Reading Comprehension (CTET Paper-I Hindi): Questions 8 - 15 of 250

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Passage

‘गोदान’ प्रेमचन्द जी की उन अमर कृतियों में से एक है, जिसमें ग्रामीण भारत की आत्मा का करूण चित्र साकार हो उठा है। इसी कारण कई मनीषी आलोचक इसे ग्रामीण भारतीय परिवेशगत समस्याओं का महाकाव्य मानते हैं तो कई विद्वान इसे ग्रामीण जीवन और कृषि संस्कृति का शोक गीत स्वीकारते हैं। कुछ विद्वान तो ऐसे भी है कि जो इन उपन्यास को ग्रामीण भारण की आधुनिक ‘गीता’ तक स्वीकार करते हैं जो कुछ भी हो, ‘गोदान’ वास्तव में मुंशी प्रेमचन्द का एक ऐसा उपन्यास है, जिसमें आचार-विचार, संस्कार और प्राकृतिक परिवेश, जो गहन करूणा से युक्त है, प्रतिबिम्बित हो उठाा है। डॉ. गोपाल राय का कहना है कि गोदान ग्राम जीवन और ग्राम संस्कृति को उसकी सम्पूर्णता में प्रस्तुत करने वाला अदव्तीय उपन्यास है, न केवल हिन्दी के वरन किसी भी भारतीय भाषा के किसी भी उपन्यास में ग्रामीण समाज का ऐसा व्यापक यथार्थ और सहानुभूतिपूर्ण चित्रण नहीं हुआ है। ग्रामीण जीवन और संस्कृति के अंकन की दृष्टि से इस उपन्यास का वही महत्व है जो आधुनिक युग में युग जीवन की अभिव्यक्ति की दृष्टि से महाकाव्यों का हुआ करता था। इस प्रकार डॉ. राय गोदान को आधुनिक युग का महाकाव्य ही नहीं स्वीकारते वरन् सर्वश्रेष्ठ महाकाव्य भी स्वीकारते है। उनके इस कथन का यही आशय है कि प्रेमचन्द जी ने ग्राम जीवन से संबंध सभी पक्षों का न केवल अत्यन्त विशदता से चित्रण किया है, वरन् उनकी गहराइयों में जाकर उनके सच्चे चित्र प्रस्तुत कर दिए हैं। प्रेमचन्द जी ने जिस ग्राम जीवन का चित्र गोदान में प्रस्तुत किया है, उसका संबंध आज ग्राम परिवेश से न होकर तत्कालीन ग्राम जीवन से है। ग्रामीण जीवन को वास्तविक आधार प्रदान करने के लिए प्रेमचन्द जी ने चित्र के अनुरूप ही कुछ ऐसे खांचे अथवा चित्रफलक निर्मित किए हैं जो चित्र को यथार्थ बनाने में सहयोगी सिद्ध हुए हैं। ग्रामीण किसानों के घर द्वार, खेत-खलिहान और प्राकृतिक दृश्यों का ऐसा वास्तविक चित्रण अत्यन्त दुर्लभ है।

Question number: 8 (2 of 8 Based on Passage) Show Passage

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Question

‘गोदान’ को निम्नलिखित में से क्या नहीं कहा गया है?

Choices

Choice (4) Response

a.

उपन्यास

b.

गीता

c.

महाकाव्य

d.

काव्य

Question number: 9 (3 of 8 Based on Passage) Show Passage

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Question

‘गोदान’ है

Choices

Choice (4) Response

a.

काव्यग्रन्थ

b.

उपन्यास

c.

कथाकृति

d.

महाकाव्य

Question number: 10 (4 of 8 Based on Passage) Show Passage

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Question

गोदान को ग्रामीण जीवन का महाकाव्य कहने का क्या तात्पर्य है?

Choices

Choice (4) Response

a.

गोदान में ग्रामीण जीवन के सभी पहलुओं का विस्तृत चित्रण हुआ है

b.

गोदान ग्रामीण जीवन का काव्य ग्रन्थ है

c.

गोदान ग्रामीण जीवन के सभी काव्य ग्रन्थों में श्रेष्ठ है

d.

All of the above

Question number: 11 (5 of 8 Based on Passage) Show Passage

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Question

‘विशदता’ से तात्पय है

Choices

Choice (4) Response

a.

विस्तृत रूप से

b.

विशालता सहित

c.

परिपूर्णता

d.

None of the above

Passage

1914 तक देश का औद्योगिक विकास बेहद धीमा रहा और साम्राज्यवादी शोषण अत्यन्त तीव्र हो गया। गाँवों की अर्थव्यवस्था पंगु हो गई। सबसे अधिक बुरा प्रभाव कारीगरों, हरिजनों और छोटे किसानों पर पड़ा। ग्रामीण जन साम्राज्य और उनके भारतीय एजेन्ट जमींदारों के दोहरे शोषण की चक्की में पिस रहे थे। ब्रिटिश काल में सूदखोर महाजनों काएक ऐसा वर्ग पैदा हुआ, जिनसे एक बार कर्ज लेने पर गाँव के किसान जीवन-भर गुलामी का पट्टा पहनने पर मजबूर हो जाते थे। उनके हिसाब के सूद का भुगतान करने में असमर्थ किसान महाजनों को खेत बेचने पर मजबूर होकर अपनी जमीन पर ही मजदूरी होता गया। इस प्रकार देश में एक और तो बड़े किसानों की संख्या बढ़ी, दूसरी ओर जमीन जोतने वाला किसान भूस्वामित्व के अधिकार से वंचित होकर खेतिहर मजदूर होने लगा। भुखमरी से बचने के लिए बड़ी संख्या में ग्रामीण बड़े पैमाने पर रोजी-रोटी की तलाश में शहरों की ओर भागने लगे, परन्तु इन असहाय लोगों का स्वागत करने के लिए वहाँ भी कठिनाइयाँ और समस्याएँ ही थी। प्रेमचन्द ‘गोदान’ की ओर भागने लगे, परन्तु इन असहाय लोगों का स्वागत करने के लिए वहाँ भी कठिनाइयाँ और समस्याएँ ही थी। प्रेमचन्द ‘गोदान’ में होरी और गोबर के माध्यम से इस ऐतिहासिक प्रक्रिया को विस्तार से हमारे सामने प्रस्तुत करते हैं। यह अकेले होरी की ट्रेजिडी नहीं है, पूरे छोटे किसानों के साथ साम्राज्यवादी-पूँजीवादी व्यवस्था के शोषण तंत्र का क्रूर मजाक है, जो दूसरे ढंग से आज भी जारी है। 20वीं शताब्दी के आरम्भ में ग्रामीण गरीबी का प्रेमचन्द जो यथार्थ चित्रण करते हैं, यह यूरोप में किसी व्यक्ति के लिए अकल्पनीय है - ”टूटे-फूटे झोंपडे, मिट्टी की दीवारें, घरों के सामने कूडे-करकट के ढेर, कीचड़ में लिपटी भैंसें, दुर्बल गायें, हड्डी निकले किसान, जवानी में ही जिन पर बुढ़ापा आ गया है।“

Question number: 12 (1 of 8 Based on Passage) Show Passage

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Question

प्रस्तुत गद्यांश में आए शब्द ‘पंगु’ का तात्पर्य क्या है?

Choices

Choice (4) Response

a.

बिगड़ना

b.

पागुर करना

c.

सुधरना

d.

अच्छा न होना

Question number: 13 (2 of 8 Based on Passage) Show Passage

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Question

‘बुढ़ापा’ शब्द है

Choices

Choice (4) Response

a.

जातिवाचक संज्ञा

b.

भाववाचक संज्ञा

c.

व्यक्तिवाचक संज्ञा

d.

द्रव्यवाचक संज्ञा

Question number: 14 (3 of 8 Based on Passage) Show Passage

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Question

1914 तक देश के औद्योगिक विकास धीमा रहने का मुख्य कारण क्या हो सकता है?

Choices

Choice (4) Response

a.

साम्राज्यवादी शोषण

b.

गाँव की पंगु अर्थव्यवस्था

c.

सूदखोर महाजन

d.

गरीब किसान

Question number: 15 (4 of 8 Based on Passage) Show Passage

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Question

गाँवों के लोगों का शोषण कौन कर रहा था?

Choices

Choice (4) Response

a.

साम्राज्य

b.

साम्राज्य के एजेण्ट

c.

सूदखोर महाजन

d.

All a. , b. and c. are correct

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