CTET (Central Teacher Eligibility Test) Paper-I Hindi: Questions 281 - 285 of 497

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Question number: 281

» Pedagogy of Language Development » Teaching in Classroom

MCQ▾

Question

सुहेल एक साल पहले असोम से पंजाब आया है। वह हिन्दी भाषा का प्रयोग करते समय त्रुटियाँ करता है। एक शिक्षक के रूप में आप किस कथन को सही मानेंगे?

Choices

Choice (4) Response

a.

उसे रोज एक घण्टा हिन्दी भाषा के शब्द बोलने का अभ्यास करना चाहिए

b.

सुहेल को भाषा प्रयोग के अधिकाधिक अवसर व प्रोत्साहन देना चाहिए

c.

सुहेल को बार-बार उसकी त्रुटियों के बारे में बताया चाहिए

d.

सुहेल की मातृभाषा का प्रभाव लक्ष्यभाषा पर नहीं पड़ने देना चाहिए

Question number: 282

» Pedagogy of Language Development » Evaluating Language Comprehension & Proficiency

MCQ▾

Question

आंकलन

Choices

Choice (4) Response

a.

केवल यह बताता है कि बच्चे ने क्या नहीं सीखा

b.

भाषा सीखने-सिखाने की प्रक्रिया का अभिन्न अंग है

c.

पाठ समाप्ति पर ही किया जाता है

d.

मूलत: शिक्षक केन्द्रित ही होता है

Question number: 283

» Pedagogy of Language Development » Remedial Teaching

MCQ▾

Question

निम्नलिखित में से कौनसा दत्त कार्य का विशिष्ट उद्देश्य नहीं है?

Choices

Choice (4) Response

a.

विद्यार्थियों की अभिप्रेरणा देना तथा उन्हें सीखने की क्रियाओं की ओर उन्मुख करना

b.

विद्यार्थियों को उलझाए रखना ताकि वे शिक्षक को परेशान न करें

c.

निश्चित सीखने के अभ्यास तथा क्रियाओं को देना

d.

अध्ययन तथा दूसरी सीखने की क्रियाओं के लिए निर्देश देना

Question number: 284

» Pedagogy of Language Development » Evaluating Language Comprehension & Proficiency

MCQ▾

Question

. ………. और परीक्षाओं को ………. होना चाहिए एवं अधिगम को मापने के वैध तरीकों पर आधारित होना चाहिए।

Choices

Choice (4) Response

a.

आंकलन, विश्वसनीय

b.

अधिगम, मनोरंजक

c.

आंकलन, संतुलित

d.

मूल्यांकन, परिष्कृत

Passage

बौद्ध शिक्षण पद्धति का आरम्भ स्वयं बुद्ध ने सरल तथा जनमानस की भाषा में तीवन के तत्वों के उपदेश तथा जगह-जगह चर्चा करके की। लोगों को शिक्षित करने के लिए महात्मा बुद्ध ने व्याख्यान, प्रश्नोत्तर प्रासंगिक उपमा, दृष्टान्त एवं कथा को माध्यम बनाया। बुद्ध के बाद से बौद्ध शिक्षा पद्धति भी एक निश्चित स्वरूप, संगठन के साथ हिन्दू शिक्षा पद्धति से अलग स्वतंत्र शिक्षा प; ति के रूप में विकसित हुई। प्रारम्भ में हिन्दू तथा बौद्ध शिक्षा पद्धति के मूल में कोई विशेष अन्तर नहीं था किन्तु बाद में आकर दोनों शिक्षा प्रणालियों के आदर्श एवं पद्धति में विशेष रूप से उस पाठ्यक्रम में जो विशेष रूप से आम उपासक की बजाय बौद्ध भिक्षु-भिक्षुणियों के लिए था, बहुत कम समानता रह गई थी।

बौद्ध धर्म में शिक्षा प्रारम्भ संस्कार ब्राह्मणों के उपनयन संस्कार की भाँति होता था। बौद्ध संघ में सम्मिलित होने के लिए दो संस्कार आवश्यक थे प्रथम था ‘पब्बज्जा’ तथा दूसरा ‘उपसम्पदा’। पब्बज्जा से उपासकत्व का प्रारम्भ होता था। उपनयन की भाँति इसे भी आध्यात्मिक जन्म कहा गया है। यह 8 वर्ष से अधिक आयु के किसी भी व्यक्ति को दी जा सकती थी। संरक्षक की अनुज्ञा इसके लिए आवश्यक थी। व्यक्ति को तीन प्रकार की शरण की शपथ एवं दस धर्मादेश दिए जाते थे। ये शरण बुद्ध धर्म एवं संघ की होती थी।

दस धर्मादेशों में निम्न की मनाही थी

1. पारिवारिक जीवन

2. ऐसी वस्तु ग्रहण करना जो दी ना हो

3. अशुद्ध आचरण

4. झूठ बोलना

5. मादक द्रव्यों का सेवन

6. असमय भोजन

7. नृत्य गायन

8. पुष्प माला, ईत्र गहने आदि का प्रयोग

9. उच्च आसन का प्रयोग

10. सोना एवं चांदी की प्राप्ति।

Question number: 285 (1 of 8 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Prose or Drama

MCQ▾

Question

‘बौद्ध धर्म में शिक्षा प्रारम्भ संस्कार ब्राह्मणों के उपनयन संस्कार की भाँति होता था।’ - इस वाक्य में रेखांकित पद में कौनसा कारक है?

Choices

Choice (4) Response

a.

करण कारक

b.

सम्प्रदान कारक

c.

अधिकरण कारक

d.

अपादान कारक

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