क्षितिज(Kshitij-Textbook)-Additional Questions (CBSE Class-10 Hindi): Questions 967 - 977 of 1621

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Question number: 967

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » नागार्जुन यह दंतुरित मुसकान, फसल

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उपर्युक्त बातों के अलावा नागार्जुन जी ने अपने दव्ारा रचित रचनाओं में ओर किसकों महत्व दिया है?

Question number: 968

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » जयशंकर प्रसाद आत्मकथ्य

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Describe in Detail

जयशंकर प्रसाद जी मृत्यु किस सन्‌ में व कितने वर्ष की आयु में हुई?

Explanation

उनकी मृत्यु 15 नवम्बर, 1937 को 48 वर्ष की अल्पायु में ही यह अमर कथाकार इस दुनिया से विदा हो गया।

क्योंकि-हर व्यक्ति के जीवन व मृत्यु की डोर भगवान के हाथों में होती है। अंतर इतना होता है कि कोई देर से मरता है कोई जल्दी मरता हैं।

”छायावाद… (193 more words) …

Question number: 969

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Describe in Detail

जयशंकर प्रसाद जी दव्ारा रचित उपन्यास कितने व उनके नाम क्या-क्या है?

Explanation

उनके दव्ारा रचित उपन्यास तीन है व उनके नाम निम्नलिखत है- कंकाल, तितली, इरावती (अधूरा)

क्योंकि- कवि ने एक से अधिक अपनी कृतियाँ लिखी है जैसे उपन्यास, नाटक आदि।

प्रमुख रचनाएँ-हिंदी साहित्यकार के रूप में प्रसाद जी की प्रतिभा बहुमुखी है। उन्होंने कुल 27 कृतियों की रचना की हैं। उनकी… (44 more words) …

Question number: 970

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Describe in Detail

जयशंकर प्रसाद जी की भाषा निरन्तर किसकें के अनुसार परिवतर्तित होती रही है?

Explanation

प्रसाद जी की भाषा निरन्तर विषयों के अनुसार परिवतर्तित होती रही है।

क्योंकि-किस विषय में कौनसी भाषा अच्छी लगेगी इसकी जानकारी कवि को थी।

भाषा शैली- जयशंकर प्रसाद की रचनाएँ मौलिक व तीव्र अनुभूतियों से युक्त हैं। उनकी आरम्भिक कविताएँ ब्र्रज भाषा में थीं और उसके बाद उन्होंने खड़ी बोली… (76 more words) …

Question number: 971

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Describe in Detail

भाई व माता जी का स्वर्गवास हो जाने के बाद जयशंकर प्रसाद जी ने किस तरह से काम किया?

Explanation

ऐसी स्थिति में उन्होंने साहस से काम कर संघर्ष पूर्वक सामना किया।

क्योंकि-हर इंसान को मृत्यु की सत्यता स्वीकार कर आगे हिम्मतकर धैर्यपूर्वक काम करना होता हैं।

”छायावाद के श्रेष्ठ कवि जयशंकर प्रसाद एक ऐसे विलक्षण एवं विराट व्यक्तित्व को लेकर अवतरित हुए थे, जिसमें विभिन्न प्रकार की साहित्यिक प्रतिभाएँ… (171 more words) …

Question number: 972

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Describe in Detail

जयशंकर प्रसाद जी दव्ारा रचित उन्होंने अपने काव्यों में किस शैली का प्रयोग सर्वाधिक किया है?

Explanation

जयशंकर प्रसाद जी दव्ारा रचित उन्होंने अपने काव्यों में प्रतीकात्मक एवं लाक्षणिक शैली का प्रयोग सर्वाधिक किया है।

क्योंकि-ताकि उनका काव्य अनोखे रूप में पाठक को दिखे।

भाषा शैली- जयशंकर प्रसाद की रचनाएँ मौलिक व तीव्र अनुभूतियों से युक्त हैं। उनकी आरम्भिक कविताएँ ब्र्रज भाषा में थीं और उसके बाद… (79 more words) …

Question number: 973

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Describe in Detail

जयशंकर प्रसाद जी को हम कवि के रूप में क्या कह सकते हैं?

Explanation

प्रसाद जी को हम कवि के रूप में युग प्रवर्तक कह सकते हैं।

क्योंकि-उन्होंने हिंदी साहित्य को इस युग में नई पहचान दी है।

काव्यगत विशेषताएँ- जयशंकर प्रसाद जी नाटक और काव्य क्षेत्र में मौलिकता लाने वाले प्रतिभा-सम्पन्न साहित्यकार हैं। उन्हे छायावादी काव्य धारा का प्रवर्तक माना जाता है। उन्होंने… (52 more words) …

Passage

(2)

विकल विकल, उन्मन थे उन्मन

विश्व के निदाघ के सकल जन,

आए अज्ञात दिशा से अनंत के घन!

तप्त धरा, जल से फिर

शीतल कर दो-

बादल, गरजो!

Question number: 974 (1 of 10 Based on Passage) Show Passage

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » सूर्यकांत त्रिपाठी ’निराला’ उत्साह, अट नहीं रही है

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Describe in Detail

निराला जी दव्ारा रचित प्रस्तुत पद्यांश में कवि के अनुसार संसार के सभी लोग केसे हो रहे थे।

Explanation

संसार के सभी लोग गर्मी के कारण बैचेन और अनमने हो रहे थे।

क्योंकि-कवि के अनुसार उस संसार में अत्यधिक गर्मी है।

प्रसंग- निराला जी दव्ारा रचित प्रस्तुत पद में यहाँ कवि ने बादल को नई कल्पना, सोच और नये अंकुर (नवजात शिशु) अर्थात नया जीवन के लिए देने के… (186 more words) …

Question number: 975 (2 of 10 Based on Passage) Show Passage

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » सूर्यकांत त्रिपाठी ’निराला’ उत्साह, अट नहीं रही है

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Describe in Detail

निराला जी दव्ारा रचित प्रस्तुत पद्यांश में कवि के अनुसार किसके द्वारा ही समाज में चेतना का भाव आने का भरोसा बना है?

Explanation

साहित्य के माध्यम से ही समाज में जागृत का भाव आने का भरोसा बना है।

क्योंकि-किसी न किसी के माध्यम से समाज को जाग्रत करना जरूरी होता है।

प्रसंग- निराला जी दव्ारा रचित प्रस्तुत पद में यहाँ कवि ने बादल को नई कल्पना, सोच और नये अंकुर (नवजात शिशु) अर्थात… (192 more words) …

Question number: 976 (3 of 10 Based on Passage) Show Passage

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निराला जी दव्ारा रचित प्रस्तुत पद्यांश में कवि के अनुसार संसार के संपूर्ण मानव-समुदाय में बदलाव के कारण कैसा वातावरण बना हुआ था?

Explanation

मनुष्य-समुदाय अर्थात प्राणियों में परिवर्तन के परिणामस्वरूप बैचनी और अनमनी परिस्थितियों का माहौल बना हुआ था।

क्योंकि-गर्मी के कारण पृथ्वी का हर इंसान बैचेन है।

प्रसंग- निराला जी दव्ारा रचित प्रस्तुत पद में यहाँ कवि ने बादल को नई कल्पना, सोच और नये अंकुर (नवजात शिशु) अर्थात नया जीवन के… (189 more words) …

Question number: 977 (4 of 10 Based on Passage) Show Passage

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निराला जी दव्ारा रचित प्रस्तुत पद्यांश में कवि ने बादल को क्या बताया है?

Explanation

निराला जी दव्ारा रचित प्रस्तुत पद में यहाँ कवि ने बादल को नई कल्पना, सोच और नये अंकुर (नवजात शिशु) अर्थात नया जीवन के लिए देने के लिए और विनाश, विप्लव और चमक उत्पन्न को संभव करने वाला बताया है।

क्योंकि-बादल लोगों के मन एक जोश भर देता है।

प्रसंग-… (213 more words) …

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