CTET Paper-I Hindi: Questions 233 - 238 of 497

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Question number: 233

» Pedagogy of Language Development » Language Skills

MCQ▾

Question

पढ़ना कौशल में ………… सर्वाधिक महत्वपूर्ण है।

Choices

Choice (4) Response
a.

उच्चारण की शुद्धता

b.

अर्थ ग्रहण करना

c.

लिपि चिन्हों की जानकारी

d.

द्रुत गति से पढ़ना

Question number: 234

» Pedagogy of Language Development » Learning and Acquisition

MCQ▾

Question

भाषा सीखने के लिए कौनसा कारक सर्वाधिक महत्वपूर्ण है?

Choices

Choice (4) Response
a.

समृद्धि भाषिक वातावरण

b.

भाषा के व्याकरणिक नियम

c.

पाठ पर आधारित प्रश्नो त्तर

d.

भाषा की पाठ्य-पुस्तक

Question number: 235

» Pedagogy of Language Development » Teaching in Classroom

MCQ▾

Question

एक बहुसांस्कृतिक कक्षा में आप एक भाषा शिक्षक के रूप में किस बात को अधिक महत्व देंगे?

Choices

Choice (4) Response
a.

बच्चों को भाषा प्रयोग के अधिक से अधिक अवसर देना

b.

पाठ्य पुस्तक के प्रत्येक पाठ को भली-भाँति समझाना

c.

बच्चों को व्याकरण सिखाना

d.

स्वयं शुद्ध भाषा प्रयोग

Question number: 236

» Pedagogy of Language Development » Principles of Language Teaching

MCQ▾

Question

विद्यालय आने से पूर्व बच्चे

Choices

Choice (4) Response
a.

भाषा के व्याकरण की सचेत समझ रखते हैं

b.

भाषा का बिल्कुल भी ज्ञान नहीं रखते

c.

अपनी भाषा में समझने-समझाने की कुशलता से लैस होते हैं

d.

सभी भाषाओं में पूर्ण दक्षता रखते हैं

Question number: 237

» Pedagogy of Language Development » Learning and Acquisition

MCQ▾

Question

भाषा अर्जन और भाषा अधिगम के संदर्भ में कौनसा कथन सही नहीं है?

Choices

Choice (4) Response
a.

रोजगार प्राप्त करने के लिए ही भाषा सीखी जाती है।

b.

भाषा अर्जन के लिए समृद्ध भाषायी परिवेश की आवश्यकता होती है।

c.

भाषा अधिगम में सम्प्रेषण कुशलता पर भी बल रहता है।

d.

भाषा अर्जन सहज और स्वाभाविक होता है, जबकि भाषा अधिगम प्रयासपूर्ण होता है।

Passage

भारत प्राचीन काल से ही विविध धर्मों का प्रांगण रहा है। प्राचीन भारत में हिन्दू, जैन, बौद्ध, धर्मों का उदय हुआ है परन्तु इन सभी धर्मों में सांस्कृतिक पारस्परिक समिश्र इस प्रकार हुआ कि लोग भले ही विभिन्न भाषाएँ बोलते हैं, विभिन्न धर्मों को मानते हैं फिर भी भिन्न सामाजिक रीतियों पर समूचे देश में सभी की एक समान जीवन पद्धति है। हमारे देश में विविधताओं के बावजूद भीतर से गहरी एकता, हिमालय से कन्याकुमारी पूर्व में ब्रह्मपुत्र की घाटी से पश्चिम में सिन्धु पार तक झलकती है। देश में भाषात्मक एवं सांस्कृतिक एकता स्थापित करने के लिए निरन्तर प्रयास होते हैं। ईसा पूर्व तीसरी सदी में प्राकृत देश भर की सम्पर्क भाषा (लिंगवाँ का) का काम करती थी। सारे देश के प्रमुख कार्यों में अशोक के शिलालेख प्राकृत व ब्रह्मी लिपि में लिखे गये थे। बाद में वह स्थान संस्कृत ने ले लिया और देश के कोने-कोने में राजभाषा के रूप में प्रचलित रही। यह सिलसिला ईसा की चौथी शताब्दी में आकर मजबूत हुआ। यद्यपि इसके बाद देश छोटे-छोटे राज्यों में बंट गया। फिर भी राजकीय दस्तावेज की भाषा संस्कृत ही रहीं। प्राचीन भारत के लोगों की लिपि का ज्ञान 2500 ई. पूर्व तक ही था जिसको हड़प्पा व मोहनजोदड़ों के सभ्यता में सिक्कों पर अंकित पाते हैं। यद्यपि अभी तक इस लिपि को पढ़ना सम्भव नहीं हो पाया है। हस्तलिपियों के मामले में उपलब्ध हस्तलिपियाँ ईसा की चौथी सदी से पहले की नहीं है। भारत में हस्तलिपियाँ भोज पत्र एवं ताम्र पत्रों पर लिखी मिलती है। परन्तु मध्य एशिया में जहाँ भारत से प्राकृत भाषा फैल गई थी। ये हस्तलिपियाँ मेष चर्म, कष्ठि पत्रों में लिखी गई हैं, संस्कृत में पुराणों, हस्तलिपियाँ लिखित दक्षिण-भारत तथा नेपाल से प्राप्त हुई हैं।

Question number: 238 (1 of 9 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Prose or Drama

MCQ▾

Question

‘राजभाषा’ में कौनसा समास है?

Choices

Choice (4) Response
a.

अव्ययीभाव

b.

तत्पुरूष

c.

दव्न्दव्

d.

कर्मधारय

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