क्षितिज(Kshitij-Textbook)-Additional Questions (CBSE (Central Board of Secondary Education- Board Exam) Class-10 Hindi): Questions 1277 - 1289 of 1621

Get 1 year subscription: Access detailed explanations (illustrated with images and videos) to 2295 questions. Access all new questions we will add tracking exam-pattern and syllabus changes. View Sample Explanation or View Features.

Rs. 1650.00 or

Passage

(1)

बादल, गरजो! -

घेर घेर घोर गगन, धाराधर ओ!

ल्लित ललित, काले घुँघराले,

बाल कल्पना के से पाले,

विद्युत-छबि उर में, कवि, नवजीवन वाले!

वज्र, छिपा, नूतन कविता

फिर भर दो-

बादल, गरजो!

Question number: 1277 (4 of 5 Based on Passage) Show Passage

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » सूर्यकांत त्रिपाठी ’निराला’ उत्साह, अट नह

Essay Question▾

Describe in Detail

कवि निराला जी दव्ारा रचित प्रस्तुत पद्यांश में कवि ने बादल का आह्‌वान करते हुए क्या कहा है?

Explanation

कवि बादल से कह रहा है कि अरे बादल! तुम गरजना करते हुए आओ! तुम उमड़-घुमड़ कर तेज ध्वनि करते हुए पूरे आकाश को घेरते हुए सब जगह छा जाओ। अरे ओ बादल! तुम सुदंर, सुदंर और घुमने वाले काले रंग वाले हो और तुम बच्चों की अद्भूत कल्पनाओं की पतवारों (नांव चलाने वाली डंडा) तथा पालों के समान दिखाई देते हो। हे नया जीवन देने वाले बादल रूपी कवि! तुम्हारे मन में बिजल

… (1456 more words) …

Question number: 1278 (5 of 5 Based on Passage) Show Passage

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » सूर्यकांत त्रिपाठी ’निराला’ उत्साह, अट नह

Essay Question▾

Describe in Detail

कवि निराला जी दव्ारा रचित प्रस्तुत पद्यांश के शिल्प-सौंदर्य क्या हैं?

Explanation

कवि निराला जी दव्ारा रचित प्रस्तुत पद्यांश शिल्प-सौंदर्य यह है कि इसमें कवि को बादल बहुत प्रिय लगते है वह बादल कवि का अच्छा विषय बन गया है। इसके साथ में अलंकारों, मानवीकरण, लय, व भाषा आदि का बहुत ही सुंदर चित्रण किया है।

क्योंकि-ताकि कवि का उपरोक्त शिल्प-सौंदर्य पाठक को पढ़ने में आनंद आ जाए।

प्रसंग- प्रस्तुत पद्यांश महाकवि सूर्यकांत त्रिपाठी निरा

… (1114 more words) …

Question number: 1279

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » जयशंकर प्रसाद आत्मकथ्य

Essay Question▾

Describe in Detail

जयशंकर प्रसाद जी दव्ारा रचित उन्होंने अपनी रचनाओं में किसका गम्भीरता से वर्णन किया है?

Explanation

उन्होंने उन्होंने अपनी रचनाओं में प्राचीन भारतीय साहित्य, संस्कृति और प्रेमदर्शन का गम्भीरता से वर्णन किया है।

क्योंकि-ताकि उपरोक्त बातों का ज्ञान भी लोगों को हो सके।

काव्यगत विशेषताएँ- जयशंकर प्रसाद जी नाटक और काव्य क्षेत्र में मौलिकता लाने वाले प्रतिभा-सम्पन्न साहित्यकार हैं। उन्हे छायावादी काव्य धारा का प्रवर्तक माना जाता है। उन्होंने नाटक और

… (733 more words) …

Question number: 1280

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » नागार्जुन यह दंतुरित मुसकान, फसल

Essay Question▾

Describe in Detail

नागार्जुन जी स्वभाव कैसा था?

Explanation

वे मस्तमौला और फक्कड़ स्वभाव के थे।

क्योंकि -ऐसेे कवि पूर्ण रूप से स्वतंत्र होते है।

“प्रख्यात कवि नागार्जुन जी के हृदय में शोषित व दलित वर्ग के प्रति अपार संवेदना देखने को मिलती है। उन्होंने अपनी कविताओं में पीड़ित व त्रस्त व्यक्तियों के प्रति अद्धितीय सहानुभूति प्रदर्शित किया है। साथ ही अन्याय के विरुद्ध आवाज उठाने की भी प्रेरणा दी है।”

जीवन परिच

… (1319 more words) …

Question number: 1281

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » नागार्जुन यह दंतुरित मुसकान, फसल

Short Answer Question▾

Write in Short

नागार्जुन दव्ारा रचित काव्यों में और किस-किसका रूप देखने को मिलता हैं?

Question number: 1282

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » नागार्जुन यह दंतुरित मुसकान, फसल

Essay Question▾

Describe in Detail

शिक्षा ग्रहण करने के बाद नागार्जुन को कहां जाने का भी अवसर मिला?

Explanation

शिक्षा ग्रहण करने के बाद नागार्जुन को विदेश जाने का अवसर भी मिला।

क्योंकि-कभी-कभी कोई व्यक्ति अच्छा पढ़ने के बाद उसे देश से बाहर जाने का अवसर मिलता है।

“प्रख्यात कवि नागार्जुन जी के हृदय में शोषित व दलित वर्ग के प्रति अपार संवेदना देखने को मिलती है। उन्होंने अपनी कविताओं में पीड़ित व त्रस्त व्यक्तियों के प्रति अद्धितीय सहानुभूति प्रदर्शित किया है।

… (1396 more words) …

Question number: 1283

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » जयशंकर प्रसाद आत्मकथ्य

Essay Question▾

Describe in Detail

जयशंकर प्रसाद जी को किसका प्रवर्तक माना जाता है?

Explanation

उन्हें छायावादी काव्य धारा का प्रवर्तक माना जाता है।

क्योंकि-उनकी कविताएँ सबसे अधिक श्रेष्ठ रही हैं।

काव्यगत विशेषताएँ- जयशंकर प्रसाद जी नाटक और काव्य क्षेत्र में मौलिकता लाने वाले प्रतिभा-सम्पन्न साहित्यकार हैं। उन्हे छायावादी काव्य धारा का प्रवर्तक माना जाता है। उन्होंने नाटक और कविता के क्षेत्र की तरह ही कहानी क्षेत्र में भी युगान्तर उपस्थित क

… (655 more words) …

Question number: 1284

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » नागार्जुन यह दंतुरित मुसकान, फसल

Short Answer Question▾

Write in Short

नागार्जुन जी दव्ारा रचित काव्यों में ओर किसका चित्रण हुआ है?

Question number: 1285

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » जयशंकर प्रसाद आत्मकथ्य

Essay Question▾

Describe in Detail

जयशंकर प्रसाद के पिता देवी प्रसाद जी किस प्रकार के व्यक्ति थे?

Explanation

उनके पिता देवी प्रसाद जी बड़े धर्म-परायण और उदार-हृदय के व्यक्ति थे।

क्योंकि-हर व्यक्ति अपना एक स्वभाव या व्यवहार होता हैं।

“छायावाद के श्रेष्ठ कवि जयशंकर प्रसाद एक ऐसे विलक्षण एवं विराट व्यक्तित्व को लेकर अवतरित हुए थे, जिसमें विभिन्न प्रकार की साहित्यिक प्रतिभाएँ समिश्रित व विद्यमान थीं। जो कि युग-युग से चली आ रही प्राचीन धारा को एक नवीन मोड़ देन

… (1242 more words) …

Passage

(2)

यह विडंबना! अरी सरलते तेरी हँसी उड़ाऊँ मैं।

भूले अपनी या प्रवंचना औरों की दिखलाऊँ मैं।

उज्ज्वल गाथा कैसे गाऊँ, मधुर चाँदनी रातों की।

और खिल-खिला कर हँसते होने वाली उन बातों की।

Question number: 1286 (1 of 4 Based on Passage) Show Passage

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » जयशंकर प्रसाद आत्मकथ्य

Essay Question▾

Describe in Detail

जयशंकर दव्ारा रचित उपर्युक्त प्रसंग के भाव सौंदर्य क्या हैं?

Explanation

जयशंकर दव्ारा रचित उपर्युक्त प्रसंग के भाव सौंदर्य है कि इसमें कवि ने अपने जीवन को बहुत ही सरल बताया है लेकिन इस जीवन का कोई उपहास करे वह कवि को पसंद नहीं है। इसके साथ में कवि के अनुसार बीते हुए सुखी जीवन का उल्लेख करना कठिन होता है एवं कवि दूसरों के दु: खों को देखकर भूलना भी नहीं चाहता हैं।

क्योंकि-कभी व्यक्ति इतना दयावान होता है कि उसको दूसरों

… (1388 more words) …

Question number: 1287 (2 of 4 Based on Passage) Show Passage

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » जयशंकर प्रसाद आत्मकथ्य

Essay Question▾

Describe in Detail

जयशंकर दव्ारा रचित उपर्युक्त प्रसंग के शिल्प सौंदर्य क्या हैं?

Explanation

जयशंकर दव्ारा रचित उपर्युक्त प्रसंग के शिल्प सौंदर्य है कि कवि आत्मकथ्य कविता के माध्यम से कहना चाहा रहा की उसका जीवन बहुत ही सरल व अभावों से युक्त है उस जीवन का वह दूसरों के दव्ारा मजाक नहीं बनवाना चाहता हैं एवं यहां पर चांदनी रात को सुखी दिन का प्रतीक बताकर लेखक ने सुख की यादों का बहुत अद्भूत चित्र प्रस्तुत किया है साथ में कवि ने कहीं-कहीं स्था

… (1469 more words) …

Question number: 1288 (3 of 4 Based on Passage) Show Passage

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » जयशंकर प्रसाद आत्मकथ्य

Essay Question▾

Describe in Detail

जयशंकर दव्ारा रचित प्रस्तुत प्रसंग में कवि क्या कहना चाह रहा है?

Explanation

जयशंकर प्रसाद दव्ारा रचित प्रस्तुत पद में कवि कह रहा है कि कवि अपने जीवन की कहानी को एक साधारण व्यक्ति की कहानी बताता है। वह अपने सरलरूपी सीधे साधे जीवन का मजाक करवाने के पक्ष में नहीं है।

क्योंकि-कवि कहता जैसे सब लोगो के जीवन में पीड़ा व दुख है उसी तरह मेरा भी जीवन है इसलिए इसे बताने से कोई मतलब नहीं हैं। उल्टा सब लोग उस पर हँसेगे ही।

प्रसंग-जयशं

… (1285 more words) …

Question number: 1289 (4 of 4 Based on Passage) Show Passage

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » जयशंकर प्रसाद आत्मकथ्य

Essay Question▾

Describe in Detail

जयशंकर दव्ारा रचित प्रस्तुत प्रसंग में कवि अपने जीवन के माध्यम से क्या बताना चाह रहा है?

Explanation

कहानी के माध्यम से कवि यह कह रहा है कि या तो कवि अपने जीवन में मिलने वाले धोखों को भूल जाएं या फिर दूसरों के दव्ारा दिए गए धोखे के कार्यों का वर्णन करें। कवि किस तरह से सुखी जीवन की साफ निर्मल कहानी का वर्णन करें? कवि कह रहा है कि जीवन में खिल-खिलाकर हँसने वाली बातों का कवि किस प्रकार वर्णन करें? अर्थात कवि जीवन की कहानी को किस तरह सब लोगों के सा

… (1528 more words) …

f Page
Sign In