क्षितिज(Kshitij-Textbook) (CBSE (Central Board of Secondary Education- Board Exam) Class-10 Hindi): Questions 1738 - 1747 of 1777

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Passage

अट नहीं रही है

(1)

अट नहीं रही है

आभा फागुन की तन

सट नहीं रही है।

Question number: 1738 (5 of 5 Based on Passage) Show Passage

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » सूर्यकांत त्रिपाठी ’निराला’ उत्साह, अट नह

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Describe in Detail

प्रस्तुत पद्यांश किस महाकवि के द्वारा रचित कविता से उद्धत है?

Explanation

प्रस्तुत पद्यांश महाकवि सूर्यकांत त्रिपाठी ’निराला’ द्वारा रचित कविता ’अट नहीं रही है’ से उद्धत है।

क्योंकि-हर कविता किसी महाकवि के द्वारा ही लिखी होती है जिससे लोग पढ़कर प्रेरित होते है।

प्रसंग- प्रस्तुत पद्यांश महाकवि सूर्यकांत त्रिपाठी ’निराला’ द्वारा रचित कविता ’अट नहीं रही है’ से उद्धत है। यहाँ फागुन (मार्च) महीने की मदहोशी को प्रकट किया गया

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Passage

यह दंतुरित मुसकान

(1)

तुम्हारी यह दंतुरित मुसकान

मृतक में भी डाल देगी जान

धूलि-धूसर तुम्हारे ये गात……

छोड़कर तालाब मेरी झोंपड़ी में खिल रहे जलजात

परस पाकर तुम्हारा ही प्राण,

पिघलकर जल बन गया होगा कठिन पाषाण

छू गया तुमसे कि झरने लग पड़े शेफालिका के फूल

बांस था कि बबूल?

तुम मुझे पाए नहीं पहचान?

देखते ही रहोंगे अनिमेष!

थक गए हो?

आँख लूँ मैं फेर?

क्या हुआ यदि हो सके परिचित न पहली बार?

यदि तुम्हारी माँ न माध्यम बनी होती आज

मैं न सकता देख

मै न पाता जान

तुम्हारी यह दंतुरित मुसकान

Question number: 1739 (1 of 13 Based on Passage) Show Passage

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Describe in Detail

नागार्जुन द्वारा रचित प्रस्तुत प्रसंग में कवि के अनुसार बच्चे का मिट्‌टी से सना हुआ शरीर कैसा लग रहा हैं?

Explanation

नागार्जुन द्वारा रचित प्रस्तुत प्रसंग में कवि के अनुसार बच्चे का धुल-मिट्‌टी से लिप्त हुआ शरीर आकर्षक और मनमोहक लग रहा हैं।

क्योंकि- एक छोटे बच्चे का शरीर हर तरह से सुंदर होता है।

प्रसंग: - प्रस्तुत पद्यांश कवि नागार्जुन द्वारा रचित कविता ’यह दंतुरित मुसकान’ से अवतरित है। कवि ने छोटे बच्चे की दंतस्वरूप सुंदर मुसकान को देखकर हृदय में उत्पन्न होने

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Question number: 1740 (2 of 13 Based on Passage) Show Passage

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Describe in Detail

कवि नागार्जुन दव्ारा रचित प्रस्तुत प्रसंग के भाव-सौंदर्य में बच्चा अपरिचितों को किस प्रकार देखकर पहचानता है?

Explanation

बच्चा अपरिचित को अपलक देखता हुआ पहचानने का प्रयत्न करता है।

क्योंकि-बच्चे के लिए किसी अन्जान व्यक्ति को पहचानना मुश्किल होता है।

प्रसंग: - प्रस्तुत पद्यांश कवि नागार्जुन द्वारा रचित कविता ’यह दंतुरित मुसकान’ से अवतरित है। कवि ने छोटे बच्चे की दंतस्वरूप सुंदर मुसकान को देखकर हृदय में उत्पन्न होने वाले भावों को अनेक बिम्बों अर्थात उपमा के माध्यम से

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Question number: 1741 (3 of 13 Based on Passage) Show Passage

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Describe in Detail

कवि नागार्जुन द्वारा रचित प्रस्तुत प्रसंग में किसको पहचान कर बच्चा मुसकरा देता है?

Explanation

कवि नागार्जुन द्वारा रचित प्रस्तुत प्रसंग में माँ को पहचान कर बच्चा मुसकरा देता है।

क्योंकि-एक मां का बच्चे से शुरू से ही आत्मीयता व भावात्मक संबंध होता है।

प्रसंग: - प्रस्तुत पद्यांश कवि नागार्जुन द्वारा रचित कविता ’यह दंतुरित मुसकान’ से अवतरित है। कवि ने छोटे बच्चे की दंतस्वरूप सुंदर मुसकान को देखकर हृदय में उत्पन्न होने वाले भावों को अनेक बिम्

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Question number: 1742 (4 of 13 Based on Passage) Show Passage

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Describe in Detail

नागार्जुन द्वारा रचित प्रस्तुत प्रसंग में बच्चे के स्पर्श मात्र से कवि के जीवन में किसका संचार हो गया है?

Explanation

है बच्चे तुम्हारे स्पर्शमात्र से मेरे जीवन में सुख और खुशी उत्पन्न हो गई, मेरा जीवन खुशियों से भर गया है अर्थात बच्चे के स्पर्श मात्र से कवि केे जीवन में सुख और आनंद का संचार हो गया।

क्योंकि-बच्चे का छूना है ही इतना मोहक कि बस हम अपने सारे दुख तकलीफ भूल जाते है।

प्रसंग: - प्रस्तुत पद्यांश कवि नागार्जुन द्वारा रचित कविता ’यह दंतुरित मुसकान’ से अव

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Question number: 1743 (5 of 13 Based on Passage) Show Passage

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Describe in Detail

कवि नागार्जुन द्वारा रचित प्रस्तुत प्रसंग में कवि ने कोनसा भाव प्रकट किया है?

Explanation

प्रस्तुत पद्यांश कवि नागार्जुन द्वारा रचित कविता ’यह दंतुरित मुसकान’ से अवतरित है। कवि ने छोटे बच्चे की दंतस्वरूप सुंदर मुसकान को देखकर हृदय में उत्पन्न होने वाले भावों को अनेक बिम्बों अर्थात उपमा के माध्यम से प्रकट किया है।

क्योंकि- छोटे से बच्चे की मुस्काराहट देखकर हर व्यक्ति के मन में प्यार आ जाता है।

प्रसंग: - प्रस्तुत पद्यांश कवि नागार्जुन

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Question number: 1744 (6 of 13 Based on Passage) Show Passage

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Describe in Detail

नागार्जुन द्वारा रचित प्रस्तुत प्रसंग में बच्चे का स्पर्श पाकर कवि का मन किस तरह से भावुक हो जाता हैं?

Explanation

नागार्जुन द्वारा रचित प्रस्तुत प्रसंग में बच्चे की कोमलता को पाकर मन इस तरह भावात्मक हो जाता है जैसे बच्चे के छूने मात्र से कठोर पत्थर पिघलकर पानी बन गया हो। अर्थात कठोर हृदय वाला भी पिघल जाता है

क्योंकि-बच्चे का स्पर्श हर व्यक्ति के हृदय के भाव को प्रभावित करता हैं।

प्रसंग: - प्रस्तुत पद्यांश कवि नागार्जुन द्वारा रचित कविता ’यह दंतुरित मुसकान’

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Question number: 1745 (7 of 13 Based on Passage) Show Passage

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Describe in Detail

कवि नागार्जुन दव्ारा रचित प्रस्तुत प्रसंग के भाव-सौंदर्य में बच्चे के मुँह में जब नये दाँत आते तो उसकी मुसकान कैसी लगती है?

Explanation

बच्चे के मुँह में जब नये दाँत आते हैं तो उसकी मुसकान अत्यंत मनमोहक लगती है।

क्योंकि-ऐसी मुसकान पूरे विश्व में अनोखी होती है।

प्रसंग: - प्रस्तुत पद्यांश कवि नागार्जुन द्वारा रचित कविता ’यह दंतुरित मुसकान’ से अवतरित है। कवि ने छोटे बच्चे की दंतस्वरूप सुंदर मुसकान को देखकर हृदय में उत्पन्न होने वाले भावों को अनेक बिम्बों अर्थात उपमा के माध्यम से प्र

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Question number: 1746 (8 of 13 Based on Passage) Show Passage

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नागार्जुन द्वारा रचित प्रस्तुत प्रसंग में कवि ने बच्चों के नये-नये दाँतों की मधुर मुसकान को देखकर क्या कहा हैं?

Explanation

नागार्जुन द्वारा रचित प्रस्तुत प्रसंग में कवि ने बच्चों के नये-नये दाँतों के स्वरूप उनकी मीठी मुसकान को देखकर एक मरे हुए व्यक्ति के शरीर में भी प्राणों का संचार हो जाता है अर्थात उस छोटे बच्चे की दंतरूप हँसी इतनी मनमोहक है कि उस हँसी को देखकर एक पल के लिए मरते हुए व्यक्ति को भी जीवन जीने की लिए नई दिशा मिल जाती हैं क्योंकि उस बच्चे को देखकर वह अप

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Question number: 1747 (9 of 13 Based on Passage) Show Passage

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कवि नागार्जुन दव्ारा रचित प्रस्तुत पद्यांश के शिल्प-सौंदर्य क्या है?

Explanation

प्रस्तुत पद्यांश के शिल्प-सौंदर्य यह है कि इसमें कवि ने बच्चे की दंतस्वरूप मुसकान का बहुत सुंदर व अद्भूत चित्र प्रस्तुत किया है साथ में अलंकारों, बिम्बों, शैली, गुण व भाषा आदि का बहुत ही मार्मिक तरीके से प्रयोग कर प्रस्तुत किया हैं।

क्योंकि-ताकि कवि नागार्जुन दव्ारा रचित प्रस्तुत पद्यांश के शिल्प-सौंदर्य को पाठक सहजता से पढ़ सके।

प्रसंग: - प्रस्तु

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