क्षितिज(Kshitij-Textbook) (CBSE (Central Board of Secondary Education- Board Exam) Class-10 Hindi): Questions 1727 - 1737 of 1777

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Passage

आत्मकथ्य

(1)

मधुप गुन-गुना कर कह जाता कौन कहानी यह अपनी,

मुरझाकर गिर रहीं पत्तियाँ देखो कितनी आज घनी।

इस गंभीर अनंत-नीलिमा में असंख्य जीवन-इतिहास

यह लो, करते ही रहते हैं अपना व्यंग्य-मिलन उपहास

तब भी कहते हो-कह डालूँ दूर्बलता अपनी बीती।

तुम सुनकर सुख पाओगे, देखोगे-यह गागर रीती।

किंतु कहीं ऐसा न हो कि तुम ही खाली करने वाले

अपने को समझो, मेरा रस ले अपनी भरने वाले।

(2)

यह विडंबना! अरी सरलते तेरी हँसी उड़ाऊँ मैं।

भूले अपनी या प्रवंचना औरों की दिखलाऊँ मैं।

उज्ज्वल गाथा कैसे गाऊँ, मधुर चाँदनी रातों की।

और खिल-खिला कर हँसते होने वाली उन बातों की।

(3)

मिला कहाँ वह सुख जिसका मैं स्वप्न देखकर जाग गया।

आलिंगन में आते-आते मुसक्या कर जो भाग गया।

जिसके अरूण-कपोलों की मतवाली सुदंर छाया में।

अनुरागिनी उषा लेती थी निज सुहाग मधुमाया में।

(4)

उसकी स्मृति पाथेय बनी है थके पथिक की पंथा की।

सीवन को उधेड़ कर देखोगे क्यों मेरी कंथा की?

छोटे से जीवन की कैसे बड़ी कथाएँ आज कहूँ?

क्या यह अच्छा नहीं कि औरों की सुनता मैं मौन रहूँ?

सुनकर क्या तुम भला करोगे मेरी भोली आत्म-कथा?

अभी समय भी नहीं, थकी सोई है मेरी मौन व्यथा।

Question number: 1727 (4 of 10 Based on Passage) Show Passage

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’उज्ज्वल गाथा कैसे गाऊँ, चाँदनी रातों की’-कथन के माध्यम से कवि क्या कहना चाहता है?

Question number: 1728 (5 of 10 Based on Passage) Show Passage

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’आत्मकथ’ कविता की काव्यभाषा की विशेषताएँ उदाहरण सहित लिखिए।

Question number: 1729 (6 of 10 Based on Passage) Show Passage

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कवि आत्मकथा लिखने से क्यों बचना चाहता है।

Question number: 1730 (7 of 10 Based on Passage) Show Passage

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प्रगतिशील चेतना की साहित्यिक मासिक पत्रिका हंस प्रेमचंद्र ने सन्‌ 1930 से 1936 तक निकाली थी। यह साहित्यिक पत्रिका आज किस संपादक के माध्यम से निकाली जा रही है?

Question number: 1731 (8 of 10 Based on Passage) Show Passage

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आत्मकथा सुनाने के संदर्भ में ’अभी समय भी नहीं’ ऐसा कवि क्यों कहता है?

Question number: 1732 (9 of 10 Based on Passage) Show Passage

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कवि ने जो सुख का स्वप्न देखा था उसे कविता में किन भावों में अभिव्यक्त किया है?

Question number: 1733 (10 of 10 Based on Passage) Show Passage

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बनारसीदास जैन कृत हिंदी की कोनसे नम्बर की आत्मकथा मानी जाती है व इसकी रचना किस सन्‌ में हुई और यह गध्यात्मक है या पद्यात्मक है?

Passage

अट नहीं रही है

(1)

अट नहीं रही है

आभा फागुन की तन

सट नहीं रही है।

Question number: 1734 (1 of 5 Based on Passage) Show Passage

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प्रस्तुत पद्यांश किस महाकवि के द्वारा रचित कविता से उद्धत है?

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Question number: 1735 (2 of 5 Based on Passage) Show Passage

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कवि निराला जी दव्ारा रचित प्रस्तुत पद्यांश में किसकी मादकता को प्रकट किया गया है?

Explanation

… (736 more words) …

Question number: 1736 (3 of 5 Based on Passage) Show Passage

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कवि निराला जी दव्ारा रचित प्रस्तुत पद्यांश के शिल्प-सौंदर्य क्या है?

Explanation

… (864 more words) …

Question number: 1737 (4 of 5 Based on Passage) Show Passage

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कवि निराला जी दव्ारा रचित प्रस्तुत पद्यांश में कवि फागुन के लिए क्या कहता है?

Explanation

… (1038 more words) …

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