क्षितिज(Kshitij-Textbook)-Additional Questions (CBSE Class-10 Hindi): Questions 1581 - 1591 of 1621

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Passage

अट नहीं रही है

(1)

अट नहीं रही है

आभा फागुन की तन

सट नहीं रही है।

Question number: 1581 (4 of 5 Based on Passage) Show Passage

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » सूर्यकांत त्रिपाठी ’निराला’ उत्साह, अट नह

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Describe in Detail

कवि निराला जी दव्ारा रचित प्रस्तुत पद्यांश में कवि फागुन के लिए क्या कहता है?

Explanation

कवि कहता है फागुन में प्राकृतिक वस्तुओं या तत्वों की सुंदरता इतनी अनुपम, अद्भूत, विचित्र और मनोहारी हो गई है कि वह पूरी तरह से शरीर के अन्दर नहीं समा पा रही है। सभी ही जगह सुंदर एवं हृदय को प्रभावित करने वाले नज़ारे फैले हुए हैं, उन सभी को… (154 more words) …

Question number: 1582 (5 of 5 Based on Passage) Show Passage

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प्रस्तुत पद्यांश किस महाकवि के द्वारा रचित कविता से उद्धत है?

Explanation

प्रस्तुत पद्यांश महाकवि सूर्यकांत त्रिपाठी ’निराला’ द्वारा रचित कविता ’अट नहीं रही है’ से उद्धत है।

क्योंकि-हर कविता किसी महाकवि के द्वारा ही लिखी होती है जिससे लोग पढ़कर प्रेरित होते है।

प्रसंग- प्रस्तुत पद्यांश महाकवि सूर्यकांत त्रिपाठी ’निराला’ द्वारा रचित कविता ’अट नहीं रही है’ से उद्धत है। यहाँ… (98 more words) …

Passage

यह दंतुरित मुसकान

(1)

तुम्हारी यह दंतुरित मुसकान

मृतक में भी डाल देगी जान

धूलि-धूसर तुम्हारे ये गात……

छोड़कर तालाब मेरी झोंपड़ी में खिल रहे जलजात

परस पाकर तुम्हारा ही प्राण,

पिघलकर जल बन गया होगा कठिन पाषाण

छू गया तुमसे कि झरने लग पड़े शेफालिका के फूल

बांस था कि बबूल?

तुम मुझे पाए नहीं पहचान?

देखते ही रहोंगे अनिमेष!

थक गए हो?

आँख लूँ मैं फेर?

क्या हुआ यदि हो सके परिचित न पहली बार?

यदि तुम्हारी माँ न माध्यम बनी होती आज

मैं न सकता देख

मै न पाता जान

तुम्हारी यह दंतुरित मुसकान

Question number: 1583 (1 of 13 Based on Passage) Show Passage

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नागार्जुन द्वारा रचित प्रस्तुत प्रसंग में कवि के अनुसार बच्चे का मिट्‌टी से सना हुआ शरीर कैसा लग रहा हैं?

Explanation

नागार्जुन द्वारा रचित प्रस्तुत प्रसंग में कवि के अनुसार बच्चे का धुल-मिट्‌टी से लिप्त हुआ शरीर आकर्षक और मनमोहक लग रहा हैं।

क्योंकि- एक छोटे बच्चे का शरीर हर तरह से सुंदर होता है।

प्रसंग: - प्रस्तुत पद्यांश कवि नागार्जुन द्वारा रचित कविता ’यह दंतुरित मुसकान’ से अवतरित है। कवि… (354 more words) …

Question number: 1584 (2 of 13 Based on Passage) Show Passage

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कवि नागार्जुन दव्ारा रचित प्रस्तुत प्रसंग के भाव-सौंदर्य में बच्चा अपरिचितों को किस प्रकार देखकर पहचानता है?

Explanation

बच्चा अपरिचित को अपलक देखता हुआ पहचानने का प्रयत्न करता है।

क्योंकि-बच्चे के लिए किसी अन्जान व्यक्ति को पहचानना मुश्किल होता है।

प्रसंग: - प्रस्तुत पद्यांश कवि नागार्जुन द्वारा रचित कविता ’यह दंतुरित मुसकान’ से अवतरित है। कवि ने छोटे बच्चे की दंतस्वरूप सुंदर मुसकान को देखकर हृदय में उत्पन्न… (342 more words) …

Question number: 1585 (3 of 13 Based on Passage) Show Passage

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प्रस्तुत पद्यांश कवि नागार्जुन द्वारा रचित कोनसी कविता से उद्धृत है?

Explanation

प्रस्तुत पद्यांश कवि नागार्जुन द्वारा रचित कविता ’यह दंतुरित मुसकान’ से उद्धृत है।

क्योंकि- प्रस्तुत कविता कवि को बहुत प्रिय है।

प्रसंग: - प्रस्तुत पद्यांश कवि नागार्जुन द्वारा रचित कविता ’यह दंतुरित मुसकान’ से अवतरित है। कवि ने छोटे बच्चे की दंतस्वरूप सुंदर मुसकान को देखकर हृदय में उत्पन्न होने… (341 more words) …

Question number: 1586 (4 of 13 Based on Passage) Show Passage

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कवि नागार्जुन दव्ारा रचित प्रस्तुत प्रसंग के भाव-सौंदर्य क्या हैं?

Explanation

कवि नागार्जुन दव्ारा रचित प्रस्तुत प्रसंग के भाव-सौंदर्य यह है कि एक छोटे बच्चे के मुँह में नये दांत आने पर जब वह मुस्कराता देता है तो मानों हर व्यक्ति के मन में प्रेम की भावना उत्पन्न होने लगती है चाहे उस व्यक्ति का मन कठोर ही क्यों न हो।… (420 more words) …

Question number: 1587 (5 of 13 Based on Passage) Show Passage

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कवि नागार्जुन दव्ारा रचित प्रस्तुत पद्यांश के शिल्प-सौंदर्य क्या है?

Explanation

प्रस्तुत पद्यांश के शिल्प-सौंदर्य यह है कि इसमें कवि ने बच्चे की दंतस्वरूप मुसकान का बहुत सुंदर व अद्भूत चित्र प्रस्तुत किया है साथ में अलंकारों, बिम्बों, शैली, गुण व भाषा आदि का बहुत ही मार्मिक तरीके से प्रयोग कर प्रस्तुत किया हैं।

क्योंकि-ताकि कवि नागार्जुन दव्ारा रचित प्रस्तुत पद्यांश… (378 more words) …

Question number: 1588 (6 of 13 Based on Passage) Show Passage

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नागार्जुन द्वारा रचित प्रस्तुत प्रसंग में कवि ने बच्चे का मिट्‌टी से सना हुआ शरीर की उपमा किससे दी है?

Explanation

नागार्जुन द्वारा रचित प्रस्तुत प्रसंग में कवि ने बच्चे का मिट्‌टी से सना हुआ शरीर की उपमा कवि ने कमल तालाब को छोड़कर मेरी झोपड़ी में खिल रहे हो, ऐसा कहा है।

क्योंकि-बच्चे की सुंदरता में जितनी भी उपमा दो कम है क्योंकि वह अत्यधिक सुंदर है।

प्रसंग: - प्रस्तुत… (367 more words) …

Question number: 1589 (7 of 13 Based on Passage) Show Passage

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नागार्जुन द्वारा रचित प्रस्तुत प्रसंग में बच्चे का स्पर्श पाकर कवि का मन किस तरह से भावुक हो जाता हैं?

Explanation

नागार्जुन द्वारा रचित प्रस्तुत प्रसंग में बच्चे की कोमलता को पाकर मन इस तरह भावात्मक हो जाता है जैसे बच्चे के छूने मात्र से कठोर पत्थर पिघलकर पानी बन गया हो। अर्थात कठोर हृदय वाला भी पिघल जाता है

क्योंकि-बच्चे का स्पर्श हर व्यक्ति के हृदय के भाव को प्रभावित… (372 more words) …

Question number: 1590 (8 of 13 Based on Passage) Show Passage

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कवि नागार्जुन दव्ारा रचित प्रस्तुत प्रसंग के भाव-सौंदर्य में बच्चे के मुँह में जब नये दाँत आते तो उसकी मुसकान कैसी लगती है?

Explanation

बच्चे के मुँह में जब नये दाँत आते हैं तो उसकी मुसकान अत्यंत मनमोहक लगती है।

क्योंकि-ऐसी मुसकान पूरे विश्व में अनोखी होती है।

प्रसंग: - प्रस्तुत पद्यांश कवि नागार्जुन द्वारा रचित कविता ’यह दंतुरित मुसकान’ से अवतरित है। कवि ने छोटे बच्चे की दंतस्वरूप सुंदर मुसकान को देखकर हृदय… (344 more words) …

Question number: 1591 (9 of 13 Based on Passage) Show Passage

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नागार्जुन द्वारा रचित प्रस्तुत प्रसंग में बच्चे के स्पर्श मात्र से कवि के जीवन में किसका संचार हो गया है?

Explanation

है बच्चे तुम्हारे स्पर्शमात्र से मेरे जीवन में सुख और खुशी उत्पन्न हो गई, मेरा जीवन खुशियों से भर गया है अर्थात बच्चे के स्पर्श मात्र से कवि केे जीवन में सुख और आनंद का संचार हो गया।

क्योंकि-बच्चे का छूना है ही इतना मोहक कि बस हम अपने सारे… (375 more words) …

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