क्षितिज(Kshitij-Textbook) (CBSE (Central Board of Secondary Education- Board Exam) Class-10 Hindi): Questions 977 - 988 of 1777

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Passage

(2)

तारसप्तक में जब बैठने लगता है उसका गला

प्रेरणा साथ छोड़ती हुई उत्साह अस्त होता हुआ

आवाज़ से राख जैसा कुछ गिरता हुआ

तभी मुख्य गायक को ढाँढस बंधाता

कहीं से चला आता है संगतकार का स्वर

कभी-कभी वह यों ही देता है उसका साथ

यह बताने के लिए कि वह अकेला नहीं है

और यह कि फिर से गाया जा सकता है

गाया जा चुका राग

और उसकी आवाज़ में जो हिचक साफ़ सुनाई देती है

या अपने स्वर को ऊँचा न उठाने की जो कोशिश है

उसे विफलता नहीं

उसकी मनुष्यता समझा जाना चाहिए।

Question number: 977 (5 of 8 Based on Passage) Show Passage

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कवि मंगलेश डबराल द्वारा रचित प्रस्तुत प्रसंग की व्याख्या में संगतकार की मानवीय भावना कैसी है?

Question number: 978 (6 of 8 Based on Passage) Show Passage

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कवि मंगलेश डबराल द्वारा रचित प्रस्तुत प्रसंग के भाव-सौंदर्य क्या हैं?

Question number: 979 (7 of 8 Based on Passage) Show Passage

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कवि मंगलेश डबराल द्वारा रचित प्रस्तुत प्रसंग में संगतकार किस प्रकार से मुख्य गायक को सफल बना देते हैं?

Question number: 980 (8 of 8 Based on Passage) Show Passage

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कवि मंगलेश डबराल द्वारा रचित प्रस्तुत प्रसंग की व्याख्या में मुख्य गायक का साथ संगतकार कब देता है?

Question number: 981

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ऋतुराज जी दव्ारा रचित कविताओं का केंद्रीय भाव किन मुद्दों पर आधारित रहा है?

Question number: 982

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मंगलेश डबराल जी का जन्म कहाँ व किस सन्‌ में हुआ?

Passage

कवित्त

डार द्रुम पलना बिछौना नव पल्लव के,

सुमन झिंगूला सोहै तन छबि भारी दै।

पवन झूलावै, केकी-कीर बरतावैं ’देव’

कोकिल हलावै-हलसावै कर तारी दै।।

पूरित पराग सों उतारो करै राई नोन,

कंजकली नायिका लतान सिर सारी दै।

मदन महीप जू को बालक बसंत ताहि,

प्रातहि जगावत गुलाब चटकारी दै।।

Question number: 983 (1 of 4 Based on Passage) Show Passage

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देव दव्ारा रचित प्रस्तुत पद्यांश में कवि ने किसका वर्णन किया है?

Question number: 984 (2 of 4 Based on Passage) Show Passage

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देव दव्ारा रचित प्रस्तुत पद्यांश में कमल की कली रूपी नायिका किस प्रकार झूम रही है?

Question number: 985 (3 of 4 Based on Passage) Show Passage

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देव दव्ारा रचित प्रस्तुत पद्यांश का भाव-सौंदर्य क्या है?

Question number: 986 (4 of 4 Based on Passage) Show Passage

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देव दव्ारा रचित प्रस्तुत पद्यांश का शिल्प-सौंदर्य क्या है?

Question number: 987

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कवि देव कौनसे सम्पन्न कवि थे?

Passage

(4)

हरि हैं राजनीति पढ़ि आए।

समुझी बात कहत मधुकर के, समाचार सब पाए।

इक अति चतुर हुते पहिलैं ही, अब गुरु ग्रंथ पढ़ाए।

बढ़ी बुद्धि जानी जो उनकी, जोग-सँदेस पठाए।

ऊधौं भले लोग आगे के, पर हित डोलत धाए।

अब अपनै मन फेर पाइहैं, चलत जु हुते चुराए।

ते क्यौं अनीति करैं आपुन, जे और अनीति छुड़ाए।

राज धरम तौ यहै ’सूर’, जो प्रजा न जाहिं सताए।।

Question number: 988 (1 of 4 Based on Passage) Show Passage

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Describe in Detail

सूरदास दव्ारा रचित उपर्युक्त पद के शिल्प-सौंदर्य क्या है?

Explanation

उपर्युक्त पद के सूरदास दव्ारा रचित शिल्प-सौंदर्य है कि इस पद में भाषा, शब्द, भाव गायक, संगीत, अलंकार, लोकोक्ति आदि का बहुत ही अच्छे ढंग से प्रयोग किया गया है इसके साथ में इन पदों के बीच-बीच में व्यंग्य का भी बेहतर तरीके से प्रयोग किया हैं।

क्योंकि-ताकि सूरदास दव्ारा

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