क्षितिज(Kshitij-Textbook) (CBSE Class-10 Hindi): Questions 832 - 842 of 1777

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Passage

5

तुम्ह तौ कालु हाँक जनु लावा। बार बार मोहि लागि बोलावा।

सुनत लखन के बचन कठोरा। परसु सुधारि धरेउ कर घोरा।।

अब जनि देइ दोसु मोहि लोगू। कटुबादी बालक बधजोगू।।

बाल बिलोकि बहुत मैं बाँचा। अब येहु मरनिहार भा साँचा।।

कौसिक कहा छमिअ अपराधू। बाल दोष गुन गनहिं न साधू।।

खर कुठार मैं अकरुन कोही। आगे अपराधी गुरुद्रोही।।

उतर देत छोड़ौं बिनु मारे। केवल कौसिक सील तुम्हारे।।

न त येहि काटि कुठार कठोरे। गुरहि उरिन होतेउँ श्रम थोरे।।

गाधिसु नु कह हृदय हसि मुनिहि हरियरे सूझ।

अयमय खाँड़ न ऊखमय अजहुँ न बूझ अबूझ।।

Question number: 832 (6 of 8 Based on Passage) Show Passage

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » तुलसीदास राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद

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तुलसीदास जी दव्ारा रचित उपरोक्त प्रसंग में लक्ष्मण जी के कठोर वचन सुनकर परशुराम जी ने क्या किया?

Explanation

लक्ष्मण जी के इस प्रकार के कठोर शब्दों को सुन कर परशुराम जी ने अपने भयंकर अर्थात खतरनाक फरसे को सही करके अपने हाथों में पकड़ लिया ।

क्योंकि- उपरोक्त प्रसंग में लक्ष्मण ने अपने वचनों दव्ारा परशुराम जी को बहुत अधिक क्राेधत कर दिया था जिससे परशुराम जी लक्ष्मण… (368 more words) …

Question number: 833 (7 of 8 Based on Passage) Show Passage

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तुलसीदास जी दव्ारा रचित उपरोक्त प्रसंग में विश्वामित्र मन ही मन क्या सोचकर मुस्करा रहे थे?

Explanation

परशुराम जी के मुख से यह सब बातें सुनकर विश्वामित्र जी मन में मंद-मंद मुस्कारने लगे और मन में सोचने लगे कि मुनि को सारी जगह हरा-ही-हरा (अपनी वीरता ही) दिखाई दे रहा है। वे सब में विजयी होने के कारण राम-लक्ष्मण को भी एक सामान्य क्षत्रिय ही समझ रहे… (436 more words) …

Question number: 834 (8 of 8 Based on Passage) Show Passage

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » तुलसीदास राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद

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तुलसीदास जी दव्ारा रचित उपरोक्त प्रसंग का शिल्प-सौंदर्य क्या है?

Explanation

उपरोक्त प्रसंग का शिल्प-सौंदर्य है कि इस सवांद में लक्ष्मण जी के व्यंग्य बाण व परशुराम जी के क्रोध को बहुत अच्छे ढंग से प्रस्तुत किया है इसके साथ में इस सवांद में अलंकारों, भावों, दोहा, छंदो, ं संगीत, भाषा आदि का सफलतापूर्वक प्रयोग किया है।

क्योंकि-जिससे उपरोक्त संवाद को… (372 more words) …

Question number: 835

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » देव सवैया, कवित्त

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शिवसिंह ’सरोज’ के अनुसार देव दव्ारा रचित उनके ग्रंथों की कितनी संख्या है?

Question number: 836

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » मंगलेश डबराल संगतकार

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इलाहाबाद में काम करने के बाद डबराल जी ने किस सन्‌ में किस समाचार पत्र के संपादक के पद में काम किया?

Question number: 837

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » गिरिजाकुमार माथुर छाया मत छूना

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गिरिजाकुमार माथुर नई कविता के कौनसे मिज़ाज के कवि माने जाते हैं?

Passage

छाया मत छूना

मन, होगा दुख दुना।

जीवन में हैं सुरंग सुधियां सुहावनी

छवियों को चित्र-गंध फैली मनभावनी:

तन-सुगंध शेष रही, बीत गई यामिनी,

कुंतल के फूलों की याद बनी चाँंदनी।

भूल-सी एक छुअन बनता हर जीवित क्षण-

छाया मत छूना

मन, होगा दुख दूना।

Question number: 838 (1 of 13 Based on Passage) Show Passage

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » गिरिजाकुमार माथुर छाया मत छूना

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माथुर जी द्वारा रचित प्रस्तुत प्रसंग के भाव-सौंदर्य क्या है?

Question number: 839 (2 of 13 Based on Passage) Show Passage

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माथुर जी द्वारा रचित प्रस्तुत प्रसंग की व्याख्यां में कवि के अनुसार सुख के दिन बीत जाने के बाद अब उनका क्या रह गया है?

Question number: 840 (3 of 13 Based on Passage) Show Passage

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माथुर जी द्वारा रचित प्रस्तुत प्रसंग दुखद परिस्थितियों में सुख के बिताए पल याद करने से क्या ह़ो जाता है।

Question number: 841 (4 of 13 Based on Passage) Show Passage

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माथुर जी द्वारा रचित प्रस्तुत प्रसंग की व्याख्यां में जीवन का एक-एक पल क्या करता हुआ गुजर रहा है?

Question number: 842 (5 of 13 Based on Passage) Show Passage

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माथुर जी द्वारा रचित प्रस्तुत प्रसंग की व्याख्या में कवि के अनुसार मन को क्या भाने लगा है?

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