क्षितिज(Kshitij-Textbook) (CBSE Class-10 Hindi): Questions 1412 - 1425 of 1777

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Passage

अट नहीं रही है

(1)

अट नहीं रही है

आभा फागुन की तन

सट नहीं रही है।

(2)

कहीं साँस लेेते हो,

घर-घर भर देते हो,

उड़ने को नभ में तुम

पर-पर कर देते हो,

आँख हटाता हूँ तो

हट नहीं रही है।

(3)

पत्तों से लदी डाल

कहीं हरी, कहीं लाल,

कहीं पड़ी है उर में

मंद-गंध- पुष्प-माल,

पाट-पाट शोभा-श्री

पट नहीं रही है।

Question number: 1412 (1 of 9 Based on Passage) Show Passage

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छायावाद की एक खास विशेषता है अंतर्मन के भावों का बाहर की दुनिया से सामंजस्य बिठाना। कविता की किन पंक्तियों को पढ़कर यह धारणा पुष्ट होती है? लिखिए।

Question number: 1413 (2 of 9 Based on Passage) Show Passage

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अभिव्यक्ति पक्ष से क्या तात्पर्य है?

Question number: 1414 (3 of 9 Based on Passage) Show Passage

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प्रस्तुत कविता में कवि ने प्रकृति की व्यापकता का वर्णन किन रूपों में किया है?

Question number: 1415 (4 of 9 Based on Passage) Show Passage

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फागुन में ऐसा क्या होता है जो बाकी ऋतुओं से भिन्न होता हैं?

Question number: 1416 (5 of 9 Based on Passage) Show Passage

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अनुभूति से तात्पर्य किससे हैं?

Question number: 1417 (6 of 9 Based on Passage) Show Passage

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कवि की आँख फागुन की सुंदरता से क्यों नहीं हट रही है?

Question number: 1418 (7 of 9 Based on Passage) Show Passage

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नाद-सौंदर्य क्या कहलाता है?

Question number: 1419 (8 of 9 Based on Passage) Show Passage

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काव्य के दो पक्ष कौन-कौन से होते है?

Question number: 1420 (9 of 9 Based on Passage) Show Passage

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होली के आस-पास प्रकृति में जो परिवर्तन दिखाई देते हैं, उन्हें लिखिए।

Question number: 1421

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जयशंकर प्रसाद के पिता देवी प्रसाद जी किस प्रकार के व्यक्ति थे?

Explanation

उनके पिता देवी प्रसाद जी बड़े धर्म-परायण और उदार-हृदय के व्यक्ति थे।

क्योंकि-हर व्यक्ति अपना एक स्वभाव या व्यवहार होता हैं।

”छायावाद के श्रेष्ठ कवि जयशंकर प्रसाद एक ऐसे विलक्षण एवं विराट व्यक्तित्व को लेकर अवतरित हुए थे, जिसमें विभिन्न प्रकार की साहित्यिक प्रतिभाएँ समिश्रित व विद्यमान थीं। जो कि… (165 more words) …

Passage

(2)

यह विडंबना! अरी सरलते तेरी हँसी उड़ाऊँ मैं।

भूले अपनी या प्रवंचना औरों की दिखलाऊँ मैं।

उज्ज्वल गाथा कैसे गाऊँ, मधुर चाँदनी रातों की।

और खिल-खिला कर हँसते होने वाली उन बातों की।

Question number: 1422 (1 of 4 Based on Passage) Show Passage

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Describe in Detail

जयशंकर दव्ारा रचित प्रस्तुत प्रसंग में कवि अपने जीवन के माध्यम से क्या बताना चाह रहा है?

Explanation

कहानी के माध्यम से कवि यह कह रहा है कि या तो कवि अपने जीवन में मिलने वाले धोखों को भूल जाएं या फिर दूसरों के दव्ारा दिए गए धोखे के कार्यों का वर्णन करें। कवि किस तरह से सुखी जीवन की साफ निर्मल कहानी का वर्णन करें? कवि कह… (277 more words) …

Question number: 1423 (2 of 4 Based on Passage) Show Passage

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Describe in Detail

जयशंकर दव्ारा रचित उपर्युक्त प्रसंग के भाव सौंदर्य क्या हैं?

Explanation

जयशंकर दव्ारा रचित उपर्युक्त प्रसंग के भाव सौंदर्य है कि इसमें कवि ने अपने जीवन को बहुत ही सरल बताया है लेकिन इस जीवन का कोई उपहास करे वह कवि को पसंद नहीं है। इसके साथ में कवि के अनुसार बीते हुए सुखी जीवन का उल्लेख करना कठिन होता है… (245 more words) …

Question number: 1424 (3 of 4 Based on Passage) Show Passage

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जयशंकर दव्ारा रचित उपर्युक्त प्रसंग के शिल्प सौंदर्य क्या हैं?

Explanation

जयशंकर दव्ारा रचित उपर्युक्त प्रसंग के शिल्प सौंदर्य है कि कवि आत्मकथ्य कविता के माध्यम से कहना चाहा रहा की उसका जीवन बहुत ही सरल व अभावों से युक्त है उस जीवन का वह दूसरों के दव्ारा मजाक नहीं बनवाना चाहता हैं एवं यहां पर चांदनी रात को सुखी दिन… (246 more words) …

Question number: 1425 (4 of 4 Based on Passage) Show Passage

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Describe in Detail

जयशंकर दव्ारा रचित प्रस्तुत प्रसंग में कवि क्या कहना चाह रहा है?

Explanation

जयशंकर प्रसाद दव्ारा रचित प्रस्तुत पद में कवि कह रहा है कि कवि अपने जीवन की कहानी को एक साधारण व्यक्ति की कहानी बताता है। वह अपने सरलरूपी सीधे साधे जीवन का मजाक करवाने के पक्ष में नहीं है।

क्योंकि-कवि कहता जैसे सब लोगो के जीवन में पीड़ा व दुख… (225 more words) …

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