क्षितिज(Kshitij-Textbook)-Additional Questions (CBSE (Central Board of Secondary Education- Board Exam) Class-10 Hindi): Questions 1620 - 1621 of 1621

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Passage

आत्मकथ्य

(1)

मधुप गुन-गुना कर कह जाता कौन कहानी यह अपनी,

मुरझाकर गिर रहीं पत्तियाँ देखो कितनी आज घनी।

इस गंभीर अनंत-नीलिमा में असंख्य जीवन-इतिहास

यह लो, करते ही रहते हैं अपना व्यंग्य-मिलन उपहास

तब भी कहते हो-कह डालूँ दूर्बलता अपनी बीती।

तुम सुनकर सुख पाओगे, देखोगे-यह गागर रीती।

किंतु कहीं ऐसा न हो कि तुम ही खाली करने वाले

अपने को समझो, मेरा रस ले अपनी भरने वाले।

Question number: 1620 (11 of 12 Based on Passage) Show Passage

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Essay Question▾

Describe in Detail

जयशंकर प्रसाद द्वारा रचित कविता में कवि किस मन से आत्मकथा के विषय में अपने विचार प्रकट करते हुए कहता है?

Explanation

जयशंकर प्रसाद द्वारा रचित कविता में कवि अनमने व उदास मन से अपनी आत्मकथा के बारे में अपने विचार प्रस्तुत किया है।

क्योंकि-वह अपनी दु: खभरी कहानी को बताना नहीं चाहता हैं फिर भी कवि बड़े संकोच से ही यह सब कहता हैं।

प्रसंग- प्रस्तुत पद्यांश सुप्रसिद्ध छायावादी कवि जयशंकर प्रसाद द्वारा रचित आत्मकथात्मक कविता ‘आत्मकथ्य’ से अवतरित है। यह कविता पहली बार

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Question number: 1621 (12 of 12 Based on Passage) Show Passage

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Essay Question▾

Describe in Detail

प्रसाद जी दव्ारा रचित उपरोक्त प्रद्यांश के काव्य में कवि अपने मित्रों से क्या कहता हैं?

Explanation

कवि अपने मित्रों से यह कहता है कि मेरे जीवन रूपी मटके को खाली देखकर और सुनकर व पढ़कर तुम्हें सुख का अहसास होगा। मेरे जीवन के सत्य और कमियों को जानकर तुमको सुख मिलेगा। लेकिन ऐसा न हो कि मेरी पीड़ा को सुनकर तुम स्वयं को जीवन की कमियों का आरोपी समझने लगो और मेरे अभावों से खुशी लेकर अपनी कमियों को पूरा कर लो और अपने जीवन में सुखी और आनंदित हो जाओं।

क्

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