क्षितिज(Kshitij-Textbook)-Additional Questions (CBSE (Central Board of Secondary Education- Board Exam) Class-10 Hindi): Questions 1615 - 1621 of 1621

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Passage

आत्मकथ्य

(1)

मधुप गुन-गुना कर कह जाता कौन कहानी यह अपनी,

मुरझाकर गिर रहीं पत्तियाँ देखो कितनी आज घनी।

इस गंभीर अनंत-नीलिमा में असंख्य जीवन-इतिहास

यह लो, करते ही रहते हैं अपना व्यंग्य-मिलन उपहास

तब भी कहते हो-कह डालूँ दूर्बलता अपनी बीती।

तुम सुनकर सुख पाओगे, देखोगे-यह गागर रीती।

किंतु कहीं ऐसा न हो कि तुम ही खाली करने वाले

अपने को समझो, मेरा रस ले अपनी भरने वाले।

Question number: 1615 (6 of 12 Based on Passage) Show Passage

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Describe in Detail

जयशंकर प्रसाद दव्ारा रचित उपरोक्त पद्यांश के काव्य में इस प्रकार का मजाक होने पर भी कवि केे मित्र क्या कहते है?

Explanation

इस प्रकार का मजाक होने पर भी है मेरे दोस्तों! आप यह कहते हैं कि मैं अपने जीवन की खामियाँ और दुर्बलता सबको बता दूँ।

क्योंकि-ताकि जो थोड़ी बहुत पीड़ा है वह कम हो जाए। कहते है दुख बाँटने से घटता है यहाँ कवि के मित्र वही कह रहे हैं।

प्रसंग- प्रस्तुत पद्यांश सुप्रसिद्ध छायावादी कवि जयशंकर प्रसाद द्वारा रचित आत्मकथात्मक कविता ‘आत्मकथ्य’ से अवतरित है। यह

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Question number: 1616 (7 of 12 Based on Passage) Show Passage

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Describe in Detail

प्रस्तुत पद्यांश सुप्रसिद्ध छायावादी कवि जयशंकर प्रसाद द्वारा रचित किस कविता से अवतरित है?

Explanation

प्रस्तुत पद्यांश सुप्रसिद्ध छायावादी कवि जयशंकर प्रसाद द्वारा रचित आत्मकथात्मक कविता ‘आत्मकथ्य’ से अवतरित है।

क्योंकि-हर कवि की अपनी एक कहानी होती हैं, जिसे वह कविता के माध्यम से व्यक्त करता हैं।

प्रसंग- प्रस्तुत पद्यांश सुप्रसिद्ध छायावादी कवि जयशंकर प्रसाद द्वारा रचित आत्मकथात्मक कविता ‘आत्मकथ्य’ से अवतरित है। यह कविता पहली बार ‘हस’ पत्रिका में

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Question number: 1617 (8 of 12 Based on Passage) Show Passage

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Describe in Detail

प्रसाद जी दव्ारा रचित उपरोक्त प्रद्यांश के काव्य में कवि अपने मित्रों से क्या कहता हैं?

Explanation

कवि अपने मित्रों से यह कहता है कि मेरे जीवन रूपी मटके को खाली देखकर और सुनकर व पढ़कर तुम्हें सुख का अहसास होगा। मेरे जीवन के सत्य और कमियों को जानकर तुमको सुख मिलेगा। लेकिन ऐसा न हो कि मेरी पीड़ा को सुनकर तुम स्वयं को जीवन की कमियों का आरोपी समझने लगो और मेरे अभावों से खुशी लेकर अपनी कमियों को पूरा कर लो और अपने जीवन में सुखी और आनंदित हो जाओं।

क्

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Question number: 1618 (9 of 12 Based on Passage) Show Passage

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Describe in Detail

कवि दव्ारा रचित उपरोक्त काव्य में लोगों की वर्तमान में परिस्थितियाँ किस प्रकार की हैैंं?

Explanation

कवि दव्ारा रचित प्रस्तुत पद में आज वर्तमान में परिस्थितियाँ बहुत कठिन हैं।

क्योंकि-हर व्यक्ति का जीवन कठिनाईओं से भरा होता है।

प्रसंग- प्रस्तुत पद्यांश सुप्रसिद्ध छायावादी कवि जयशंकर प्रसाद द्वारा रचित आत्मकथात्मक कविता ‘आत्मकथ्य’ से अवतरित है। यह कविता पहली बार ‘हस’ पत्रिका में सन्‌ 1932 में आत्मकथा विशेषांक में प्रकाशित हुई थी। इस कविता में

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Question number: 1619 (10 of 12 Based on Passage) Show Passage

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Describe in Detail

कवि दव्ारा रचित उपरोक्त प्रद्यांश के काव्य में इस गहरे अंतहीन-विस्तृत साहित्य रूपी आकाश में कितने लोगों के जीवन का इतिहास अंकित हैं?

Explanation

कवि दव्ारा रचित उपरोक्त प्रद्यांश के काव्य में इस आकाश के समान जो बहुत ही गहरा है जिसका कोई अंत नहीं है तथा इस विस्तार साहित्य रूपी आकाश में अनगिनित लोगों की कहानी स्वरूप का इतिहास लिखा होगा।

क्योंकि-कवि के अनुसार उन सब लोगों की कहानी भी बहुत ही दु: खभरी हैं।

प्रसंग- प्रस्तुत पद्यांश सुप्रसिद्ध छायावादी कवि जयशंकर प्रसाद द्वारा रचित आत्मकथात्मक

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Question number: 1620 (11 of 12 Based on Passage) Show Passage

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Describe in Detail

प्रसाद जी दव्ारा रचित प्रस्तुत पद्यांश का भाव-सौंदर्य क्या हैं?

Explanation

प्रसाद जी दव्ारा रचित प्रस्तुत पद्यांश का भाव-सौंदर्य यह हैं कि इसमें कवि अपनी दु: खभरी कहानी को प्रकट नहीं करना चाहता है क्योंकि कवि की कहानी में अभावों व जीवन की सत्यता के अलावा ओर कुछ भी नहीं हैं इस कहानी को कुछ लोग पढ़कर कवि का उपहास ही करेंगे व सुख और खुशी मनाएंगे।

क्योंकि-कवि अपनी जीवन की पीड़ा को बताकर उसका मजाक नहीं करवाना चाहता हैं।

प्रसंग

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Question number: 1621 (12 of 12 Based on Passage) Show Passage

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Describe in Detail

जयशंकर प्रसाद द्वारा रचित उपरोक्त कविता पहली बार किस पत्रिका में व किस सन्‌ में आत्मकथा विशेषांक में प्रकाशित हुई थी?

Explanation

जयशंकर प्रसाद द्वारा रचित यह कविता पहली बार ‘हंस’ पत्रिका में सन्‌ 1932 में आत्मकथा विशेषांक में प्रकाशित हुई थी।

क्योंकि-कवि के अनुसार प्रस्तुत कविता सर्वश्रेष्ठ होने के कारण पाठको तक पहुंचानी थी जिससे उस आत्मकथा को ओर अधिक ख्याति मिल सके।

प्रसंग- प्रस्तुत पद्यांश सुप्रसिद्ध छायावादी कवि जयशंकर प्रसाद द्वारा रचित आत्मकथात्मक कविता ‘आत्मकथ्य’ से

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