क्षितिज(Kshitij-Textbook) (CBSE Class-10 Hindi): Questions 129 - 141 of 1777

Get 1 year subscription: Access detailed explanations (illustrated with images and videos) to 2295 questions. Access all new questions we will add tracking exam-pattern and syllabus changes. View Sample Explanation or View Features.

Rs. 1650.00 or

Question number: 129

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » गिरिजाकुमार माथुर छाया मत छूना

Short Answer Question▾

Write in Short

माथुर जी दव्ारा रचित नाटक का क्या नाम है?

Question number: 130

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » मंगलेश डबराल संगतकार

Short Answer Question▾

Write in Short

डबराल जी ने दिल्ली में आकर कहाँ-कहाँ काम किया?

Question number: 131

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » तुलसीदास राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद

Short Answer Question▾

Write in Short

तुलसीदास जी ने अपने दव्ारा रचित काव्यों में किन-किन छंदों का प्रयोग किया है?

Question number: 132

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » ऋतुराज कन्यादान

Short Answer Question▾

Write in Short

कविवर ऋतुराज का जन्म कहाँ व किस सन्‌ में हुआ?

Passage

(3)

बिहसि लखनु बोले मृदु बानी अहो मुनीसु महाभट मानी।।

पुनि पुनि मोहि देखाव कुठारु। चहत उड़ावन फँूकि पहारू।।

इहाँ कुम्हड़बतिआ कोउ नाहीं। जे तरजनी देखि मरि जाहीं।।

देख कुठारु सरासन बाना। मैं कछु कहा सहित अभिमाना।।

भृगसुत समुझि जनेउ बिलोकी। जो कछु कहहु सहौं रिस रोकी।।

सुर महिसुर हरिजन अरु गाई। हमरे कुल इन्ह पर न सुराई।।

बधें पापु अपकीरति हारें। मारतहू पा परिअ तुम्हारें।।

कोटि कुलिस सम बचनु तुम्हारा। ब्यर्थ धरहु धनु बान कुठारा।।

जो बिलोक अनुचित कहेउँ छमहु महामुनि धीर।

सुनि सरोष भृगुबंसमनि बोले गिरा गंभीर।।

Question number: 133 (1 of 5 Based on Passage) Show Passage

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » तुलसीदास राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद

Essay Question▾

Describe in Detail

तुलसीदास जी दव्ारा रचित उपर्युक्त प्रसंग में किस समय का वर्णन है?

Explanation

तुलसीदास जी दव्ारा रचित प्रस्तुत संवाद में उस समय का वर्णन है जब लक्ष्मण जी क्रोधयुक्त परशुराम जी के भाव को देखकर उन पर हँसते हुए कहते हैं।

क्योंकि-लक्ष्मण जी का स्वभाव भी ऐसा है। अर्थात वे व्यवहार रूप से बहुत ही चचंल है।

प्रसंग- तुलसीदास जी दव्ारा रचित प्रस्तुत… (238 more words) …

Question number: 134 (2 of 5 Based on Passage) Show Passage

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » तुलसीदास राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद

Essay Question▾

Describe in Detail

तुलसीदास जी दव्ारा रचित उपर्युक्त प्रसंग में लक्ष्मण जी परशुराम जी पर व्यंग्य करते हुए क्या-क्या कहते हैं?

Explanation

लक्ष्मण जी हँसकर व्यंग्य स्वरूप शब्द बोलते है कि हे मुनीश्वर आप तो अपने को एक महान योद्धा समझते हो और बार-बार मुझे अपना कुल्हाड़ा दिखाकर डराते हैं। ऐसा प्रतीत होता है कि आप तो फूँक से पहाड़ उड़ाना चाहते हैं लेकिन इस सभा में काशी फल अर्थात कच्चे फल… (389 more words) …

Question number: 135 (3 of 5 Based on Passage) Show Passage

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » तुलसीदास राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद

Essay Question▾

Describe in Detail

तुलसीदास जी दव्ारा रचित उपर्युक्त प्रद्यांश के शिल्प-सौंदर्य क्या है?

Explanation

तुलसीदास जी दव्ारा रचित उपर्युक्त प्रद्यांश के शिल्प-सौंदर्य है कि इस संवाद में लक्ष्मण ने परशुराम पर बहुत अधिक व्यंग्य किया है इसके साथ में इस संवाद में अलंकार, मुहावरों, रसों, छंदों, ओज रूप गुण, दोहा, चौपाई, संगीत व भाषा का बहुत ही मार्मिक तरीके से प्रस्तुत किये गए है।… (255 more words) …

Question number: 136 (4 of 5 Based on Passage) Show Passage

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » तुलसीदास राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद

Essay Question▾

Describe in Detail

तुलसीदास जी दव्ारा रचित उपर्युक्त प्रद्यांश का भाव-सौंदर्य क्या है?

Explanation

तुलसीदास दव्ारा रचति प्रस्तुत संवाद के भाव-सौदर्य में कवि ने यहाँ लक्ष्मण के माध्यम से परशुरामजी के प्रति उपहास का वर्णन किया है। अर्थात लक्ष्मण ने परशुराम जी को व्यंग्य करते हुए उन्हें वीरता का मतलब समझाया हैं।

क्योंकि-ताकि परशुराम जी को मालूम हो कि वीरता का सही उपयोग कहाँ… (246 more words) …

Question number: 137 (5 of 5 Based on Passage) Show Passage

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » तुलसीदास राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद

Essay Question▾

Describe in Detail

तुलसीदास जी दव्ारा रचित उपर्युक्त प्रसंग में परशुराम जी को उपरोक्त व्यंग्य बोलकर बाद में लक्ष्मण जी ने क्या कहा?

Explanation

हे महामुनि! इन सबको देखकर मैंने कुछ गलत कहा हो तो उसे सहन करके मुझे माफ कर दिजिए। फिर लक्ष्मण जी के शब्दों को सुनकर परशुराम जी गुस्से के साथ गंभीर वचनों से बोले।

क्योंकि-फिर अगर उस चंचल व्यक्ति को अपनी गलती का ऐहसास होता है तो वह उनसे माफी… (259 more words) …

Question number: 138

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » गिरिजाकुमार माथुर छाया मत छूना

Short Answer Question▾

Write in Short

लोकप्रिय कवि गिरिजाकुमार माथुर का जन्म किस सन्‌ व स्थान पर हुआ?

Question number: 139

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » मंगलेश डबराल संगतकार

Short Answer Question▾

Write in Short

डबराल जी दव्ारा रचित उन्होंने अपनी काव्य-रचनाओं में किस बात का विरोध किया है?

Question number: 140

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » ऋतुराज कन्यादान

Short Answer Question▾

Write in Short

कहाँ से कवि ऋतुराज जी ने प्रारम्भिक शिक्षा प्राप्त की?

Question number: 141

» क्षितिज(Kshitij-Textbook) » Additional Questions » तुलसीदास राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद

Short Answer Question▾

Write in Short

तुलसीदास जी दव्ारा रचित रामचरितमानस को ओर क्या कहा जाता है?

Sign In