क्षितिज(Kshitij-Textbook)-Additional Questions (CBSE Class-10 Hindi): Questions 827 - 838 of 1621

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Passage

(2)

लड़की अभी सयानी नहीं थी

अभी इतनी भोली सरल थी

कि उसे सुख का आभास तो होता था

लेकिन दुख बांचना नहीं आता था

पाठिका थी वह धुंधले प्रकाश की

कुछ तुकों और कुछ लयबद्ध पंक्तियों की

Question number: 827 (7 of 9 Based on Passage) Show Passage

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » ऋतुराज कन्यादान

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कवि ऋतुराज द्वारा रचित प्रस्तुत प्रसंग की व्याख्या में उसे थोड़ा बहुत किस बात का ज्ञान था?

Question number: 828 (8 of 9 Based on Passage) Show Passage

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » ऋतुराज कन्यादान

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कवि ऋतुराज द्वारा रचित प्रस्तुत प्रसंग के भाव-सौंदर्य क्या हैं?

Question number: 829 (9 of 9 Based on Passage) Show Passage

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » ऋतुराज कन्यादान

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कवि ऋतुराज द्वारा रचित प्रस्तुत प्रसंग के शिल्प-सौंदर्य क्या है?

Question number: 830

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » ऋतुराज कन्यादान

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कवि ऋतुराज जी ने कितने साल तक अंग्रेजी साहित्य के अध्यापन का कार्य किया?

Question number: 831

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » तुलसीदास राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद

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तुलसीदास जी ने अपने काव्यों में किसका प्रयोग किया है?

Question number: 832

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » मंगलेश डबराल संगतकार

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डबराल जी ने उसके बाद कुछ समय तक कहाँ पर संपादन का कार्य किया?

Question number: 833

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » मंगलेश डबराल संगतकार

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कवि मंगलेंश डबराल दव्ारा रचित उन्होंने अपनी रचनाओं मेें ओर किस भाषा को अपनाया है?

Question number: 834

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » तुलसीदास राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद

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तुलसीदास जी अपनी रचनाओं मेें प्रकृति-चित्रण के अतिरिक्त ओर क्या किया है?

Question number: 835

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » सूरदास पद

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हिन्दी साहित्य के अनेकानेक भक्त कवियों में किसका स्थान सर्वोपरी हैं?

Passage

पद

(1)

ऊधौ, तुम हौ अति बड़भागी।

अपरस रहत सनेह तगा तैं, नाहिन मन अनुरागी।

पुरइनि पात रहत जल भीतर, ता रस देह न दागी।

ज्यौं जल माहं तेल की गागरि, बूंद न ताकौं लागी।

प्रीति-नदी मैं पाउं न बोरयौ, दृष्टि न रूप परागी।

’सूरदास’ अबला हम भोरी, गुर चाँटी ज्यौं पागी।।

Question number: 836 (1 of 4 Based on Passage) Show Passage

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » सूरदास पद

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सूरदास दव्ारा रचित उपर्युक्त पद में ’उद्धव संदेश’ नामक खण्ड में से उपखण्ड किससे अवतरित हैं?

Explanation

सूरदास दव्ारा रचित उपर्युक्त पद में ’उद्धव संदेश’ नामक खण्ड में से उपखण्ड ’भ्रमरगीत’ नामक उपखण्ड से अवतरित हैं।

क्योंकि- जब कोई भक्त कवि अपने पदों के खंड करके वर्णन करता है तो उस खंड का नाम अवश्य रखता हैं।

प्रसंग- प्रस्तुत पद कवि सूरदास द्वारा रचित ’सूरसागर’ में ’उद्धव… (407 more words) …

Question number: 837 (2 of 4 Based on Passage) Show Passage

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » सूरदास पद

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Describe in Detail

सूरदास जी के दव्ारा रचित प्रस्तुत पद के शिल्प-सौंदर्य कौन-कौन से हैं?

Explanation

उपर्युक्त पद के अनुसार सूरदास जी के दव्ारा रचित शिल्प-सौंदर्य में कवि ने विभिन्न प्रकार के अलंकार का प्रयोग कर अपने शिल्प-सौंदर्य में एक जान डाल दी है इसके अलावा भाषा, गायक, संगीत व भाव का सुंदर समावेश कर उपरोक्त शिल्प-सौंदर्य को ओर अधिक सुंदर बना दिया है।

क्योंकि-ताकि कवि… (429 more words) …

Question number: 838 (3 of 4 Based on Passage) Show Passage

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » सूरदास पद

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Describe in Detail

सूरदास दव्ारा रचित उपर्युक्त पद के सूरसागर में से कौनसा खण्ड हैं?

Explanation

सूरदास दव्ारा रचित उपर्युक्त पद के सूरसागर में से ’उद्धव संदेश’ नामक खण्ड हैं।

क्योंकि-जब कोई भक्त कवि अपने पद लिखते है तो उसमें वे अलग-अलग खंड बनातें है ताकि किसी को पढ़ने में दिकक्त न हो।

प्रसंग- प्रस्तुत पद कवि सूरदास द्वारा रचित ’सूरसागर’ में ’उद्धव संदेश’ खण्ड के… (404 more words) …

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