क्षितिज(Kshitij-Textbook)-Additional Questions (CBSE Class-10 Hindi): Questions 1617 - 1621 of 1621

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Passage

आत्मकथ्य

(1)

मधुप गुन-गुना कर कह जाता कौन कहानी यह अपनी,

मुरझाकर गिर रहीं पत्तियाँ देखो कितनी आज घनी।

इस गंभीर अनंत-नीलिमा में असंख्य जीवन-इतिहास

यह लो, करते ही रहते हैं अपना व्यंग्य-मिलन उपहास

तब भी कहते हो-कह डालूँ दूर्बलता अपनी बीती।

तुम सुनकर सुख पाओगे, देखोगे-यह गागर रीती।

किंतु कहीं ऐसा न हो कि तुम ही खाली करने वाले

अपने को समझो, मेरा रस ले अपनी भरने वाले।

Question number: 1617 (8 of 12 Based on Passage) Show Passage

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Describe in Detail

प्रस्तुत पद्यांश सुप्रसिद्ध छायावादी कवि जयशंकर प्रसाद द्वारा रचित किस कविता से अवतरित है?

Explanation

प्रस्तुत पद्यांश सुप्रसिद्ध छायावादी कवि जयशंकर प्रसाद द्वारा रचित आत्मकथात्मक कविता ’आत्मकथ्य’ से अवतरित है।

क्योंकि-हर कवि की अपनी एक कहानी होती हैं, जिसे वह कविता के माध्यम से व्यक्त करता हैं।

प्रसंग- प्रस्तुत पद्यांश सुप्रसिद्ध छायावादी कवि जयशंकर प्रसाद द्वारा रचित आत्मकथात्मक कविता ’आत्मकथ्य’ से अवतरित है। यह कविता… (284 more words) …

Question number: 1618 (9 of 12 Based on Passage) Show Passage

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Describe in Detail

कवि दव्ारा रचित उपरोक्त काव्य में लोगों की वर्तमान में परिस्थितियाँ किस प्रकार की हैैंं?

Explanation

कवि दव्ारा रचित प्रस्तुत पद में आज वर्तमान में परिस्थितियाँ बहुत कठिन हैं।

क्योंकि-हर व्यक्ति का जीवन कठिनाईओं से भरा होता है।

प्रसंग- प्रस्तुत पद्यांश सुप्रसिद्ध छायावादी कवि जयशंकर प्रसाद द्वारा रचित आत्मकथात्मक कविता ’आत्मकथ्य’ से अवतरित है। यह कविता पहली बार ’हस’ पत्रिका में सन्‌ 1932 में आत्मकथा विशेषांक… (274 more words) …

Question number: 1619 (10 of 12 Based on Passage) Show Passage

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Describe in Detail

प्रसाद जी दव्ारा रचित उपरोक्त प्रद्यांश के काव्य में कवि अपने मित्रों से क्या कहता हैं?

Explanation

कवि अपने मित्रों से यह कहता है कि मेरे जीवन रूपी मटके को खाली देखकर और सुनकर व पढ़कर तुम्हें सुख का अहसास होगा। मेरे जीवन के सत्य और कमियों को जानकर तुमको सुख मिलेगा। लेकिन ऐसा न हो कि मेरी पीड़ा को सुनकर तुम स्वयं को जीवन की कमियों… (356 more words) …

Question number: 1620 (11 of 12 Based on Passage) Show Passage

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Describe in Detail

जयशंकर प्रसाद जी दव्ारा रचित प्रस्तुत पद्यांश के शिल्प-सौंदर्य क्या हैं।

Explanation

जयशंकर प्रसाद जी दव्ारा रचित प्रस्तुत पद्यांश के शिल्प-सौंदर्य हैं कि इसमें कवि ने जीवन की सत्यता व उनके अभावों का अद्भुत चित्र प्रस्तुत किया है। साथ में उपमा, प्रतीक, शब्दों, भाषा व भाव का सुंदर प्रयोग किया हैं।

क्योंकि- जिससे कवि के काव्यों में ओर अधिक निखार आ जाए।… (302 more words) …

Question number: 1621 (12 of 12 Based on Passage) Show Passage

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Describe in Detail

जयशंकर प्रसाद द्वारा रचित कविता में कवि किस मन से आत्मकथा के विषय में अपने विचार प्रकट करते हुए कहता है?

Explanation

जयशंकर प्रसाद द्वारा रचित कविता में कवि अनमने व उदास मन से अपनी आत्मकथा के बारे में अपने विचार प्रस्तुत किया है।

क्योंकि-वह अपनी दु: खभरी कहानी को बताना नहीं चाहता हैं फिर भी कवि बड़े संकोच से ही यह सब कहता हैं।

प्रसंग- प्रस्तुत पद्यांश सुप्रसिद्ध छायावादी कवि जयशंकर… (295 more words) …

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