी है?

Choices

Choice (4) Response
a.

जलधि

b.

वसुन्धरा

c.

महीप

d.

वारिधि

Question number: 40 (6 of 6 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Poetry

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Question

कवि के अनुसार यदि भाग्य ही सब कुछ होता तो क्या होता?

Choices

Choice (4) Response
a.

रत्न स्वयं प्रकाश युक्त हो उठते

b.

रत्न मिल जाते

c.

पैरों के नीचे वसुधा होती

d.

धरती स्वयं ही रत्न रूपी सम्पत्ति उगल देती

Passage

प्राचीन भारत में शिक्षा ज्ञान प्राप्ति का सबसे बड़ा स्रोत माना जाता था। व्यक्ति के जीवन को संतुलित और श्रेष्ठ बनाने तथा एक नई दिशा प्रदान करने में शिक्षा का महत्वपूर्ण योगदान था। सामाजिक बुराइयों को उसकी जड़ों से निर्मूल करने और त्रुटिपूर्ण जीवन में सुधार करने के लिए शिक्षा की नितान्त आवश्यकता थी। यह एक ऐसी व्यवस्था थी, जिसके द्वारा सम्पूर्ण जीवन ही परिवर्तित किया जा सकता था। व्यक्ति को अपने व्यक्तित्व का विकास करने, वास्तविक ज्ञान को प्राप्त करने और समस्याओं को दूर करने के लिए शिक्षा पर निर्भर होना पड़ता था। आधुनिक युग की भाँति प्राचीन भारत में भी मनुष्य के चरित्र का उत्थान शिक्षा से ही सम्भव था। सामाजिक उत्तरदायित्वों को निष्ठापूर्वक वहन करना प्रत्येक मानव का उल्लेखनीय योगदान रहता है। भारतीय मनीषियों ने इस ओर अपना ध्यान केन्द्रित करके शिक्षा को समाज की आधारशिला के रूप में स्वीकार किया। विद्या का स्थान किसी भी वस्तु से बहुत ऊँचा बताया गया। प्रखर बुद्धि एवं सही विवेक के लिए शिक्षा की उपयोगिता को स्वीकार किया गया। यह माना गया कि शिक्षा ही मनुष्य को व्यावहारिक कर्तव्यों का पाठ पढ़ाने और सफल नागरिक बनाने में सक्षम है। इसके माध्यम से व्यक्ति का शारीरिक, मानसिक और आत्मिक अर्थात् सर्वांगीण विकास सम्भव है। शिक्षा ने ही प्राचीन संस्कृति को संरक्षण दिया और इसके प्रसार में मदद की।

विद्याल का आरम्भ उपनयन संस्कार द्वारा होता था। उपनयन संस्कार के महत्व पर प्रकाश डालते हुए मनुस्मृति में उल्लेख मिलता है कि गर्भाधान संस्कार द्वारा तो व्यक्ति का शरीर उत्पन्न होता है पर उपनयन संस्कार द्वारा उसका आध्यात्मिक जन्म होता है। प्राचीन काल में बच्चों को शिक्षा प्राप्त करने के लिए आचार्य के पास भेजा जाताथा। शतपथ ब्राह्मण के अनुसार, जो ब्रह्मचर्य ग्रहण करता है। वह लम्बी अवधि की यज्ञावधि ग्रहण करता है। छान्दोग्योपनिषद् में उल्लेख मिलता है कि आरूणि ने अपने पुत्र श्वेतकेतु को ब्रह्मचारी रूप में वेदाध्ययन के लिए गुरू के पास जाने को प्रेरित किया था। आचार्य के पास रहते हुए ब्रह्मचारी को तप और साधना का जीवन बिताते हुए विद्याध्ययन में तल्लीन रहना पड़ता था। इस अवस्था में बालक जो ज्ञानार्जन करता था उसका लाभ उसको जीवन भर मिलता था। गुरू गृह में निवास करते हुए विद्यार्थी समाज के निकट सम्पर्क में आता था। गुरू के लिए समिधा, जल का ालना तथा गृह कार्य करना उसका कर्तव्य माना जाता था। गृहस्थ धर्म की शिक्षा केसाथ-साथ वह श्रम और सेवा का पाठ पढ़ता था। शिक्षा केवल सैद्धान्तिक और पुस्तकीय न होकर जीवन की वास्तविकताओं के निकट होती थी।

Question number: 41 (1 of 9 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Prose or Drama

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Question

‘उपनयन’ शब्द में कौनसा समास है?

Choices

Choice (4) Response
a.

बहुब्रीहि

b.

दव्न्दव्

c.

अव्ययीभाव

d.

कर्मधारय

Question number: 42 (2 of 9 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Prose or Drama

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Question

प्राचीन काल में विद्यार्थियों के कर्तव्य निम्नलिखित में से कौनसे थे?

A. ब्रह्मचर्य

B. गुरू के साथ रहना

C. गुरू की सेवा करना

D. गृहस्थ जीवन व्यतीत करना

Choices

Choice (4) Response
a.

A एवं B

b.

A, B एवं C

c.

C एवं D

d.

B, C एवं D

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