क्षितिज(Kshitij-Textbook) (CBSE Class-10 Hindi): Questions 1266 - 1277 of 1777

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Passage

उत्साह

(1)

बादल, गरजो! -

घेर घेर घोर गगन, धाराधर ओ!

ल्लित ललित, काले घुँघराले,

बाल कल्पना के से पाले,

विद्युत-छबि उर में, कवि, नवजीवन वाले!

वज्र, छिपा, नूतन कविता

फिर भर दो-

बादल, गरजो!

(2)

विकल विकल, उन्मन थे उन्मन

विश्व के निदाघ के सकल जन,

आए अज्ञात दिशा से अनंत के घन!

तप्त धरा, जल से फिर

शीतल कर दो-

बादल, गरजो!

Question number: 1266 (3 of 3 Based on Passage) Show Passage

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Textbook Questions » सूर्यकांत त्रिपाठी ’निराला’ उत्साह, अट नहीं रही है

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Write in Short

कविता में बादल किन-किन अर्थों की ओर संकेत करता है?

Question number: 1267

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » नागार्जुन यह दंतुरित मुसकान, फसल

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नागार्जुन जी किस वर्ग के प्रतिनिधि कवि है?

Explanation

वे सर्वहारा वर्ग के प्रतिनिधि कवि हैं।

क्योंकि-कवि ने सभी वर्गो में समान योगदान दिया है।

”प्रख्यात कवि नागार्जुन जी के हृदय में शोषित व दलित वर्ग के प्रति अपार संवेदना देखने को मिलती है। उन्होंने अपनी कविताओं में पीड़ित व त्रस्त व्यक्तियों के प्रति अद्धितीय सहानुभूति प्रदर्शित किया है।… (176 more words) …

Question number: 1268

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » नागार्जुन यह दंतुरित मुसकान, फसल

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कवि का नाम नागार्जुन कैसे पड़ा?

Explanation

महात्मा बुद्ध के प्रसिद्ध शिष्य के नाम पर इन्होंने अपना नाम ”नागार्जुन” रख लिया। इस तरह उनका नाम यह पड़ा।

क्योंकि- ताकि उस नाम से प्रेरित होकर वे आगे बढ़ सके।

”प्रख्यात कवि नागार्जुन जी के हृदय में शोषित व दलित वर्ग के प्रति अपार संवेदना देखने को मिलती है।… (191 more words) …

Question number: 1269

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » नागार्जुन यह दंतुरित मुसकान, फसल

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Write in Short

नागार्जुन दव्ारा रचित भस्मांकुर काव्य में अत्यंत सुदंर ढंग से क्या प्रस्तुत किया गया है?

Question number: 1270

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » जयशंकर प्रसाद आत्मकथ्य

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प्रसाद जी ने अपनी रचनाओं में भाषा का श्रृंगार किन शब्दों से किया है?

Explanation

उन्होंने अपनी रचनाओं में भाषा का श्रृंगार संस्कृत के तत्सम शब्दों से किया है।

क्योंकि-ताकि उसकी भाषा में ओर अधिक निखार आ सके।

भाषा शैली- जयशंकर प्रसाद की रचनाएँ मौलिक व तीव्र अनुभूतियों से युक्त हैं। उनकी आरम्भिक कविताएँ ब्र्रज भाषा में थीं और उसके बाद उन्होंने खड़ी बोली में… (75 more words) …

Question number: 1271

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » जयशंकर प्रसाद आत्मकथ्य

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जयशंकर प्रसाद जी के दव्ारा रचित नाटक कौन-कौन से है?

Explanation

जयशंकर प्रसाद जी के दव्ारा रचित नाटक निम्न है-सज्जन, विशाख, प्रायश्चित, करुणालय, कल्याणी-परिणय, राज्यश्री, अजातशत्रु, कामना, चन्द्रगुप्त, स्कन्दगुप्त, विक्रमादित्य, एक घूँट, ध्रुव-स्वामिनी।

क्योंकि- कवि दव्ारा रचित नाटक के नाम भी मिल जाते हैं।

प्रमुख रचनाएँ-हिंदी साहित्यकार के रूप में प्रसाद जी की प्रतिभा बहुमुखी है। उन्होंने कुल 27 कृतियों की… (48 more words) …

Passage

फसल क्या है?

और तो कुछ नहीं है वह

नदियों के पानी का जादू है वह

हाथों के स्पर्श की महिमा है

भूरी-काली-संदली मिट्‌टी का गुण धर्म है

रूपांतर है सूरज की किरणों का

सिमटा हुआ संकोच है हवा की थिरकन का!

Question number: 1272 (1 of 8 Based on Passage) Show Passage

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प्रस्तुत पद्यांश कविता फसल के कवि का क्या नाम हैं?

Explanation

कविता फसल के कवि का नागार्जुन नाम हैं।

क्योंकि- उपरोक्त नाम कवि ने किसी से प्रेरित होकर रखा हैं।

प्रसंग-प्रस्तुत पद्यांश हमारी हिन्दी की पाठ्‌य-पुस्तक ’क्षितिज-भाग-2’ में संकलित कविता ’फसल’ से अवतरति हैं इसके कवि नागार्जुन हैं। यहाँ कवि ने फसल की उत्पत्ति संबंधी प्रश्न के बाद स्वयं ही उनके… (180 more words) …

Question number: 1273 (2 of 8 Based on Passage) Show Passage

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नागार्जुन दव्ारा रचित प्रस्तुत प्रसंग की व्याख्या में कवि ने फसलों पर किस प्रकार की मिट्‌िटयों का प्रभाव बताया है?

Explanation

नागार्जुन दव्ारा रचित प्रस्तुत व्याख्या में कवि ने फसलों पर अनेक प्रकार की भूरी, काली, चंदन जैसी मिट्‌िटयों की उर्वरता व गुणवत्ता का प्रभाव बताया है।

क्योंकि-यह सब मिट्‌िटयों के गुण हैं।

प्रसंग-प्रस्तुत पद्यांश हमारी हिन्दी की पाठ्‌य-पुस्तक ’क्षितिज-भाग-2’ में संकलित कविता ’फसल’ से अवतरति हैं इसके कवि नागार्जुन हैं।… (193 more words) …

Question number: 1274 (3 of 8 Based on Passage) Show Passage

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नागार्जुन दव्ारा रचित प्रस्तुत पद्यांश हिन्दी की पाठ्‌य-पुस्तक ’क्षितिज-भाग-2’ में संकलित किस कविता से उद्धृत हैं?

Explanation

प्रस्तुत पद्यांश हिन्दी की पाठ्‌य-पुस्तक ’क्षितिज-भाग-2’ में संकलित कविता ’फसल’ से उद्धृत हैं।

क्योंकि-उपरोक्त कविता कवि की बहुत ही खास कविता हैं।

प्रसंग-प्रस्तुत पद्यांश हमारी हिन्दी की पाठ्‌य-पुस्तक ’क्षितिज-भाग-2’ में संकलित कविता ’फसल’ से अवतरति हैं इसके कवि नागार्जुन हैं। यहाँ कवि ने फसल की उत्पत्ति संबंधी प्रश्न के बाद… (183 more words) …

Question number: 1275 (4 of 8 Based on Passage) Show Passage

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नागार्जुन दव्ारा रचित प्रस्तुत प्रसंग की व्याख्या में कवि के अनुसार फसल के निर्माण में क्या सहायक होती हैं?

Explanation

नागार्जुन दव्ारा रचित प्रस्तुत प्रसंग की व्याख्या में कवि के अनुसार मनुष्य की कठोर श्रम व मेहनत के साथ -साथ प्रकृति के पंचमहाभूतों का भी फसल के निर्माण में विशेष या खास योगदान रहता है।

क्योंकि- किसी भी वस्तु के निर्माण में अनेक उपकरणों की आवश्यकता होती है। अपनेआप कोई… (215 more words) …

Question number: 1276 (5 of 8 Based on Passage) Show Passage

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नागार्जुन दव्ारा रचित प्रस्तुत प्रसंग की व्याख्या में कवि के अनुसार फसलों पर किसका प्रभाव होता है?

Explanation

नागार्जुन दव्ारा रचित प्रस्तुत प्रसंग की व्याख्या में कवि के अनुसार फसल पर विभिन्न नदियों के अमृततुल्य जल का प्रभाव होता है।

क्योंकि- बिना पानी के कोई भी पौधा, जीव, जन्तु या व्यक्ति जीवित नहीं रह सकते है।

प्रसंग-प्रस्तुत पद्यांश हमारी हिन्दी की पाठ्‌य-पुस्तक ’क्षितिज-भाग-2’ में संकलित कविता ’फसल’ से… (199 more words) …

Question number: 1277 (6 of 8 Based on Passage) Show Passage

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नागार्जुन दव्ारा रचित प्रस्तुत प्रसंग के शिल्प-सौंदर्य क्या है?

Explanation

प्रस्तुत प्रसंग के शिल्प-सौंदर्य है कि कवि ने फसल के निर्माण के बारे में बहुत ही मार्मिक तरीका प्रस्तुत कर बताया हैं। साथ में अलंकारों, शैली, खड़ी बोली, छंदों व भाषा आदि का बहुत ही मनोरम तरीके से प्रयोग किया हैं।

क्योंकि-ताकि कवि के उपर्युक्त शिल्प सौंदर्य में बहुत अधिक… (214 more words) …

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