क्षितिज(Kshitij-Textbook)-Additional Questions (CBSE Class-10 Hindi): Questions 889 - 899 of 1621

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Passage

(2)

तारसप्तक में जब बैठने लगता है उसका गला

प्रेरणा साथ छोड़ती हुई उत्साह अस्त होता हुआ

आवाज़ से राख जैसा कुछ गिरता हुआ

तभी मुख्य गायक को ढाँढस बंधाता

कहीं से चला आता है संगतकार का स्वर

कभी-कभी वह यों ही देता है उसका साथ

यह बताने के लिए कि वह अकेला नहीं है

और यह कि फिर से गाया जा सकता है

गाया जा चुका राग

और उसकी आवाज़ में जो हिचक साफ़ सुनाई देती है

या अपने स्वर को ऊँचा न उठाने की जो कोशिश है

उसे विफलता नहीं

उसकी मनुष्यता समझा जाना चाहिए।

Question number: 889 (1 of 8 Based on Passage) Show Passage

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कवि मंगलेश डबराल द्वारा रचित प्रस्तुत प्रसंग की व्याख्या में संगतकार की आवाज़ में स्पष्ट रूप से क्या पता चल रहा है?

Question number: 890 (2 of 8 Based on Passage) Show Passage

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कवि मंगलेश डबराल द्वारा रचित प्रस्तुत प्रसंग की व्याख्या में मुख्य गायक को सांत्वना देने के लिए संगतकार का स्वर कौनसी दिशा से आता है?

Question number: 891 (3 of 8 Based on Passage) Show Passage

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कवि मंगलेश डबराल द्वारा रचित प्रस्तुत प्रसंग की व्याख्या में संगतकार की मानवीय भावना कैसी है?

Question number: 892 (4 of 8 Based on Passage) Show Passage

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कवि मंगलेश डबराल द्वारा रचित प्रस्तुत प्रसंग में संगतकार किस प्रकार से मुख्य गायक को सफल बना देते हैं?

Question number: 893 (5 of 8 Based on Passage) Show Passage

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प्रस्तुत प्रसंग के शिल्प-सौंदर्य कौन-कौन से है?

Question number: 894 (6 of 8 Based on Passage) Show Passage

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कवि मंगलेश डबराल द्वारा रचित प्रस्तुत प्रसंग की व्याख्या में संगतकार ने किस काम का प्रयास नहीं किया है?

Question number: 895 (7 of 8 Based on Passage) Show Passage

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कवि मंगलेश डबराल द्वारा रचित प्रस्तुत प्रसंग के भाव-सौंदर्य क्या हैं?

Question number: 896 (8 of 8 Based on Passage) Show Passage

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कवि मंगलेश डबराल द्वारा रचित प्रस्तुत प्रसंग की व्याख्या में मुख्य गायक का साथ संगतकार कब देता है?

Question number: 897

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ऋतुराज जी दव्ारा रचित कविताओं का केंद्रीय भाव किन मुद्दों पर आधारित रहा है?

Question number: 898

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मंगलेश डबराल जी का जन्म कहाँ व किस सन्‌ में हुआ?

Passage

कवित्त

डार द्रुम पलना बिछौना नव पल्लव के,

सुमन झिंगूला सोहै तन छबि भारी दै।

पवन झूलावै, केकी-कीर बरतावैं ’देव’

कोकिल हलावै-हलसावै कर तारी दै।।

पूरित पराग सों उतारो करै राई नोन,

कंजकली नायिका लतान सिर सारी दै।

मदन महीप जू को बालक बसंत ताहि,

प्रातहि जगावत गुलाब चटकारी दै।।

Question number: 899 (1 of 4 Based on Passage) Show Passage

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देव दव्ारा रचित प्रस्तुत पद्यांश का शिल्प-सौंदर्य क्या है?

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