क्षितिज(Kshitij-Textbook) (CBSE (Central Board of Secondary Education- Board Exam) Class-10 Hindi): Questions 160 - 170 of 1777

Get 1 year subscription: Access detailed explanations (illustrated with images and videos) to 2295 questions. Access all new questions we will add tracking exam-pattern and syllabus changes. View Sample Explanation or View Features.

Rs. 1650.00 or

Question number: 160

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » तुलसीदास राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद

Short Answer Question▾

Write in Short

गुरु नर हरि दास से तुलसीदास जी ने कौनसा ज्ञान प्राप्त करके वे किस कार्य में लग गए?

Question number: 161

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » सूरदास पद

Short Answer Question▾

Write in Short

सूरदास जी दव्ारा रचित काव्य-रचनाएँ किस भाषा की है?

Passage

कन्यादान

(1)

कितना प्रामाणिक था उसका दुख

लड़की को दान में देते वक्त

जैसे वही उसकी अंतिम पूंजी हो

(2)

लड़की अभी सयानी नहीं थी

अभी इतनी भोली सरल थी

कि उसे सुख का आभास तो होता था

लेकिन दुख बांचना नहीं आता था

पाठिका थी वह धुंधले प्रकाश की

कुछ तुकों और कुछ लयबद्ध पंक्तियों की

(3)

मां ने कहा पानी में झांककर

अपने चेहरे पर मत रीझना

आग रोटियां सेंकने के लिए है

जलने के लिए नहीं

वस्त्र और आभूषण शाब्दिक भ्रमों की तरह

बंधन हैं स्त्री जीवन के

(4)

मां ने कहा लड़की होना

पर लड़की जैसी दिखाई मत देना।

Question number: 162 (1 of 7 Based on Passage) Show Passage

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Textbook Questions » ऋतुराज कन्यादान

Short Answer Question▾

Write in Short

आपकी दृष्टि में कन्या के साथ दान की बात करना कहाँ तक उचित है?

Question number: 163 (2 of 7 Based on Passage) Show Passage

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Textbook Questions » ऋतुराज कन्यादान

Short Answer Question▾

Write in Short

आपके विचार से मां ने ऐसा क्यों कहा कि लड़की होने पर लड़की जैसी मत दिखाई देना?

Question number: 164 (3 of 7 Based on Passage) Show Passage

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Textbook Questions » ऋतुराज कन्यादान

Short Answer Question▾

Write in Short

पाठिका थी वह धुंधले प्रकाश की, कुछ तुकों और कुछ लयबद्ध पंक्तियों की’

इन पंक्तियों को पढ़कर लड़की की जो छवि आपके सामने उभरकर आ रही है, उसे स्पष्ट कीजिए।

Question number: 165 (4 of 7 Based on Passage) Show Passage

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Textbook Questions » ऋतुराज कन्यादान

Short Answer Question▾

Write in Short

प्रश्न ’आग रोटियाँं सेकने के लिए है जलने के लिए’

इन पंक्तियों में समाज में स्त्री की किस स्थिति की ओर संकेत किया गया है।

Question number: 166 (5 of 7 Based on Passage) Show Passage

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Textbook Questions » ऋतुराज कन्यादान

Short Answer Question▾

Write in Short

मां को अपनी बेटी अंतिम पूंजी क्यों लगा रही है?

Question number: 167 (6 of 7 Based on Passage) Show Passage

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Textbook Questions » ऋतुराज कन्यादान

Short Answer Question▾

Write in Short

मां ने बेटी को क्या-क्या सीख दी?

Question number: 168 (7 of 7 Based on Passage) Show Passage

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Textbook Questions » ऋतुराज कन्यादान

Short Answer Question▾

Write in Short

प्रश्न ’आग रोटियाँं सेकने के लिए है जलने के लिए’

मां ने बेटी को सचेत करना क्यों जरूरी समझा?

Passage

संगतकार

(1)

मुख्य गायक के चट्‌टान जैसे भारी स्वर का साथ देती

वह आवाज सुंदर कमज़ोर कांपती हुई थी

वह मुख्य गायका का छोटा भाई है

या उसका शिष्य

या पैदल चलकर सीखने आने वाले दूर कोई रिश्तेदार

मुख्य गायक की गरज़ में

वह अपनी गूंज मिलाता आया है प्राचीन काल से

गायक जब अंतरे की जटिल तानों के जंगल में

खो चुका होता है

या अपने ही सरगम को लांघकर

चला जाता है भटकता हुआ एक अनहद में

तब संगतकार ही स्थायी को संभाले रहता है

जैसे समेटता हो मुख्य गाायक का पीछे छूटा

हुआ सामान

जैसे उसे याद दिलाता हो उसका बचपन

जब वह नौसिखिया था

Question number: 169 (1 of 8 Based on Passage) Show Passage

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » मंगलेश डबराल संगतकार

Short Answer Question▾

Write in Short

कवि मंगलेश डबराल द्वारा रचित प्रस्तुत पद्यांश की व्याख्या के गाने में मुख्य गायक के साथ कैसी आवाज आ रही थी?

Question number: 170 (2 of 8 Based on Passage) Show Passage

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » मंगलेश डबराल संगतकार

Short Answer Question▾

Write in Short

कवि मंगलेश डबराल द्वारा रचित प्रस्तुत पद्यांश की व्याख्या में सहंयोगी गायक गीत की टेक सही करके गाते हुए कैसे लगते हैं?

f Page
Sign In