Reading Comprehension (CTET (Central Teacher Eligibility Test) Paper-I Hindi): Questions 183 - 191 of 255

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Passage

प्रगतिवाद का संबंध जीवन और जगत के प्रति नये दृष्टिकोण से है। इस भौतिक जगत को सम्पूर्ण सत्य मानकर, उसमें रहने वाले मानव समुदाय के मंगल की कामना से प्रेरित होकर प्रगतिवादी साहित्य की रचना की गई है। जीवन के प्रति लौकिक दृष्टि इस साहित्य का आधार है और सामाजिक यथार्थ से उत्पन्न होता है, लेकिन उसे बदलने और बेहतर बनाने की कामना के साथ प्रगतिवादी कवि न तो इतिहास की उपेक्षा करता है, न वर्तमान का अनादर, न ही वह भविष्य के रंगीन सपने बुनता है। इतिहास को वैज्ञानिक दृष्टि से जाँचते-परखते हुए, वह वर्तमान मो समझने की कोशिश करताहै और उसी के आधार पर भविष्य के लिए अपना मार्ग चुनता है। यही कारण है कि प्रगतिवादी काव्य में ऐतिहासिक चेतना अनिवार्यत: विद्यमान रहती है। प्रगतिवादी कवि की दृर्ष्टि सामाजिक यथार्थ पर केन्द्रित रहती है, वह अपने परिवेश और प्रकृति के प्रति गहरे लगाव से प्रेरित होता है तथा जीवन के प्रति उसका दृष्टिकोण सकारात्मक होता है। मानव को वह सर्वोपरि मानता है।

प्रगतिवादी कवि के पास सामाजिक यथार्थ को देखने की दृष्टि होती है। एक वर्ग चेतना प्रधान दृष्टि। नागार्जुन यदि दुखरन झा जैसे प्राइमरी स्कूल के अल्पवेतन भोगी मास्टर का यथार्थ चित्रण करते हैं, जो सामाजिक विषमता के यथार्थ को ध्यान में रखते हुए इस सरल यथार्थ को कविता में व्यक्त करने के लिये यथार्थ रूपों की समझ जरूरी है। कवि का वास्तव बोध और वस्तुपरक निरीक्षण दोनों पर ध्यान जाना चाहिए।

प्रगतिशील चेतना के कवि की दृष्टि सामाजिक यथार्थ के अनेक रूपों की ओर जाती है। कवि सामाजिक विषमता को उजागर करता हुआ कभी अपना विक्षोभ व्यक्त करता है, तो कभी अपना सात्विक क्रोध। कभी वह अन्याय और अत्याचार के विरूद्ध सिंह गर्जना करता है, तो कभी शोषण और दमन के दृश्य देखकर अपना दु: ख व्यक्त करता है।

प्रगतिवादी चेतना के कवि को प्रकृति और परिवेश के प्रति कवि का लगाव भी ध्यान आकृष्ट करता है। प्रगतिवादी कवि प्रकृति में जिस जीवन सक्रियता का आभास पाता है, उसके लिए एक प्रकार का स्थानिक लगाव जरूरी है।

Question number: 183 (7 of 9 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Prose or Drama

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Question

कौनसा कथन असत्य है?

Choices

Choice (4) Response

a.

जीवन के प्रति अलौकिक दृष्टि प्रगतिवादी साहित्य का आधार है।

b.

प्रगतिवाद का संबंध जीवन और जगत के प्रति नये दृष्टिकोण से है।

c.

प्रगतिवादी कवि समाज का यथार्थ चित्रण करता है।

d.

प्रगतिवाद मानव को सर्वोपरि मानता है।

Question number: 184 (8 of 9 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Prose or Drama

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Question

‘दमन’ का तात्पर्य है

Choices

Choice (4) Response

a.

दबाया जाना

b.

दाब

c.

दमा की बीमारी

d.

दबाव

Passage

रवि जग में शोभा सरसाता, सोम सुधा बरसाता।

सब हैं लगे कर्म में, कोई निष्क्रिय दृष्टि न आता।

है उद्देश्य नितान्त तुच्छ तृण के भी लघु जीवन का।

उसी पूर्ति में वह करता है अन्त कर्ममय तन का।

तुम मनुष्य हो, अमित बुद्धि-बल विलसित जन्म तुम्हारा।

क्या उद्देश्य रहित हो जग में, तुमने कभी विचारा?

बुरा न मानों एक बार सोचो तुम अपने मन में

क्या कर्तव्य समाप्त कर लिया तुमने निज जीवन में?

जिस पर गिरकर उदर-दरी से तुमने जन्म लिया है

जिसका खाकर अन्न सुधासम नीर, समीर पिया है

वही स्नेह की मूर्ति दयामयि माता तुल्य मही है

उसके प्रति कर्तव्य तुम्हारा क्या कुछ शेष नहीं है?

Question number: 185 (1 of 6 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Poetry

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Question

कवि को निरन्तर कर्म करने की प्रेरणा कौन देता है?

Choices

Choice (4) Response

a.

रवि

b.

तृण

c.

चन्द्रमा

d.

प्रकृति

Question number: 186 (2 of 6 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Poetry

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Question

‘सोम’ का पर्यायवाची खोजिए

Choices

Choice (4) Response

a.

शराब

b.

शहद

c.

चन्द्रमा

d.

अमृत

Question number: 187 (3 of 6 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Poetry

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Question

यह वाक्य किस प्रकार का है उसके प्रति कर्तव्य तुम्हारा क्या कुछ शेष नहीं है?

Choices

Choice (4) Response

a.

प्रश्नवाचक

b.

विधानवाचक

c.

भाववाचक

d.

विस्मयवाचक

Question number: 188 (4 of 6 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Poetry

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Question

‘निष्क्रिय’ का विपरीतार्थक लिखिए

Choices

Choice (4) Response

a.

सक्रिय

b.

अक्रिय

c.

क्रियान्वयन

d.

क्रियान्वित

Question number: 189 (5 of 6 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Poetry

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Question

निष्क्रिय में प्रयुक्त उपसर्ग है

Choices

Choice (4) Response

a.

नि

b.

इय

c.

निति

d.

निस्

Question number: 190 (6 of 6 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Poetry

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Question

यह कविता क्या प्रेरणा देती है?

Choices

Choice (4) Response

a.

सोच-विचार

b.

निरन्तर गति

c.

निरन्तर कर्म

d.

देश-प्रेम

Passage

‘गोदान’ प्रेमचन्द जी की उन अमर कृतियों में से एक है, जिसमें ग्रामीण भारत की आत्मा का करूण चित्र साकार हो उठा है। इसी कारण कई मनीषी आलोचक इसे ग्रामीण भारतीय परिवेशगत समस्याओं का महाकाव्य मानते हैं तो कई विद्वान इसे ग्रामीण जीवन और कृषि संस्कृति का शोक गीत स्वीकारते हैं। कुछ विद्वान तो ऐसे भी है कि जो इन उपन्यास को ग्रामीण भारण की आधुनिक ‘गीता’ तक स्वीकार करते हैं जो कुछ भी हो, ‘गोदान’ वास्तव में मुंशी प्रेमचन्द का एक ऐसा उपन्यास है, जिसमें आचार-विचार, संस्कार और प्राकृतिक परिवेश, जो गहन करूणा से युक्त है, प्रतिबिम्बित हो उठाा है। डॉ. गोपाल राय का कहना है कि गोदान ग्राम जीवन और ग्राम संस्कृति को उसकी सम्पूर्णता में प्रस्तुत करने वाला अदव्तीय उपन्यास है, न केवल हिन्दी के वरन किसी भी भारतीय भाषा के किसी भी उपन्यास में ग्रामीण समाज का ऐसा व्यापक यथार्थ और सहानुभूतिपूर्ण चित्रण नहीं हुआ है। ग्रामीण जीवन और संस्कृति के अंकन की दृष्टि से इस उपन्यास का वही महत्व है जो आधुनिक युग में युग जीवन की अभिव्यक्ति की दृष्टि से महाकाव्यों का हुआ करता था। इस प्रकार डॉ. राय गोदान को आधुनिक युग का महाकाव्य ही नहीं स्वीकारते वरन् सर्वश्रेष्ठ महाकाव्य भी स्वीकारते है। उनके इस कथन का यही आशय है कि प्रेमचन्द जी ने ग्राम जीवन से संबंध सभी पक्षों का न केवल अत्यन्त विशदता से चित्रण किया है, वरन् उनकी गहराइयों में जाकर उनके सच्चे चित्र प्रस्तुत कर दिए हैं। प्रेमचन्द जी ने जिस ग्राम जीवन का चित्र गोदान में प्रस्तुत किया है, उसका संबंध आज ग्राम परिवेश से न होकर तत्कालीन ग्राम जीवन से है। ग्रामीण जीवन को वास्तविक आधार प्रदान करने के लिए प्रेमचन्द जी ने चित्र के अनुरूप ही कुछ ऐसे खांचे अथवा चित्रफलक निर्मित किए हैं जो चित्र को यथार्थ बनाने में सहयोगी सिद्ध हुए हैं। ग्रामीण किसानों के घर द्वार, खेत-खलिहान और प्राकृतिक दृश्यों का ऐसा वास्तविक चित्रण अत्यन्त दुर्लभ है।

Question number: 191 (7 of 9 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Prose or Drama

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Question

गोदान को ग्रामीण जीवन का महाकाव्य कहने का क्या तात्पर्य है?

Choices

Choice (4) Response

a.

गोदान में ग्रामीण जीवन के सभी पहलुओं का विस्तृत चित्रण हुआ है

b.

गोदान ग्रामीण जीवन के सभी काव्य ग्रन्थों में श्रेष्ठ है

c.

गोदान ग्रामीण जीवन का काव्य ग्रन्थ है

d.

None of the above

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