क्षितिज(Kshitij-Textbook) (CBSE (Central Board of Secondary Education- Board Exam) Class-10 Hindi): Questions 1410 - 1423 of 1777

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Question number: 1410

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » जयशंकर प्रसाद आत्मकथ्य

Essay Question▾

Describe in Detail

जयशंकर प्रसाद जी को किसका प्रवर्तक माना जाता है?

Explanation

उन्हें छायावादी काव्य धारा का प्रवर्तक माना जाता है।

क्योंकि-उनकी कविताएँ सबसे अधिक श्रेष्ठ रही हैं।

काव्यगत विशेषताएँ- जयशंकर प्रसाद जी नाटक और काव्य क्षेत्र में मौलिकता लाने वाले प्रतिभा-सम्पन्न साहित्यकार हैं। उन्हे छायावादी काव्य धारा का प्रवर्तक माना जाता है। उन्होंने नाटक और कविता के क्षेत्र की तरह ही… (44 more words) …

Question number: 1411

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » नागार्जुन यह दंतुरित मुसकान, फसल

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Write in Short

नागार्जुन जी दव्ारा रचित काव्यों में ओर किसका चित्रण हुआ है?

Passage

अट नहीं रही है

(1)

अट नहीं रही है

आभा फागुन की तन

सट नहीं रही है।

(2)

कहीं साँस लेेते हो,

घर-घर भर देते हो,

उड़ने को नभ में तुम

पर-पर कर देते हो,

आँख हटाता हूँ तो

हट नहीं रही है।

(3)

पत्तों से लदी डाल

कहीं हरी, कहीं लाल,

कहीं पड़ी है उर में

मंद-गंध- पुष्प-माल,

पाट-पाट शोभा-श्री

पट नहीं रही है।

Question number: 1412 (1 of 9 Based on Passage) Show Passage

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Textbook Questions » सूर्यकांत त्रिपाठी ’निराला’ उत्साह, अट नह

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कवि की आँख फागुन की सुंदरता से क्यों नहीं हट रही है?

Question number: 1413 (2 of 9 Based on Passage) Show Passage

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Write in Short

प्रस्तुत कविता में कवि ने प्रकृति की व्यापकता का वर्णन किन रूपों में किया है?

Question number: 1414 (3 of 9 Based on Passage) Show Passage

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Textbook Questions » सूर्यकांत त्रिपाठी ’निराला’ उत्साह, अट नह

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काव्य के दो पक्ष कौन-कौन से होते है?

Question number: 1415 (4 of 9 Based on Passage) Show Passage

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Textbook Questions » सूर्यकांत त्रिपाठी ’निराला’ उत्साह, अट नह

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फागुन में ऐसा क्या होता है जो बाकी ऋतुओं से भिन्न होता हैं?

Question number: 1416 (5 of 9 Based on Passage) Show Passage

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Write in Short

छायावाद की एक खास विशेषता है अंतर्मन के भावों का बाहर की दुनिया से सामंजस्य बिठाना। कविता की किन पंक्तियों को पढ़कर यह धारणा पुष्ट होती है? लिखिए।

Question number: 1417 (6 of 9 Based on Passage) Show Passage

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Write in Brief

अनुभूति से तात्पर्य किससे हैं?

Question number: 1418 (7 of 9 Based on Passage) Show Passage

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Write in Brief

अभिव्यक्ति पक्ष से क्या तात्पर्य है?

Question number: 1419 (8 of 9 Based on Passage) Show Passage

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Write in Short

होली के आस-पास प्रकृति में जो परिवर्तन दिखाई देते हैं, उन्हें लिखिए।

Question number: 1420 (9 of 9 Based on Passage) Show Passage

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Write in Brief

नाद-सौंदर्य क्या कहलाता है?

Question number: 1421

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Essay Question▾

Describe in Detail

जयशंकर प्रसाद के पिता देवी प्रसाद जी किस प्रकार के व्यक्ति थे?

Explanation

उनके पिता देवी प्रसाद जी बड़े धर्म-परायण और उदार-हृदय के व्यक्ति थे।

क्योंकि-हर व्यक्ति अपना एक स्वभाव या व्यवहार होता हैं।

”छायावाद के श्रेष्ठ कवि जयशंकर प्रसाद एक ऐसे विलक्षण एवं विराट व्यक्तित्व को लेकर अवतरित हुए थे, जिसमें विभिन्न प्रकार की साहित्यिक प्रतिभाएँ समिश्रित व विद्यमान थीं। जो कि… (165 more words) …

Passage

(2)

यह विडंबना! अरी सरलते तेरी हँसी उड़ाऊँ मैं।

भूले अपनी या प्रवंचना औरों की दिखलाऊँ मैं।

उज्ज्वल गाथा कैसे गाऊँ, मधुर चाँदनी रातों की।

और खिल-खिला कर हँसते होने वाली उन बातों की।

Question number: 1422 (1 of 4 Based on Passage) Show Passage

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Describe in Detail

जयशंकर दव्ारा रचित प्रस्तुत प्रसंग में कवि क्या कहना चाह रहा है?

Explanation

जयशंकर प्रसाद दव्ारा रचित प्रस्तुत पद में कवि कह रहा है कि कवि अपने जीवन की कहानी को एक साधारण व्यक्ति की कहानी बताता है। वह अपने सरलरूपी सीधे साधे जीवन का मजाक करवाने के पक्ष में नहीं है।

क्योंकि-कवि कहता जैसे सब लोगो के जीवन में पीड़ा व दुख… (225 more words) …

Question number: 1423 (2 of 4 Based on Passage) Show Passage

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Describe in Detail

जयशंकर दव्ारा रचित उपर्युक्त प्रसंग के भाव सौंदर्य क्या हैं?

Explanation

जयशंकर दव्ारा रचित उपर्युक्त प्रसंग के भाव सौंदर्य है कि इसमें कवि ने अपने जीवन को बहुत ही सरल बताया है लेकिन इस जीवन का कोई उपहास करे वह कवि को पसंद नहीं है। इसके साथ में कवि के अनुसार बीते हुए सुखी जीवन का उल्लेख करना कठिन होता है… (245 more words) …

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