Reading Comprehension (CTET Paper-I Hindi): Questions 195 - 201 of 250

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Passage

उपयुक्त उस खल को न यद्यपि मृत्यु का भी दण्ड है,

पर मृत्यु से बढ़कर न जग में दण्ड और प्रचण्ड है।

अतएव कल उस नीच को रण-मध्य जो मारूँ न मैं,

तो सत्य कहता हूँ कभी शस्त्रास्त्र फिर धारूँ न मैं।

अथवा अधिक कहना वृधा हैं, पार्थ का प्रण है यही,

साक्षी रहे सुन ये बचन रवि, शशि, अनल, अम्बर, मही।

सूर्यास्त से पहले न जो मैं कल जयद्रथ-वधकरूँ,

तो शपथ करता हूँ स्वयं मैं ही अनल में जल मरूँ।

Question number: 195 (5 of 6 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Poetry

MCQ▾

Question

पार्थ की क्या प्रतिज्ञा है?

Choices

Choice (4) Response

a.

दुष्ट को मारने की

b.

जयद्रथ वध करने की

c.

अस्त्र-शस्त्र धारण न करने की

d.

आग में जलकर मरने की

Passage

सभ्यता के पुराने दस्तावेज के रूप में खण्डहरों व भूमिगम सामग्रियों को देखा जाता है। जब व्यक्ति अपने आपको सामाजिक जीवन में ढालने लगा, तब से वह समग्र एकता में प्रदर्शित होता है। इस प्रदर्शन की सीमा को हड़प्पा व मोहनजोदड़ों से प्राप्त वस्तुओं से कर सकते हैं उनकी अभिव्यक्ति रहन-सहन, मोहरों, सिक्कों एवं बने बनाए पक्के व अधपक्के खिलौनों से जान सकते हैं। उनकी धार्मिक भावना के रूप में कुण्ड की प्राप्ति हुई है, जिससे उनके धार्मिक संवेदनाओं को जाने सकते हैं। लेकिन प्राकृतिक आपदाओं में ढहती सभ्यताओं की कहानी, जमीन में धंसे समय के काल को खोद कर देख सकते हैं। इससे इतिहास की टूटी कड़ियों का पता चलता है। इससे यह भी पता चलता है कि कैसे नगरीय सभ्यता के स्थान पर ग्रामीण सभ्यता का विकास होता है। यह वैदिक युग में हुआ और इसी सभ्यता में भाषा की उपलब्धि हासिल हुई जिसको संस्कृत के रूप में जाना जाताहै।

वैदिक युग में मानव ने जंगल से निकल ग्रामीण संस्कृति का निर्माण किया तथा समाज ने प्राकृतिक रूपों को ही अपने ईष्ट के रूप में स्वीकारा, जिसकी अभिव्यक्ति ऋग्वेद के रूप में मिलती है। भाषा की यह वृत्ति केवल भारतभूमि पर ही सम्भव नहीं हुई बल्कि विश्व के अन्य हिस्सों में भी देखने को मिलती है। संस्कृत भाषा के प्राथमिक जीवित रचना के रूप में ऋग्वेद का शास्त्रीय संस्कृत भाषा का संबंध है। संस्कृत भाषा अपनी समस्त स्थितियों में प्रयुक्त बहुल भाषा है परन्तु वेदों में जो रूप प्रयुक्त हुए हैं, उनमें बाद के दिनों से अन्तर है। यही कारण है कि वैदिक भाषा का प्रभाव बाद के दिनों में अन्य भाषाओं में देखने को मिलता है क्योंकि संस्कृत ही इन भाषाओं की जननी है। वर्तमान में भारतीय संविधान में संग्रहीत सभी भाषाओं का प्रभाव देखा जाता है।

Question number: 196 (6 of 9 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Prose or Drama

MCQ▾

Question

निम्नलिखित में से कौनसी विश्व की पहली साहित्यिक रचना मानी जाती है?

Choices

Choice (4) Response

a.

उपनिषद्

b.

ऋग्वेद

c.

सामवेद

d.

अथर्ववेद

Question number: 197 (7 of 9 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Prose or Drama

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Question

संस्कृत को किन भाषाओं की जननी बताया गया है?

Choices

Choice (4) Response

a.

हड़प्पाकालीन भाषाओं की

b.

सभी भाषाओं की

c.

वैदिक भाषाओं की

d.

Question does not provide sufficient data or is vague

Question number: 198 (8 of 9 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Prose or Drama

MCQ▾

Question

कौनसी सभ्यता पहले विद्यमान थी?

Choices

Choice (4) Response

a.

ग्रामीण सभ्यता

b.

नगरीय सभ्यता

c.

ग्रामीण सभ्यता व नगरीय सभ्यता दोनों एकसाथ विद्यमान थी

d.

None of the above

Passage

पत्र-पत्रिकाएँ मानव समाज की दिशा-निर्देशिका मानी जाती हैं। समाज के भीतर घटती घटनाओं से लेकर परिवेश की समझ उत्पन्न करने का कार्य पत्रकारिता का प्रथम व महत्वपूर्ण कर्तव्य है। राजनीतिक-सामाजिक चिन्तन की समझ पैदा करने के साथ विचार की सामर्थ्य पत्रकारिता के माध्यम से ही उत्पन्न होती है। पत्रकारिता ने युगों से अपने इस दायित्व का निर्वाह किया तथा दायित्व निर्वहन की समस्त कसौटियों को पूर्ण करते हुए समय-समय पर अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज की। यह अध्ययन करना अपने-आपमें अत्यन्त रोचक है कि पत्रकारिता की यह यात्रा कब और कैसे आरम्भ हुई और किन पड़ावों से गुजरकर राष्ट्रीयता के मिशन से व्यावसायिकता तक की यात्रा को उसने सम्पन्न किया। आजादी से पूर्व का युग राष्ट्रीयता और राष्ट्रीय चेतना की अनुभूति के विकास का युग था। इस युग का मिशन और जीवन का उद्देश्य एक ही था - स्वाधीनता की चाह और प्राप्ति का प्रयास। इस प्रयास के तहत ही हिन्दी पत्र-पत्रिकाओं का आरम्भ हुआ। इस संदर्भ में इस तथ्य को भी ध्यान में रखना होगा कि हिन्दी क्षेत्रों के बाहर भी विशेषकर हिन्दीतर भाषी क्षेत्रों को राष्ट्रीय अस्मिता का वाहक मानकर सभी पत्रकारों ने हिन्दी को ही अपनी ‘भाषा’ के रूप में चुना और हिन्दी भाषा के पत्र-पत्रिकाओं के संवर्द्धन में अपना योगदान दिया।

Question number: 199 (6 of 9 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Prose or Drama

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Question

‘योगदान’ में कौनसा समास है?

Choices

Choice (4) Response

a.

अव्ययीभाव

b.

तत्पुरूष

c.

दव्न्दव्

d.

कर्मधारय

Question number: 200 (7 of 9 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Prose or Drama

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Question

राष्ट्रीय चेतना के विकास के युग में हिन्दीतर भाषी क्षेत्रों में पत्रकारों ने अपनी भाषा के रूप में ‘हिन्दी’ का चुनाव क्यों किया?

Choices

Choice (4) Response

a.

क्योंकि हिन्दी भाषा ही सर्वाधिक सशक्त भाषा थी

b.

क्योंकि हिन्दी भाषा ही राष्ट्रीय अस्तिमा की वाहक थी

c.

क्योंकि उत्तर भारत के लोगों का वर्चस्व सर्वाधिक था

d.

Question does not provide sufficient data or is vague

Question number: 201 (8 of 9 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Prose or Drama

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Question

निम्नलिखित में से किसे मानव समाज के दिशा-निर्देशक के अन्तर्गत नहीं रखा गया है?

Choices

Choice (4) Response

a.

छोटी पत्रिकाएँ

b.

सांध्य समाचार पत्र

c.

दैनिक समाचार पत्र

d.

टीवी

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