क्षितिज(Kshitij-Textbook)-Additional Questions (CBSE Class-10 Hindi): Questions 1565 - 1576 of 1621

Get 1 year subscription: Access detailed explanations (illustrated with images and videos) to 2295 questions. Access all new questions we will add tracking exam-pattern and syllabus changes. View Sample Explanation or View Features.

Rs. 1650.00 or

Passage

फसल

एक के नहीं,

दो के नहीं,

ढेर सारी नदियों के पानी का जादू:

एक के नहीं,

दो के नहीं,

लाख-लाख कोटि-कोटि हाथों के स्पर्श की गरिमा:

एक के नहीं,

दो के नहीं,

हज़ार-हज़ार खेतों की मिट्‌टी का गुण धर्म:

Question number: 1565 (1 of 6 Based on Passage) Show Passage

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » नागार्जुन यह दंतुरित मुसकान, फसल

Essay Question▾

Describe in Detail

नागार्जुन द्वारा रचित प्रस्तुत पद्यांश में कवि के अनुसार फसल किस प्रकार उत्पन्न होती हैं?

Explanation

प्रस्तुत पद्यांश में कवि के अनुसार फसलों को पैदा करने के लिए एक से अधिक अर्थात लाख-लाख, करोड़-करोड़ लोगों का हाथ होता है जो दिन-रात फसल को उगाने में परिश्रम व मेहनत करते रहते हैं। एक फसल अनगिनित किसानों और मजदूरों के मेहनत व परिश्रम का ही फल है। प्रकृति… (296 more words) …

Question number: 1566 (2 of 6 Based on Passage) Show Passage

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » नागार्जुन यह दंतुरित मुसकान, फसल

Essay Question▾

Describe in Detail

प्रस्तुत पद्यांश कवि नागार्जुन द्वारा रचित कविता में यहाँ कवि ने फसल के बारे में क्या बताया हैं?

Explanation

फसल स्वयं पैदा न होकर नदियों के जल, किसानों के परिश्रम और खेतों की विभिन्न प्रकार की मिट्‌टियों का फल होती है।

क्योंकि- कोई भी काम अकेले नहीं होता है जब उसे सब मिलकर करते है तो उसका फल भी अच्छा मिलता है।

प्रसंग- प्रस्तुत पद्यांश कवि नागार्जुन द्वारा रचित… (191 more words) …

Question number: 1567 (3 of 6 Based on Passage) Show Passage

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » नागार्जुन यह दंतुरित मुसकान, फसल

Essay Question▾

Describe in Detail

कवि नागार्जुन द्वारा रचित प्रस्तुत पद्यांश के शिल्प-सौंदर्य क्या हैं?

Explanation

प्रस्तुत पद्यांश के शिल्प-सौंदर्य है कि इसमें कवि को पूरी भूमि व श्रम व मेहनत करने वालों से बेहद लगाव हैं। जिसका कवि ने बहुत ही मार्मिक चित्र प्रस्तुत किया हैं इसके अलावा उन्होंने खड़ी बोली, छंद, अलंकारों, भाषा आदि का बहुत ही सुंदर प्रयोग किया हैं।

क्योंकि- ताकि उपरोक्त… (212 more words) …

Question number: 1568 (4 of 6 Based on Passage) Show Passage

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » नागार्जुन यह दंतुरित मुसकान, फसल

Essay Question▾

Describe in Detail

कवि नागार्जुन द्वारा रचित उपर्युक्त प्रसंग के भाव-सौंदर्य क्या हैं?

Explanation

कवि नागार्जुन द्वारा रचित उपर्युक्त प्रसंग के भाव-सौंदर्य यह है कि इसमें कवि फसल के बारे बताते हुए कहता है एक फसल के निर्माण में अनेक लोगों के हाथ लगने व प्रकृति के योगदान से ही अच्छी प्रकार की फसल तैयार की जा सकती हैं जिससे उसका परिणाम भी अच्छा… (224 more words) …

Question number: 1569 (5 of 6 Based on Passage) Show Passage

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » नागार्जुन यह दंतुरित मुसकान, फसल

Essay Question▾

Describe in Detail

प्रस्तुत पद्यांश कवि नागार्जुन द्वारा रचित कौनसी कविता से उद्धृत है।

Explanation

प्रस्तुत पद्यांश कवि नागार्जुन द्वारा रचित ’फसल’ कविता से उद्धृत है।

क्योंकि- उपरोक्त कविता कवि की मुख्य कविता हैं।

प्रसंग- प्रस्तुत पद्यांश कवि नागार्जुन द्वारा रचित कविता ’फसल’ से अवतरित है। यहाँ कवि ने फसल के बारे में बताना चाहा है कि एक फसल के निर्माण में एक नहीं अनेक… (167 more words) …

Question number: 1570 (6 of 6 Based on Passage) Show Passage

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » नागार्जुन यह दंतुरित मुसकान, फसल

Essay Question▾

Describe in Detail

कवि नागार्जुन द्वारा रचित उपर्युक्त प्रसंग में कवि के अनुसार फसल के बिना हमारा जीवन कैसे बताया हैं?

Explanation

कवि के अनुसार फसल के बिना हमारा जीवन निरर्थक हो जाता है।

क्योंकि- जब धरती पर अनाज ही नहीं रहेगा तो व्यक्ति कैसे जी पाएगा।

प्रसंग- प्रस्तुत पद्यांश कवि नागार्जुन द्वारा रचित कविता ’फसल’ से अवतरित है। यहाँ कवि ने फसल के बारे में बताना चाहा है कि एक फसल… (173 more words) …

Passage

(3)

मिला कहाँ वह सुख जिसका मैं स्वप्न देखकर जाग गया।

आलिंगन में आते-आते मुसक्या कर जो भाग गया।

जिसके अरूण-कपोलों की मतवाली सुदंर छाया में।

अनुरागिनी उषा लेती थी निज सुहाग मधुमाया में।

Question number: 1571 (1 of 3 Based on Passage) Show Passage

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » जयशंकर प्रसाद आत्मकथ्य

Essay Question▾

Describe in Detail

जयशंकर प्रसाद दव्ारा रचित प्रस्तुत पद्यांश शिल्प-सौंदर्य क्या है?

Explanation

जयशंकर प्रसाद दव्ारा रचित प्रस्तुत पद्यांश शिल्प-सौंदर्य है कि यहां कवि ने जीवन की सत्यता व अभावों के बारे में बहुत मनोरम चित्र प्रस्तुत किया है जिसमें अलंकारों, बिम्बों, शब्दों व मिश्रित भाषा का बहुत ही सुंदर रूप प्रकट किया है।

क्योंकि- ताकि कवि दव्ारा रचित प्रस्तुत पद का यह… (198 more words) …

Question number: 1572 (2 of 3 Based on Passage) Show Passage

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » जयशंकर प्रसाद आत्मकथ्य

Essay Question▾

Describe in Detail

जयशंकर प्रसाद दव्ारा रचित प्रस्तुत पद्यांश में कवि क्या कहना चाह रहा है?

Explanation

प्रस्तुत पद्यांश में कवि क्या कहना चाह रहा है कि कवि ने अपने जीवन के उन सुखद क्षणों का उल्लेख करना चाहा है जो कवि के बहुत पास आकर बहुत दूर चले गए अर्थात वह अपने सुख का थोड़ा सा भी उपभोग नहीं कर पाया।

क्योंकि-कभी इसांन के समय न… (204 more words) …

Question number: 1573 (3 of 3 Based on Passage) Show Passage

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » जयशंकर प्रसाद आत्मकथ्य

Essay Question▾

Describe in Detail

जयशंकर प्रसाद दव्ारा रचित प्रस्तुत पद्यांश भाव-सौंदर्य क्या है?

Explanation

जयशंकर प्रसाद दव्ारा रचित प्रस्तुत पद्यांश भाव-सौंदर्य यह है कि कवि अपने जीवन की उन सुखी दिनों की कल्पना कर लिख रहा है जिसका आनंद कवि को नहीं मिल पाया है वे सुख बहुत पास होते हुए भी समय अभाव के कारण दूर हो गए। इसलिए कवि कहता है हम… (219 more words) …

Question number: 1574

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » जयशंकर प्रसाद आत्मकथ्य

Essay Question▾

Describe in Detail

जयशंकर प्रसाद जी दव्ारा रचित कहानी संग्रह व निबंध कौन-कौन से है?

Explanation

उनके दव्ारा रचित कहानी संग्रह व निबंध निम्नलिखत है-

कहानी संग्रह-आँधी, इन्द्रजाल, छाया, प्रतिध्वनि आदि।

निबंध-काव्यकला एवं अन्य निबंध

क्योंकि-कवि ने अपनी रचनाओं में अनेक कृतियों के अलावा कहानी संग्रह व निबंध भी लिखे हैं।

प्रमुख रचनाएँ-हिंदी साहित्यकार के रूप में प्रसाद जी की प्रतिभा बहुमुखी है। उन्होंने… (52 more words) …

Question number: 1575

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » जयशंकर प्रसाद आत्मकथ्य

Essay Question▾

Describe in Detail

हिंदी साहित्य के अमर कवि व लेखक जयशंकर प्रसाद का जन्म कहाँ व किस सन्‌ में हुआ?

Explanation

हिंदी साहित्य के अमर कवि व लेखक जयशंकर प्रसाद का जन्म काशी के ’सुघंनी साहू’ के प्रसिद्ध परिवार में सन्‌ 1889 में हुआ।

क्योंकि-हर व्यक्ति का जन्म ईश्वर के माध्यम से तय होता हैं।

”छायावाद के श्रेष्ठ कवि जयशंकर प्रसाद एक ऐसे विलक्षण एवं विराट व्यक्तित्व को लेकर अवतरित हुए… (178 more words) …

Question number: 1576

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » जयशंकर प्रसाद आत्मकथ्य

Essay Question▾

Describe in Detail

जयशंकर प्रसाद जी ने संस्कार किस से प्राप्त किये?

Explanation

उन्होंने उदारता, विद्वानों का आदर और विद्याभ्यास जैसे संस्कार तो पूर्वजों की परंपरा से ही प्राप्त किये।

क्योंकि-ऐसे संस्कार व्यक्ति में पूर्वजों से स्वत: ही अनुकरण के माध्यम से अपनेआप आ जाते हैं।

”छायावाद के श्रेष्ठ कवि जयशंकर प्रसाद एक ऐसे विलक्षण एवं विराट व्यक्तित्व को लेकर अवतरित हुए थे,… (177 more words) …

Sign In