CTET (Central Teacher Eligibility Test) Paper-I Hindi: Questions 137 - 142 of 497

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Question number: 137

» Pedagogy of Language Development » Language Skills

MCQ▾

Question

‘डायरी लेखन’ का मुख्य उद्देश्य है

Choices

Choice (4) Response

a.

वर्तनी का ज्ञान

b.

शब्द भण्डार में वृद्धि

c.

वाक्य संरचना का ज्ञान

d.

अपने भावों, विचारों की ईमानदारी और आत्मविश्वास से पूर्ण भाषिक अभिव्यक्ति को प्रोत्साहित करना

Question number: 138

» Pedagogy of Language Development » Remedial Teaching

MCQ▾

Question

कलिका हिन्दी भाषा में बोलते समय कई बार अटकती है। आप क्या करेंगे?

Choices

Choice (4) Response

a.

उसे प्रवाहपूर्ण अभिव्यक्ति के नमूने सुनाएँगे और कहेंगे कि उसे भी हू-ब-हू ऐसे ही बोलना है

b.

कक्षा में बाकी बच्चों में कहेंगे कि कलिका के समक्ष प्रवाहपूर्ण अभिव्यक्ति के नमूने प्रस्तुत करें

c.

कक्षा में केवल कलिका को ही बार-बार बोलने के लिए कहेंगे

d.

धैर्य रखते हुए उसे सहज अभिव्यक्ति के लिए प्रोत्साहित करेंगे

Question number: 139

» Pedagogy of Language Development » Teaching- Learning Materials

MCQ▾

Question

भाषा हमारे परिवेश में बिखरी मिलती है। यह कथन किस पर लागू नहीं होता?

Choices

Choice (4) Response

a.

भाषा प्रयोगशाला

b.

अखबार

c.

विज्ञान

d.

साइनबोर्ड

Passage

साहित्य को समाज का प्रतिबिम्ब माना गया है अर्थात् समाज का पूर्ण रूप साहित्य में प्रतिबिम्बित होता रहता है। अनादि काल से साहित्य अपने इसी धर्म का पूर्ण निर्वाह करता चला आ रहा है। वह समाज के विभिन्न रूपों का चित्रण कर एक तरफ तो हमारे सामने समाज का यथार्थ चित्र प्रस्तुत करता है और दूसरी ओर अपनी प्रखर मेधा और स्वस्थ कल्पना द्वारा समाज के विभिन्न पहलुओं का विवेचन करता हुआ यह भी बताता है कि मानव समाज की सुख समृद्धि, सुरक्षा और विकास के लिए कौनसा मार्ग उपादेय है। एक आलोचक के शब्दों में - ”कवि वास्तव में समाज की व्यवस्था, वातावरण, धर्म-कर्म, रीति-नीति तथा सामाजिक शिष्टाचार या लोक व्यवहार से ही अपने काव्य के उपकरण चुनता है और उनका प्रतिपादन अपने आदर्शों के अनुरूप करता है। साहित्यकार उसी समाज का प्रतिनिधित्व करता है, जिसमें वह जन्म लेता है। वह अपनी समस्याओं का सुलझाव, अपने आदर्श की स्थापना अपने समाज के आदर्शों के अनुरूप ही करता है। अत: यह कहना सर्वथा असम्भव और अविवेकपूर्ण है कि साहित्यकार समाज से पूर्णत: निरपेक्ष या तटस्थ रहकर साहित्य सृजन करता है। वाल्मीकि, तुलसी, सूर, भारतेन्दु, प्रेमचन्द आदि का साहित्य इस बात का सर्वाधिक सशक्त प्रमाण है कि साहित्यकार समाज से घनिष्ट रूप से सम्बद्ध रखता हुआ ही साहित्य सृजन करता है। समाज की अवहेलना करने वाला साहित्य क्षणजीवी होता है।“

मानव का कला या साहित्य सृजन के प्रति उन्मुख होना उसके इन्द्रिय बोध का परिणाम रहा है। रूप, रस, ग्रन्थ, स्पर्श आदि के इन्द्रियबोध मानव और पशु दोनों में ही विद्यमान हैं, परन्तु मानव में पशु की अपेक्षा अधिक मात्रा में। मानव में एक विशिष्ट गुण और विवेक है। विवेक द्वारा उसने सामाजिक जीवन का विकास और अपने इन्द्रियबोध का परिष्कार किया है। समाज व्यवस्था बदलने के साथ मनुष्य का इन्द्रियबोध विचार और भावों की अपेक्षा स्थायी रहता है। भाव और विचार दोनों ही साहित्य के मूलाधार है और इनका उद्गम और परिष्कार सामाजिक परिवेश में ही सम्भव होता है, समाज से कटकर निरपेक्ष रहने पर नहीं।

Question number: 140 (1 of 8 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Prose or Drama

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Question

‘उपादेय’ का तात्पर्य हाता है

Choices

Choice (4) Response

a.

ग्रहण करने योग्य

b.

श्रेष्ठ

c.

उत्तम

d.

All a. , b. and c. are correct

Question number: 141 (2 of 8 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Prose or Drama

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Question

कवि अपने काव्य के उपकरण कहाँ से चुनता है?

Choices

Choice (4) Response

a.

धर्म-कर्म

b.

रीति-नीति

c.

लोक व्यवहार

d.

All a. , b. and c. are correct

Question number: 142 (3 of 8 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Prose or Drama

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Question

साहित्यकार किस समाज का प्रतिनिधित्व करता है?

Choices

Choice (4) Response

a.

जिस समाज में वह जन्म लेता है

b.

जिस समाज के बारे में वह लिखना चाहता है

c.

जिस समाज की वह अवहेलना करता है

d.

All of the above

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