कृतिका (Kritika-Textbook)-Prose (CBSE Class-10 Hindi): Questions 79 - 96 of 461

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Passage

लेकिन बरखा न रुकी; और भी मुसलाधार पानी होने लगा। हम लोग पेड़ों की जड़ से धड़ से सट गए, जैसे कुत्ते के कान में अँठई (कुत्ते के शरीर में चिपके रहने वाले छोटे कीड़े, किलनी) चिपक जाती है। मगर बरखा जीम नहीं, थम गई। बरखा बंद होते ही बाग में बहुत-से-बिच्छु नज़र आए। हम लोग डरकर भाग चले। हम लोगों में बैजू बड़ा ढीठ था। संयोग की बात, बीच में मूसन तिवार मिल गए। बेचारे बूढ़े आदमी को सूझता कम था। बैजू उनको चिढ़कार बोला- बुढ़वा बेईमान माँगे करैला का चोखा।

Question number: 79 (1 of 6 Based on Passage) Show Passage

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बैजू ने तिवारी जी को चिढ़ाकर क्या बोला?

Question number: 80 (2 of 6 Based on Passage) Show Passage

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बच्चों ने मूसलाधार पानी आने पर क्या किया?

Explanation

बच्चों ने मूसलाधार पानी आने पर पेड़ों की जड़ से धड़ से सट गए, जैसे कुत्ते के कान अँठई चिपक जाती है। अर्थात (कुत्ते के शरीर में चिपके रहने वाले छोटे कीड़े, किलनी) । इस तरह वे पेड़ से चिपक जाते थे।

क्योंकि-लेकिन कभी आँधी के साथ मूसलाधार पानी इतनी… (9 more words) …

Question number: 81 (3 of 6 Based on Passage) Show Passage

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बच्चों में सबसे अधिक ढीठ कौन था?

Explanation

बच्चों में सबसे अधिक ढीठ बैजू था।क्योंकि-कोई कोई बच्चा सब बच्चो से अलग अधिक शैतान होता हैं।

Question number: 82 (4 of 6 Based on Passage) Show Passage

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बच्चों को रास्ते में कौन मिल गए थे?

Explanation

बच्चों रास्ते में मूसन तिवारी मिल गए थे। क्योंकि-बच्चों की टोली में कोई न कोई बच्चों को मिल ही जाता है जिसे बच्चे चिढ़ा सके।

Question number: 83 (5 of 6 Based on Passage) Show Passage

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मूसन तिवारी कैसे थे?

Explanation

मूसन तिवारी बूढे व उन्हें सूझता कम था। क्योंकि-बढ़े बुर्जगों को हमेशा कम ही सूझता हैं।

Question number: 84 (6 of 6 Based on Passage) Show Passage

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बरखा बंद होते ही बाग में क्या नजर आया थे?

Explanation

बरखा बंद होते ही बाग में बिच्छु नजर आए थे। क्योंकि-इस तरह ज़ोर से बरसात आने पर हर जगह तरह-तरह के जीव निकल जाते हैं।

Passage

इंग्लैंड के अखबारों की कतरने हिंदुस्तान अखबारों में दूसरे दिन चिपकी नज़र आती थीं, कि रानी ने एक ऐसा हलके नीले रंग का सूट बनवाया है जिसका रेशमी कपड़ा हिंदुस्तान से मँगाया गया है…… कि करीब चार सौ पौंड खरचा उस सूट पर आया है।

Question number: 85 (1 of 4 Based on Passage) Show Passage

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इस सूट पर कितना खर्च आया था?

Question number: 86 (2 of 4 Based on Passage) Show Passage

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रानी ने कौनसे रंग का सूट बनवाया था?

Question number: 87 (3 of 4 Based on Passage) Show Passage

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इस सूट के कपड़े का नाम क्या था?

Question number: 88 (4 of 4 Based on Passage) Show Passage

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इस सूट का कपड़ा कहाँं से मंगवाया गया था?

Passage

बस, हम उठकर उछलने-कूदने लगते थे। फिर रस्सी में बँधा हुआ काठ का घोड़ा लेकर नंग-धड़ंग बाहर गली में निकल जाते थे।

Question number: 89 (1 of 1 Based on Passage) Show Passage

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बच्चे गली में कैसे निकलते थें?

Passage

थोड़ी देर बाद फिर लड़कों की मंडली जुट जाती थी। इकट्‌ठा होते ही राय जमती कि खेती की जाए। बस, चबूतरे के छोर पर घिरनी गड़ जाती और नीचे की गली कुआँ बन जाती थी। मूँज की बटी हुई पतली रस्सी में एक चुक्कड़ बाँध गराड़ी पर चढ़ाकर लटका दिया जाता औा दो लड़के बैल बनकर ‘मोट’ खींचने लग जाते। चबूतरा खेत बनता, कंकड़ बीज और ठेंगा हल-जुआठा। बड़ी मेहनत से खेत जोते-बोए और पटाए जाते। फसल तैयार होते देर न लगती और हम हाथोंहाथ फसल काट लेते थे। काटते समय गाते थे

ऊँच नीच में बई कियार, जो उपजी सो भई हमारी।

फसल को एक जगह रखकर उसे पैरों से रौंद डालते थे। कसोरे (मिट्टी का बना छिछला कटोरा) का सूप बनाकर ओसाते और मिट्टी की दीए के तराजू पर तौलकर राशि तैयार कर देते थे। इसी बीच बाबू जी आकर पूछ बैठते थे-इस साल की खेती कैसी रही भोलानाथ?

बस, फिर क्या, हम लोग ज्यों-का त्यों खेत-खलिहान छोड़कर हँसते हुए भाग जाते थे। कैसी मौज की खेती थी।

ऐसे-ऐसे नाटक हम लोग बराबर खेला करते थे। बटोही भी कुछ देर ठिठककर हम लोगों के तमाशे देख लेते थे।

Question number: 90 (1 of 7 Based on Passage) Show Passage

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बटोही क्या करते थे?

Question number: 91 (2 of 7 Based on Passage) Show Passage

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बच्चे राशि कैसे तैयार करते थे?

Explanation

कसोरे (मिट्टी का बना छिछला कटोरा) का सूप बनाकर ओसाते और मिट्टी की दीए के तराजू पर तौलकर राशि तैयार कर देते थे।

क्योंकि-कई बच्चें खेल में ही नई चीज़ बनाते थे।

Question number: 92 (3 of 7 Based on Passage) Show Passage

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बच्चे नाटक में खेत कैसे तैयार करते थे?

Explanation

बच्चे एक चबूतरे को खेत बनाते है उसमें वे चबूतरे की छोर पर घिरनी गड़ा देते और नीचे की गली कुआँ बन जाती थी। मूँज की बटी हुई पतली रस्सी में एक चुक्कड़ बाँध गराड़ी पर चढ़कार लटका दिया जाता और दो लड़के बैल बनकर ‘मोट’ खीेचने लग जाते। फिर… (26 more words) …

Question number: 93 (4 of 7 Based on Passage) Show Passage

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खेत के नाटक में बाबूजी आकर बच्चों से क्या पूछंते है?

Question number: 94 (5 of 7 Based on Passage) Show Passage

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बच्चों की यह खेती कैसी थी?

Question number: 95 (6 of 7 Based on Passage) Show Passage

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नाटक में फसल काटते समय बच्चे कौनसा गाना गाते थे?

Explanation

नाटक में फसल काटते समय बच्चे ऊँच नीच में बई कियार, जो उपजी सो भई हमारी। गाना गाते थे। क्योंकि-कभी-कभी बच्चे खेल में गाना भी गाते है जिससे उनका खेल का मजा बढ़ जाता हैं।

Question number: 96 (7 of 7 Based on Passage) Show Passage

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बाबू जी के पूछने पर बच्चे क्या करते थे?

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