Reading Comprehension (CTET Paper-I Hindi): Questions 149 - 158 of 250

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Passage

जो पूर्व में हमकों अशिक्षित या असभ्य बता रहे

वे लोग या तो अज्ञ हैं या पक्षपात जता रहे।

यदि हम अशिक्षित थे, कहें तो सभ्य वे कैसे हुए?

वे आप ऐसे भी नहीं थे, आज हम जैसे हुए।

ज्यों-ज्यों हमारी प्रचुर प्राचीनता की खोज बढ़ती जाएगी

त्यों-त्यों हमारी उच्चता पर आप चढ़ती जाएगी।

जिस ओर देखेंगे हमारे चिन्ह दर्शक पाएँगे

हमको गाय बतलाएँगे, जब, जो जहाँ तक जाएँगे।

कल जो हमारी सभ्यता पर थे हँसे अज्ञान से

वे आज लज्जित हो रहे हैं अधिक अनुसंधान से।

गिरते हुए भी दूसरों को हम चढ़ाते ही रहे

घटते हुए भी दूसरों को हम बढ़ाते ही रहे

Question number: 149 (2 of 6 Based on Passage) Show Passage

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Question

‘गिरते हुए भी दूसरों को हम चढ़ाते ही रहे’ का आशय है

Choices

Choice (4) Response

a.

हमने विदेशियों को सहायता दी

b.

हमने आक्रमणकारियों को बढ़ावा दिया

c.

हमने स्वयं दीन होते हुए भी दूसरों को उन्नत किया

d.

हमने पतित होकर भी दूसरों का उद्धार किया

Question number: 150 (3 of 6 Based on Passage) Show Passage

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Question

कवि कहना चाहता है कि

Choices

Choice (4) Response

a.

भारतीय संस्कृति प्राचीन है

b.

भारत का अतीत महान था

c.

भारतीय संस्कृति महान है

d.

भारत का वर्तमान महान है

Question number: 151 (4 of 6 Based on Passage) Show Passage

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Question

‘अज्ञ’ का तात्पर्य है

Choices

Choice (4) Response

a.

पापी

b.

पाप

c.

अज्ञानी

d.

विद्वान

Question number: 152 (5 of 6 Based on Passage) Show Passage

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Question

इस कविता का वक्ता कौन है?

Choices

Choice (4) Response

a.

भारत

b.

देश

c.

स्वतंत्रता सेनानी

d.

भारतीय सेना

Question number: 153 (6 of 6 Based on Passage) Show Passage

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Question

जो शिक्षित न हो, उसे कहते हैं

Choices

Choice (4) Response

a.

शिक्षक

b.

अशिक्षक

c.

अशक्षति

d.

अशिक्षित

Passage

आम की थी डाल हरियल, मैं मगनगम झूमता था

कई पल्लव और भी थे, उन्हें जीर भर चूमता था।

देख मेरा हरा यौवन मुस्कुराती नित्य डाली

गीत से मन जीत लेते कभी कोयल, कभी माली

बाग बस्ती में अचानक हुआ मेरा रंग पीला

खिलखिलाना बन्द, बजना बन्द, यह तन पड़ा ढीला।

हवा ने ऐसा हिलाया डाल का भी साथ छूटा

रह गया परिवार पीछे, एक पल्लव हाय! टूटा।।

जब हवा की गोद में कुछ दूर बगिया से बहा

देवता हो तुम पवन मेरी सुनो मैंने कहा।

जन्मभूमि बाग मेरी मूल माँ के चरण चूमूँ

खाद बनकर करूँ सेवा फिर किसी डाली पै झूमूँ

पवन की करूणा-कृपा से बाग में उड़ लौट आया

वृक्ष के चरणों में पल्लव खाद बनकर मुस्कुराया।

Question number: 154 (1 of 6 Based on Passage) Show Passage

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Question

बिछड़े पत्ते की चाह क्या थी?

Choices

Choice (4) Response

a.

अपनी डाल पर फिर से लहराने की

b.

खाद बन जाने की

c.

किसी प्रकार वृक्ष का साथ पाने की

d.

समर्पण की

Question number: 155 (2 of 6 Based on Passage) Show Passage

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Question

‘मैं’ किसका प्रतीक है?

Choices

Choice (4) Response

a.

भारत

b.

व्यक्ति

c.

पत्ता

d.

फूल

Question number: 156 (3 of 6 Based on Passage) Show Passage

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Question

‘यौवन’ का विलोम लिखिए

Choices

Choice (4) Response

a.

बचपन

b.

बुढ़ापा

c.

प्रौढ़ता

d.

बाल्यकाल

Question number: 157 (4 of 6 Based on Passage) Show Passage

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Question

‘आम की हरियल डाली’ किसकी प्रतीक है?

Choices

Choice (4) Response

a.

हरे-भरे वातावरण की

b.

प्रकृति की

c.

वनस्पति की

d.

भरे-पूरे खुशहाल जीवन की

Question number: 158 (5 of 6 Based on Passage) Show Passage

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Question

‘रह गया परिवार पीछे’ में परिवार किसे कहा गया है?

Choices

Choice (4) Response

a.

पत्ते

b.

डालियाँ

c.

पक्षी

d.

पक्षी, पेड़, डाली आदि

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