Reading Comprehension (CTET Paper-I Hindi): Questions 186 - 194 of 250

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Passage

रवि जग में शोभा सरसाता, सोम सुधा बरसाता।

सब हैं लगे कर्म में, कोई निष्क्रिय दृष्टि न आता।

है उद्देश्य नितान्त तुच्छ तृण के भी लघु जीवन का।

उसी पूर्ति में वह करता है अन्त कर्ममय तन का।

तुम मनुष्य हो, अमित बुद्धि-बल विलसित जन्म तुम्हारा।

क्या उद्देश्य रहित हो जग में, तुमने कभी विचारा?

बुरा न मानों एक बार सोचो तुम अपने मन में

क्या कर्तव्य समाप्त कर लिया तुमने निज जीवन में?

जिस पर गिरकर उदर-दरी से तुमने जन्म लिया है

जिसका खाकर अन्न सुधासम नीर, समीर पिया है

वही स्नेह की मूर्ति दयामयि माता तुल्य मही है

उसके प्रति कर्तव्य तुम्हारा क्या कुछ शेष नहीं है?

Question number: 186 (6 of 6 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Poetry

MCQ▾

Question

‘सोम’ का पर्यायवाची खोजिए

Choices

Choice (4) Response

a.

शराब

b.

शहद

c.

अमृत

d.

चन्द्रमा

Passage

‘गोदान’ प्रेमचन्द जी की उन अमर कृतियों में से एक है, जिसमें ग्रामीण भारत की आत्मा का करूण चित्र साकार हो उठा है। इसी कारण कई मनीषी आलोचक इसे ग्रामीण भारतीय परिवेशगत समस्याओं का महाकाव्य मानते हैं तो कई विद्वान इसे ग्रामीण जीवन और कृषि संस्कृति का शोक गीत स्वीकारते हैं। कुछ विद्वान तो ऐसे भी है कि जो इन उपन्यास को ग्रामीण भारण की आधुनिक ‘गीता’ तक स्वीकार करते हैं जो कुछ भी हो, ‘गोदान’ वास्तव में मुंशी प्रेमचन्द का एक ऐसा उपन्यास है, जिसमें आचार-विचार, संस्कार और प्राकृतिक परिवेश, जो गहन करूणा से युक्त है, प्रतिबिम्बित हो उठाा है। डॉ. गोपाल राय का कहना है कि गोदान ग्राम जीवन और ग्राम संस्कृति को उसकी सम्पूर्णता में प्रस्तुत करने वाला अदव्तीय उपन्यास है, न केवल हिन्दी के वरन किसी भी भारतीय भाषा के किसी भी उपन्यास में ग्रामीण समाज का ऐसा व्यापक यथार्थ और सहानुभूतिपूर्ण चित्रण नहीं हुआ है। ग्रामीण जीवन और संस्कृति के अंकन की दृष्टि से इस उपन्यास का वही महत्व है जो आधुनिक युग में युग जीवन की अभिव्यक्ति की दृष्टि से महाकाव्यों का हुआ करता था। इस प्रकार डॉ. राय गोदान को आधुनिक युग का महाकाव्य ही नहीं स्वीकारते वरन् सर्वश्रेष्ठ महाकाव्य भी स्वीकारते है। उनके इस कथन का यही आशय है कि प्रेमचन्द जी ने ग्राम जीवन से संबंध सभी पक्षों का न केवल अत्यन्त विशदता से चित्रण किया है, वरन् उनकी गहराइयों में जाकर उनके सच्चे चित्र प्रस्तुत कर दिए हैं। प्रेमचन्द जी ने जिस ग्राम जीवन का चित्र गोदान में प्रस्तुत किया है, उसका संबंध आज ग्राम परिवेश से न होकर तत्कालीन ग्राम जीवन से है। ग्रामीण जीवन को वास्तविक आधार प्रदान करने के लिए प्रेमचन्द जी ने चित्र के अनुरूप ही कुछ ऐसे खांचे अथवा चित्रफलक निर्मित किए हैं जो चित्र को यथार्थ बनाने में सहयोगी सिद्ध हुए हैं। ग्रामीण किसानों के घर द्वार, खेत-खलिहान और प्राकृतिक दृश्यों का ऐसा वास्तविक चित्रण अत्यन्त दुर्लभ है।

Question number: 187 (6 of 8 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Prose or Drama

MCQ▾

Question

‘गोदान’ के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौनसा कथन असत्य है?

Choices

Choice (4) Response

a.

इसमें ग्रामीण परिवेश का चित्रण है।

b.

इसमें कृषकों की समस्याओं का चित्रण है।

c.

इसमें प्राकृतिक दृश्यों का चित्रण नहीं है।

d.

इसमें ग्राम्य जीवन के सभी पहलुओं का चित्रण है।

Question number: 188 (7 of 8 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Prose or Drama

MCQ▾

Question

‘सहानुभूति’ का सन्धि विच्छेद है

Choices

Choice (4) Response

a.

सह + अनुभूति

b.

सहान + भूति

c.

सहा + अनुभूति

d.

सहा: नुभूति

Passage

1914 तक देश का औद्योगिक विकास बेहद धीमा रहा और साम्राज्यवादी शोषण अत्यन्त तीव्र हो गया। गाँवों की अर्थव्यवस्था पंगु हो गई। सबसे अधिक बुरा प्रभाव कारीगरों, हरिजनों और छोटे किसानों पर पड़ा। ग्रामीण जन साम्राज्य और उनके भारतीय एजेन्ट जमींदारों के दोहरे शोषण की चक्की में पिस रहे थे। ब्रिटिश काल में सूदखोर महाजनों काएक ऐसा वर्ग पैदा हुआ, जिनसे एक बार कर्ज लेने पर गाँव के किसान जीवन-भर गुलामी का पट्टा पहनने पर मजबूर हो जाते थे। उनके हिसाब के सूद का भुगतान करने में असमर्थ किसान महाजनों को खेत बेचने पर मजबूर होकर अपनी जमीन पर ही मजदूरी होता गया। इस प्रकार देश में एक और तो बड़े किसानों की संख्या बढ़ी, दूसरी ओर जमीन जोतने वाला किसान भूस्वामित्व के अधिकार से वंचित होकर खेतिहर मजदूर होने लगा। भुखमरी से बचने के लिए बड़ी संख्या में ग्रामीण बड़े पैमाने पर रोजी-रोटी की तलाश में शहरों की ओर भागने लगे, परन्तु इन असहाय लोगों का स्वागत करने के लिए वहाँ भी कठिनाइयाँ और समस्याएँ ही थी। प्रेमचन्द ‘गोदान’ की ओर भागने लगे, परन्तु इन असहाय लोगों का स्वागत करने के लिए वहाँ भी कठिनाइयाँ और समस्याएँ ही थी। प्रेमचन्द ‘गोदान’ में होरी और गोबर के माध्यम से इस ऐतिहासिक प्रक्रिया को विस्तार से हमारे सामने प्रस्तुत करते हैं। यह अकेले होरी की ट्रेजिडी नहीं है, पूरे छोटे किसानों के साथ साम्राज्यवादी-पूँजीवादी व्यवस्था के शोषण तंत्र का क्रूर मजाक है, जो दूसरे ढंग से आज भी जारी है। 20वीं शताब्दी के आरम्भ में ग्रामीण गरीबी का प्रेमचन्द जो यथार्थ चित्रण करते हैं, यह यूरोप में किसी व्यक्ति के लिए अकल्पनीय है - ”टूटे-फूटे झोंपडे, मिट्टी की दीवारें, घरों के सामने कूडे-करकट के ढेर, कीचड़ में लिपटी भैंसें, दुर्बल गायें, हड्डी निकले किसान, जवानी में ही जिन पर बुढ़ापा आ गया है।“

Question number: 189 (8 of 8 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Prose or Drama

MCQ▾

Question

ग्रामीण अर्थव्यवस्था कमजोर होने का कुप्रभाव किस पर पड़ा?

Choices

Choice (4) Response

a.

कारीगर

b.

छोटे किसान

c.

दलित वर्ग

d.

All a. , b. and c. are correct

Passage

भाषा के उद्योग को लेकर यह कहना उचित है कि जब तक उसे बोलने व लिखने में सुविधा नहीं होती, तब तक उसने विकास की सम्भावना अवरूद्ध होती है। संस्कृत में इस तरह के अवरोधक हटाने का कार्य पाणिनी ने किया खासकर दर्शन में इस तरह से पुट पाए हैं जो इस बात की पुष्टि करता है। संगीत पर भी यह बात लागू होती है, लेकिन फिर भी ध्यान देने योग्य बात यह है कि शास्त्रीय संगीत कभी जनता द्वारा बड़े पैमाने पर स्वीकृत नहीं होता था। उस समय के व्यक्ति संस्कृत भाषा के अध्ययन करते थे और बोलते भी थे, सम्भवत: बहुत कुछ निम्न वर्ग के व्यक्ति भी इसे समझ लेते होंगे। सम्पूर्ण भारत के लिए संस्कृत राष्ट्र भाषा के रूप में समझी जाती थी और आज भी समानता का परिचय देती नजर आती है। प्राचीन भारत के साहित्य और इतिहास में अनेकों मानव जातियों का संगम हुआ है। प्राक, आर्य, भारतीय आय, यूनानी, शक, हुण और तुर्क आदि अनेक जातियों ने भारत को अपना घर बनाया। प्रत्येक जातियों ने सामाजिक व्यवस्था, शिल्पकला, वास्तुकला और साहित्य के विकास में यथासत्य अपना व्योम दान दिया। ये सभी समुदाय इस तरह भारतीय सम्भावना एवं संस्कृति के आत्मसात् कर लिया कि आज इसे मूल रूप में साथ-साथ भारतीय संस्कृति की विशेषता इसमें उत्तर-दक्षिण तथा पूर्व-पश्चिम के सांस्कृतिक उपादान रूप में समाहित हो गए हैं।

आर्य आतीय उपादान, उत्तर भारत के वैदिक और सांस्कृतिक मूलक, संस्कृति के अंग हैं, जो प्राक, आर्य जातीय उपादान दक्षिण के द्रविड़ व तमिल संस्कृति के इन सभी संस्कृति में उन शब्दों का भी आदान-प्रदान जो मौजूद स्थिति में भिन्न भाषा रूप संस्कृति के रूप में मौजूद है। इसी प्रकार पाली और संस्कृत में बहुत से शब्द जो गंगा के मैदानों में विकसित भावनाओं और समस्याओं के द्योतक हैं, लगभग 300 ई. पूर्व से 600 ई. पूर्व के संगम से प्रसिद्ध प्राचीनतम, तमिल ग्रन्थों से मिलते हैं। इसमें भारत के पूर्वांचल ने भी जहाँ प्राक, आर्य जातियाँ बसी हुई हैं, अपना योगदान दिया है। यहाँ के लोग मुण्डा या कोल भाषा बोलते हैं। यह सभी भी झारखण्ड, बिहार, पश्चिम बंग, ओडिशा, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ के आदिवासियों की मुख्य भाषा हैं। भाषा वैज्ञानिकों ने यह सिद्ध किया है कि आर्य भाषा में फाहा, नौका, सन्ती आदि सूचक शब्द मिलते हैं, जो मुण्डा भाषाओं से लिया है। ब्राह्मण संस्कृति, मुण्डा संस्कृति के साथ घुल-मिल गई। ऐसा माना जाता है कि वैदिक भाषा में जो ध्वन्यात्मक व शब्दात्मक परिवर्तन मिलते हैं उसकी व्याख्या मुण्डा प्रसंग के आधार पर जितनी की जाती है उतनी द्रविड़ प्रभाव के आधार पर नहीं।

Question number: 190 (9 of 9 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Prose or Drama

MCQ▾

Question

‘यथासत्य’ में कौनसा समास है?

Choices

Choice (4) Response

a.

अव्ययीभाव

b.

तत्पुरूष

c.

दव्न्दव्

d.

कर्मधारय

Passage

अन्धकार की गुहा सरीखी उन आँखों से डरता है मन

भरा दूर तक उनमें दारूण दैन्य दु: ख का नीरव रोदन।

वह स्वाधीन किसान रहा, अभिमान भरा आँखों में इसका

छोड़ उसे मँझधार आज संसार कगार सदृश वह खिसका।

लहराते वे खेत दृगों में हुआ बेदखल वह अब जिन से

हँसती भी उसके जीवन की हरियाली जिनके तृन-तृन से।

आँखों ही में घूमा करता वह उसकी आँखों का तारा

कारकुनों की लाठी से जो गया जवानी ही में मारा।

बिना दावादर्पन के घरनी स्वरग चली - आँखे आती भर

देख-रेख के बिना दुधमुँही बिटिया दो दिन बाद गई मर।

Question number: 191 (6 of 6 Based on Passage) Show Passage

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Question

किसान का बेटा कहाँ गया?

Choices

Choice (4) Response

a.

तारा बन गया

b.

देखरेख के बिना मर गया

c.

बिना दवा-दर्पन के स्वर्ग सिधारा

d.

कारकुनों की लाठियों से मारा गया

Passage

साहित्य को समाज का प्रतिबिम्ब माना गया है अर्थात् समाज का पूर्ण रूप साहित्य में प्रतिबिम्बित होता रहता है। अनादि काल से साहित्य अपने इसी धर्म का पूर्ण निर्वाह करता चला आ रहा है। वह समाज के विभिन्न रूपों का चित्रण कर एक तरफ तो हमारे सामने समाज का यथार्थ चित्र प्रस्तुत करता है और दूसरी ओर अपनी प्रखर मेधा और स्वस्थ कल्पना द्वारा समाज के विभिन्न पहलुओं का विवेचन करता हुआ यह भी बताता है कि मानव समाज की सुख समृद्धि, सुरक्षा और विकास के लिए कौनसा मार्ग उपादेय है। एक आलोचक के शब्दों में - ”कवि वास्तव में समाज की व्यवस्था, वातावरण, धर्म-कर्म, रीति-नीति तथा सामाजिक शिष्टाचार या लोक व्यवहार से ही अपने काव्य के उपकरण चुनता है और उनका प्रतिपादन अपने आदर्शों के अनुरूप करता है। साहित्यकार उसी समाज का प्रतिनिधित्व करता है, जिसमें वह जन्म लेता है। वह अपनी समस्याओं का सुलझाव, अपने आदर्श की स्थापना अपने समाज के आदर्शों के अनुरूप ही करता है। अत: यह कहना सर्वथा असम्भव और अविवेकपूर्ण है कि साहित्यकार समाज से पूर्णत: निरपेक्ष या तटस्थ रहकर साहित्य सृजन करता है। वाल्मीकि, तुलसी, सूर, भारतेन्दु, प्रेमचन्द आदि का साहित्य इस बात का सर्वाधिक सशक्त प्रमाण है कि साहित्यकार समाज से घनिष्ट रूप से सम्बद्ध रखता हुआ ही साहित्य सृजन करता है। समाज की अवहेलना करने वाला साहित्य क्षणजीवी होता है।“

मानव का कला या साहित्य सृजन के प्रति उन्मुख होना उसके इन्द्रिय बोध का परिणाम रहा है। रूप, रस, ग्रन्थ, स्पर्श आदि के इन्द्रियबोध मानव और पशु दोनों में ही विद्यमान हैं, परन्तु मानव में पशु की अपेक्षा अधिक मात्रा में। मानव में एक विशिष्ट गुण और विवेक है। विवेक द्वारा उसने सामाजिक जीवन का विकास और अपने इन्द्रियबोध का परिष्कार किया है। समाज व्यवस्था बदलने के साथ मनुष्य का इन्द्रियबोध विचार और भावों की अपेक्षा स्थायी रहता है। भाव और विचार दोनों ही साहित्य के मूलाधार है और इनका उद्गम और परिष्कार सामाजिक परिवेश में ही सम्भव होता है, समाज से कटकर निरपेक्ष रहने पर नहीं।

Question number: 192 (5 of 8 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Prose or Drama

MCQ▾

Question

कवि का आदर्श होता है

Choices

Choice (4) Response

a.

उसके समाज के आदर्श के अनुरूप

b.

उसके स्वयं के आदर्श के अनुरूप

c.

उसके परिवार के आदर्श के अनुरूप

d.

All of the above

Question number: 193 (6 of 8 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Prose or Drama

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Question

निम्नलिखित में से कौनसा अव्यय है

Choices

Choice (4) Response

a.

प्रति

b.

रूप

c.

समाज

d.

मानव

Question number: 194 (7 of 8 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Prose or Drama

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Question

साहित्य हमें क्या बताता है?

Choices

Choice (4) Response

a.

सामाजिक वर्चस्व करने के लिए क्या करना चाहिए

b.

समाज व्यवस्था को बदलते रहना चाहिए

c.

मानव समाज की सुख समृद्धि, सुरक्षा और विकास के लिए कौनसा मार्ग उपादेय है

d.

All of the above

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