क्षितिज(Kshitij-Textbook) (CBSE Class-10 Hindi): Questions 1716 - 1726 of 1777

Get 1 year subscription: Access detailed explanations (illustrated with images and videos) to 2295 questions. Access all new questions we will add tracking exam-pattern and syllabus changes. View Sample Explanation or View Features.

Rs. 1650.00 or

Passage

फसल

एक के नहीं,

दो के नहीं,

ढेर सारी नदियों के पानी का जादू:

एक के नहीं,

दो के नहीं,

लाख-लाख कोटि-कोटि हाथों के स्पर्श की गरिमा:

एक के नहीं,

दो के नहीं,

हज़ार-हज़ार खेतों की मिट्‌टी का गुण धर्म:

Question number: 1716 (6 of 6 Based on Passage) Show Passage

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » नागार्जुन यह दंतुरित मुसकान, फसल

Essay Question▾

Describe in Detail

कवि नागार्जुन द्वारा रचित उपर्युक्त प्रसंग में कवि के अनुसार फसल के बिना हमारा जीवन कैसे बताया हैं?

Explanation

कवि के अनुसार फसल के बिना हमारा जीवन निरर्थक हो जाता है।

क्योंकि- जब धरती पर अनाज ही नहीं रहेगा तो व्यक्ति कैसे जी पाएगा।

प्रसंग- प्रस्तुत पद्यांश कवि नागार्जुन द्वारा रचित कविता ’फसल’ से अवतरित है। यहाँ कवि ने फसल के बारे में बताना चाहा है कि एक फसल… (173 more words) …

Passage

(3)

मिला कहाँ वह सुख जिसका मैं स्वप्न देखकर जाग गया।

आलिंगन में आते-आते मुसक्या कर जो भाग गया।

जिसके अरूण-कपोलों की मतवाली सुदंर छाया में।

अनुरागिनी उषा लेती थी निज सुहाग मधुमाया में।

Question number: 1717 (1 of 3 Based on Passage) Show Passage

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » जयशंकर प्रसाद आत्मकथ्य

Essay Question▾

Describe in Detail

जयशंकर प्रसाद दव्ारा रचित प्रस्तुत पद्यांश भाव-सौंदर्य क्या है?

Explanation

जयशंकर प्रसाद दव्ारा रचित प्रस्तुत पद्यांश भाव-सौंदर्य यह है कि कवि अपने जीवन की उन सुखी दिनों की कल्पना कर लिख रहा है जिसका आनंद कवि को नहीं मिल पाया है वे सुख बहुत पास होते हुए भी समय अभाव के कारण दूर हो गए। इसलिए कवि कहता है हम… (219 more words) …

Question number: 1718 (2 of 3 Based on Passage) Show Passage

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » जयशंकर प्रसाद आत्मकथ्य

Essay Question▾

Describe in Detail

जयशंकर प्रसाद दव्ारा रचित प्रस्तुत पद्यांश शिल्प-सौंदर्य क्या है?

Explanation

जयशंकर प्रसाद दव्ारा रचित प्रस्तुत पद्यांश शिल्प-सौंदर्य है कि यहां कवि ने जीवन की सत्यता व अभावों के बारे में बहुत मनोरम चित्र प्रस्तुत किया है जिसमें अलंकारों, बिम्बों, शब्दों व मिश्रित भाषा का बहुत ही सुंदर रूप प्रकट किया है।

क्योंकि- ताकि कवि दव्ारा रचित प्रस्तुत पद का यह… (198 more words) …

Question number: 1719 (3 of 3 Based on Passage) Show Passage

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » जयशंकर प्रसाद आत्मकथ्य

Essay Question▾

Describe in Detail

जयशंकर प्रसाद दव्ारा रचित प्रस्तुत पद्यांश में कवि क्या कहना चाह रहा है?

Explanation

प्रस्तुत पद्यांश में कवि क्या कहना चाह रहा है कि कवि ने अपने जीवन के उन सुखद क्षणों का उल्लेख करना चाहा है जो कवि के बहुत पास आकर बहुत दूर चले गए अर्थात वह अपने सुख का थोड़ा सा भी उपभोग नहीं कर पाया।

क्योंकि-कभी इसांन के समय न… (204 more words) …

Question number: 1720

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » जयशंकर प्रसाद आत्मकथ्य

Essay Question▾

Describe in Detail

जयशंकर प्रसाद जी दव्ारा रचित कहानी संग्रह व निबंध कौन-कौन से है?

Explanation

उनके दव्ारा रचित कहानी संग्रह व निबंध निम्नलिखत है-

कहानी संग्रह-आँधी, इन्द्रजाल, छाया, प्रतिध्वनि आदि।

निबंध-काव्यकला एवं अन्य निबंध

क्योंकि-कवि ने अपनी रचनाओं में अनेक कृतियों के अलावा कहानी संग्रह व निबंध भी लिखे हैं।

प्रमुख रचनाएँ-हिंदी साहित्यकार के रूप में प्रसाद जी की प्रतिभा बहुमुखी है। उन्होंने… (52 more words) …

Question number: 1721

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » जयशंकर प्रसाद आत्मकथ्य

Essay Question▾

Describe in Detail

हिंदी साहित्य के अमर कवि व लेखक जयशंकर प्रसाद का जन्म कहाँ व किस सन्‌ में हुआ?

Explanation

हिंदी साहित्य के अमर कवि व लेखक जयशंकर प्रसाद का जन्म काशी के ’सुघंनी साहू’ के प्रसिद्ध परिवार में सन्‌ 1889 में हुआ।

क्योंकि-हर व्यक्ति का जन्म ईश्वर के माध्यम से तय होता हैं।

”छायावाद के श्रेष्ठ कवि जयशंकर प्रसाद एक ऐसे विलक्षण एवं विराट व्यक्तित्व को लेकर अवतरित हुए… (178 more words) …

Question number: 1722

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » जयशंकर प्रसाद आत्मकथ्य

Essay Question▾

Describe in Detail

जयशंकर प्रसाद जी ने संस्कार किस से प्राप्त किये?

Explanation

उन्होंने उदारता, विद्वानों का आदर और विद्याभ्यास जैसे संस्कार तो पूर्वजों की परंपरा से ही प्राप्त किये।

क्योंकि-ऐसे संस्कार व्यक्ति में पूर्वजों से स्वत: ही अनुकरण के माध्यम से अपनेआप आ जाते हैं।

”छायावाद के श्रेष्ठ कवि जयशंकर प्रसाद एक ऐसे विलक्षण एवं विराट व्यक्तित्व को लेकर अवतरित हुए थे,… (177 more words) …

Question number: 1723

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » जयशंकर प्रसाद आत्मकथ्य

Essay Question▾

Describe in Detail

जयशंकर प्रसाद जी नाटक और काव्य क्षेत्र में क्या लाने वाले प्रतिभा-सम्पन्न साहित्यकार हैं?

Explanation

जयशंकर प्रसाद जी नाटक और काव्य क्षेत्र में मौलिकता लाने वाले प्रतिभा-सम्पन्न साहित्यकार हैं।

क्योंकि-कभी कोई कवि हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा लाने में सफल हो जाता हैं।

काव्यगत विशेषताएँ- जयशंकर प्रसाद जी नाटक और काव्य क्षेत्र में मौलिकता लाने वाले प्रतिभा-सम्पन्न साहित्यकार हैं। उन्हे छायावादी काव्य धारा का प्रवर्तक… (56 more words) …

Passage

आत्मकथ्य

(1)

मधुप गुन-गुना कर कह जाता कौन कहानी यह अपनी,

मुरझाकर गिर रहीं पत्तियाँ देखो कितनी आज घनी।

इस गंभीर अनंत-नीलिमा में असंख्य जीवन-इतिहास

यह लो, करते ही रहते हैं अपना व्यंग्य-मिलन उपहास

तब भी कहते हो-कह डालूँ दूर्बलता अपनी बीती।

तुम सुनकर सुख पाओगे, देखोगे-यह गागर रीती।

किंतु कहीं ऐसा न हो कि तुम ही खाली करने वाले

अपने को समझो, मेरा रस ले अपनी भरने वाले।

(2)

यह विडंबना! अरी सरलते तेरी हँसी उड़ाऊँ मैं।

भूले अपनी या प्रवंचना औरों की दिखलाऊँ मैं।

उज्ज्वल गाथा कैसे गाऊँ, मधुर चाँदनी रातों की।

और खिल-खिला कर हँसते होने वाली उन बातों की।

(3)

मिला कहाँ वह सुख जिसका मैं स्वप्न देखकर जाग गया।

आलिंगन में आते-आते मुसक्या कर जो भाग गया।

जिसके अरूण-कपोलों की मतवाली सुदंर छाया में।

अनुरागिनी उषा लेती थी निज सुहाग मधुमाया में।

(4)

उसकी स्मृति पाथेय बनी है थके पथिक की पंथा की।

सीवन को उधेड़ कर देखोगे क्यों मेरी कंथा की?

छोटे से जीवन की कैसे बड़ी कथाएँ आज कहूँ?

क्या यह अच्छा नहीं कि औरों की सुनता मैं मौन रहूँ?

सुनकर क्या तुम भला करोगे मेरी भोली आत्म-कथा?

अभी समय भी नहीं, थकी सोई है मेरी मौन व्यथा।

Question number: 1724 (1 of 10 Based on Passage) Show Passage

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Textbook Questions » जयशंकर प्रसाद आत्मकथ्य

Short Answer Question▾

Write in Short

बनारसीदास जैन कृत हिंदी की कोनसे नम्बर की आत्मकथा मानी जाती है व इसकी रचना किस सन्‌ में हुई और यह गध्यात्मक है या पद्यात्मक है?

Question number: 1725 (2 of 10 Based on Passage) Show Passage

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Textbook Questions » जयशंकर प्रसाद आत्मकथ्य

Short Answer Question▾

Write in Short

भाव स्पष्ट कीजिए-

(क) मिला कहाँ वह सुख जिसका मैं स्वप्न देखकर जाग गया।

आलिंगन में आते-आते मुसक्या कर जो भाग गया।

Question number: 1726 (3 of 10 Based on Passage) Show Passage

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Textbook Questions » जयशंकर प्रसाद आत्मकथ्य

Short Answer Question▾

Write in Short

कवि ने जो सुख का स्वप्न देखा था उसे कविता में किन भावों में अभिव्यक्त किया है?

Sign In