क्षितिज(Kshitij-Textbook)-Additional Questions (CBSE (Central Board of Secondary Education- Board Exam) Class-10 Hindi): Questions 772 - 782 of 1621

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Passage

5

तुम्ह तौ कालु हाँक जनु लावा। बार बार मोहि लागि बोलावा।

सुनत लखन के बचन कठोरा। परसु सुधारि धरेउ कर घोरा।।

अब जनि देइ दोसु मोहि लोगू। कटुबादी बालक बधजोगू।।

बाल बिलोकि बहुत मैं बाँचा। अब येहु मरनिहार भा साँचा।।

कौसिक कहा छमिअ अपराधू। बाल दोष गुन गनहिं न साधू।।

खर कुठार मैं अकरुन कोही। आगे अपराधी गुरुद्रोही।।

उतर देत छोड़ौं बिनु मारे। केवल कौसिक सील तुम्हारे।।

न त येहि काटि कुठार कठोरे। गुरहि उरिन होतेउँ श्रम थोरे।।

गाधिसु नु कह हृदय हसि मुनिहि हरियरे सूझ।

अयमय खाँड़ न ऊखमय अजहुँ न बूझ अबूझ।।

Question number: 772 (6 of 8 Based on Passage) Show Passage

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » तुलसीदास राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद

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तुलसीदास जी दव्ारा रचित उपरोक्त प्रसंग की व्याख्या में लक्ष्मण ने परशुराम जी से क्या कहा?

Explanation

उपरोक्त प्रसंग की व्याख्या में लक्ष्मण ने परशुराम जी से कहा आप तो जैसे बार-बार आवाज लगाकर समय अर्थात मृत्यु को मेरे लिए बुला रहे हो।

क्योंकि-कभी-कभी क्रोध से युक्त ज्ञानी व्यक्ति भी अपने ज्ञान से अज्ञान हो जाता है उसे सही रास्ता दिखाने के लिए किसी व्यक्ति को आगे

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Question number: 773 (7 of 8 Based on Passage) Show Passage

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » तुलसीदास राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद

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तुलसीदास जी दव्ारा रचित उपरोक्त प्रसंग में परशुराम जी को समझाते हुए विश्वामित्र जी ने क्या कहा?

Explanation

तुलसीदास जी दव्ारा रचित उपरोक्त प्रसंग में विश्वामित्र जी ने परशुराम जी को समझाते हुए कहा कि लक्ष्मण जी का अपराध क्षमा कीजिए। सज्जन लोग बच्चों के गुण व अवगुण नहीं गिना करते हैं।

क्योंकि-जब किसी ज्ञानी व्यक्ति को बहुत क्रोध आता है अर्थात उस व्यक्ति की बुद्धि भ्रष्ट हो

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Question number: 774 (8 of 8 Based on Passage) Show Passage

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » तुलसीदास राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद

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तुलसीदास जी दव्ारा रचित उपरोक्त प्रसंग में विश्वामित्र जी कहने पर परशुराम जी ने क्या कहा?

Explanation

परशुराम जी बोले-तीखी धार के कुल्हाड़ा और मुझ दयारहित और क्रोधी के समक्ष यह गुरु द्रोही (शिक्षक के प्रति गद्दार) उत्तर दे रहा है। इतना होते हुए भी मैं इस बिना मारे कैसे छोड़ रहा हूँ, इसलिए हे विश्वामित्र केवल तुम्हारे शील और प्रेम के कारण ही ऐसा हो रहा

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Question number: 775

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » देव सवैया, कवित्त

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शिवसिंह ’सरोज’ के अनुसार देव दव्ारा रचित उनके ग्रंथों की कितनी संख्या है?

Question number: 776

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » मंगलेश डबराल संगतकार

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इलाहाबाद में काम करने के बाद डबराल जी ने किस सन्‌ में किस समाचार पत्र के संपादक के पद में काम किया?

Question number: 777

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » गिरिजाकुमार माथुर छाया मत छूना

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गिरिजाकुमार माथुर नई कविता के कौनसे मिज़ाज के कवि माने जाते हैं?

Passage

छाया मत छूना

मन, होगा दुख दुना।

जीवन में हैं सुरंग सुधियां सुहावनी

छवियों को चित्र-गंध फैली मनभावनी:

तन-सुगंध शेष रही, बीत गई यामिनी,

कुंतल के फूलों की याद बनी चाँंदनी।

भूल-सी एक छुअन बनता हर जीवित क्षण-

छाया मत छूना

मन, होगा दुख दूना।

Question number: 778 (1 of 13 Based on Passage) Show Passage

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » गिरिजाकुमार माथुर छाया मत छूना

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माथुर जी द्वारा रचित प्रस्तुत प्रसंग की व्याख्यां में जीवन का एक-एक पल क्या करता हुआ गुजर रहा है?

Question number: 779 (2 of 13 Based on Passage) Show Passage

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » गिरिजाकुमार माथुर छाया मत छूना

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माथुर जी द्वारा रचित प्रस्तुत प्रसंग के शिल्प-सौंदर्य क्या है?

Question number: 780 (3 of 13 Based on Passage) Show Passage

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » गिरिजाकुमार माथुर छाया मत छूना

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माथुर जी द्वारा रचित प्रस्तुत प्रसंग की व्याख्यां में कवि के अनुसार क्या बाकी रह गया?

Question number: 781 (4 of 13 Based on Passage) Show Passage

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माथुर जी द्वारा रचित प्रस्तुत प्रसंग के भाव-सौंदर्य क्या है?

Question number: 782 (5 of 13 Based on Passage) Show Passage

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माथुर जी द्वारा रचित प्रस्तुत प्रसंग की व्याख्यां में कवि मन को क्या समझाता है?

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