क्षितिज(Kshitij-Textbook)-Additional Questions (CBSE Class-10 Hindi): Questions 1612 - 1621 of 1621

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Passage

आत्मकथ्य

(1)

मधुप गुन-गुना कर कह जाता कौन कहानी यह अपनी,

मुरझाकर गिर रहीं पत्तियाँ देखो कितनी आज घनी।

इस गंभीर अनंत-नीलिमा में असंख्य जीवन-इतिहास

यह लो, करते ही रहते हैं अपना व्यंग्य-मिलन उपहास

तब भी कहते हो-कह डालूँ दूर्बलता अपनी बीती।

तुम सुनकर सुख पाओगे, देखोगे-यह गागर रीती।

किंतु कहीं ऐसा न हो कि तुम ही खाली करने वाले

अपने को समझो, मेरा रस ले अपनी भरने वाले।

Question number: 1612 (3 of 12 Based on Passage) Show Passage

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कवि दव्ारा रचित उपरोक्त प्रद्यांश के काव्य में इस गहरे अंतहीन-विस्तृत साहित्य रूपी आकाश में कितने लोगों के जीवन का इतिहास अंकित हैं?

Explanation

कवि दव्ारा रचित उपरोक्त प्रद्यांश के काव्य में इस आकाश के समान जो बहुत ही गहरा है जिसका कोई अंत नहीं है तथा इस विस्तार साहित्य रूपी आकाश में अनगिनित लोगों की कहानी स्वरूप का इतिहास लिखा होगा।

क्योंकि-कवि के अनुसार उन सब लोगों की कहानी भी बहुत ही दु:… (304 more words) …

Question number: 1613 (4 of 12 Based on Passage) Show Passage

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जयशंकर प्रसाद जी दव्ारा रचित प्रस्तुत पद्यांश के शिल्प-सौंदर्य क्या हैं।

Explanation

जयशंकर प्रसाद जी दव्ारा रचित प्रस्तुत पद्यांश के शिल्प-सौंदर्य हैं कि इसमें कवि ने जीवन की सत्यता व उनके अभावों का अद्भुत चित्र प्रस्तुत किया है। साथ में उपमा, प्रतीक, शब्दों, भाषा व भाव का सुंदर प्रयोग किया हैं।

क्योंकि- जिससे कवि के काव्यों में ओर अधिक निखार आ जाए।… (302 more words) …

Question number: 1614 (5 of 12 Based on Passage) Show Passage

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प्रसाद जी दव्ारा रचित प्रस्तुत पद्यांश का भाव-सौंदर्य क्या हैं?

Explanation

प्रसाद जी दव्ारा रचित प्रस्तुत पद्यांश का भाव-सौंदर्य यह हैं कि इसमें कवि अपनी दु: खभरी कहानी को प्रकट नहीं करना चाहता है क्योंकि कवि की कहानी में अभावों व जीवन की सत्यता के अलावा ओर कुछ भी नहीं हैं इस कहानी को कुछ लोग पढ़कर कवि का उपहास ही… (321 more words) …

Question number: 1615 (6 of 12 Based on Passage) Show Passage

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प्रस्तुत पद्यांश सुप्रसिद्ध छायावादी कवि जयशंकर प्रसाद द्वारा रचित किस कविता से अवतरित है?

Explanation

प्रस्तुत पद्यांश सुप्रसिद्ध छायावादी कवि जयशंकर प्रसाद द्वारा रचित आत्मकथात्मक कविता ’आत्मकथ्य’ से अवतरित है।

क्योंकि-हर कवि की अपनी एक कहानी होती हैं, जिसे वह कविता के माध्यम से व्यक्त करता हैं।

प्रसंग- प्रस्तुत पद्यांश सुप्रसिद्ध छायावादी कवि जयशंकर प्रसाद द्वारा रचित आत्मकथात्मक कविता ’आत्मकथ्य’ से अवतरित है। यह कविता… (284 more words) …

Question number: 1616 (7 of 12 Based on Passage) Show Passage

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कवि दव्ारा रचित उपरोक्त काव्य में लोगों की वर्तमान में परिस्थितियाँ किस प्रकार की हैैंं?

Explanation

कवि दव्ारा रचित प्रस्तुत पद में आज वर्तमान में परिस्थितियाँ बहुत कठिन हैं।

क्योंकि-हर व्यक्ति का जीवन कठिनाईओं से भरा होता है।

प्रसंग- प्रस्तुत पद्यांश सुप्रसिद्ध छायावादी कवि जयशंकर प्रसाद द्वारा रचित आत्मकथात्मक कविता ’आत्मकथ्य’ से अवतरित है। यह कविता पहली बार ’हस’ पत्रिका में सन्‌ 1932 में आत्मकथा विशेषांक… (274 more words) …

Question number: 1617 (8 of 12 Based on Passage) Show Passage

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जयशंकर प्रसाद द्वारा रचित उपरोक्त कविता पहली बार किस पत्रिका में व किस सन्‌ में आत्मकथा विशेषांक में प्रकाशित हुई थी?

Explanation

जयशंकर प्रसाद द्वारा रचित यह कविता पहली बार ’हंस’ पत्रिका में सन्‌ 1932 में आत्मकथा विशेषांक में प्रकाशित हुई थी।

क्योंकि-कवि के अनुसार प्रस्तुत कविता सर्वश्रेष्ठ होने के कारण पाठको तक पहुंचानी थी जिससे उस आत्मकथा को ओर अधिक ख्याति मिल सके।

प्रसंग- प्रस्तुत पद्यांश सुप्रसिद्ध छायावादी कवि जयशंकर प्रसाद… (294 more words) …

Question number: 1618 (9 of 12 Based on Passage) Show Passage

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प्रसाद जी दव्ारा रचित उपरोक्त प्रद्यांश के काव्य में कवि अपने मित्रों से क्या कहता हैं?

Explanation

कवि अपने मित्रों से यह कहता है कि मेरे जीवन रूपी मटके को खाली देखकर और सुनकर व पढ़कर तुम्हें सुख का अहसास होगा। मेरे जीवन के सत्य और कमियों को जानकर तुमको सुख मिलेगा। लेकिन ऐसा न हो कि मेरी पीड़ा को सुनकर तुम स्वयं को जीवन की कमियों… (356 more words) …

Question number: 1619 (10 of 12 Based on Passage) Show Passage

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कवि जयशंकर प्रसाद दव्ारा रचित उपरोक्त पद्यांश के काव्य में वे सब लोग क्या करते हैं?

Explanation

कवि जयशंकर प्रसाद दव्ारा रचित उपरोक्त पद्यांश के काव्य में वे सब लोग अपनी जीवन के बारे में लिखकर खराब और अपमानित तरीके से दूसरों के सामने अपना मजाक करवाते रहते हैं।

क्योंकि-उन सब लोगों का दु: ख बहुत ही अधिक बढ़ गया है।

प्रसंग- प्रस्तुत पद्यांश सुप्रसिद्ध छायावादी कवि… (296 more words) …

Question number: 1620 (11 of 12 Based on Passage) Show Passage

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जयशंकर प्रसाद दव्ारा रचित उपरोक्त पद्यांश के काव्य में इस प्रकार का मजाक होने पर भी कवि केे मित्र क्या कहते है?

Explanation

इस प्रकार का मजाक होने पर भी है मेरे दोस्तों! आप यह कहते हैं कि मैं अपने जीवन की खामियाँ और दुर्बलता सबको बता दूँ।

क्योंकि-ताकि जो थोड़ी बहुत पीड़ा है वह कम हो जाए। कहते है दुख बाँटने से घटता है यहाँ कवि के मित्र वही कह रहे हैं।… (302 more words) …

Question number: 1621 (12 of 12 Based on Passage) Show Passage

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कवि दव्ारा रचित प्रस्तुत काव्य में लोगों की अभिलाषा रूपी पत्तियाँ क्या होती जा रही हैं?

Explanation

कवि दव्ारा रचित प्रस्तुत काव्य में उम्मीद रूपी पत्तियाँ खत्म होती दिखाई दे रही हैं अर्थात जीवन में आशा नाम की किरण दूर-दूर तक कहीं भी नजर नहीं आ रही है।

क्योंकि-जब व्यक्ति को अत्यधिक दु: ख होता है उसकी सोच नकारात्मक हो जाती हैं।

प्रसंग- प्रस्तुत पद्यांश सुप्रसिद्ध छायावादी… (297 more words) …

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