क्षितिज(Kshitij-Textbook)-Additional Questions (CBSE (Central Board of Secondary Education- Board Exam) Class-10 Hindi): Questions 1609 - 1619 of 1621

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Question number: 1609

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » नागार्जुन यह दंतुरित मुसकान, फसल

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Describe in Detail

नागार्जुन दव्ारा रचित उन्होंने अपनी कविताओं में क्या प्रदर्शित किया है?

Explanation

उन्होंने अपनी कविताओं में पीड़ित व त्रस्त व्यक्तियों के प्रति अद्धितीय सहानुभूति प्रदर्शित किया है।

क्योंकि-उनके मन में गरीबो के प्रति बहुत दयाभाव हैं।

“प्रख्यात कवि नागार्जुन जी के हृदय में शोषित व दलित वर्ग के प्रति अपार संवेदना देखने को मिलती है। उन्होंने अपनी कविताओं में पीड़ित व त्रस्त व्यक्तियों के प्रति अद्धितीय सहानुभूति प्रदर्शित किया है।

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Passage

आत्मकथ्य

(1)

मधुप गुन-गुना कर कह जाता कौन कहानी यह अपनी,

मुरझाकर गिर रहीं पत्तियाँ देखो कितनी आज घनी।

इस गंभीर अनंत-नीलिमा में असंख्य जीवन-इतिहास

यह लो, करते ही रहते हैं अपना व्यंग्य-मिलन उपहास

तब भी कहते हो-कह डालूँ दूर्बलता अपनी बीती।

तुम सुनकर सुख पाओगे, देखोगे-यह गागर रीती।

किंतु कहीं ऐसा न हो कि तुम ही खाली करने वाले

अपने को समझो, मेरा रस ले अपनी भरने वाले।

Question number: 1610 (1 of 12 Based on Passage) Show Passage

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कवि दव्ारा रचित उपरोक्त काव्य में लोगों की वर्तमान में परिस्थितियाँ किस प्रकार की हैैंं?

Explanation

कवि दव्ारा रचित प्रस्तुत पद में आज वर्तमान में परिस्थितियाँ बहुत कठिन हैं।

क्योंकि-हर व्यक्ति का जीवन कठिनाईओं से भरा होता है।

प्रसंग- प्रस्तुत पद्यांश सुप्रसिद्ध छायावादी कवि जयशंकर प्रसाद द्वारा रचित आत्मकथात्मक कविता ‘आत्मकथ्य’ से अवतरित है। यह कविता पहली बार ‘हस’ पत्रिका में सन्‌ 1932 में आत्मकथा विशेषांक में प्रकाशित हुई थी। इस कविता में

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Question number: 1611 (2 of 12 Based on Passage) Show Passage

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प्रस्तुत पद्यांश सुप्रसिद्ध छायावादी कवि जयशंकर प्रसाद द्वारा रचित किस कविता से अवतरित है?

Explanation

प्रस्तुत पद्यांश सुप्रसिद्ध छायावादी कवि जयशंकर प्रसाद द्वारा रचित आत्मकथात्मक कविता ‘आत्मकथ्य’ से अवतरित है।

क्योंकि-हर कवि की अपनी एक कहानी होती हैं, जिसे वह कविता के माध्यम से व्यक्त करता हैं।

प्रसंग- प्रस्तुत पद्यांश सुप्रसिद्ध छायावादी कवि जयशंकर प्रसाद द्वारा रचित आत्मकथात्मक कविता ‘आत्मकथ्य’ से अवतरित है। यह कविता पहली बार ‘हस’ पत्रिका में

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Question number: 1612 (3 of 12 Based on Passage) Show Passage

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जयशंकर प्रसाद दव्ारा रचित उपरोक्त पद्यांश के काव्य में इस प्रकार का मजाक होने पर भी कवि केे मित्र क्या कहते है?

Explanation

इस प्रकार का मजाक होने पर भी है मेरे दोस्तों! आप यह कहते हैं कि मैं अपने जीवन की खामियाँ और दुर्बलता सबको बता दूँ।

क्योंकि-ताकि जो थोड़ी बहुत पीड़ा है वह कम हो जाए। कहते है दुख बाँटने से घटता है यहाँ कवि के मित्र वही कह रहे हैं।

प्रसंग- प्रस्तुत पद्यांश सुप्रसिद्ध छायावादी कवि जयशंकर प्रसाद द्वारा रचित आत्मकथात्मक कविता ‘आत्मकथ्य’ से अवतरित है। यह

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Question number: 1613 (4 of 12 Based on Passage) Show Passage

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Describe in Detail

जयशंकर प्रसाद द्वारा रचित उपरोक्त कविता पहली बार किस पत्रिका में व किस सन्‌ में आत्मकथा विशेषांक में प्रकाशित हुई थी?

Explanation

जयशंकर प्रसाद द्वारा रचित यह कविता पहली बार ‘हंस’ पत्रिका में सन्‌ 1932 में आत्मकथा विशेषांक में प्रकाशित हुई थी।

क्योंकि-कवि के अनुसार प्रस्तुत कविता सर्वश्रेष्ठ होने के कारण पाठको तक पहुंचानी थी जिससे उस आत्मकथा को ओर अधिक ख्याति मिल सके।

प्रसंग- प्रस्तुत पद्यांश सुप्रसिद्ध छायावादी कवि जयशंकर प्रसाद द्वारा रचित आत्मकथात्मक कविता ‘आत्मकथ्य’ से

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Question number: 1614 (5 of 12 Based on Passage) Show Passage

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Describe in Detail

कवि जयशंकर प्रसाद दव्ारा रचित उपरोक्त पद्यांश के काव्य में वे सब लोग क्या करते हैं?

Explanation

कवि जयशंकर प्रसाद दव्ारा रचित उपरोक्त पद्यांश के काव्य में वे सब लोग अपनी जीवन के बारे में लिखकर खराब और अपमानित तरीके से दूसरों के सामने अपना मजाक करवाते रहते हैं।

क्योंकि-उन सब लोगों का दु: ख बहुत ही अधिक बढ़ गया है।

प्रसंग- प्रस्तुत पद्यांश सुप्रसिद्ध छायावादी कवि जयशंकर प्रसाद द्वारा रचित आत्मकथात्मक कविता ‘आत्मकथ्य’ से अवतरित है। यह कविता प

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Question number: 1615 (6 of 12 Based on Passage) Show Passage

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प्रसाद जी दव्ारा रचित प्रस्तुत पद्यांश का भाव-सौंदर्य क्या हैं?

Explanation

प्रसाद जी दव्ारा रचित प्रस्तुत पद्यांश का भाव-सौंदर्य यह हैं कि इसमें कवि अपनी दु: खभरी कहानी को प्रकट नहीं करना चाहता है क्योंकि कवि की कहानी में अभावों व जीवन की सत्यता के अलावा ओर कुछ भी नहीं हैं इस कहानी को कुछ लोग पढ़कर कवि का उपहास ही करेंगे व सुख और खुशी मनाएंगे।

क्योंकि-कवि अपनी जीवन की पीड़ा को बताकर उसका मजाक नहीं करवाना चाहता हैं।

प्रसंग

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Question number: 1616 (7 of 12 Based on Passage) Show Passage

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Describe in Detail

कवि दव्ारा रचित प्रस्तुत काव्य में लोगों की अभिलाषा रूपी पत्तियाँ क्या होती जा रही हैं?

Explanation

कवि दव्ारा रचित प्रस्तुत काव्य में उम्मीद रूपी पत्तियाँ खत्म होती दिखाई दे रही हैं अर्थात जीवन में आशा नाम की किरण दूर-दूर तक कहीं भी नजर नहीं आ रही है।

क्योंकि-जब व्यक्ति को अत्यधिक दु: ख होता है उसकी सोच नकारात्मक हो जाती हैं।

प्रसंग- प्रस्तुत पद्यांश सुप्रसिद्ध छायावादी कवि जयशंकर प्रसाद द्वारा रचित आत्मकथात्मक कविता ‘आत्मकथ्य’ से अवतरित है।

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Question number: 1617 (8 of 12 Based on Passage) Show Passage

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कवि दव्ारा रचित उपरोक्त प्रद्यांश के काव्य में इस गहरे अंतहीन-विस्तृत साहित्य रूपी आकाश में कितने लोगों के जीवन का इतिहास अंकित हैं?

Explanation

कवि दव्ारा रचित उपरोक्त प्रद्यांश के काव्य में इस आकाश के समान जो बहुत ही गहरा है जिसका कोई अंत नहीं है तथा इस विस्तार साहित्य रूपी आकाश में अनगिनित लोगों की कहानी स्वरूप का इतिहास लिखा होगा।

क्योंकि-कवि के अनुसार उन सब लोगों की कहानी भी बहुत ही दु: खभरी हैं।

प्रसंग- प्रस्तुत पद्यांश सुप्रसिद्ध छायावादी कवि जयशंकर प्रसाद द्वारा रचित आत्मकथात्मक

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Question number: 1618 (9 of 12 Based on Passage) Show Passage

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जयशंकर प्रसाद द्वारा रचित कविता में कवि ने अपने जीवन को किस प्रकार अभिव्यक्त किया है?

Explanation

इस कविता में कवि ने अपने जीवन के सत्य एवं अभावों को बहुत ही हृदय को स्पर्श करने वाले के जैसे ढंग से प्रस्तुत किया गया है।

क्योंकि-कवि का जीवन बहुत पीड़ओं व दु: खों से परिपूर्ण हैं जिसे कवि आत्मकथा के माध्यम से बता रहा है।

प्रसंग- प्रस्तुत पद्यांश सुप्रसिद्ध छायावादी कवि जयशंकर प्रसाद द्वारा रचित आत्मकथात्मक कविता ‘आत्मकथ्य’ से अवतरित है। यह कविता

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Question number: 1619 (10 of 12 Based on Passage) Show Passage

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जयशंकर प्रसाद जी दव्ारा रचित प्रस्तुत पद्यांश के शिल्प-सौंदर्य क्या हैं।

Explanation

जयशंकर प्रसाद जी दव्ारा रचित प्रस्तुत पद्यांश के शिल्प-सौंदर्य हैं कि इसमें कवि ने जीवन की सत्यता व उनके अभावों का अद्भुत चित्र प्रस्तुत किया है। साथ में उपमा, प्रतीक, शब्दों, भाषा व भाव का सुंदर प्रयोग किया हैं।

क्योंकि- जिससे कवि के काव्यों में ओर अधिक निखार आ जाए।

प्रसंग- प्रस्तुत पद्यांश सुप्रसिद्ध छायावादी कवि जयशंकर प्रसाद द्वारा रचित आत्मक

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