क्षितिज(Kshitij-Textbook)-Additional Questions (CBSE Class-10 Hindi): Questions 1615 - 1621 of 1621

Get 1 year subscription: Access detailed explanations (illustrated with images and videos) to 2295 questions. Access all new questions we will add tracking exam-pattern and syllabus changes. View Sample Explanation or View Features.

Rs. 1650.00 or

Passage

आत्मकथ्य

(1)

मधुप गुन-गुना कर कह जाता कौन कहानी यह अपनी,

मुरझाकर गिर रहीं पत्तियाँ देखो कितनी आज घनी।

इस गंभीर अनंत-नीलिमा में असंख्य जीवन-इतिहास

यह लो, करते ही रहते हैं अपना व्यंग्य-मिलन उपहास

तब भी कहते हो-कह डालूँ दूर्बलता अपनी बीती।

तुम सुनकर सुख पाओगे, देखोगे-यह गागर रीती।

किंतु कहीं ऐसा न हो कि तुम ही खाली करने वाले

अपने को समझो, मेरा रस ले अपनी भरने वाले।

Question number: 1615 (6 of 12 Based on Passage) Show Passage

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » जयशंकर प्रसाद आत्मकथ्य

Essay Question▾

Describe in Detail

जयशंकर प्रसाद जी दव्ारा रचित प्रस्तुत पद्यांश के शिल्प-सौंदर्य क्या हैं।

Explanation

जयशंकर प्रसाद जी दव्ारा रचित प्रस्तुत पद्यांश के शिल्प-सौंदर्य हैं कि इसमें कवि ने जीवन की सत्यता व उनके अभावों का अद्भुत चित्र प्रस्तुत किया है। साथ में उपमा, प्रतीक, शब्दों, भाषा व भाव का सुंदर प्रयोग किया हैं।

क्योंकि- जिससे कवि के काव्यों में ओर अधिक निखार आ जाए।… (302 more words) …

Question number: 1616 (7 of 12 Based on Passage) Show Passage

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » जयशंकर प्रसाद आत्मकथ्य

Essay Question▾

Describe in Detail

जयशंकर प्रसाद द्वारा रचित कविता में कवि ने अपने जीवन को किस प्रकार अभिव्यक्त किया है?

Explanation

इस कविता में कवि ने अपने जीवन के सत्य एवं अभावों को बहुत ही हृदय को स्पर्श करने वाले के जैसे ढंग से प्रस्तुत किया गया है।

क्योंकि-कवि का जीवन बहुत पीड़ओं व दु: खों से परिपूर्ण हैं जिसे कवि आत्मकथा के माध्यम से बता रहा है।

प्रसंग- प्रस्तुत पद्यांश… (299 more words) …

Question number: 1617 (8 of 12 Based on Passage) Show Passage

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » जयशंकर प्रसाद आत्मकथ्य

Essay Question▾

Describe in Detail

प्रसाद जी दव्ारा रचित प्रस्तुत पद्यांश का भाव-सौंदर्य क्या हैं?

Explanation

प्रसाद जी दव्ारा रचित प्रस्तुत पद्यांश का भाव-सौंदर्य यह हैं कि इसमें कवि अपनी दु: खभरी कहानी को प्रकट नहीं करना चाहता है क्योंकि कवि की कहानी में अभावों व जीवन की सत्यता के अलावा ओर कुछ भी नहीं हैं इस कहानी को कुछ लोग पढ़कर कवि का उपहास ही… (321 more words) …

Question number: 1618 (9 of 12 Based on Passage) Show Passage

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » जयशंकर प्रसाद आत्मकथ्य

Essay Question▾

Describe in Detail

कवि दव्ारा रचित उपरोक्त काव्य में लोगों की वर्तमान में परिस्थितियाँ किस प्रकार की हैैंं?

Explanation

कवि दव्ारा रचित प्रस्तुत पद में आज वर्तमान में परिस्थितियाँ बहुत कठिन हैं।

क्योंकि-हर व्यक्ति का जीवन कठिनाईओं से भरा होता है।

प्रसंग- प्रस्तुत पद्यांश सुप्रसिद्ध छायावादी कवि जयशंकर प्रसाद द्वारा रचित आत्मकथात्मक कविता ’आत्मकथ्य’ से अवतरित है। यह कविता पहली बार ’हस’ पत्रिका में सन्‌ 1932 में आत्मकथा विशेषांक… (274 more words) …

Question number: 1619 (10 of 12 Based on Passage) Show Passage

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » जयशंकर प्रसाद आत्मकथ्य

Essay Question▾

Describe in Detail

जयशंकर प्रसाद दव्ारा रचित उपरोक्त पद्यांश के काव्य में इस प्रकार का मजाक होने पर भी कवि केे मित्र क्या कहते है?

Explanation

इस प्रकार का मजाक होने पर भी है मेरे दोस्तों! आप यह कहते हैं कि मैं अपने जीवन की खामियाँ और दुर्बलता सबको बता दूँ।

क्योंकि-ताकि जो थोड़ी बहुत पीड़ा है वह कम हो जाए। कहते है दुख बाँटने से घटता है यहाँ कवि के मित्र वही कह रहे हैं।… (302 more words) …

Question number: 1620 (11 of 12 Based on Passage) Show Passage

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » जयशंकर प्रसाद आत्मकथ्य

Essay Question▾

Describe in Detail

जयशंकर प्रसाद द्वारा रचित उपरोक्त कविता पहली बार किस पत्रिका में व किस सन्‌ में आत्मकथा विशेषांक में प्रकाशित हुई थी?

Explanation

जयशंकर प्रसाद द्वारा रचित यह कविता पहली बार ’हंस’ पत्रिका में सन्‌ 1932 में आत्मकथा विशेषांक में प्रकाशित हुई थी।

क्योंकि-कवि के अनुसार प्रस्तुत कविता सर्वश्रेष्ठ होने के कारण पाठको तक पहुंचानी थी जिससे उस आत्मकथा को ओर अधिक ख्याति मिल सके।

प्रसंग- प्रस्तुत पद्यांश सुप्रसिद्ध छायावादी कवि जयशंकर प्रसाद… (294 more words) …

Question number: 1621 (12 of 12 Based on Passage) Show Passage

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » जयशंकर प्रसाद आत्मकथ्य

Essay Question▾

Describe in Detail

कवि दव्ारा रचित उपरोक्त प्रद्यांश के काव्य में इस गहरे अंतहीन-विस्तृत साहित्य रूपी आकाश में कितने लोगों के जीवन का इतिहास अंकित हैं?

Explanation

कवि दव्ारा रचित उपरोक्त प्रद्यांश के काव्य में इस आकाश के समान जो बहुत ही गहरा है जिसका कोई अंत नहीं है तथा इस विस्तार साहित्य रूपी आकाश में अनगिनित लोगों की कहानी स्वरूप का इतिहास लिखा होगा।

क्योंकि-कवि के अनुसार उन सब लोगों की कहानी भी बहुत ही दु:… (304 more words) …

Sign In