क्षितिज(Kshitij-Textbook) (CBSE (Central Board of Secondary Education- Board Exam) Class-10 Hindi): Questions 829 - 839 of 1777

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Passage

5

तुम्ह तौ कालु हाँक जनु लावा। बार बार मोहि लागि बोलावा।

सुनत लखन के बचन कठोरा। परसु सुधारि धरेउ कर घोरा।।

अब जनि देइ दोसु मोहि लोगू। कटुबादी बालक बधजोगू।।

बाल बिलोकि बहुत मैं बाँचा। अब येहु मरनिहार भा साँचा।।

कौसिक कहा छमिअ अपराधू। बाल दोष गुन गनहिं न साधू।।

खर कुठार मैं अकरुन कोही। आगे अपराधी गुरुद्रोही।।

उतर देत छोड़ौं बिनु मारे। केवल कौसिक सील तुम्हारे।।

न त येहि काटि कुठार कठोरे। गुरहि उरिन होतेउँ श्रम थोरे।।

गाधिसु नु कह हृदय हसि मुनिहि हरियरे सूझ।

अयमय खाँड़ न ऊखमय अजहुँ न बूझ अबूझ।।

Question number: 829 (3 of 8 Based on Passage) Show Passage

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तुलसीदास जी दव्ारा रचित उपरोक्त प्रसंग के भाव-सौंदर्य क्या हैं?

Explanation

तुलसीदास जी दव्ारा रचित प्रस्तुत प्रसंग के भाव सौदर्य में कवि ने परशुराम जी के क्रोध को बहुत ही सहज स्वरूप को प्रस्तुत किया है। परशुरामजी लक्ष्मण जी के व्यंग्य शब्दों को सुनकर लक्ष्मण को मारने के लिए अपना कुल्हाड़ा उठाते हैं लेकिन विश्वामित्र जी के प्रेम के कारण ऐसा नहीं कर पाते हैं अर्थात विश्वामित्र के कहने पर वे रूक जाते है।

क्योंकि- विश्वामित

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Question number: 830 (4 of 8 Based on Passage) Show Passage

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तुलसीदास जी दव्ारा रचित उपरोक्त प्रसंग की व्याख्या में लक्ष्मण ने परशुराम जी से क्या कहा?

Explanation

उपरोक्त प्रसंग की व्याख्या में लक्ष्मण ने परशुराम जी से कहा आप तो जैसे बार-बार आवाज लगाकर समय अर्थात मृत्यु को मेरे लिए बुला रहे हो।

क्योंकि-कभी-कभी क्रोध से युक्त ज्ञानी व्यक्ति भी अपने ज्ञान से अज्ञान हो जाता है उसे सही रास्ता दिखाने के लिए किसी व्यक्ति को आगे आना ही पड़ता है जैसे प्रस्तुत संवाद में परशुराम जी को सही रास्ता बताने के लिए लक्ष्मण

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Question number: 831 (5 of 8 Based on Passage) Show Passage

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तुलसीदास जी दव्ारा रचित उपरोक्त प्रसंग में परशुराम जी को समझाते हुए विश्वामित्र जी ने क्या कहा?

Explanation

तुलसीदास जी दव्ारा रचित उपरोक्त प्रसंग में विश्वामित्र जी ने परशुराम जी को समझाते हुए कहा कि लक्ष्मण जी का अपराध क्षमा कीजिए। सज्जन लोग बच्चों के गुण व अवगुण नहीं गिना करते हैं।

क्योंकि-जब किसी ज्ञानी व्यक्ति को बहुत क्रोध आता है अर्थात उस व्यक्ति की बुद्धि भ्रष्ट हो जाती है तो उस ज्ञानी व्यक्ति को समझाने के लिए महाज्ञानी को सामने आना ही पड़ता है

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Question number: 832 (6 of 8 Based on Passage) Show Passage

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तुलसीदास जी दव्ारा रचित उपरोक्त प्रसंग का शिल्प-सौंदर्य क्या है?

Explanation

उपरोक्त प्रसंग का शिल्प-सौंदर्य है कि इस सवांद में लक्ष्मण जी के व्यंग्य बाण व परशुराम जी के क्रोध को बहुत अच्छे ढंग से प्रस्तुत किया है इसके साथ में इस सवांद में अलंकारों, भावों, दोहा, छंदो, ं संगीत, भाषा आदि का सफलतापूर्वक प्रयोग किया है।

क्योंकि-जिससे उपरोक्त संवाद को पढ़ने से पाठक के मन में आनंद की अनुभूति हो सके।

प्रसंग- तुलसीदास जी दव्ारा रच

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Question number: 833 (7 of 8 Based on Passage) Show Passage

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तुलसीदास जी दव्ारा रचित उपरोक्त प्रसंग में विश्वामित्र जी कहने पर परशुराम जी ने क्या कहा?

Explanation

परशुराम जी बोले-तीखी धार के कुल्हाड़ा और मुझ दयारहित और क्रोधी के समक्ष यह गुरु द्रोही (शिक्षक के प्रति गद्दार) उत्तर दे रहा है। इतना होते हुए भी मैं इस बिना मारे कैसे छोड़ रहा हूँ, इसलिए हे विश्वामित्र केवल तुम्हारे शील और प्रेम के कारण ही ऐसा हो रहा है अन्यथा मैं इसे कब का इस कठोर कुल्हाड़ा से काटकर थोड़े ही मेहनत से गुरु के ऋण से मुक्त हो जाता।

क्

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Question number: 834 (8 of 8 Based on Passage) Show Passage

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तुलसीदास जी दव्ारा रचित प्रस्तुत प्रसंग में किस समय का वर्णन है?

Explanation

तुलसीदास जी दव्ारा रचित प्रस्तुत प्रसंग में कवि ने उस समय का वर्णन बताया है जब लक्ष्मण ने परशुराम जी के मुंह से अपने ही कार्यो की प्रशंसा सुनकर परशुराम जी को कहते हैं कि शूरवीर अपने शौर्य का परिचय केवल युद्ध-भूमि में दिखाते हैं। हर जगह वे अपनी वीरता को नहीं बताते रहते है केवल कायर लोग अपनी बढ़ाई हर जगह करते रहते हैं।

क्योंकि-जो व्यक्ति बहादुर होत

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Question number: 835

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » देव सवैया, कवित्त

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शिवसिंह ’सरोज’ के अनुसार देव दव्ारा रचित उनके ग्रंथों की कितनी संख्या है?

Question number: 836

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » मंगलेश डबराल संगतकार

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इलाहाबाद में काम करने के बाद डबराल जी ने किस सन्‌ में किस समाचार पत्र के संपादक के पद में काम किया?

Question number: 837

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » गिरिजाकुमार माथुर छाया मत छूना

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गिरिजाकुमार माथुर नई कविता के कौनसे मिज़ाज के कवि माने जाते हैं?

Passage

छाया मत छूना

मन, होगा दुख दुना।

जीवन में हैं सुरंग सुधियां सुहावनी

छवियों को चित्र-गंध फैली मनभावनी:

तन-सुगंध शेष रही, बीत गई यामिनी,

कुंतल के फूलों की याद बनी चाँंदनी।

भूल-सी एक छुअन बनता हर जीवित क्षण-

छाया मत छूना

मन, होगा दुख दूना।

Question number: 838 (1 of 13 Based on Passage) Show Passage

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गिरिजाकुमार माथुर द्वारा रचित प्रस्तुत प्रसंग में कवि क्या बताना चाहा रहा है?

Question number: 839 (2 of 13 Based on Passage) Show Passage

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माथुर जी द्वारा रचित प्रस्तुत प्रसंग की व्याख्यां में कवि के अनुसार सुख के दिन बीत जाने के बाद अब उनका क्या रह गया है?

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