क्षितिज(Kshitij-Textbook) (CBSE Class-10 Hindi): Questions 831 - 841 of 1777

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Passage

5

तुम्ह तौ कालु हाँक जनु लावा। बार बार मोहि लागि बोलावा।

सुनत लखन के बचन कठोरा। परसु सुधारि धरेउ कर घोरा।।

अब जनि देइ दोसु मोहि लोगू। कटुबादी बालक बधजोगू।।

बाल बिलोकि बहुत मैं बाँचा। अब येहु मरनिहार भा साँचा।।

कौसिक कहा छमिअ अपराधू। बाल दोष गुन गनहिं न साधू।।

खर कुठार मैं अकरुन कोही। आगे अपराधी गुरुद्रोही।।

उतर देत छोड़ौं बिनु मारे। केवल कौसिक सील तुम्हारे।।

न त येहि काटि कुठार कठोरे। गुरहि उरिन होतेउँ श्रम थोरे।।

गाधिसु नु कह हृदय हसि मुनिहि हरियरे सूझ।

अयमय खाँड़ न ऊखमय अजहुँ न बूझ अबूझ।।

Question number: 831 (5 of 8 Based on Passage) Show Passage

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » तुलसीदास राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद

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तुलसीदास जी दव्ारा रचित प्रस्तुत प्रसंग में किस समय का वर्णन है?

Explanation

तुलसीदास जी दव्ारा रचित प्रस्तुत प्रसंग में कवि ने उस समय का वर्णन बताया है जब लक्ष्मण ने परशुराम जी के मुंह से अपने ही कार्यो की प्रशंसा सुनकर परशुराम जी को कहते हैं कि शूरवीर अपने शौर्य का परिचय केवल युद्ध-भूमि में दिखाते हैं। हर जगह वे अपनी वीरता… (392 more words) …

Question number: 832 (6 of 8 Based on Passage) Show Passage

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तुलसीदास जी दव्ारा रचित उपरोक्त प्रसंग में विश्वामित्र मन ही मन क्या सोचकर मुस्करा रहे थे?

Explanation

परशुराम जी के मुख से यह सब बातें सुनकर विश्वामित्र जी मन में मंद-मंद मुस्कारने लगे और मन में सोचने लगे कि मुनि को सारी जगह हरा-ही-हरा (अपनी वीरता ही) दिखाई दे रहा है। वे सब में विजयी होने के कारण राम-लक्ष्मण को भी एक सामान्य क्षत्रिय ही समझ रहे… (436 more words) …

Question number: 833 (7 of 8 Based on Passage) Show Passage

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तुलसीदास जी दव्ारा रचित उपरोक्त प्रसंग में लक्ष्मण जी के कठोर वचन सुनकर परशुराम जी ने क्या किया?

Explanation

लक्ष्मण जी के इस प्रकार के कठोर शब्दों को सुन कर परशुराम जी ने अपने भयंकर अर्थात खतरनाक फरसे को सही करके अपने हाथों में पकड़ लिया ।

क्योंकि- उपरोक्त प्रसंग में लक्ष्मण ने अपने वचनों दव्ारा परशुराम जी को बहुत अधिक क्राेधत कर दिया था जिससे परशुराम जी लक्ष्मण… (368 more words) …

Question number: 834 (8 of 8 Based on Passage) Show Passage

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तुलसीदास जी दव्ारा रचित उपरोक्त प्रसंग में परशुराम जी को समझाते हुए विश्वामित्र जी ने क्या कहा?

Explanation

तुलसीदास जी दव्ारा रचित उपरोक्त प्रसंग में विश्वामित्र जी ने परशुराम जी को समझाते हुए कहा कि लक्ष्मण जी का अपराध क्षमा कीजिए। सज्जन लोग बच्चों के गुण व अवगुण नहीं गिना करते हैं।

क्योंकि-जब किसी ज्ञानी व्यक्ति को बहुत क्रोध आता है अर्थात उस व्यक्ति की बुद्धि भ्रष्ट हो… (378 more words) …

Question number: 835

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » देव सवैया, कवित्त

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शिवसिंह ’सरोज’ के अनुसार देव दव्ारा रचित उनके ग्रंथों की कितनी संख्या है?

Question number: 836

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » मंगलेश डबराल संगतकार

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इलाहाबाद में काम करने के बाद डबराल जी ने किस सन्‌ में किस समाचार पत्र के संपादक के पद में काम किया?

Question number: 837

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » गिरिजाकुमार माथुर छाया मत छूना

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गिरिजाकुमार माथुर नई कविता के कौनसे मिज़ाज के कवि माने जाते हैं?

Passage

छाया मत छूना

मन, होगा दुख दुना।

जीवन में हैं सुरंग सुधियां सुहावनी

छवियों को चित्र-गंध फैली मनभावनी:

तन-सुगंध शेष रही, बीत गई यामिनी,

कुंतल के फूलों की याद बनी चाँंदनी।

भूल-सी एक छुअन बनता हर जीवित क्षण-

छाया मत छूना

मन, होगा दुख दूना।

Question number: 838 (1 of 13 Based on Passage) Show Passage

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माथुर जी द्वारा रचित प्रस्तुत प्रसंग की व्याख्यां में कवि के अनुसार चाँदनी में क्या याद दिलाता है?

Question number: 839 (2 of 13 Based on Passage) Show Passage

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माथुर जी द्वारा रचित प्रस्तुत प्रसंग की व्याख्यां में कवि के अनुसार क्या बाकी रह गया?

Question number: 840 (3 of 13 Based on Passage) Show Passage

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माथुर जी द्वारा रचित प्रस्तुत प्रसंग की व्याख्या में कवि के अनुसार मन को क्या भाने लगा है?

Question number: 841 (4 of 13 Based on Passage) Show Passage

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माथुर जी द्वारा रचित प्रस्तुत प्रसंग की व्याख्यां में कवि के अनुसार सुख के दिन बीत जाने के बाद अब उनका क्या रह गया है?

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