क्षितिज(Kshitij-Textbook)-Textbook Questions (CBSE (Central Board of Secondary Education- Board Exam) Class-10 Hindi): Questions 72 - 83 of 156

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Passage

पद

(1)

ऊधौ, तुम हौ अति बड़भागी।

अपरस रहत सनेह तगा तैं, नाहिन मन अनुरागी।

पुरइनि पात रहत जल भीतर, ता रस देह न दागी।

ज्यौं जल माहं तेल की गागरि, बूंद न ताकौं लागी।

प्रीति-नदी मैं पाउं न बोरयौ, दृष्टि न रूप परागी।

’सूरदास’ अबला हम भोरी, गुर चाँटी ज्यौं पागी।।

(2)

मन की मन ही मांझ रही।

कहिए जाइ कौ पै ऊधौ, नाहीं परत कही।

अवधि अधार आस आवन की, तन मन बिथा सही।

अब इन जोग सँदेसनि सुनि-सुनि, बिरहिनि बिरह दही।

चाहति हुतीं गुहारि जितहिं तैं, उत तैं धार बही।

’सूरदास’ अब धीर धरहिं क्यौं, मरजादा न लही।।

(3)

हमारैं हरि हारिल की लकरी।

मन क्रम बचन नंद-नंदन उर, यह दृढ़ करि पकरी।

जागत सोवत स्वप्न दिवस-निसि, कान्ह-कान्ह जक री।

सुनत जोग लागत है ऐसौ, ज्यौं करुई ककरी।

सु तौ ब्याधि हमकौं लै आए, देखी सुनी न करी।

यह तौ ’सूर’ तिनहिं लै, सौंपौ, जिनके मन चकरी।।

(4)

हरि हैं राजनीति पढ़ि आए।

समुझी बात कहत मधुकर के, समाचार सब पाए।

इक अति चतुर हुते पहिलैं ही, अब गुरु ग्रंथ पढ़ाए।

बढ़ी बुद्धि जानी जो उनकी, जोग-सँदेस पठाए।

ऊधौं भले लोग आगे के, पर हित डोलत धाए।

अब अपनै मन फेर पाइहैं, चलत जु हुते चुराए।

ते क्यौं अनीति करैं आपुन, जे और अनीति छुड़ाए।

राज धरम तौ यहै ’सूर’, जो प्रजा न जाहिं सताए।।

Question number: 72 (12 of 12 Based on Passage) Show Passage

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’मरजादा न लही’ के माध्यम से कौन-सी मर्यादा न रहने की बात की जा रही है?

Passage

सवैया

पांयनि नूपुर मंजु बजैं, कटि किंकिन कै धुनि की मधुराई।

सांवरे अंग लसै पट पीत, हिये हुलसै बनमाल सुहाई।

माथे किरीट बड़े दृग चंचल, मंद हँसी मुखचंद जुन्हाई।

जै जग-मंदिर-दीपक सुदंर, श्रीब्रजदूलह ’देव’ सहाई।।

कवित्त

डार द्रुम पलना बिछौना नव पल्लव के,

सुमन झिंगूला सोहै तन छबि भारी दै।

पवन झूलावै, केकी-कीर बरतावैं ’देव’

कोकिल हलावै-हलसावै कर तारी दै।।

पूरित पराग सों उतारो करै राई नोन,

कंजकली नायिका लतान सिर सारी दै।

मदन महीप जू को बालक बसंत ताहि,

प्रातहि जगावत गुलाब चटकारी दै।।

कवित्त

फटिक सिलानि सौं सुधार्‌यों सुधा मंदिर,

उदधि दधि को सो अधिकाइ उमगे अमंद।

बाहर ते भीतर लौं भीति न दिखैए ’देव’

दूध को सो फेन फैल्यों आंगन फरसबंद।

तारा सी तरुनि तामें ठाढ़ी झिलमिली होति,

मोतिन की ज्योति मिल्यो मल्लिका को मकरंद।

आरसी से अंबर में आभा सी उजारी लगै,

प्यारी राधिका को प्रतिबिंब सो लगत चंद।।

Question number: 73 (1 of 12 Based on Passage) Show Passage

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निम्नलिखित पक्तिंयों का काव्य -सौंदर्य स्पष्ट कीजिए-

Question number: 74 (2 of 12 Based on Passage) Show Passage

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’प्रातहि जगावत गुलाब चटकारी दै’-इस पंक्ति का भाव स्पष्ट कीजिए।

Question number: 75 (3 of 12 Based on Passage) Show Passage

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आप अपने घर की छत से पूर्णिमा की रात देखिए तथा उनके सौंदर्य का वर्णन अपने शब्दों में कीजिए।

Question number: 76 (4 of 12 Based on Passage) Show Passage

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’प्यारी राधिका को प्रतिबिंब सो लगत चंद’- इस पंक्ति का भाव स्पष्ट करते हुए बताएँ कि इसमें कौन-सा अलंकार है?

Question number: 77 (5 of 12 Based on Passage) Show Passage

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चाँदनी रात की सुदंरता को कवि ने किन-किन रूपों में देखा है?

Question number: 78 (6 of 12 Based on Passage) Show Passage

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भारतीय ऋतु चक्र में कितनी ऋतुएँ मानी गई हैं, वे कौन-कौन सी हैं?

Question number: 79 (7 of 12 Based on Passage) Show Passage

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कवित्त किसे कहते है?

Question number: 80 (8 of 12 Based on Passage) Show Passage

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दूसरे कवित्त के आधार पर स्पष्ट करें कि ऋतुराज बसंत के बाल-रूप का वर्णन परंपरागत बसंत वर्णन से किस प्रकार भिन्न है।

Question number: 81 (9 of 12 Based on Passage) Show Passage

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पहले सवैये में से उन पक्तिंयों को छाँटकर लिखिए, जिनमें अनुप्रास और रूपक अलंकार का प्रयोग हुआ है?

Question number: 82 (10 of 12 Based on Passage) Show Passage

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पठित कविताओं के आधार पर कवि देव की काव्यगत विशेषताएँ बताइए।

Question number: 83 (11 of 12 Based on Passage) Show Passage

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’ग्लोबल वार्मिंग’ के कारण ऋतुओं में क्या परिवर्तन आ रहे हैं? इस समस्या से निपटने के लिए आपकी क्या भूमिका हो सकती हैं?

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