क्षितिज(Kshitij-Textbook)-Additional Questions (CBSE (Central Board of Secondary Education- Board Exam) Class-10 Hindi): Questions 1575 - 1586 of 1621

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Question number: 1575

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » जयशंकर प्रसाद आत्मकथ्य

Essay Question▾

Describe in Detail

हिंदी साहित्य के अमर कवि व लेखक जयशंकर प्रसाद का जन्म कहाँ व किस सन्‌ में हुआ?

Explanation

हिंदी साहित्य के अमर कवि व लेखक जयशंकर प्रसाद का जन्म काशी के ’सुघंनी साहू’ के प्रसिद्ध परिवार में सन्‌ 1889 में हुआ।

क्योंकि-हर व्यक्ति का जन्म ईश्वर के माध्यम से तय होता हैं।

”छायावाद के श्रेष्ठ कवि जयशंकर प्रसाद एक ऐसे विलक्षण एवं विराट व्यक्तित्व को लेकर अवतरित हुए… (178 more words) …

Question number: 1576

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जयशंकर प्रसाद जी ने संस्कार किस से प्राप्त किये?

Explanation

उन्होंने उदारता, विद्वानों का आदर और विद्याभ्यास जैसे संस्कार तो पूर्वजों की परंपरा से ही प्राप्त किये।

क्योंकि-ऐसे संस्कार व्यक्ति में पूर्वजों से स्वत: ही अनुकरण के माध्यम से अपनेआप आ जाते हैं।

”छायावाद के श्रेष्ठ कवि जयशंकर प्रसाद एक ऐसे विलक्षण एवं विराट व्यक्तित्व को लेकर अवतरित हुए थे,… (177 more words) …

Question number: 1577

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जयशंकर प्रसाद जी नाटक और काव्य क्षेत्र में क्या लाने वाले प्रतिभा-सम्पन्न साहित्यकार हैं?

Explanation

जयशंकर प्रसाद जी नाटक और काव्य क्षेत्र में मौलिकता लाने वाले प्रतिभा-सम्पन्न साहित्यकार हैं।

क्योंकि-कभी कोई कवि हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा लाने में सफल हो जाता हैं।

काव्यगत विशेषताएँ- जयशंकर प्रसाद जी नाटक और काव्य क्षेत्र में मौलिकता लाने वाले प्रतिभा-सम्पन्न साहित्यकार हैं। उन्हे छायावादी काव्य धारा का प्रवर्तक… (56 more words) …

Passage

अट नहीं रही है

(1)

अट नहीं रही है

आभा फागुन की तन

सट नहीं रही है।

Question number: 1578 (1 of 5 Based on Passage) Show Passage

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » सूर्यकांत त्रिपाठी ’निराला’ उत्साह, अट नह

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कवि निराला जी दव्ारा रचित प्रस्तुत पद्यांश में किसकी मादकता को प्रकट किया गया है?

Explanation

प्रस्तुत पद्यांश में फागुन महीने की मादकता को प्रकट किया गया है।

क्योंकि-कवि को फागुन का महीना बहुत अच्छा लगता हैं।

प्रसंग- प्रस्तुत पद्यांश महाकवि सूर्यकांत त्रिपाठी ’निराला’ द्वारा रचित कविता ’अट नहीं रही है’ से उद्धत है। यहाँ फागुन (मार्च) महीने की मदहोशी को प्रकट किया गया है।

व्याख्या-… (87 more words) …

Question number: 1579 (2 of 5 Based on Passage) Show Passage

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कवि निराला जी दव्ारा रचित प्रस्तुत पद्यांश के भाव-सौंदर्य क्या है?

Explanation

कवि निराला जी दव्ारा रचित प्रस्तुत पद्यांश के भाव-सौंदर्य है कि फागुन का महीना आने पर मन को प्रभावित करने वाले सभी जगह सौदंर्य फैल जाता हैं। अर्थात इसमें कवि मनुष्य के खुश होने की बात कह रहा है क्योंकि जब व्यक्ति का मन प्रसन्न होता है तो उसे हर… (135 more words) …

Question number: 1580 (3 of 5 Based on Passage) Show Passage

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प्रस्तुत पद्यांश किस महाकवि के द्वारा रचित कविता से उद्धत है?

Explanation

प्रस्तुत पद्यांश महाकवि सूर्यकांत त्रिपाठी ’निराला’ द्वारा रचित कविता ’अट नहीं रही है’ से उद्धत है।

क्योंकि-हर कविता किसी महाकवि के द्वारा ही लिखी होती है जिससे लोग पढ़कर प्रेरित होते है।

प्रसंग- प्रस्तुत पद्यांश महाकवि सूर्यकांत त्रिपाठी ’निराला’ द्वारा रचित कविता ’अट नहीं रही है’ से उद्धत है। यहाँ… (98 more words) …

Question number: 1581 (4 of 5 Based on Passage) Show Passage

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Describe in Detail

कवि निराला जी दव्ारा रचित प्रस्तुत पद्यांश में कवि फागुन के लिए क्या कहता है?

Explanation

कवि कहता है फागुन में प्राकृतिक वस्तुओं या तत्वों की सुंदरता इतनी अनुपम, अद्भूत, विचित्र और मनोहारी हो गई है कि वह पूरी तरह से शरीर के अन्दर नहीं समा पा रही है। सभी ही जगह सुंदर एवं हृदय को प्रभावित करने वाले नज़ारे फैले हुए हैं, उन सभी को… (154 more words) …

Question number: 1582 (5 of 5 Based on Passage) Show Passage

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कवि निराला जी दव्ारा रचित प्रस्तुत पद्यांश के शिल्प-सौंदर्य क्या है?

Explanation

प्रस्तुत पद्यांश के शिल्प-सौंदर्य यह है कि इसमें कवि ने फागुन महिने का कर बहुत ही सुंदर दृश्य प्रस्तुत कर लय, संगीत, अलंकारों, भाषा व बिम्ब का बहुत ही अच्छे से प्रयोग किया है।

क्योंकि-ताकि इस प्रसंग के शिल्प-सौंदर्य पाठक आनंद के साथ पढ़ सके।

प्रसंग- प्रस्तुत पद्यांश महाकवि सूर्यकांत… (111 more words) …

Passage

यह दंतुरित मुसकान

(1)

तुम्हारी यह दंतुरित मुसकान

मृतक में भी डाल देगी जान

धूलि-धूसर तुम्हारे ये गात……

छोड़कर तालाब मेरी झोंपड़ी में खिल रहे जलजात

परस पाकर तुम्हारा ही प्राण,

पिघलकर जल बन गया होगा कठिन पाषाण

छू गया तुमसे कि झरने लग पड़े शेफालिका के फूल

बांस था कि बबूल?

तुम मुझे पाए नहीं पहचान?

देखते ही रहोंगे अनिमेष!

थक गए हो?

आँख लूँ मैं फेर?

क्या हुआ यदि हो सके परिचित न पहली बार?

यदि तुम्हारी माँ न माध्यम बनी होती आज

मैं न सकता देख

मै न पाता जान

तुम्हारी यह दंतुरित मुसकान

Question number: 1583 (1 of 13 Based on Passage) Show Passage

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कवि नागार्जुन दव्ारा रचित प्रस्तुत प्रसंग के भाव-सौंदर्य में बच्चे के मुँह में जब नये दाँत आते तो उसकी मुसकान कैसी लगती है?

Explanation

बच्चे के मुँह में जब नये दाँत आते हैं तो उसकी मुसकान अत्यंत मनमोहक लगती है।

क्योंकि-ऐसी मुसकान पूरे विश्व में अनोखी होती है।

प्रसंग: - प्रस्तुत पद्यांश कवि नागार्जुन द्वारा रचित कविता ’यह दंतुरित मुसकान’ से अवतरित है। कवि ने छोटे बच्चे की दंतस्वरूप सुंदर मुसकान को देखकर हृदय… (344 more words) …

Question number: 1584 (2 of 13 Based on Passage) Show Passage

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नागार्जुन द्वारा रचित प्रस्तुत प्रसंग में कवि के अनुसार बच्चे का मिट्‌टी से सना हुआ शरीर कैसा लग रहा हैं?

Explanation

नागार्जुन द्वारा रचित प्रस्तुत प्रसंग में कवि के अनुसार बच्चे का धुल-मिट्‌टी से लिप्त हुआ शरीर आकर्षक और मनमोहक लग रहा हैं।

क्योंकि- एक छोटे बच्चे का शरीर हर तरह से सुंदर होता है।

प्रसंग: - प्रस्तुत पद्यांश कवि नागार्जुन द्वारा रचित कविता ’यह दंतुरित मुसकान’ से अवतरित है। कवि… (354 more words) …

Question number: 1585 (3 of 13 Based on Passage) Show Passage

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प्रस्तुत पद्यांश कवि नागार्जुन द्वारा रचित कोनसी कविता से उद्धृत है?

Explanation

प्रस्तुत पद्यांश कवि नागार्जुन द्वारा रचित कविता ’यह दंतुरित मुसकान’ से उद्धृत है।

क्योंकि- प्रस्तुत कविता कवि को बहुत प्रिय है।

प्रसंग: - प्रस्तुत पद्यांश कवि नागार्जुन द्वारा रचित कविता ’यह दंतुरित मुसकान’ से अवतरित है। कवि ने छोटे बच्चे की दंतस्वरूप सुंदर मुसकान को देखकर हृदय में उत्पन्न होने… (341 more words) …

Question number: 1586 (4 of 13 Based on Passage) Show Passage

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नागार्जुन द्वारा रचित प्रस्तुत प्रसंग में कवि ने बच्चे का मिट्‌टी से सना हुआ शरीर की उपमा किससे दी है?

Explanation

नागार्जुन द्वारा रचित प्रस्तुत प्रसंग में कवि ने बच्चे का मिट्‌टी से सना हुआ शरीर की उपमा कवि ने कमल तालाब को छोड़कर मेरी झोपड़ी में खिल रहे हो, ऐसा कहा है।

क्योंकि-बच्चे की सुंदरता में जितनी भी उपमा दो कम है क्योंकि वह अत्यधिक सुंदर है।

प्रसंग: - प्रस्तुत… (367 more words) …

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