क्षितिज(Kshitij-Textbook) (CBSE Class-10 Hindi): Questions 1758 - 1770 of 1777

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Passage

(3)

पत्तों से लदी डाल

कहीं हरी, कहीं लाल,

कहीं पड़ी है उर में

मंद-गंध- पुष्प-माल,

पाट-पाट शोभा-श्री

पट नहीं रही है।

Question number: 1758 (2 of 3 Based on Passage) Show Passage

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » सूर्यकांत त्रिपाठी ’निराला’ उत्साह, अट नह

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कवि निराला जी दव्ारा रचित प्रस्तुत पद्यांश के भाव-सौंदर्य क्या है?

Explanation

कवि निराला जी दव्ारा रचित प्रस्तुत पद्यांश के भाव-सौंदय है कि इसमें कवि ने फागुन महीने की सौंदर्यता का वर्णन बहुत ही मार्मिक चित्र प्रस्तुत किया है जिसमें प्रकृति के प्रत्येक हिस्से की सुंदरता को कवि ने अपनी कविता के माध्यम से प्रकट किया है प्रकृति की सुंदरता इतनी अधिक… (154 more words) …

Question number: 1759 (3 of 3 Based on Passage) Show Passage

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कवि निराला जी दव्ारा रचित प्रस्तुत पद्यांश के शिल्प-सौंदर्य क्या है?

Explanation

प्रस्तुत पद्यांश के शिल्प-सौंदर्य है कि इसमें कवि प्रकृति की खूबसुरती का बहुत ही सहजता से वर्णन किया है। साथ में शब्दों, अलंकारों व भाषा का बड़ी सहजता व सरलता से प्रयोग किया हैं।

क्योंकि-कवि दव्ारा रचित प्रसंग के शिल्प सौंदर्य पाठक को पढ़ने में सरल लगे।

प्रसंग- प्रस्तुत पद्यांश… (128 more words) …

Question number: 1760

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नागार्जुन जी दव्ारा रचित उपन्यास कितने प्रकार के व कौन-कौन से है?

Question number: 1761

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नागार्जुन जी को कौनसा कवि भी कहा जाता है?

Question number: 1762

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नागार्जुन जी दव्ारा रचित उनका प्रसिद्ध खंडकाव्य कौनसा है?

Question number: 1763

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नागार्जुन जी का जन्म किस सन्‌ में व कहां हुआ था?

Explanation

उनका जन्म सन्‌ 1911 में बिहार प्रदेश के दरभंगा जिले के सतलखा नामक गाँव में हुआ था।

क्योंकि-हर व्यक्ति का जन्म सही जगह व सही समय पर निश्चित होता हैं।

”प्रख्यात कवि नागार्जुन जी के हृदय में शोषित व दलित वर्ग के प्रति अपार संवेदना देखने को मिलती है। उन्होंने… (190 more words) …

Question number: 1764

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नागार्जुन दव्ारा रचित काव्यों में उनका यथार्थ किसमें आधारित है?

Explanation

सुप्रसिद्ध जनवादी कवि नागार्जुन का अधिकांश काव्य यथार्थ ठोस धरातल पर आधारित है।

क्योंकि- ताकि कवि का काव्य सत्य की रचनाओं पर दृढ़ हो सके।

”प्रख्यात कवि नागार्जुन जी के हृदय में शोषित व दलित वर्ग के प्रति अपार संवेदना देखने को मिलती है। उन्होंने अपनी कविताओं में पीड़ित व… (185 more words) …

Question number: 1765

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नागार्जुन दव्ारा रचित उन्होंने अपनी कविताओं में क्या प्रदर्शित किया है?

Explanation

उन्होंने अपनी कविताओं में पीड़ित व त्रस्त व्यक्तियों के प्रति अद्धितीय सहानुभूति प्रदर्शित किया है।

क्योंकि-उनके मन में गरीबो के प्रति बहुत दयाभाव हैं।

”प्रख्यात कवि नागार्जुन जी के हृदय में शोषित व दलित वर्ग के प्रति अपार संवेदना देखने को मिलती है। उन्होंने अपनी कविताओं में पीड़ित व त्रस्त… (184 more words) …

Passage

आत्मकथ्य

(1)

मधुप गुन-गुना कर कह जाता कौन कहानी यह अपनी,

मुरझाकर गिर रहीं पत्तियाँ देखो कितनी आज घनी।

इस गंभीर अनंत-नीलिमा में असंख्य जीवन-इतिहास

यह लो, करते ही रहते हैं अपना व्यंग्य-मिलन उपहास

तब भी कहते हो-कह डालूँ दूर्बलता अपनी बीती।

तुम सुनकर सुख पाओगे, देखोगे-यह गागर रीती।

किंतु कहीं ऐसा न हो कि तुम ही खाली करने वाले

अपने को समझो, मेरा रस ले अपनी भरने वाले।

Question number: 1766 (1 of 12 Based on Passage) Show Passage

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कवि जयशंकर प्रसाद दव्ारा रचित उपरोक्त पद्यांश के काव्य में वे सब लोग क्या करते हैं?

Explanation

कवि जयशंकर प्रसाद दव्ारा रचित उपरोक्त पद्यांश के काव्य में वे सब लोग अपनी जीवन के बारे में लिखकर खराब और अपमानित तरीके से दूसरों के सामने अपना मजाक करवाते रहते हैं।

क्योंकि-उन सब लोगों का दु: ख बहुत ही अधिक बढ़ गया है।

प्रसंग- प्रस्तुत पद्यांश सुप्रसिद्ध छायावादी कवि… (296 more words) …

Question number: 1767 (2 of 12 Based on Passage) Show Passage

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Describe in Detail

जयशंकर प्रसाद द्वारा रचित कविता में कवि किस मन से आत्मकथा के विषय में अपने विचार प्रकट करते हुए कहता है?

Explanation

जयशंकर प्रसाद द्वारा रचित कविता में कवि अनमने व उदास मन से अपनी आत्मकथा के बारे में अपने विचार प्रस्तुत किया है।

क्योंकि-वह अपनी दु: खभरी कहानी को बताना नहीं चाहता हैं फिर भी कवि बड़े संकोच से ही यह सब कहता हैं।

प्रसंग- प्रस्तुत पद्यांश सुप्रसिद्ध छायावादी कवि जयशंकर… (295 more words) …

Question number: 1768 (3 of 12 Based on Passage) Show Passage

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प्रसाद जी दव्ारा रचित उपरोक्त प्रद्यांश के काव्य में कवि अपने मित्रों से क्या कहता हैं?

Explanation

कवि अपने मित्रों से यह कहता है कि मेरे जीवन रूपी मटके को खाली देखकर और सुनकर व पढ़कर तुम्हें सुख का अहसास होगा। मेरे जीवन के सत्य और कमियों को जानकर तुमको सुख मिलेगा। लेकिन ऐसा न हो कि मेरी पीड़ा को सुनकर तुम स्वयं को जीवन की कमियों… (356 more words) …

Question number: 1769 (4 of 12 Based on Passage) Show Passage

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कवि दव्ारा रचित प्रस्तुत काव्य में लोगों की अभिलाषा रूपी पत्तियाँ क्या होती जा रही हैं?

Explanation

कवि दव्ारा रचित प्रस्तुत काव्य में उम्मीद रूपी पत्तियाँ खत्म होती दिखाई दे रही हैं अर्थात जीवन में आशा नाम की किरण दूर-दूर तक कहीं भी नजर नहीं आ रही है।

क्योंकि-जब व्यक्ति को अत्यधिक दु: ख होता है उसकी सोच नकारात्मक हो जाती हैं।

प्रसंग- प्रस्तुत पद्यांश सुप्रसिद्ध छायावादी… (297 more words) …

Question number: 1770 (5 of 12 Based on Passage) Show Passage

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प्रस्तुत पद्यांश सुप्रसिद्ध छायावादी कवि जयशंकर प्रसाद द्वारा रचित किस कविता से अवतरित है?

Explanation

प्रस्तुत पद्यांश सुप्रसिद्ध छायावादी कवि जयशंकर प्रसाद द्वारा रचित आत्मकथात्मक कविता ’आत्मकथ्य’ से अवतरित है।

क्योंकि-हर कवि की अपनी एक कहानी होती हैं, जिसे वह कविता के माध्यम से व्यक्त करता हैं।

प्रसंग- प्रस्तुत पद्यांश सुप्रसिद्ध छायावादी कवि जयशंकर प्रसाद द्वारा रचित आत्मकथात्मक कविता ’आत्मकथ्य’ से अवतरित है। यह कविता… (284 more words) …

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