क्षितिज(Kshitij-Textbook) (CBSE (Central Board of Secondary Education- Board Exam) Class-10 Hindi): Questions 1260 - 1272 of 1777

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Question number: 1260

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » जयशंकर प्रसाद आत्मकथ्य

Essay Question▾

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जयशंकर प्रसाद दव्ारा रचित उनकी रचनाएँ किससें से युक्त हैं?

Explanation

जयशंकर प्रसाद दव्ारा रचित उनकी रचनाएँ मौलिक व तीव्र अनुभूतियों से युक्त हैं।

क्योंकि-उन्होंने उपरोक्त बातों को गहराई से महसूस किया है।

भाषा शैली- जयशंकर प्रसाद की रचनाएँ मौलिक व तीव्र अनुभूतियों से युक्त हैं। उनकी आरम्भिक कविताएँ ब्र्रज भाषा में थीं और उसके बाद उन्होंने खड़ी बोली में लिखना

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Passage

(2)

कहीं साँस लेेते हो,

घर-घर भर देते हो,

उड़ने को नभ में तुम

पर-पर कर देते हो,

आँख हटाता हूँ तो

हट नहीं रही है।

Question number: 1261 (1 of 3 Based on Passage) Show Passage

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » सूर्यकांत त्रिपाठी ’निराला’ उत्साह, अट नह

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कवि निराला जी दव्ारा रचित प्रस्तुत प्रसंग का भाव-सौंदर्य क्या है?

Explanation

प्रस्तुत प्रसंग का भाव-सौंदय है कि इसमें कवि यह बताना चाह रहा है कि एक फागुन का महीना ही ऐसा होता है जिसमें व्यक्ति के मन में प्रसन्नता और वातावरण में हरयाली छा जाती हैं अर्थात दोनों ही प्रसन्न हो जाते है। हर तरफ फूलों की खुशबू से सुंदर दृश्य

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Question number: 1262 (2 of 3 Based on Passage) Show Passage

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » सूर्यकांत त्रिपाठी ’निराला’ उत्साह, अट नह

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कवि निराला जी दव्ारा रचित प्रस्तुत प्रसंग में कवि ने किसका सजीव चित्रण किया है?

Explanation

प्रस्तुत प्रसंग में कवि ने फागुन की सपूंर्ण सुंदरता का सजीव चित्रण किया है।

क्योंकि-फागुन के महीने में ही प्रकृति बहुत ही अधिक सुंदर दिखाई देती हैं।

प्रसंग- निराला जी दव्ारा रचित प्रस्तुत पद यहाँ कवि ने फागुन की मदहोशी को प्रकट करते हुए फागुन की संपूर्ण सुंदरता का सजीव

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Question number: 1263 (3 of 3 Based on Passage) Show Passage

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कवि निराला जी दव्ारा रचित प्रस्तुत प्रस्तुत प्रसंग के शिल्प-सौंदर्य क्या है?

Explanation

प्रस्तुत प्रसंग का शिल्प-सौंदर्य यह है कि इसमें कवि ने फागुन महीने का मानव का अनुकरण कर उसके महत्व का बहुत ही सुंदर चित्र प्रस्तुत किया है साथ में अलंकार, आकर्षक, व भाषा का बहुत ही सहजता से वर्णन किया है।

क्योंकि-इस प्रसंग में शिल्प सौंदर्य का अलग रूप ही

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Passage

उत्साह

(1)

बादल, गरजो! -

घेर घेर घोर गगन, धाराधर ओ!

ल्लित ललित, काले घुँघराले,

बाल कल्पना के से पाले,

विद्युत-छबि उर में, कवि, नवजीवन वाले!

वज्र, छिपा, नूतन कविता

फिर भर दो-

बादल, गरजो!

(2)

विकल विकल, उन्मन थे उन्मन

विश्व के निदाघ के सकल जन,

आए अज्ञात दिशा से अनंत के घन!

तप्त धरा, जल से फिर

शीतल कर दो-

बादल, गरजो!

Question number: 1264 (1 of 3 Based on Passage) Show Passage

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कविता में बादल किन-किन अर्थों की ओर संकेत करता है?

Question number: 1265 (2 of 3 Based on Passage) Show Passage

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Write in Short

कवि बादल से फुहार, रिमझिम या बरसने के स्थान पर ’गरजने’ के लिए क्यों कहता है?

Question number: 1266 (3 of 3 Based on Passage) Show Passage

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कविता का शीर्षक ’उत्साह’ क्यों रखा गया है?

Question number: 1267

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » नागार्जुन यह दंतुरित मुसकान, फसल

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नागार्जुन जी किस वर्ग के प्रतिनिधि कवि है?

Explanation

वे सर्वहारा वर्ग के प्रतिनिधि कवि हैं।

क्योंकि-कवि ने सभी वर्गो में समान योगदान दिया है।

”प्रख्यात कवि नागार्जुन जी के हृदय में शोषित व दलित वर्ग के प्रति अपार संवेदना देखने को मिलती है। उन्होंने अपनी कविताओं में पीड़ित व त्रस्त व्यक्तियों के प्रति अद्धितीय सहानुभूति प्रदर्शित किया है।

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Question number: 1268

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कवि का नाम नागार्जुन कैसे पड़ा?

Explanation

महात्मा बुद्ध के प्रसिद्ध शिष्य के नाम पर इन्होंने अपना नाम ”नागार्जुन” रख लिया। इस तरह उनका नाम यह पड़ा।

क्योंकि- ताकि उस नाम से प्रेरित होकर वे आगे बढ़ सके।

”प्रख्यात कवि नागार्जुन जी के हृदय में शोषित व दलित वर्ग के प्रति अपार संवेदना देखने को मिलती है।

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Question number: 1269

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » नागार्जुन यह दंतुरित मुसकान, फसल

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नागार्जुन दव्ारा रचित भस्मांकुर काव्य में अत्यंत सुदंर ढंग से क्या प्रस्तुत किया गया है?

Question number: 1270

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प्रसाद जी ने अपनी रचनाओं में भाषा का श्रृंगार किन शब्दों से किया है?

Explanation

उन्होंने अपनी रचनाओं में भाषा का श्रृंगार संस्कृत के तत्सम शब्दों से किया है।

क्योंकि-ताकि उसकी भाषा में ओर अधिक निखार आ सके।

भाषा शैली- जयशंकर प्रसाद की रचनाएँ मौलिक व तीव्र अनुभूतियों से युक्त हैं। उनकी आरम्भिक कविताएँ ब्र्रज भाषा में थीं और उसके बाद उन्होंने खड़ी बोली में

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Question number: 1271

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जयशंकर प्रसाद जी के दव्ारा रचित नाटक कौन-कौन से है?

Explanation

जयशंकर प्रसाद जी के दव्ारा रचित नाटक निम्न है-सज्जन, विशाख, प्रायश्चित, करुणालय, कल्याणी-परिणय, राज्यश्री, अजातशत्रु, कामना, चन्द्रगुप्त, स्कन्दगुप्त, विक्रमादित्य, एक घूँट, ध्रुव-स्वामिनी।

क्योंकि- कवि दव्ारा रचित नाटक के नाम भी मिल जाते हैं।

प्रमुख रचनाएँ-हिंदी साहित्यकार के रूप में प्रसाद जी की प्रतिभा बहुमुखी है। उन्होंने कुल 27 कृतियों की

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Passage

फसल क्या है?

और तो कुछ नहीं है वह

नदियों के पानी का जादू है वह

हाथों के स्पर्श की महिमा है

भूरी-काली-संदली मिट्‌टी का गुण धर्म है

रूपांतर है सूरज की किरणों का

सिमटा हुआ संकोच है हवा की थिरकन का!

Question number: 1272 (1 of 8 Based on Passage) Show Passage

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नागार्जुन दव्ारा रचित प्रस्तुत प्रसंग में कवि ने कौनसे प्रश्न के बाद स्वयं ही उनके उत्तर दिए हैं?

Explanation

नागार्जुन दव्ारा रचित प्रस्तुत प्रसंग में यहाँ कवि ने फसल की उत्पत्ति संबंधी प्रश्न के बाद स्वयं ही उनके जवाब दिए हैं।

क्योंकि- ताकि इसके उत्तर को वह सही ढंग से पहचान सके अर्थात कोई भी काम अपनेआप नहीं बनते बल्कि उनके पीछे कईयों का हाथ होता है।

प्रसंग-प्रस्तुत पद्यांश

… (209 more words) …

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