क्षितिज(Kshitij-Textbook) (CBSE Class-10 Hindi): Questions 855 - 867 of 1777

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Question number: 855

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » तुलसीदास राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद

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तुलसीदास जी रचनाओं में किन शब्दों की अधिकता होते हुए भी भाषा में कलिष्टता नहीं आ पाई है?

Question number: 856

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » सूरदास पद

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किस नगर व पुस्तकालय के अनुसार सूरदास के ग्रन्थों की संख्या 25 मानी जाती है?

Question number: 857

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » तुलसीदास राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद

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तुलसीदास जी दव्ारा रचित रचनाओं में से कितनी रचनाएँ प्रमाणिक निकली है?

Question number: 858

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » तुलसीदास राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद

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तुलसीदास जी का बचपन कैसे व्यतीत हुआ?

Passage

कवित्त

फटिक सिलानि सौं सुधार्‌यों सुधा मंदिर,

उदधि दधि को सो अधिकाइ उमगे अमंद।

बाहर ते भीतर लौं भीति न दिखैए ’देव’

दूध को सो फेन फैल्यों आंगन फरसबंद।

तारा सी तरुनि तामें ठाढ़ी झिलमिली होति,

मोतिन की ज्योति मिल्यो मल्लिका को मकरंद।

आरसी से अंबर में आभा सी उजारी लगै,

प्यारी राधिका को प्रतिबिंब सो लगत चंद।।

Question number: 859 (1 of 4 Based on Passage) Show Passage

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » देव सवैया, कवित्त

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कवि देव दव्ारा रचित प्रस्तुत प्रसंग में क्या कहना चाह रहे है?

Question number: 860 (2 of 4 Based on Passage) Show Passage

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » देव सवैया, कवित्त

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देव कवि दव्ारा रचित प्रस्तुत प्रसंग में कवि ने किसका वर्णन किया है?

Question number: 861 (3 of 4 Based on Passage) Show Passage

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » देव सवैया, कवित्त

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कवि देव दव्ारा रचित प्रस्तुत प्रसंग के शिल्प सौंदर्य क्या है?

Question number: 862 (4 of 4 Based on Passage) Show Passage

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » देव सवैया, कवित्त

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कवि देव दव्ारा रचित प्रस्तुत प्रसंग का भाव सौंदर्य क्या है?

Question number: 863

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » सूरदास पद

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सूरदास के किस वर्णन के दव्ारा उन्हें जंमांध नहीं कहा जा सकता?

Question number: 864

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » मंगलेश डबराल संगतकार

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डबराल जी को किस पुरस्कार तथा किस सम्मान से सम्मानित किया जा चुका है?

Question number: 865

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » मंगलेश डबराल संगतकार

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मंगलेश डबराल के दव्ारा रचित मुख्य रूप से इनके चार कविता संग्रहों के नाम क्या है?

Question number: 866

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » गिरिजाकुमार माथुर छाया मत छूना

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उसके बाद गिरिजा जी ने कौनसा कार्य किया?

Passage

(3)

दुविधा-हत साहस है, दिखता है पंथ नहीं,

देह सुखी हो पर मन के दुख का अंत नहीं।

दुख है न चांद खिला शरद-रात आने पर,

क्या हुआ जो खिला फूल रस-बसंत जाने पर?

जो न मिला भूल उसे कर तू भविष्य वरण,

छाया मत छूना

मन, होगा दुख दूना।

Question number: 867 (1 of 12 Based on Passage) Show Passage

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » गिरिजाकुमार माथुर छाया मत छूना

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माथुर दव्ारा रचित प्रस्तुत प्रसंग की व्याख्या में कवि किसका चुनाव करने को कह रहा है?

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