क्षितिज(Kshitij-Textbook)-Textbook Questions (CBSE Class-10 Hindi): Questions 152 - 156 of 156

Get 1 year subscription: Access detailed explanations (illustrated with images and videos) to 2295 questions. Access all new questions we will add tracking exam-pattern and syllabus changes. View Sample Explanation or View Features.

Rs. 1650.00 or

Passage

आत्मकथ्य

(1)

मधुप गुन-गुना कर कह जाता कौन कहानी यह अपनी,

मुरझाकर गिर रहीं पत्तियाँ देखो कितनी आज घनी।

इस गंभीर अनंत-नीलिमा में असंख्य जीवन-इतिहास

यह लो, करते ही रहते हैं अपना व्यंग्य-मिलन उपहास

तब भी कहते हो-कह डालूँ दूर्बलता अपनी बीती।

तुम सुनकर सुख पाओगे, देखोगे-यह गागर रीती।

किंतु कहीं ऐसा न हो कि तुम ही खाली करने वाले

अपने को समझो, मेरा रस ले अपनी भरने वाले।

(2)

यह विडंबना! अरी सरलते तेरी हँसी उड़ाऊँ मैं।

भूले अपनी या प्रवंचना औरों की दिखलाऊँ मैं।

उज्ज्वल गाथा कैसे गाऊँ, मधुर चाँदनी रातों की।

और खिल-खिला कर हँसते होने वाली उन बातों की।

(3)

मिला कहाँ वह सुख जिसका मैं स्वप्न देखकर जाग गया।

आलिंगन में आते-आते मुसक्या कर जो भाग गया।

जिसके अरूण-कपोलों की मतवाली सुदंर छाया में।

अनुरागिनी उषा लेती थी निज सुहाग मधुमाया में।

(4)

उसकी स्मृति पाथेय बनी है थके पथिक की पंथा की।

सीवन को उधेड़ कर देखोगे क्यों मेरी कंथा की?

छोटे से जीवन की कैसे बड़ी कथाएँ आज कहूँ?

क्या यह अच्छा नहीं कि औरों की सुनता मैं मौन रहूँ?

सुनकर क्या तुम भला करोगे मेरी भोली आत्म-कथा?

अभी समय भी नहीं, थकी सोई है मेरी मौन व्यथा।

Question number: 152 (6 of 10 Based on Passage) Show Passage

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Textbook Questions » जयशंकर प्रसाद आत्मकथ्य

Short Answer Question▾

Write in Short

भाव स्पष्ट कीजिए-

(क) मिला कहाँ वह सुख जिसका मैं स्वप्न देखकर जाग गया।

आलिंगन में आते-आते मुसक्या कर जो भाग गया।

Question number: 153 (7 of 10 Based on Passage) Show Passage

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Textbook Questions » जयशंकर प्रसाद आत्मकथ्य

Short Answer Question▾

Write in Short

स्मृति को ’पाथेय’ बनाने से कवि का क्या आशय है?

Question number: 154 (8 of 10 Based on Passage) Show Passage

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Textbook Questions » जयशंकर प्रसाद आत्मकथ्य

Short Answer Question▾

Write in Short

बनारसीदास जैन कृत हिंदी की कोनसे नम्बर की आत्मकथा मानी जाती है व इसकी रचना किस सन्‌ में हुई और यह गध्यात्मक है या पद्यात्मक है?

Question number: 155 (9 of 10 Based on Passage) Show Passage

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Textbook Questions » जयशंकर प्रसाद आत्मकथ्य

Short Answer Question▾

Write in Short

इस कविता के माध्यम से प्रसाद जी के व्यक्तित्व की जो झलक मिलती है, उसे अपने शब्दों में लिखिए?

Question number: 156 (10 of 10 Based on Passage) Show Passage

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Textbook Questions » जयशंकर प्रसाद आत्मकथ्य

Short Answer Question▾

Write in Short

’आत्मकथ’ कविता की काव्यभाषा की विशेषताएँ उदाहरण सहित लिखिए।

f Page
Sign In