क्षितिज(Kshitij-Textbook) (CBSE Class-10 Hindi): Questions 1720 - 1730 of 1777

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Question number: 1720

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Describe in Detail

जयशंकर प्रसाद जी दव्ारा रचित कहानी संग्रह व निबंध कौन-कौन से है?

Explanation

उनके दव्ारा रचित कहानी संग्रह व निबंध निम्नलिखत है-

कहानी संग्रह-आँधी, इन्द्रजाल, छाया, प्रतिध्वनि आदि।

निबंध-काव्यकला एवं अन्य निबंध

क्योंकि-कवि ने अपनी रचनाओं में अनेक कृतियों के अलावा कहानी संग्रह व निबंध भी लिखे हैं।

प्रमुख रचनाएँ-हिंदी साहित्यकार के रूप में प्रसाद जी की प्रतिभा बहुमुखी है। उन्होंने… (52 more words) …

Question number: 1721

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हिंदी साहित्य के अमर कवि व लेखक जयशंकर प्रसाद का जन्म कहाँ व किस सन्‌ में हुआ?

Explanation

हिंदी साहित्य के अमर कवि व लेखक जयशंकर प्रसाद का जन्म काशी के ’सुघंनी साहू’ के प्रसिद्ध परिवार में सन्‌ 1889 में हुआ।

क्योंकि-हर व्यक्ति का जन्म ईश्वर के माध्यम से तय होता हैं।

”छायावाद के श्रेष्ठ कवि जयशंकर प्रसाद एक ऐसे विलक्षण एवं विराट व्यक्तित्व को लेकर अवतरित हुए… (178 more words) …

Question number: 1722

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जयशंकर प्रसाद जी ने संस्कार किस से प्राप्त किये?

Explanation

उन्होंने उदारता, विद्वानों का आदर और विद्याभ्यास जैसे संस्कार तो पूर्वजों की परंपरा से ही प्राप्त किये।

क्योंकि-ऐसे संस्कार व्यक्ति में पूर्वजों से स्वत: ही अनुकरण के माध्यम से अपनेआप आ जाते हैं।

”छायावाद के श्रेष्ठ कवि जयशंकर प्रसाद एक ऐसे विलक्षण एवं विराट व्यक्तित्व को लेकर अवतरित हुए थे,… (177 more words) …

Question number: 1723

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जयशंकर प्रसाद जी नाटक और काव्य क्षेत्र में क्या लाने वाले प्रतिभा-सम्पन्न साहित्यकार हैं?

Explanation

जयशंकर प्रसाद जी नाटक और काव्य क्षेत्र में मौलिकता लाने वाले प्रतिभा-सम्पन्न साहित्यकार हैं।

क्योंकि-कभी कोई कवि हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा लाने में सफल हो जाता हैं।

काव्यगत विशेषताएँ- जयशंकर प्रसाद जी नाटक और काव्य क्षेत्र में मौलिकता लाने वाले प्रतिभा-सम्पन्न साहित्यकार हैं। उन्हे छायावादी काव्य धारा का प्रवर्तक… (56 more words) …

Passage

आत्मकथ्य

(1)

मधुप गुन-गुना कर कह जाता कौन कहानी यह अपनी,

मुरझाकर गिर रहीं पत्तियाँ देखो कितनी आज घनी।

इस गंभीर अनंत-नीलिमा में असंख्य जीवन-इतिहास

यह लो, करते ही रहते हैं अपना व्यंग्य-मिलन उपहास

तब भी कहते हो-कह डालूँ दूर्बलता अपनी बीती।

तुम सुनकर सुख पाओगे, देखोगे-यह गागर रीती।

किंतु कहीं ऐसा न हो कि तुम ही खाली करने वाले

अपने को समझो, मेरा रस ले अपनी भरने वाले।

(2)

यह विडंबना! अरी सरलते तेरी हँसी उड़ाऊँ मैं।

भूले अपनी या प्रवंचना औरों की दिखलाऊँ मैं।

उज्ज्वल गाथा कैसे गाऊँ, मधुर चाँदनी रातों की।

और खिल-खिला कर हँसते होने वाली उन बातों की।

(3)

मिला कहाँ वह सुख जिसका मैं स्वप्न देखकर जाग गया।

आलिंगन में आते-आते मुसक्या कर जो भाग गया।

जिसके अरूण-कपोलों की मतवाली सुदंर छाया में।

अनुरागिनी उषा लेती थी निज सुहाग मधुमाया में।

(4)

उसकी स्मृति पाथेय बनी है थके पथिक की पंथा की।

सीवन को उधेड़ कर देखोगे क्यों मेरी कंथा की?

छोटे से जीवन की कैसे बड़ी कथाएँ आज कहूँ?

क्या यह अच्छा नहीं कि औरों की सुनता मैं मौन रहूँ?

सुनकर क्या तुम भला करोगे मेरी भोली आत्म-कथा?

अभी समय भी नहीं, थकी सोई है मेरी मौन व्यथा।

Question number: 1724 (1 of 10 Based on Passage) Show Passage

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’आत्मकथ’ कविता की काव्यभाषा की विशेषताएँ उदाहरण सहित लिखिए।

Question number: 1725 (2 of 10 Based on Passage) Show Passage

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कवि आत्मकथा लिखने से क्यों बचना चाहता है।

Question number: 1726 (3 of 10 Based on Passage) Show Passage

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भाव स्पष्ट कीजिए-

(क) मिला कहाँ वह सुख जिसका मैं स्वप्न देखकर जाग गया।

आलिंगन में आते-आते मुसक्या कर जो भाग गया।

Question number: 1727 (4 of 10 Based on Passage) Show Passage

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’उज्ज्वल गाथा कैसे गाऊँ, चाँदनी रातों की’-कथन के माध्यम से कवि क्या कहना चाहता है?

Question number: 1728 (5 of 10 Based on Passage) Show Passage

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कवि ने जो सुख का स्वप्न देखा था उसे कविता में किन भावों में अभिव्यक्त किया है?

Question number: 1729 (6 of 10 Based on Passage) Show Passage

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बनारसीदास जैन कृत हिंदी की कोनसे नम्बर की आत्मकथा मानी जाती है व इसकी रचना किस सन्‌ में हुई और यह गध्यात्मक है या पद्यात्मक है?

Question number: 1730 (7 of 10 Based on Passage) Show Passage

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प्रगतिशील चेतना की साहित्यिक मासिक पत्रिका हंस प्रेमचंद्र ने सन्‌ 1930 से 1936 तक निकाली थी। यह साहित्यिक पत्रिका आज किस संपादक के माध्यम से निकाली जा रही है?

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