Reading Comprehension (CTET Paper-I Hindi): Questions 182 - 192 of 250

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Passage

रवि जग में शोभा सरसाता, सोम सुधा बरसाता।

सब हैं लगे कर्म में, कोई निष्क्रिय दृष्टि न आता।

है उद्देश्य नितान्त तुच्छ तृण के भी लघु जीवन का।

उसी पूर्ति में वह करता है अन्त कर्ममय तन का।

तुम मनुष्य हो, अमित बुद्धि-बल विलसित जन्म तुम्हारा।

क्या उद्देश्य रहित हो जग में, तुमने कभी विचारा?

बुरा न मानों एक बार सोचो तुम अपने मन में

क्या कर्तव्य समाप्त कर लिया तुमने निज जीवन में?

जिस पर गिरकर उदर-दरी से तुमने जन्म लिया है

जिसका खाकर अन्न सुधासम नीर, समीर पिया है

वही स्नेह की मूर्ति दयामयि माता तुल्य मही है

उसके प्रति कर्तव्य तुम्हारा क्या कुछ शेष नहीं है?

Question number: 182 (1 of 6 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Poetry

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Question

कवि को निरन्तर कर्म करने की प्रेरणा कौन देता है?

Choices

Choice (4) Response

a.

रवि

b.

चन्द्रमा

c.

तृण

d.

प्रकृति

Question number: 183 (2 of 6 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Poetry

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Question

‘सोम’ का पर्यायवाची खोजिए

Choices

Choice (4) Response

a.

शराब

b.

शहद

c.

अमृत

d.

चन्द्रमा

Question number: 184 (3 of 6 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Poetry

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Question

यह कविता क्या प्रेरणा देती है?

Choices

Choice (4) Response

a.

देश-प्रेम

b.

निरन्तर कर्म

c.

निरन्तर गति

d.

सोच-विचार

Question number: 185 (4 of 6 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Poetry

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Question

यह वाक्य किस प्रकार का है उसके प्रति कर्तव्य तुम्हारा क्या कुछ शेष नहीं है?

Choices

Choice (4) Response

a.

विधानवाचक

b.

विस्मयवाचक

c.

प्रश्नवाचक

d.

भाववाचक

Question number: 186 (5 of 6 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Poetry

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Question

‘निष्क्रिय’ का विपरीतार्थक लिखिए

Choices

Choice (4) Response

a.

अक्रिय

b.

सक्रिय

c.

क्रियान्वयन

d.

क्रियान्वित

Question number: 187 (6 of 6 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Poetry

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Question

निष्क्रिय में प्रयुक्त उपसर्ग है

Choices

Choice (4) Response

a.

नि

b.

निस्

c.

निति

d.

इय

Passage

‘गोदान’ प्रेमचन्द जी की उन अमर कृतियों में से एक है, जिसमें ग्रामीण भारत की आत्मा का करूण चित्र साकार हो उठा है। इसी कारण कई मनीषी आलोचक इसे ग्रामीण भारतीय परिवेशगत समस्याओं का महाकाव्य मानते हैं तो कई विद्वान इसे ग्रामीण जीवन और कृषि संस्कृति का शोक गीत स्वीकारते हैं। कुछ विद्वान तो ऐसे भी है कि जो इन उपन्यास को ग्रामीण भारण की आधुनिक ‘गीता’ तक स्वीकार करते हैं जो कुछ भी हो, ‘गोदान’ वास्तव में मुंशी प्रेमचन्द का एक ऐसा उपन्यास है, जिसमें आचार-विचार, संस्कार और प्राकृतिक परिवेश, जो गहन करूणा से युक्त है, प्रतिबिम्बित हो उठाा है। डॉ. गोपाल राय का कहना है कि गोदान ग्राम जीवन और ग्राम संस्कृति को उसकी सम्पूर्णता में प्रस्तुत करने वाला अदव्तीय उपन्यास है, न केवल हिन्दी के वरन किसी भी भारतीय भाषा के किसी भी उपन्यास में ग्रामीण समाज का ऐसा व्यापक यथार्थ और सहानुभूतिपूर्ण चित्रण नहीं हुआ है। ग्रामीण जीवन और संस्कृति के अंकन की दृष्टि से इस उपन्यास का वही महत्व है जो आधुनिक युग में युग जीवन की अभिव्यक्ति की दृष्टि से महाकाव्यों का हुआ करता था। इस प्रकार डॉ. राय गोदान को आधुनिक युग का महाकाव्य ही नहीं स्वीकारते वरन् सर्वश्रेष्ठ महाकाव्य भी स्वीकारते है। उनके इस कथन का यही आशय है कि प्रेमचन्द जी ने ग्राम जीवन से संबंध सभी पक्षों का न केवल अत्यन्त विशदता से चित्रण किया है, वरन् उनकी गहराइयों में जाकर उनके सच्चे चित्र प्रस्तुत कर दिए हैं। प्रेमचन्द जी ने जिस ग्राम जीवन का चित्र गोदान में प्रस्तुत किया है, उसका संबंध आज ग्राम परिवेश से न होकर तत्कालीन ग्राम जीवन से है। ग्रामीण जीवन को वास्तविक आधार प्रदान करने के लिए प्रेमचन्द जी ने चित्र के अनुरूप ही कुछ ऐसे खांचे अथवा चित्रफलक निर्मित किए हैं जो चित्र को यथार्थ बनाने में सहयोगी सिद्ध हुए हैं। ग्रामीण किसानों के घर द्वार, खेत-खलिहान और प्राकृतिक दृश्यों का ऐसा वास्तविक चित्रण अत्यन्त दुर्लभ है।

Question number: 188 (6 of 8 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Prose or Drama

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Question

‘प्रतिबिम्बित’ शब्द ________ है|

Choices

Choice (4) Response

a.

विशेषण

b.

संज्ञा

c.

क्रिया

d.

प्रविशेषण

Question number: 189 (7 of 8 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Prose or Drama

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Question

‘महाकाव्य’ में कौनसा समास है?

Choices

Choice (4) Response

a.

अव्ययीभाव

b.

तत्पुरूष

c.

दव्न्दव्

d.

कर्मधारय

Passage

1914 तक देश का औद्योगिक विकास बेहद धीमा रहा और साम्राज्यवादी शोषण अत्यन्त तीव्र हो गया। गाँवों की अर्थव्यवस्था पंगु हो गई। सबसे अधिक बुरा प्रभाव कारीगरों, हरिजनों और छोटे किसानों पर पड़ा। ग्रामीण जन साम्राज्य और उनके भारतीय एजेन्ट जमींदारों के दोहरे शोषण की चक्की में पिस रहे थे। ब्रिटिश काल में सूदखोर महाजनों काएक ऐसा वर्ग पैदा हुआ, जिनसे एक बार कर्ज लेने पर गाँव के किसान जीवन-भर गुलामी का पट्टा पहनने पर मजबूर हो जाते थे। उनके हिसाब के सूद का भुगतान करने में असमर्थ किसान महाजनों को खेत बेचने पर मजबूर होकर अपनी जमीन पर ही मजदूरी होता गया। इस प्रकार देश में एक और तो बड़े किसानों की संख्या बढ़ी, दूसरी ओर जमीन जोतने वाला किसान भूस्वामित्व के अधिकार से वंचित होकर खेतिहर मजदूर होने लगा। भुखमरी से बचने के लिए बड़ी संख्या में ग्रामीण बड़े पैमाने पर रोजी-रोटी की तलाश में शहरों की ओर भागने लगे, परन्तु इन असहाय लोगों का स्वागत करने के लिए वहाँ भी कठिनाइयाँ और समस्याएँ ही थी। प्रेमचन्द ‘गोदान’ की ओर भागने लगे, परन्तु इन असहाय लोगों का स्वागत करने के लिए वहाँ भी कठिनाइयाँ और समस्याएँ ही थी। प्रेमचन्द ‘गोदान’ में होरी और गोबर के माध्यम से इस ऐतिहासिक प्रक्रिया को विस्तार से हमारे सामने प्रस्तुत करते हैं। यह अकेले होरी की ट्रेजिडी नहीं है, पूरे छोटे किसानों के साथ साम्राज्यवादी-पूँजीवादी व्यवस्था के शोषण तंत्र का क्रूर मजाक है, जो दूसरे ढंग से आज भी जारी है। 20वीं शताब्दी के आरम्भ में ग्रामीण गरीबी का प्रेमचन्द जो यथार्थ चित्रण करते हैं, यह यूरोप में किसी व्यक्ति के लिए अकल्पनीय है - ”टूटे-फूटे झोंपडे, मिट्टी की दीवारें, घरों के सामने कूडे-करकट के ढेर, कीचड़ में लिपटी भैंसें, दुर्बल गायें, हड्डी निकले किसान, जवानी में ही जिन पर बुढ़ापा आ गया है।“

Question number: 190 (8 of 8 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Prose or Drama

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Question

‘बुढ़ापा’ शब्द है

Choices

Choice (4) Response

a.

जातिवाचक संज्ञा

b.

भाववाचक संज्ञा

c.

व्यक्तिवाचक संज्ञा

d.

द्रव्यवाचक संज्ञा

Passage

भाषा के उद्योग को लेकर यह कहना उचित है कि जब तक उसे बोलने व लिखने में सुविधा नहीं होती, तब तक उसने विकास की सम्भावना अवरूद्ध होती है। संस्कृत में इस तरह के अवरोधक हटाने का कार्य पाणिनी ने किया खासकर दर्शन में इस तरह से पुट पाए हैं जो इस बात की पुष्टि करता है। संगीत पर भी यह बात लागू होती है, लेकिन फिर भी ध्यान देने योग्य बात यह है कि शास्त्रीय संगीत कभी जनता द्वारा बड़े पैमाने पर स्वीकृत नहीं होता था। उस समय के व्यक्ति संस्कृत भाषा के अध्ययन करते थे और बोलते भी थे, सम्भवत: बहुत कुछ निम्न वर्ग के व्यक्ति भी इसे समझ लेते होंगे। सम्पूर्ण भारत के लिए संस्कृत राष्ट्र भाषा के रूप में समझी जाती थी और आज भी समानता का परिचय देती नजर आती है। प्राचीन भारत के साहित्य और इतिहास में अनेकों मानव जातियों का संगम हुआ है। प्राक, आर्य, भारतीय आय, यूनानी, शक, हुण और तुर्क आदि अनेक जातियों ने भारत को अपना घर बनाया। प्रत्येक जातियों ने सामाजिक व्यवस्था, शिल्पकला, वास्तुकला और साहित्य के विकास में यथासत्य अपना व्योम दान दिया। ये सभी समुदाय इस तरह भारतीय सम्भावना एवं संस्कृति के आत्मसात् कर लिया कि आज इसे मूल रूप में साथ-साथ भारतीय संस्कृति की विशेषता इसमें उत्तर-दक्षिण तथा पूर्व-पश्चिम के सांस्कृतिक उपादान रूप में समाहित हो गए हैं।

आर्य आतीय उपादान, उत्तर भारत के वैदिक और सांस्कृतिक मूलक, संस्कृति के अंग हैं, जो प्राक, आर्य जातीय उपादान दक्षिण के द्रविड़ व तमिल संस्कृति के इन सभी संस्कृति में उन शब्दों का भी आदान-प्रदान जो मौजूद स्थिति में भिन्न भाषा रूप संस्कृति के रूप में मौजूद है। इसी प्रकार पाली और संस्कृत में बहुत से शब्द जो गंगा के मैदानों में विकसित भावनाओं और समस्याओं के द्योतक हैं, लगभग 300 ई. पूर्व से 600 ई. पूर्व के संगम से प्रसिद्ध प्राचीनतम, तमिल ग्रन्थों से मिलते हैं। इसमें भारत के पूर्वांचल ने भी जहाँ प्राक, आर्य जातियाँ बसी हुई हैं, अपना योगदान दिया है। यहाँ के लोग मुण्डा या कोल भाषा बोलते हैं। यह सभी भी झारखण्ड, बिहार, पश्चिम बंग, ओडिशा, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ के आदिवासियों की मुख्य भाषा हैं। भाषा वैज्ञानिकों ने यह सिद्ध किया है कि आर्य भाषा में फाहा, नौका, सन्ती आदि सूचक शब्द मिलते हैं, जो मुण्डा भाषाओं से लिया है। ब्राह्मण संस्कृति, मुण्डा संस्कृति के साथ घुल-मिल गई। ऐसा माना जाता है कि वैदिक भाषा में जो ध्वन्यात्मक व शब्दात्मक परिवर्तन मिलते हैं उसकी व्याख्या मुण्डा प्रसंग के आधार पर जितनी की जाती है उतनी द्रविड़ प्रभाव के आधार पर नहीं।

Question number: 191 (9 of 9 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Prose or Drama

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Question

प्रस्तुत गद्यांश में निम्नलिखित में से किसका उल्लेख नहीं है?

Choices

Choice (4) Response

a.

तुर्क

b.

शक

c.

मंगोल

d.

हुण

Passage

अन्धकार की गुहा सरीखी उन आँखों से डरता है मन

भरा दूर तक उनमें दारूण दैन्य दु: ख का नीरव रोदन।

वह स्वाधीन किसान रहा, अभिमान भरा आँखों में इसका

छोड़ उसे मँझधार आज संसार कगार सदृश वह खिसका।

लहराते वे खेत दृगों में हुआ बेदखल वह अब जिन से

हँसती भी उसके जीवन की हरियाली जिनके तृन-तृन से।

आँखों ही में घूमा करता वह उसकी आँखों का तारा

कारकुनों की लाठी से जो गया जवानी ही में मारा।

बिना दावादर्पन के घरनी स्वरग चली - आँखे आती भर

देख-रेख के बिना दुधमुँही बिटिया दो दिन बाद गई मर।

Question number: 192 (6 of 6 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Poetry

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Question

अन्धेरा या पर्याय है

Choices

Choice (4) Response

a.

तिमिर

b.

तरू

c.

विटप

d.

Question does not provide sufficient data or is vague

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