क्षितिज(Kshitij-Textbook) (CBSE (Central Board of Secondary Education- Board Exam) Class-10 Hindi): Questions 960 - 971 of 1777

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Passage

सवैया

पांयनि नूपुर मंजु बजैं, कटि किंकिन कै धुनि की मधुराई।

सांवरे अंग लसै पट पीत, हिये हुलसै बनमाल सुहाई।

माथे किरीट बड़े दृग चंचल, मंद हँसी मुखचंद जुन्हाई।

जै जग-मंदिर-दीपक सुदंर, श्रीब्रजदूलह ’देव’ सहाई।।

कवित्त

डार द्रुम पलना बिछौना नव पल्लव के,

सुमन झिंगूला सोहै तन छबि भारी दै।

पवन झूलावै, केकी-कीर बरतावैं ’देव’

कोकिल हलावै-हलसावै कर तारी दै।।

पूरित पराग सों उतारो करै राई नोन,

कंजकली नायिका लतान सिर सारी दै।

मदन महीप जू को बालक बसंत ताहि,

प्रातहि जगावत गुलाब चटकारी दै।।

कवित्त

फटिक सिलानि सौं सुधार्‌यों सुधा मंदिर,

उदधि दधि को सो अधिकाइ उमगे अमंद।

बाहर ते भीतर लौं भीति न दिखैए ’देव’

दूध को सो फेन फैल्यों आंगन फरसबंद।

तारा सी तरुनि तामें ठाढ़ी झिलमिली होति,

मोतिन की ज्योति मिल्यो मल्लिका को मकरंद।

आरसी से अंबर में आभा सी उजारी लगै,

प्यारी राधिका को प्रतिबिंब सो लगत चंद।।

Question number: 960 (12 of 13 Based on Passage) Show Passage

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कवि ने ’श्री ब्रजदूलह’ किसके लिए प्रयुक्त किया है और उन्हें संसार रूपी मंदिर का दीपक क्यों कहा है?

Question number: 961 (13 of 13 Based on Passage) Show Passage

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चाँदनी रात की सुदंरता को कवि ने किन-किन रूपों में देखा है?

Passage

सवैया

पांयनि नूपुर मंजु बजैं, कटि किंकिन कै धुनि की मधुराई।

सांवरे अंग लसै पट पीत, हिये हुलसै बनमाल सुहाई।

माथे किरीट बड़े दृग चंचल, मंद हँसी मुखचंद जुन्हाई।

जै जग-मंदिर-दीपक सुदंर, श्रीब्रजदूलह ’देव’ सहाई।।

Question number: 962 (1 of 9 Based on Passage) Show Passage

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देव जी दव्ारा रचित उपरोक्त पद्यांश में कृष्ण जी की आँखे कैसी है?

Question number: 963 (2 of 9 Based on Passage) Show Passage

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देव जी दव्ारा रचित उपर्युक्त प्रसंग का भाव सौंदर्य क्या है?

Question number: 964 (3 of 9 Based on Passage) Show Passage

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देव कवि द्वारा रचित प्रस्तुत पद्यांश में बाल कृष्ण के पैरों में पायल के घूँघरू कैसी आवाज़ में बज रहेे हैं।

Question number: 965 (4 of 9 Based on Passage) Show Passage

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देव कवि द्वारा रचित प्रस्तुत पद्यांश में कृष्ण के हृदय पर क्या सुशोभित हो रहा है?

Question number: 966 (5 of 9 Based on Passage) Show Passage

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देव कवि द्वारा रचित प्रस्तुत पद्यांश में कृष्ण के साँवले शरीर पर पीले वस्त्र कैसे लग रहे है?

Question number: 967 (6 of 9 Based on Passage) Show Passage

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देव कवि द्वारा रचित प्रस्तुत पद्यांश में कृष्ण जी के मस्तक पर क्या विराजमान हैं?

Question number: 968 (7 of 9 Based on Passage) Show Passage

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प्रस्तुत पद्यांश किस कवि द्वारा रचित है?

Question number: 969 (8 of 9 Based on Passage) Show Passage

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देव जी दव्ारा रचित उपर्युक्त प्रसंग के शिल्प सौंदर्य क्या है?

Question number: 970 (9 of 9 Based on Passage) Show Passage

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देव जी दव्ारा रचित उपरोक्त पद्यांश में उनके मुख रूपी चाँद पर हँसी की चाँदनी कैसी लग रही है।

Question number: 971

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माथुर जी कौनसे युग के कवि है?

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