क्षितिज(Kshitij-Textbook) (CBSE Class-10 Hindi): Questions 655 - 667 of 1777

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Passage

छाया मत छूना

मन, होगा दुख दुना।

जीवन में हैं सुरंग सुधियां सुहावनी

छवियों को चित्र-गंध फैली मनभावनी:

तन-सुगंध शेष रही, बीत गई यामिनी,

कुंतल के फूलों की याद बनी चाँंदनी।

भूल-सी एक छुअन बनता हर जीवित क्षण-

छाया मत छूना

मन, होगा दुख दूना।

(2)

यश है या न वैभव है, मान है न सरमाया;

जितना ही दौड़ा तू उतना ही भरमाया।

प्रभुता का शरण-बिंब केवल मृगतृष्णा है,

हर चंद्रिका में छिपी एक रात कृष्णा है।

जो है यथार्थ कठिन उस का तू कर पूजन-

छाया मत छूना

मन, होगा दुख दूना।

(3)

दुविधा-हत साहस है, दिखता है पंथ नहीं,

देह सुखी हो पर मन के दुख का अंत नहीं।

दुख है न चांद खिला शरद-रात आने पर,

क्या हुआ जो खिला फूल रस-बसंत जाने पर?

जो न मिला भूल उसे कर तू भविष्य वरण,

छाया मत छूना

मन, होगा दुख दूना।

Question number: 655 (5 of 5 Based on Passage) Show Passage

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Textbook Questions » गिरिजाकुमार माथुर छाया मत छूना

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’मृगतृष्णा’ किसे कहते हैं, कविता में इसका प्रयोग किस अर्थ में हुआ है?

Question number: 656

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » तुलसीदास राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद

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कुछ विद्वान तुलसीदास का जन्मस्थान कहाँ मानते है?

Question number: 657

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » गिरिजाकुमार माथुर छाया मत छूना

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गिरिजा जी की प्रारम्भिक शिक्षा किस प्रदेश के नगर में हुई थी?

Question number: 658

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » तुलसीदास राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद

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महाकवि तुलसीदास ने मुख्यत: कौन-कौन सी भाषाओं में अपनी साहित्यिक रचनाएँ लिखी हैं।

Question number: 659

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » तुलसीदास राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद

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तुलसीदास जी को हिंदी साहित्य में क्या कहा जाता हैं?

Question number: 660

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » तुलसीदास राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद

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तुलसीदास जी का विवाह किससे हुआ था?

Question number: 661

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » देव सवैया, कवित्त

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इन ग्रंथों के अतिरिक्त आचार्य विश्वनाथ प्रसाद मिश्र ने देव के दव्ारा रचित कौनसे कुछ अन्य ग्रंथों का भी उल्लेख किया है।

Question number: 662

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » देव सवैया, कवित्त

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देव दव्ारा रचित रचनाओं में दो पक्ष कौन-कौन से सशक्त थे?

Question number: 663

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » तुलसीदास राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद

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तुलसीदास जी ने अपने दव्ारा रचित काव्यों में किन अलंकारो का अधिक प्रयोग किया है?

Question number: 664

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माथुर जी दव्ारा रचित उन्होंने अपनी रचनाओं में क्या उकेरा है?

Passage

(2)

यश है या न वैभव है, मान है न सरमाया;

जितना ही दौड़ा तू उतना ही भरमाया।

प्रभुता का शरण-बिंब केवल मृगतृष्णा है,

हर चंद्रिका में छिपी एक रात कृष्णा है।

जो है यथार्थ कठिन उस का तू कर पूजन-

छाया मत छूना

मन, होगा दुख दूना।

Question number: 665 (1 of 13 Based on Passage) Show Passage

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » गिरिजाकुमार माथुर छाया मत छूना

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माथुर जी दव्ारा रचित प्रस्तुत प्रसंग के भाव-सौंदर्य में कवि के अनुसार जीवन में क्या आता जाता रहता है?

Question number: 666 (2 of 13 Based on Passage) Show Passage

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माथुर जी दव्ारा रचित प्रस्तुत प्रसंग के भाव-सौंदर्य क्या है?

Question number: 667 (3 of 13 Based on Passage) Show Passage

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माथुर जी दव्ारा रचित प्रस्तुत प्रसंग की व्याख्या में सुख के बाद क्या आना निश्चित होता है?

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