क्षितिज(Kshitij-Textbook)-Additional Questions (CBSE Class-10 Hindi): Questions 869 - 880 of 1621

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Question number: 869

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » ऋतुराज कन्यादान

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ऋतुराज जी दव्ारा रचित उन्होंने अपनी रचनाओं में किन रस को अनेकानेक रसों में विशेष महत्व दिया है?

Question number: 870

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » मंगलेश डबराल संगतकार

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मंगलेंश डबराल ने कविता लेखन के साथ-साथ ओर किन क्षेत्र में अनेक लेख लिखें हैं?

Question number: 871

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » सूरदास पद

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सूरदास जी ने अपनी रचनाओं में किनकी लीलाओं का बड़ा मनोहारी एवं सजीव वर्णन किया हैं?

Question number: 872

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » देव सवैया, कवित्त

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श्रृंगार रस के कौनसे पक्ष में देव की रचनाओं को विशेष सफलता मिली है?

Question number: 873

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » ऋतुराज कन्यादान

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सेवानिवृत्ति के बाद अब कवि ऋतुराज जी ने कहाँ अपना निवास बना रखा है?

Question number: 874

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » तुलसीदास राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद

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संपूर्ण हिंदी साहित्य में महाकवि गोस्वामी तुलसीदास का कौनसा स्थान है।

Question number: 875

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » देव सवैया, कवित्त

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कवि देव की मृत्यु किस सन्‌ में हुई?

Question number: 876

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » देव सवैया, कवित्त

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देव एक प्रतिभावान कवि होने के साथ-साथ उनमे ओर कौनसा गुण था?

Passage

सवैया

पांयनि नूपुर मंजु बजैं, कटि किंकिन कै धुनि की मधुराई।

सांवरे अंग लसै पट पीत, हिये हुलसै बनमाल सुहाई।

माथे किरीट बड़े दृग चंचल, मंद हँसी मुखचंद जुन्हाई।

जै जग-मंदिर-दीपक सुदंर, श्रीब्रजदूलह ’देव’ सहाई।।

कवित्त

डार द्रुम पलना बिछौना नव पल्लव के,

सुमन झिंगूला सोहै तन छबि भारी दै।

पवन झूलावै, केकी-कीर बरतावैं ’देव’

कोकिल हलावै-हलसावै कर तारी दै।।

पूरित पराग सों उतारो करै राई नोन,

कंजकली नायिका लतान सिर सारी दै।

मदन महीप जू को बालक बसंत ताहि,

प्रातहि जगावत गुलाब चटकारी दै।।

कवित्त

फटिक सिलानि सौं सुधार्‌यों सुधा मंदिर,

उदधि दधि को सो अधिकाइ उमगे अमंद।

बाहर ते भीतर लौं भीति न दिखैए ’देव’

दूध को सो फेन फैल्यों आंगन फरसबंद।

तारा सी तरुनि तामें ठाढ़ी झिलमिली होति,

मोतिन की ज्योति मिल्यो मल्लिका को मकरंद।

आरसी से अंबर में आभा सी उजारी लगै,

प्यारी राधिका को प्रतिबिंब सो लगत चंद।।

Question number: 877 (1 of 1 Based on Passage) Show Passage

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » देव सवैया, कवित्त

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कवि ने ’श्री ब्रजदूलह’ किसके लिए प्रयुक्त किया है और उन्हें संसार रूपी मंदिर का दीपक क्यों कहा है?

Passage

सवैया

पांयनि नूपुर मंजु बजैं, कटि किंकिन कै धुनि की मधुराई।

सांवरे अंग लसै पट पीत, हिये हुलसै बनमाल सुहाई।

माथे किरीट बड़े दृग चंचल, मंद हँसी मुखचंद जुन्हाई।

जै जग-मंदिर-दीपक सुदंर, श्रीब्रजदूलह ’देव’ सहाई।।

Question number: 878 (1 of 9 Based on Passage) Show Passage

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » देव सवैया, कवित्त

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देव जी दव्ारा रचित उपर्युक्त प्रसंग का भाव सौंदर्य क्या है?

Question number: 879 (2 of 9 Based on Passage) Show Passage

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » देव सवैया, कवित्त

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देव जी दव्ारा रचित उपर्युक्त प्रसंग के शिल्प सौंदर्य क्या है?

Question number: 880 (3 of 9 Based on Passage) Show Passage

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » देव सवैया, कवित्त

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देव कवि द्वारा रचित प्रस्तुत पद्यांश में कृष्ण के साँवले शरीर पर पीले वस्त्र कैसे लग रहे है?

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