क्षितिज(Kshitij-Textbook)-Additional Questions (CBSE (Central Board of Secondary Education- Board Exam) Class-10 Hindi): Questions 918 - 930 of 1621

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Passage

(2)

लखन कहा हसि हमरे जाना। सुनहु देव सब धनुष समाना।।

का छति लाभु जून धनु तोरें। देखा राम नयन के भोरें।।

छुअत टूट रघुपतिहु न दोसू। मुनि बिनु काज करिअ कत रोसू।।

बोले चितै परसु की ओरा। रे सठ सुनेहि सुभाउ न मोरा।

बालकु बोलि बधौं नहि तोही। केवल मुनि जड़ जानहि मोही।।

बाल ब्रह्यचारी अति कोही। बिस्वबिदित क्षत्रियकुल द्रोही।।

भुजबल भूमि भूप बिनू कीन्ही। बिपुल बार महिदेवन्ह दीन्ही।।

सहसबाहुभुज छेदनिहारा। परसु बिलोकु महीपकुमारा।।

मातु पितहि जनि सोचबस करसि महीसकिसोर।

गर्भन्ह के अर्भक दलन परसु मोर अति घोर।।

Question number: 918 (3 of 4 Based on Passage) Show Passage

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » तुलसीदास राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद

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Describe in Detail

तुलसीदास जी दव्ारा रचित प्रस्तुत प्रद्यांश में परशुराम ने राम जी से क्या पूँछते है?

Explanation

प्रस्तुत प्रद्यांश में परशुराम जी ने राम जी से शिव का धनुष तोड़ने वाले के विषय में पूछते हैं।

क्योंकि- तुलसीदास जी दव्ारा रचित उपरोक्त संवाद में परशुराम जानना चाहते है यह धनुष किसने तोड़ा।

प्रसंग- पूर्ववत अर्थात जो पहले वाले संवाद में तुलसीदास जी ने धुनष तोड़े जाने के

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Question number: 919 (4 of 4 Based on Passage) Show Passage

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » तुलसीदास राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद

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Describe in Detail

तुलसीदास जी दव्ारा रचित उपरोक्त प्रद्यांश का भाव-सौंदर्य क्या हैं?

Explanation

तुलसीदास दव्ारा रचित प्रस्तुत संवाद के भाव सौदर्य में कवि ने राम और परशुराम दोनों के प्रताप अर्थात दोनों की वीरता को बड़ी ही सुंदर ढंग से प्रस्तुत किया है। परशुराम के यश को व्यक्त किया गया है कि किस तरह पूरे विश्व में परशुराम जी विख्यात हैं।

क्योंकि- तुलसीदास

… (288 more words) …

Question number: 920

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » मंगलेश डबराल संगतकार

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डबराल जी दव्ारा रचित उन्होंने अपनी नई कविताओं मेें कौनसी पहचान बनाई है?

Question number: 921

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » सूरदास पद

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सूरदास जी क्या थें?

Question number: 922

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » तुलसीदास राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद

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अब तक तुलसीदास दव्ारा रचित उनकी कितनी रचानाएँ प्राप्त हुई हैं?

Question number: 923

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » गिरिजाकुमार माथुर छाया मत छूना

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माथुर जी दव्ारा रचित उन्होंने अपनी रचनाओं में क्या अभिव्यक्ति प्रदान की है?

Question number: 924

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » गिरिजाकुमार माथुर छाया मत छूना

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शिक्षा समाप्त करने के बाद गिरिजा जी ने किस क्षेत्र में कार्य करना आरंभ किया?

Question number: 925

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » देव सवैया, कवित्त

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देव दव्ारा रचित रचनाओं में उन्होंने शब्दों का चयन कैसे किया है?

Question number: 926

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » देव सवैया, कवित्त

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देव किस रस के कवि थे?

Question number: 927

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » देव सवैया, कवित्त

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देव ने अपने दव्ारा रचित काव्यों में श्रृंगार रस के कौनसे पक्ष का वर्णन किया है?

Question number: 928

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » तुलसीदास राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद

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तुलसीदास जी दव्ारा रचित ’रामचरितमानस’ जैसे महाकाव्य की रचना कौनसे वर्ष में की?

Question number: 929

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » देव सवैया, कवित्त

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देव को आश्रयदाताओं में से कौनसे आश्रयदाता से सबसे अधिक संतोष व सम्मान मिला?

Question number: 930

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देव किन लोगों के मध्य अपना काव्य-जीवन व्यतीत किया?

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