Reading Comprehension (CTET Paper-I Hindi): Questions 161 - 167 of 250

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Passage

आँसू ये भाग्य पसीजा, हे मित्र, कहाँ इस जग में।

नित यहाँ शक्ति के आगे, दीपक जलते मग-मग में।

कुछ तनिक ध्यान से सोचो, धरती किसकी हो पाई?

बोलो युग-युग तक किसने, किसकी विरूदावलि गाई?

मधुमास मधु रूचिकर है, पर पतझर भी आता है

जग रंगमंच का अभिनय, जो आता सो जाता है।

सचमुच वह ही जीवित है, जिसमें कुछ बल-विक्रम है

पल-पल घुड़दौड़ यहाँ है, बल-पोरूष का संगम है।

दुर्बल को सहज मिटाकर, चुपचाप समय खा जाता

वीरों के ही गीतों को, इतिहास सदा दोहराता।

फिर क्या विषाद, भय, चिन्ता जो होगा सब सह लेंगे

परिवर्तन की लहरों में, जैसे होगा बह लेंगे।

Question number: 161 (2 of 6 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Poetry

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Question

यह कविता क्या प्रेरणा देती है

Choices

Choice (4) Response

a.

वीर बनो

b.

गतिशील बनो

c.

करूणावान बनो

d.

चिन्तनशील बनो

Question number: 162 (3 of 6 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Poetry

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Question

‘विषाद’ का पर्यायवाची लिखिए।

Choices

Choice (4) Response

a.

निराशा

b.

पराजय

c.

दु: ख

d.

नीरवता

Question number: 163 (4 of 6 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Poetry

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Question

यहाँ लोग किसकी आराधना करते हैं?

Choices

Choice (4) Response

a.

समर्थ लोगों की

b.

करूणावान लोगों की

c.

दुर्बलों की

d.

दीन-दुखियों की

Question number: 164 (5 of 6 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Poetry

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Question

क्या आशय है ”आँसू से भाग्य पसीजा, हे मित्र, कहाँ इस जग में।“

Choices

Choice (4) Response

a.

रोने-धोने से कुछ नहीं होता

b.

रोने-धोने से लोग पसीज जाते हैं

c.

रोने-धोने से भाग नहीं बनता

d.

रोने-धोने से भाग्य भी रोता है

Question number: 165 (6 of 6 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Poetry

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Question

”पल-पल घुड़दौड़ यहाँ है“ का आशय है

Choices

Choice (4) Response

a.

हर पल बल-पौरूष की होड़ है

b.

यहाँ सदा नीचा दिखाने की होड़ है

c.

यहाँ हमेशा घोड़ों की दौड़ चलती है

d.

यहाँ हमेशा भागदौड़ मची रहती है

Passage

समाज में पाठशालाओं, स्कूलों अथवा शिक्षा की दूरी दुकानों की कोई कमी नहीं है। छोटे से छोटे बच्चे को माँ-बाप स्कूल भेजने जल्दी करते हैं। दो-ढाई साल के बच्चे को भी स्कूल में बिठाकर आ जाने का आग्रह भी हर घर में बना हुआ है।

इसके विपरीत हर घर की दूसरी सच्चाई यह भी है कि कोई भी माँ-बाप बालकों के बारे में, बालकों की सही शिक्षा के बारे में और साथ ही सच्चा और अच्छा माता-पिता अथवा अभिभावक होने का शिक्षण कहीं से भी प्राप्त नहीं करता। माता-पिता बनने से पहले किसी भी नौजवान जोड़े को यह नहीं सिखाया जाता है कि माँ-बाप बनने का अर्थ क्या है? इससे पहले किसी भी जोड़े को यह भी नहीं सिखाया जाता कि अच्छे और सच्चे दाम्पत्य की शुरूआत कैसे की जानी चाहिए? पति-पत्नी होने का अर्थ क्या है? यह भी कोई नहीं बताता। परिणाम साफ है कि जीवन शुरू होने से पहले ही घर टूटने-बिखरने लगते हैं। घर बसाने की शाला न आज तक कहीं खुली है और न खुलती दिखती है। समाज और सत्ता दोनों या तो इस संकट के प्रति सजग नहीं है या फिर इसे अनदेखा कर रहे हैं।

Question number: 166 (1 of 9 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Prose or Drama

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Question

हर घर में किस चीज का आग्रह बना हुआ है?

Choices

Choice (4) Response

a.

बच्चों को स्कूल न भेजने का

b.

बहुत छोटे बच्चे को स्कूल में पढ़ाने का

c.

बहुत छोटे बच्चे को दुकान भेजने का

d.

बहुत छोटे बच्चे को स्कूल में बिठाकर आने का

Question number: 167 (2 of 9 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Prose or Drama

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Question

माता-पिता को बच्चों की सही शिक्षा के बारे में जानना क्यों जरूरी है?

Choices

Choice (4) Response

a.

बच्चों को ज्ञानवान बनाया जा सके

b.

ताकि बच्चों को उच्च डिग्रियाँ प्राप्त करवाई जा सकें

c.

ताकि बच्चे स्वयं प्रवेश लेने योग्य बन सकें

d.

जिससे बेहतर समाज का निर्माण किया जा सके

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