CTET Paper-I Hindi: Questions 399 - 405 of 497

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Question number: 399

» Pedagogy of Language Development » Language Skills

MCQ▾

Question

निमनलिखित में से कौनसा मौन पठन का महत्व नहीं है?

Choices

Choice (4) Response

a.

मौन वाचन में नेत्र तथा मस्तिष्क अक्रिय रहते हैं

b.

मौन वाचन में थकान कम होती है क्योंकि इसमें वाग्यंत्रों पर जोर नहीं पड़ता

c.

मौन वचान अवकाश का सदुपयोग करता है

d.

मौन वाचन के समय पाठक एकाग्रचित्त होकर ध्यान केन्द्रित कर पढ़ता है

Question number: 400

» Pedagogy of Language Development » Language Skills

MCQ▾

Question

सस्वर वाचन में निम्नलिखि में से किस पर सबसे कम ध्यान दिया जाना चाहिए?

Choices

Choice (4) Response

a.

शुद्ध एवं स्पष्टता

b.

भावानुकूल वाचन

c.

स्थानीय बोलियों का प्रभाव

d.

विराम चिन्हों का समुचित प्रयोग

Question number: 401

» Pedagogy of Language Development » Principles of Language Teaching

MCQ▾

Question

भाषा शिक्षण की विधियाँ मुख्यत: ……… पर निर्भर करनी चाहिए।

Choices

Choice (4) Response

a.

परीक्षा पद्धति

b.

लक्ष्य भाषा

c.

समय अवधि

d.

बच्चों का स्तर, आयु और प्रकरण

Question number: 402

» Pedagogy of Language Development » Teaching- Learning Materials

MCQ▾

Question

भाषा शिक्षण में पाठ्य पुस्तक

Choices

Choice (4) Response

a.

अनावश्यक है

b.

एकमात्र संसाधन है

c.

साध्य है

d.

साधन है

Question number: 403

» Pedagogy of Language Development » Evaluating Language Comprehension & Proficiency

MCQ▾

Question

बच्चों की भाषा के आंकलन का सर्वाधिक प्रभावी तरीका है

Choices

Choice (4) Response

a.

प्रश्नों के उत्तर देना

b.

प्रश्न पूछना और पढ़ी गई सामग्री पर प्रतिक्रिया व्यक्त करना

c.

श्रुतलेख

d.

लिखित परीक्षा

Question number: 404

» Pedagogy of Language Development » Principles of Language Teaching

MCQ▾

Question

किस विद्या के शिक्षण के समय आप मौन पठन को महत्व देंगे?

Choices

Choice (4) Response

a.

संवादात्मक कहानी

b.

कविता

c.

एकांकी

d.

निबन्ध

Passage

प्रगतिवाद का संबंध जीवन और जगत के प्रति नये दृष्टिकोण से है। इस भौतिक जगत को सम्पूर्ण सत्य मानकर, उसमें रहने वाले मानव समुदाय के मंगल की कामना से प्रेरित होकर प्रगतिवादी साहित्य की रचना की गई है। जीवन के प्रति लौकिक दृष्टि इस साहित्य का आधार है और सामाजिक यथार्थ से उत्पन्न होता है, लेकिन उसे बदलने और बेहतर बनाने की कामना के साथ प्रगतिवादी कवि न तो इतिहास की उपेक्षा करता है, न वर्तमान का अनादर, न ही वह भविष्य के रंगीन सपने बुनता है। इतिहास को वैज्ञानिक दृष्टि से जाँचते-परखते हुए, वह वर्तमान मो समझने की कोशिश करताहै और उसी के आधार पर भविष्य के लिए अपना मार्ग चुनता है। यही कारण है कि प्रगतिवादी काव्य में ऐतिहासिक चेतना अनिवार्यत: विद्यमान रहती है। प्रगतिवादी कवि की दृर्ष्टि सामाजिक यथार्थ पर केन्द्रित रहती है, वह अपने परिवेश और प्रकृति के प्रति गहरे लगाव से प्रेरित होता है तथा जीवन के प्रति उसका दृष्टिकोण सकारात्मक होता है। मानव को वह सर्वोपरि मानता है।

प्रगतिवादी कवि के पास सामाजिक यथार्थ को देखने की दृष्टि होती है। एक वर्ग चेतना प्रधान दृष्टि। नागार्जुन यदि दुखरन झा जैसे प्राइमरी स्कूल के अल्पवेतन भोगी मास्टर का यथार्थ चित्रण करते हैं, जो सामाजिक विषमता के यथार्थ को ध्यान में रखते हुए इस सरल यथार्थ को कविता में व्यक्त करने के लिये यथार्थ रूपों की समझ जरूरी है। कवि का वास्तव बोध और वस्तुपरक निरीक्षण दोनों पर ध्यान जाना चाहिए।

प्रगतिशील चेतना के कवि की दृष्टि सामाजिक यथार्थ के अनेक रूपों की ओर जाती है। कवि सामाजिक विषमता को उजागर करता हुआ कभी अपना विक्षोभ व्यक्त करता है, तो कभी अपना सात्विक क्रोध। कभी वह अन्याय और अत्याचार के विरूद्ध सिंह गर्जना करता है, तो कभी शोषण और दमन के दृश्य देखकर अपना दु: ख व्यक्त करता है।

प्रगतिवादी चेतना के कवि को प्रकृति और परिवेश के प्रति कवि का लगाव भी ध्यान आकृष्ट करता है। प्रगतिवादी कवि प्रकृति में जिस जीवन सक्रियता का आभास पाता है, उसके लिए एक प्रकार का स्थानिक लगाव जरूरी है।

Question number: 405 (1 of 8 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Prose or Drama

MCQ▾

Question

प्रस्तुत गद्यांश का सर्वाधिक उपयुक्त शीर्षक निम्नलिखित में से क्या होगा?

Choices

Choice (4) Response

a.

प्रगति

b.

प्रगतिवाद

c.

प्रगति के प्रयास

d.

मानव एवं प्रगति

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