क्षितिज(Kshitij-Textbook) (CBSE (Central Board of Secondary Education- Board Exam) Class-10 Hindi): Questions 1477 - 1489 of 1777

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Question number: 1477

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » जयशंकर प्रसाद आत्मकथ्य

Essay Question▾

Describe in Detail

जयशंकर प्रसाद जी ने अपनी रचनाओं को किस बोली में लिखना आरम्भ किया?

Explanation

उन्होंने अपनी रचनाओं को खड़ी बोली में लिखना आरम्भ किया।

क्योंकि-कवि को शुरूआत में ब्रज भाषा के बाद खड़ी बोली सरल लगी।

भाषा शैली- जयशंकर प्रसाद की रचनाएँ मौलिक व तीव्र अनुभूतियों से युक्त हैं। उनकी आरम्भिक कविताएँ ब्र्रज भाषा में थीं और उसके बाद उन्होंने खड़ी बोली में लिखना आरम्भ किया। प्रसाद जी की भाषा निरन्तर विषयों के अनुसार परिवतर्तित होती रही है

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Question number: 1478

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Describe in Detail

जयशंकर प्रसाद जी की विशेष रुचि किस कार्य में है?

Explanation

उनकी विशेष रूचियों में कसरत करना और घुड़सवारी करना थीं।

क्योंकि-हर इंसान की पसंद अलग-अलग होती है।

“छायावाद के श्रेष्ठ कवि जयशंकर प्रसाद एक ऐसे विलक्षण एवं विराट व्यक्तित्व को लेकर अवतरित हुए थे, जिसमें विभिन्न प्रकार की साहित्यिक प्रतिभाएँ समिश्रित व विद्यमान थीं। जो कि युग-युग से चली आ रही प्राचीन धारा को एक नवीन मोड़ देने में समर्थ सिद्ध हुई।”

जी

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Question number: 1479

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » नागार्जुन यह दंतुरित मुसकान, फसल

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Write in Short

कवि दव्ारा रचित रचनाओं में उन्होंने किन शब्दों को उदारता से अपनाया हैं?

Question number: 1480

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Describe in Detail

किस सन्‌ में विदेश से लौटने के बाद उन्होंने क्या कार्य किया?

Explanation

सन्‌ 1938 में भारत लौटकर वे स्वतंत्रता की लड़ाई में कूद पड़े।

क्योंकि-कभी-कभी व्यक्ति की अन्य बातों में भी रूचि होती है।

“प्रख्यात कवि नागार्जुन जी के हृदय में शोषित व दलित वर्ग के प्रति अपार संवेदना देखने को मिलती है। उन्होंने अपनी कविताओं में पीड़ित व त्रस्त व्यक्तियों के प्रति अद्धितीय सहानुभूति प्रदर्शित किया है। साथ ही अन्याय के विरुद्ध आवाज उ

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Question number: 1481

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Describe in Detail

जयशंकर प्रसाद जी दव्ारा रचित नाटक और कविता के क्षेत्र की तरह ही उन्होंने किस क्षेत्र में भी युगान्तर उपस्थित किया?

Explanation

उनके दव्ारा रचित नाटक और कविता के क्षेत्र की तरह ही कहानी क्षेत्र में भी युगान्तर उपस्थित किया।

क्योंकि-उनके दव्ारा रचित कहानियाँ भी बहुत अच्छी हैं।

काव्यगत विशेषताएँ- जयशंकर प्रसाद जी नाटक और काव्य क्षेत्र में मौलिकता लाने वाले प्रतिभा-सम्पन्न साहित्यकार हैं। उन्हे छायावादी काव्य धारा का प्रवर्तक माना जाता है। उन्होंने नाटक और कविता के क्षेत्र क

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Question number: 1482

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Describe in Detail

नागार्जुन दव्ारा रचित उन्होंने अपने काव्यों में किस बात की प्रेरणा दी है?

Explanation

उन्होंने अपने काव्य में अन्याय के विरुद्ध आवाज उठाने की भी प्रेरणा दी है।

क्योंकि-ताकि समाज में थोड़ा अन्याय कम हो सके।

“प्रख्यात कवि नागार्जुन जी के हृदय में शोषित व दलित वर्ग के प्रति अपार संवेदना देखने को मिलती है। उन्होंने अपनी कविताओं में पीड़ित व त्रस्त व्यक्तियों के प्रति अद्धितीय सहानुभूति प्रदर्शित किया है। साथ ही अन्याय के विरुद्ध आवाज उ

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Question number: 1483

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Describe in Detail

जयशंकर प्रसाद जी की भाषा में प्रधान विशेषता क्या रही है?

Explanation

भावमयता उनकी भाषा की प्रधान विशेषता रही है।

क्योंकि-ताकि कवि की भाषा ओर अधिक दृढ़ बन सके।

भाषा शैली- जयशंकर प्रसाद की रचनाएँ मौलिक व तीव्र अनुभूतियों से युक्त हैं। उनकी आरम्भिक कविताएँ ब्र्रज भाषा में थीं और उसके बाद उन्होंने खड़ी बोली में लिखना आरम्भ किया। प्रसाद जी की भाषा निरन्तर विषयों के अनुसार परिवतर्तित होती रही है। प्रसाद जी ने अपनी भाषा का

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Question number: 1484

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Describe in Detail

जयशंकर प्रसाद जी के कठोर परिश्रम करने के कारण उन्हें कौनसा रोग हो गया?

Explanation

कठोर परिश्रम करने के कारण उनका स्वास्थ्य बिगड़ गया और वे तपेदिक के रोगी बन गए।

क्योंकि-हद से ज्यादा काम करने से कोई भी व्यक्ति बीमार हो जाएगा।

“छायावाद के श्रेष्ठ कवि जयशंकर प्रसाद एक ऐसे विलक्षण एवं विराट व्यक्तित्व को लेकर अवतरित हुए थे, जिसमें विभिन्न प्रकार की साहित्यिक प्रतिभाएँ समिश्रित व विद्यमान थीं। जो कि युग-युग से चली आ रही प्राचीन धार

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Question number: 1485

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Describe in Detail

कवि नागार्जुन जी किस व्यक्ति से प्रभावित हुए?

Explanation

कवि नागार्जुन जी महात्मा बुद्ध नामक व्यक्ति से प्रभावित हुए थे।

क्योंकि-ताकि कवि अपनी मंजिल तक सही तरह से पहुंच सके।

“प्रख्यात कवि नागार्जुन जी के हृदय में शोषित व दलित वर्ग के प्रति अपार संवेदना देखने को मिलती है। उन्होंने अपनी कविताओं में पीड़ित व त्रस्त व्यक्तियों के प्रति अद्धितीय सहानुभूति प्रदर्शित किया है। साथ ही अन्याय के विरुद्ध आवाज उठा

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Question number: 1486

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Write in Short

नागार्जुन दव्ारा रचित काव्य में कवि ने किस प्रकार के गहरे व्यंग्य किए हैं?

Question number: 1487

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Describe in Detail

जयशंकर प्रसाद जी ने किस-किस विषय की शिक्षा घर पर प्राप्त की है?

Explanation

उन्होंने घर पर ही अंग्रेजी, हिन्दी, संस्कृत, उर्दू का समुचित ज्ञान प्राप्त किया।

क्योंकि-कवि के अपने निजी या कोई अन्य कारण होने से।

“छायावाद के श्रेष्ठ कवि जयशंकर प्रसाद एक ऐसे विलक्षण एवं विराट व्यक्तित्व को लेकर अवतरित हुए थे, जिसमें विभिन्न प्रकार की साहित्यिक प्रतिभाएँ समिश्रित व विद्यमान थीं। जो कि युग-युग से चली आ रही प्राचीन धारा को एक नव

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Passage

यह दंतुरित मुसकान

(1)

तुम्हारी यह दंतुरित मुसकान

मृतक में भी डाल देगी जान

धूलि-धूसर तुम्हारे ये गात……

छोड़कर तालाब मेरी झोंपड़ी में खिल रहे जलजात

परस पाकर तुम्हारा ही प्राण,

पिघलकर जल बन गया होगा कठिन पाषाण

छू गया तुमसे कि झरने लग पड़े शेफालिका के फूल

बांस था कि बबूल?

तुम मुझे पाए नहीं पहचान?

देखते ही रहोंगे अनिमेष!

थक गए हो?

आँख लूँ मैं फेर?

क्या हुआ यदि हो सके परिचित न पहली बार?

यदि तुम्हारी माँ न माध्यम बनी होती आज

मैं न सकता देख

मै न पाता जान

तुम्हारी यह दंतुरित मुसकान

(2)

धन्य तुम, माँ भी तुम्हारी धन्य!

चिर प्रवासी मैं। इतर, मैं अन्य!

इस अतिथि से प्रिय तुम्हारा क्या रहा संपर्क

उँगलियाँ माँ की कराती रही हैं मधुपर्क

देखते तुम इधर कनखी मार

और होती जब कि आंखे चार

तब तुम्हारी दंतुरित मुसकान

मुझे लगती बड़ी ही छविमान!

Question number: 1488 (1 of 5 Based on Passage) Show Passage

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बच्चे की मुसकान और एक बड़े व्यक्ति की मुसकान में क्या अंतर है?

Question number: 1489 (2 of 5 Based on Passage) Show Passage

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Write in Short

कवि ने बच्चे की मुसकान के सौंदर्य को किन-किन बिंबो के माध्यम से व्यक्त किया है?

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