कृतिका (Kritika-Textbook)-Prose (CBSE Class-10 Hindi): Questions 427 - 444 of 461

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Passage

टुन्नू को विदा करने के बाद दुलारी प्रकृतिस्थल हुई तो सहसा उसे खयाल पड़ा कि आज टुन्नू की वेशभूषा में भारी अंतर था। आबरवाँ (बहुत बारीक मलमल) की जगह ख द्दर का कुरता और लखनवी दोपलिया की जगह गांधी टोपी देखकर दुलारी ने टुन्नू से उसका कारण पूछना चाहा था। परंतु उसका अवसर ही नहीं आया। उसने धीरे-धीरे जाकर अपने कपड़ों का संदूक खोला और उसमें बड़े यत्न से टुन्नू दव्ारा दी गई साड़ी सब कपड़ों के नीचे दबाकर रख दी।

Question number: 427 (4 of 4 Based on Passage) Show Passage

» कृतिका (Kritika-Textbook) » Prose » एही ठैयाँ झुलती हेरानी हो रामा!

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दुलारी ने धीरे-धीरे जाकर क्या खोला?

Passage

यहाँ पर कृतिकार के स्वभाव और आत्मानुशासन का महत्व बहुत होता हे। कुछ आलसी जीव होते हैं कि बिना इस बाहरी दबाव के लिख ही नहीं पाते-इसी के सहारे उनके भीतर की विवशता स्पष्ट होती है- यह कुछ वैसा ही है जैसे प्रात: काल की नींद खुल जाने पर कोई बिछौने पर तब तक पड़ा रहे जब तक घड़ी का एलार्म न बज जाए। इस प्रकार वास्तव में कृतिकार बाहर के दबाव के प्रति समर्पित नहीं हो जाता है, उसे केवल एक सहायक यंत्र (एलार्म घड़ी) की तरह काम मे लाता है जिससे भौतिक यथार्थ के साथ उसका संबंध बना रहे। मुझे इस सहारे की ज़रूरत नहीं पड़ती लेकिन कभी उससे बाधा भी नहीं होती। उठने वाली तुलना को बनाए रखूँ तो कहूँ कि सबेरे उठ जाता हूँ अपने आप ही, पर अलार्म भी बज जाए तो कोई हानि नहीं मानता।

Question number: 428 (1 of 3 Based on Passage) Show Passage

» कृतिका (Kritika-Textbook) » Prose » मैं क्यों लिखता हूँ?

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वे कौनसे आलसी जीव होते है जो लिख नहीं पाते हैं?

Question number: 429 (2 of 3 Based on Passage) Show Passage

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यह विवशता कैसी होती हैं?

Question number: 430 (3 of 3 Based on Passage) Show Passage

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उन आलसी लोगों का क्या स्पष्ट होता है?

Passage

जगह-जगह गदराए पाईन और धूपी के खूबसूरत नुकीले पेड़ों का जायजा लेते हुए पहाड़ी रास्तों पर आगे बढ़ने लगे कि जगह दिखाई दीं…. एक कतार में लगी सफ़ेद-सफ़ेद बौद्ध पताकाएँ। किसी ध्वज की तरह लहराती…. शांति और अहिंसा की प्रतीक ये पताकाएँ जिन पर मंत्र लिखे हुए थे। नार्गे ने बताया यहां बुद्ध की बड़ी मान्यता है। जब किसी बुद्धिस्ट की मृत्यु होती है, उसकी आत्मा की शांति के लिए शहर से दूर किसी भी पवित्र स्थान पर एक सौ आठ श्वेत पताकाएँ फहरा दी जाती हैं। नहीं, इन्हे उतारा नहीं जाता है, ये धीरे-धीरे अपने आप ही नष्ट हो जाती हैं। कई बार किसी नए कार्य की शुरुआत में भी पताकाएँ लगा दी जाती हैं पर वे रंगीन होती हैं। नार्गे बोलता जा रहा था और मेरी नज़र उसकी की जीप में लगी दलाई लामा की तस्वीर पर टिकी हुई थी। कई दुकानों पर भी मैंने दलाई लामा की ऐसी ही तसवीर देखी थी।

Question number: 431 (1 of 7 Based on Passage) Show Passage

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किसी बुद्धिस्ट की मृत्यु होने पर क्या होता है?

Question number: 432 (2 of 7 Based on Passage) Show Passage

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किसी नए कार्य के लिए कौनसी पताकाएँ लगाई जाती है?

Question number: 433 (3 of 7 Based on Passage) Show Passage

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लेखिका की नजर किसमे टिकी थी?

Question number: 434 (4 of 7 Based on Passage) Show Passage

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बौद्ध पताकाओं में क्या लिखा हुआ था?

Question number: 435 (5 of 7 Based on Passage) Show Passage

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जगह-जगह क्या देखने को मिला?

Question number: 436 (6 of 7 Based on Passage) Show Passage

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बौद्ध पताकाऐं किसका प्रतीक थी?

Question number: 437 (7 of 7 Based on Passage) Show Passage

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नार्गे ने क्या बताया?

Passage

और तभी दिमाग में कौंधा कि मिल्टन ने ईव की सुंदरता का वर्णन करते हुए लिखा था कि शैतान भी उसे देखकर ठगा-सा रह जाता था और दूसरों का अमंगल करने की वृत्ति भूल जाता था। मैंने मणि से पूछा- ”क्या उसने पढ़ी है मिल्टन की वह कविता? ”

पर मणि उस समय किसी दूसरे ही सवाल से जूझ रही थी। वह एकाएक दाशैनिको की तरह कहने लगी, ”ये हिमशिखर जल स्तंभ हैं, पूरे एशिया के। देखों, प्रकृति भी किस नायाब ढेग से सारा इंतजाम करती है। सर्दियों में बर्फ़ के रूप में जल संग्रह कर लेती है और गर्मियों में पानी के लिए जब त्राहि-त्राहि मचती है तो ये ही बर्फ़ शिलाएँ पिघल-पिघल जलधारा बन हमारे सूखे कंठो को तरावट पहुँचाती हैं। कितनी अद्भुत व्यवस्था है जल संचय की! ”

Question number: 438 (1 of 3 Based on Passage) Show Passage

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मणि दार्शनिक की तरह क्या कहने लगी?

Question number: 439 (2 of 3 Based on Passage) Show Passage

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मिल्टन ने किसकी सुंदरता का वर्णन करते हुए लिखा था?

Question number: 440 (3 of 3 Based on Passage) Show Passage

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आगे सफर में क्या दिखा?

Passage

लेकिन एक बड़ी मुश्किल पेश थी जॉर्ज पंचम की नाक! … नयी दिल्ली में सब कुछ था, सब कुछ होता जा रहा था, सब कुछ हो जाने की उम्मीद थी पर जॉर्ज पंचम की नाक बड़ी मुसीबत थी। नयी दिल्ली में सब था…. सिर्फ़ नाक नहीं थी!

Question number: 441 (1 of 2 Based on Passage) Show Passage

» कृतिका (Kritika-Textbook) » Prose » जॉर्ज पंचम की नाक

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नयी दिल्ली में क्या नहीं था?

Question number: 442 (2 of 2 Based on Passage) Show Passage

» कृतिका (Kritika-Textbook) » Prose » जॉर्ज पंचम की नाक

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सबसे बड़ी मुश्किल क्या थी?

Passage

सुबह हमें यूमथांग के लिए निकल पड़ना था, पर आँख खुलते ही मैं बालकनी की तरफ़ भगी। यहाँ के लोगों ने बताया था कि मौसम साफ़ हो तो बालकनी से भी कंचनजंघा दिखाई देती है। हिमालय की तीसरी सबसे बड़ी चोटी कंचनजंघा है! पर मौसम अच्छा होने के बावजूद आसमान हलके-हलके बादलों से ढका था, पिछले वर्ष की ही तरह इस बार भी बादलों के कपाट ठाकुर जी के कपाट की तरह बंद ही रहे। कंचनजंघा न दिखनी थी, न दिखी। पर सामने ही रकम-रकम (तरह-तरह) के रंग-बिरंगे इतने सारे फूल दिखाई दिये। ऐसा लगा मानों फूलों के बाग में आ गई हूँ।

Question number: 443 (1 of 5 Based on Passage) Show Passage

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हिमालय की तीसरी सबसे बड़ी चोटी कौनसी है?

Question number: 444 (2 of 5 Based on Passage) Show Passage

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पिछले वर्ष की तरह किसके कपाट ठाकुर जी के कपाट की तरह बंद ही रहे?

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