क्षितिज(Kshitij-Textbook) (CBSE (Central Board of Secondary Education- Board Exam) Class-10 Hindi): Questions 937 - 949 of 1777

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Question number: 937

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » देव सवैया, कवित्त

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उन आश्रयदाताओं के नाम क्या-क्या हैं?

Passage

(6)

कहेउ लखन मुनि सीलु तुम्हारा। को नहि जान बिदित संसारा।।

माता तिहि उरिन भये नीकें। गुररिनु रहा सोचु बड़ जी कें।।

सो जनु हमरेहि माथें काढ़ा। दिन चलि गये ब्याज बड़ बाढ़ा।।

अब आनिअ ब्यवहरिआ बोली। तुरत देउँ मैं थैली खोली।।

सुनि कटु बचन कुठार सुधारा। हाय हाय सब सभा पुकारा।।

भृगुबर परसु देखाबहु मोही। बिद्र बिचारि बचौं नृप द्रोही।।

मिले न कबहूँ सुभट रन गाढ़े। दव्जदेवता घरहि के बाढ़े।।

अनुचित कहि सबु लोगु पुकारे। रघुपति सयनहि लखनु नेवारे।।

लखन उतर आहुति सरिस भृगुबरकोपु कृसानु।

बढ़त देखि जल सम बचन बोले रघुकुलभानु।।

Question number: 938 (1 of 3 Based on Passage) Show Passage

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » तुलसीदास राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद

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तुलसीदास जी दव्ारा रचित उपरोक्त प्रसंग के शिल्प-सौंदर्य क्या हैं?

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Question number: 939 (2 of 3 Based on Passage) Show Passage

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » तुलसीदास राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद

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तुलसीदास जी दव्ारा रचित उपरोक्त प्रसंग में किस समय का वर्णन किया गया है?

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… (1347 more words) …

Question number: 940 (3 of 3 Based on Passage) Show Passage

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » तुलसीदास राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद

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तुलसीदास जी दव्ारा रचित उपरोक्त प्रसंग के भाव-सौंदर्य क्या है?

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… (1408 more words) …

Question number: 941

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » ऋतुराज कन्यादान

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ऋतुराज जी दव्ारा रचित उन्होंने अपनी रचनाओं में किन रस को अनेकानेक रसों में विशेष महत्व दिया है?

Question number: 942

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » मंगलेश डबराल संगतकार

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मंगलेंश डबराल ने कविता लेखन के साथ-साथ ओर किन क्षेत्र में अनेक लेख लिखें हैं?

Question number: 943

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » सूरदास पद

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सूरदास जी ने अपनी रचनाओं में किनकी लीलाओं का बड़ा मनोहारी एवं सजीव वर्णन किया हैं?

Question number: 944

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » देव सवैया, कवित्त

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श्रृंगार रस के कौनसे पक्ष में देव की रचनाओं को विशेष सफलता मिली है?

Question number: 945

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » ऋतुराज कन्यादान

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सेवानिवृत्ति के बाद अब कवि ऋतुराज जी ने कहाँ अपना निवास बना रखा है?

Question number: 946

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » तुलसीदास राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद

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संपूर्ण हिंदी साहित्य में महाकवि गोस्वामी तुलसीदास का कौनसा स्थान है।

Question number: 947

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » देव सवैया, कवित्त

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कवि देव की मृत्यु किस सन्‌ में हुई?

Question number: 948

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » देव सवैया, कवित्त

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देव एक प्रतिभावान कवि होने के साथ-साथ उनमे ओर कौनसा गुण था?

Passage

सवैया

पांयनि नूपुर मंजु बजैं, कटि किंकिन कै धुनि की मधुराई।

सांवरे अंग लसै पट पीत, हिये हुलसै बनमाल सुहाई।

माथे किरीट बड़े दृग चंचल, मंद हँसी मुखचंद जुन्हाई।

जै जग-मंदिर-दीपक सुदंर, श्रीब्रजदूलह ’देव’ सहाई।।

कवित्त

डार द्रुम पलना बिछौना नव पल्लव के,

सुमन झिंगूला सोहै तन छबि भारी दै।

पवन झूलावै, केकी-कीर बरतावैं ’देव’

कोकिल हलावै-हलसावै कर तारी दै।।

पूरित पराग सों उतारो करै राई नोन,

कंजकली नायिका लतान सिर सारी दै।

मदन महीप जू को बालक बसंत ताहि,

प्रातहि जगावत गुलाब चटकारी दै।।

कवित्त

फटिक सिलानि सौं सुधार्‌यों सुधा मंदिर,

उदधि दधि को सो अधिकाइ उमगे अमंद।

बाहर ते भीतर लौं भीति न दिखैए ’देव’

दूध को सो फेन फैल्यों आंगन फरसबंद।

तारा सी तरुनि तामें ठाढ़ी झिलमिली होति,

मोतिन की ज्योति मिल्यो मल्लिका को मकरंद।

आरसी से अंबर में आभा सी उजारी लगै,

प्यारी राधिका को प्रतिबिंब सो लगत चंद।।

Question number: 949 (1 of 13 Based on Passage) Show Passage

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’ग्लोबल वार्मिंग’ के कारण ऋतुओं में क्या परिवर्तन आ रहे हैं? इस समस्या से निपटने के लिए आपकी क्या भूमिका हो सकती हैं?

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